CG Board Class 10 Science Solutions Chapter 7 जैविक प्रक्रियाएँ : पोषण, परिवहन, श्वसन, उत्सर्जन – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 10 Science Solutions Chapter 7 जैविक प्रक्रियाएँ : पोषण, परिवहन, श्वसन, उत्सर्जन are given below for Hindi Medium Students.

CG Board Class 10 Science Solutions Chapter 7 जैविक प्रक्रियाएँ : पोषण, परिवहन, श्वसन, उत्सर्जन


अभ्यास:-

प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए-

Page No.118                   प्रश्न1. आमाशय की आंतरिक झिल्ली HCI अम्ल से सुरक्षित रहती है जिसका कारण है-

 (अ) पेप्सिन (स) लार के एमाइलेज के कारण

 (ब) श्लेष्मा (द) इनमें से कोई नहीं।

Page No.118                       प्रश्न 2. श्वसन के दौरान गैसों का आदान-प्रदान होता है-

 (अ) श्वास नली व आहार नली में

 (ब) फेफड़ों की कूपिकाओं व रक्त कोशिकाओं में 

 (स) वायु कूपिका व श्वास नलियों में

 (द) श्वास नली व श्वसनी में।

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प्रश्न 3. मनुष्य के शरीर में फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त का परिवहन निम्न में से किसके द्वारा होता है –

 (अ) फुफ्फुस शिरा (स) नेफ्रॉन

 (ब) फुफ्फुस धमनी (द) इनमें से कोई नहीं।

Page No.118                                         प्रश्न 4. वृक्क की इकाई है-

 (अ) नेफ्रॉन (स) मूत्र नलिका

 (ब) बोमन सम्पुट (द) मूत्राशय ।

Page No.118                       प्रश्न 5. निम्नलिखित में से वह प्रक्रिया जो प्रकाश संश्लेषण के दौरान नहीं होती है – 

 (अ) प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन

 (ब) कार्बन-डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में बदलना

 (स) कार्बन का कार्बन डाइऑक्साइड में बदलना

 (द) इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस निकलती है I

उत्तर- 1. (ब), 2. (ब), 3. (ब), 4. (अ), 5. (स)।

Page No.118                               प्रश्न 2. शिरा, धमनी से किस प्रकार अलग है ? उत्तर- धमनी और शिरा दोनों में ही रक्त प्रवाहित होता है, परन्तु दोनों के कार्य अलग – अलग होते है, जो निम्न है-

धमनी शिरा 
1. धमनी रक्त को हृदय से अंगों तक ले के जाती है।2. धमनी द्वारा ऑक्सीजन युक्त (शुद्ध रक्त) रक्त का बहाव होता है।3. ये मोटी रक्त नलिकाएं होती है।4. धमनियों में ऑक्सीकृत रक्त होने के कारण लाल दिखाई देती है।1.शिरा रक्त को उत्तको (कोशिका) से हृदय तक लेकर आती है।2.शिरा द्वारा अशुद्ध रक्त (ऑक्सीजन अनुपस्थित) का बहाव होता है।3.ये पतली रक्त नलिकाएं होती है।4.शिराओं के रक्त में CO2 की उपस्थिति के कारण नीली दिखाई देती है।

Page No.118                 प्रश्न 3. ऑक्सीजन की उपस्थिति व अनुपस्थिति में होने वाली श्वसन की प्रक्रियाओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।             उत्तर- ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाली श्वसन प्रक्रिया को ऑक्सी श्वसन तथा ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाली श्वसन प्रक्रिया को अनाक्सी श्वसन कहते हैं। दोनों में निम्न अंतर है – 

ऑक्सी श्वसनअनाक्सी श्वसन
1. इस प्रक्रिया में कार्बनिक पदार्थ (ग्लूकोज, प्रोटीन) का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है।2. इस क्रिया का अंतिम उत्पाद CO2 और H2O और ऊर्जा होती है।C6H12O6 + 6O2 6CO2 + 6H2O + 38 ATP  glucose (energy)
 Ex- पौधे, मानव, पक्षी etc.
1.इसमें कार्बनिक पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
2.इस क्रिया का अंतिम उत्पाद CO2 और लैक्टिक अम्ल या एल्कोहल या इथेनॉल और ऊर्जा होती है।C6H12O6 2C2H5OH + 2 CO2 + 2 ATPEx- Yeast, Lactobacillus, Human muscles cell, Bacteria etc.

