CG Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 सत्सङ्गतिः is specifically designed for Hindi medium students of Class 7 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 7 संस्कृत पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 सत्सङ्गतिः
CGBSE समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 13 – सत्सङ्गतिः हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 7 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 7 Sanskrit Solutions Chapter 13 संस्कृत are given below for Hindi Medium students.
Page No.- 28, Chapter- 13, Chapter Name- (सत्सङ्गतिः)
प्रश्न 1 – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) मानवे कस्य प्रभावः भवति?
उत्तर:- मानवे संसर्गस्य प्रभावः भवति।
(ख) सत्सङ्गेन मनुष्यः कीदृशः भवति?
उत्तर:- सत्सङ्गेन मनुष्य:सज्जन : भवति।
(ग) दुर्जनानां सङ्गेन किं भवति?
उत्तर:- दुर्जनानां सङ्गेन मनुष्य दुर्जनः भवति।
(घ) उन्नत्याः सोपानं किम् अस्ति?
उत्तर:- उन्नत्याः सोपानं सत्सङ्ग: अस्ति।
(ड) शास्त्रस्य कः निर्देशः अस्ति?
उत्तर:- शास्त्रस्य तु अयं निर्देशः अस्ति यत् विद्यालंकृतः अपि दुर्जनः परिहर्तव्यः।
(च) सत्सङ्गतिः किं करोति?
उत्तर:- सत्सङ्गतिः मनुष्येषु बहवः गुणाः उद्भवन्ति।
(छ) सतां सङ्गतिः कीदृशी भवति?
उत्तर:- सतां सङ्गतिः श्रेयस्करा भवति।
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प्रश्न 2 – निम्नलिखित पदों में विभक्ति,वचन एवं लिङ्ग बताये –
(क) सताम् (ख) संसारे (ग) दुर्जनैः (घ) नीतिकाराः (ड़) विवेकवान् (च) आत्मनः (छ) अस्मिन् नीडे (ज) सन्ताश्रमे
| पद | विभक्ति | वचन | लिंग |
| सताम् | द्वितीया | एकवचन | पुल्लिंग |
| संसारे | सप्तमी | एकवचन | नपुंसकलिंग |
| दुर्जनैः | तृतीया | बहुवचन | पुल्लिंग |
| नीतिकाराः | प्रथमा | बहुवचन | पुल्लिंग |
| विवेकवान् | द्वितीया | बहुवचन | पुल्लिंग |
| आत्मन्: | पंचमी /षष्ठी | एकवचन | नपुंसकलिंग |
| आस्मन् नीडे | सप्तमी | एकवचन | नपुंसकलिंग |
| सन्ताश्रमे | सप्तमी | एकवचन | नपुंसकलिंग |
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प्रश्न 3- निम्नलिखित पदों का विग्रह करें और समास का नाम बताये –
(क) सत्सङ्गतिः (ख) गुणदोषौ (ग) मानवजीवने (घ) सत्पुरुषाणाम्
| पद | विग्रह | समास का नाम |
| सत्सङ्गतिः | सतांसङ्गतिः | तत्पुरुष समास |
| गुणदोषौ | गुणश्चदोषश्च | द्वन्द समास |
| मानवजीवने | मानवस्यजीवने | तत्पुरुष समास |
| सत्पुरुषाणाम् | सप्त पुरुषाणाम् समाहारः | द्धिगु समास |
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प्रश्न 4- रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए –
(क) सतां सङ्गतिः ______ कथ्यते।
उत्तर:- सत्सङ्गतिः
(ख) सत्सङ्गेन मनुष्येषु _____ आयान्ति।
उत्तर:- गुणाः
(ग) मानवजीवने सत्सङ्ग ____ अस्ति।
उत्तर:- उन्नतेः सोपानं
(घ) विद्यालड्कृतः अपि _____ परिहर्तव्यः।
उत्तर:- दुर्जनः
(ड़) सता सङ्गतिः _____ भवति।
उत्तर:- नरः सज्जनः
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प्रश्न 5- संस्कृत में अनुवाद कीजिए –
(क) संसार में सज्जन भी है।
उत्तर:- संसारे सज्जनाः अपि सन्ति।
(ख) मनुष्य पर संसर्ग का प्रभाव पड़ता है।
उत्तर:- मानवे संसर्गस्य प्रभावः भवति।
(ग) वर्तमान युग में सज्जनो का अभाव दिखाई देता है।
उत्तर:- वर्तमान युगे सज्जनानां अभावः दृष्टिगोचरः भवति।
(घ) सत्सङ्ग से मनुष्य की उन्नति होती है।
उत्तर:- सत्सङ्गेन मनुष्यस्य उन्नति: भवति।
(ड) सतसङ्गति श्रेयष्कर होती है।
उत्तर:- सत्सङ्गति श्रेयस्करा भवति।
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प्रश्न 6- संधि विच्छेद करते हुए संधि का नाम एवं नियम बताईये –
यद्यपि, मनुष्योपरि, विद्यालडकृताः, भवतीति
उत्तर :-
| यद्यपि | यदि +अपि (ई +अ =य) | यण् स्वर संधि |
| मनुष्योपरि | मनुष्य +उपरि (अ +उ =ओ ) | गुण स्वर संधि |
| विद्यालङ्कृतः | विद्या +अङ्कृतः(आ +अ =आ) | दीर्घ स्वर संधि |
| भवतीवि | भवति +इति (इ +इ =ई ) | दीर्घ स्वर संधि |
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प्रश्न 7 – हिंदी में व्याख्या करें –
(क) सतां सङ्गतिः सत्सङ्गतिः कथ्यते।
उत्तर:- सज्जनों की संगति को सत्संगति कहते है।
(ख) सत्सङ्गतिः कथय किं न करोति पुंसाम्।
उत्तर:- कहो सत्संगति कौन सा हित नहीं करती।
(कहो सत्संगति मनुष्य के लिए क्या नहीं करती )
(ग) दिक्षु तनोति कीर्तिम्।
उत्तर:- कीर्ति सभी दिशाओं में फैलती है।
(घ) सत्सङ्गतिः श्रेयस्करा भवतीति।
उत्तर:- सत्संगति श्रेयस्कर है।
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प्रश्न 8 – (क) सत्सड़्गति पर संस्कृत में पाँच वाक्य बनाइये।
उत्तर:- सत्सड़्गति :-
(1) सतां सङ्गतिः सत्सङ्गतिः कथ्यते।
(2)यदि सज्जै: सह सङ्गतिः भवति तर्हिनरः सज्जनः भवति।
(3)सत्सङ्गेन मनुष्यं विवेकवान् श्रद्धावान ,शीलवान च भवति।
(4)सतसङ्गेन मनुष्येणु बहवः गुणाः उद्भवन्ति।
(5)अतः सतां सङ्गति: श्रेयस्करा भवतीति।
Page No.- 28, Chapter-13, Chapter Name- (सत्सङ्गतिः)
(ख) सत्सड़्गति के दो पद्य कण्ठस्थ कीजिए।
उत्तर :-
(1) “दुर्जनः परिहर्तव्यः विद्यालड़् कृतोङ्पि सन्।”
मणिना भूषित: सर्प:किमसौ न भयंकरः।
(2) जाड्यं धियो हरति सि चति वाचि सत्यं
मानोन्नतिं. दिशिति पापमयाकरोति।
चेत: प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिं।
सत्सड्गतिः कथय किं न करोति पुसाम्।।
(विद्यार्थीगण कष्ठस्थ करें )
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