Page No.118                       प्रश्न 4. उत्पादकों और उपभोक्ताओं के ऊर्जा स्रोतों में क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।             उत्तर- उत्पादकों और उपभोक्ता के ऊर्जा स्रोतों में अंतर :- (1) उत्पादक :- ऐसे जीव जो अपना भोज्य पदार्थ सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में स्वयं बनाते है उसे उत्पादक कहते हैं। इसे स्वपोषी जीव कहते हैं।     उदा. समस्त हरे पौधे   उत्पादक के ऊर्जा स्त्रोत सूर्य का प्रकाश होता है। (2) उपभोक्ता – ऐसे जीव जो अपना भोजन पौधे या दूसरे जीवों से लेता है उसे उपभोक्ता या विषमपोषी जीव कहते हैं।   उदा.- समस्त प्राणी , पशु पक्षी, अपघटक आदि । उपभोक्ता का ऊर्जा स्रोत हरे पौधे (उत्पादक) होते हैं। 

Page No.118                 प्रश्न 5. भोजन के आधार पर पौधे व जन्तुओं का आपस में क्या सम्बन्ध है ?               उत्तर- समस्त हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा सौर ऊर्जा को ग्रहण करके कार्बनिक पदार्थ का निर्माण करते हैं, और खाद्य श्रृंखला द्वारा पूरे जीव-जन्तुओं का ऊर्जा स्रोत है। क्योकि समस्त जीव-जन्तुओं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर ही निर्भर रहते हैं।

Page No.118                             प्रश्न 6. मनुष्य में मूत्र का निर्माण तथा उसका निष्कासन क्यों आवश्यक है ?             उत्तर- प्रत्येक दिन हमारे शरीर में भोजन से सम्बधित कई जैविक प्रक्रियाएं चलती रहती है, जिनमें कई पदार्थों का निर्माण व अपघटन होता रहता है। इनमें से बहुत सारे भोज्य पदार्थ रक्त द्वारा अवशोषित होकर पूरे उत्तकों में पहुंचा दिया जाता है, तथा कुछ जैसे नाइट्रोजनी पदार्थ (प्रोटीन) के अपहास से बने यूरिया व यूरिक अम्ल हमारे शरीर के लिये हानिकारक होते हैं, इसे मूत्र कहते है। इसे शरीर से बाहर निकालना बहुत ही आवश्यक है I अगर शरीर में बने मूत्र का निष्कासन नही होगा, तो बहुत सारे बिमारियों का सामना करना पड़ेगा । मूत्र निर्माण की प्रक्रिया वृक्क के नेफ्रॉन में होती है, और इसी के द्वारा इसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है जिससे शरीर में जल का संतुलन बना रहता है।

Page No.118                               प्रश्न 7. पौधों के जाइलम एवं फ्लोएम के द्वारा परिवहन करने वाले पदार्थों में अंतर बताइए। उत्तर- पौधों के जाइलम ‘फ्लोएम के द्वारा परिवहन करने वाले पदार्थों में अन्तर –                              जाइलम :– जाइलम द्वारा मृदा में उपस्थित जल और उसमें घुले खनिज लवणों का संवहन होता है। यह पौधे के सभी भागों में जल व खनिज लवण को पहुंचाने का काम करता है । फ्लोएम:- फ्लोएम वह उत्तक हैं, जो पौधे के पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा निर्मित भोज्या पदार्थ को पौधे के प्रत्येक भागों में संवहन का कार्य करती है।

Page No.118                               प्रश्न 8. आमाशय में स्रावित HCl का कार्य बताइए। उत्तर- आमाशय में स्रावित HCl का कार्य निम्न है –               (1) HCl के द्वारा ही हानिकारक जीवाणु को नष्ट किया जाता है I               (2) HCl के द्वारा ही पेप्सिनोजन सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित होता है, जिससे प्रोटीन का विघटन होता है।

Page No.118                         प्रश्न 9. अपने स्कूल या परिवेश के किसी पौधे की कुछ टहनियों को एक पॉलिथीन में करीब 3-4 घंटे तक ढँक कर रखिये। उसके बाद उस पॉलिथीन में जमा हुए पानी को मापिए। अब क्या आप उसे पूरे पौधे द्वारा 3-4 घंटे में वाष्पोत्सर्जित पानी की मात्रा बता सकते हैं ? यदि हाँ क्यों और नहीं तो क्यों?                             उत्तर- पौधे द्वारा अनावश्यक जल को वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहा जाता है I               पूरे पौधे को 3-4 घंटे तक पॉलिथीन में बांधने से पॉलिथीन के सतह पर वाष्पीकृत हुये पानी के बूंदों की मात्रा मापन करके बता सकते है I                     पॉलिथीन की सतह पर उपस्थित कुछ वाष्प का मापन करके वाष्पीकृत पानी की मात्रा बता सकते है I

Page No.:118                                         प्रश्न 10. वाष्पोत्सर्जन आधारित कई प्रयोग समय समय में खेती के संदर्भ में किए जाते हैं। एक पौधे पर निम्नलिखित तरीके से प्रयोग किया गया। प्रयोग में अरहर के पौधों की चार पत्तियों पर वेसलीन लगाया गया। सारणी देखकर बताइए कि पत्ती के किस सतह से अधिकतम वाष्पोत्सर्जन हुआ है I

  1. इस पत्ती में किस सतह पर रंध्र ज्यादा होंगे ?
  2. पौधे से ज्यादा मात्रा में पानी निकल जाए तो क्या होगा ?
  3. पौधे से पानी नहीं निकल पाया तो पौधे को क्या नुकसान होगा I

उत्तर – प्रयोग से से पता चलता है कि पौधे के निचली सतह से अधिकतम वाष्पोत्सर्जन हुआ है I 1. पत्ती की निचली सतह पर रंध्र ज्यादा होंगे I 2. पौधो से ज्यादा मात्रा में पानी निकाल दिया जाए तो प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जायेंगे , पौधों की जैविक क्रियाएँ सुचारू रूप से नहीं हो पाएगी I                     3. अगर पौधे से पानी नहीं निकल पाया तो अतिरिक्त पानी पौधो में ही रह जायेगा जिससे पौधे सड़ने लगेंगे, पत्तियां पिली हो जायेगी, पौधो में पानी का संतुलन बिगड़ जायेगा तथा पौधे अपना कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पायेगा |

Page No.119                 प्रश्न 11. हृदय से रक्त का बहाव एक साथ दो परिपथों से किस प्रकार होता है ? समझाइए। उत्तर- हृदय से रक्त का बहाव एक साथ दो परिपथ से निम्न प्रकार होता है-       (1) पहला परिपथ – हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त बाया आलिंद से बाया निलय में पंप होकर धमनी के द्वारा शरीर के सभी उत्तकों में पहुंचा दिया जाता है I उत्तकों में श्वसन क्रिया में बने CO2 को शिरा के द्वारा दाया आलिंद से दाया निलय में पम्प कर दिया जाता है।      चित्र. रक्त के बहाव का दोहरा परिसंचरण

(2) दूसरा परिपथ – इसमें दाया निलय में उपस्थित ऑक्सीजन रहित रक्त अर्थात CO2 युक्त रक्त फुम्फुस धमनी से फेफड़ा तक पम्प किया जाता है। फिर फुम्फुस शिरा से रक्त ऑक्सीजन युक्त होकर बाया आलिन्द तक पहुचायां जाता है।

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