CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 अब्राहम लिंकन का पत्र – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 अब्राहम लिंकन का पत्र is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 अब्राहम लिंकन का पत्र

CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 3 – अब्राहम लिंकन का पत्र हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 3 हिंदी are given below for Hindi Medium students.


अभ्यास :

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 1 – अब्राहम लिंकन कौन थे ? उन्होंने किसे पत्र लिखा ?

उत्तर :- अब्राहम लिंकन तत्कालीन अमेरिका  के राष्ट्रपति थे। उन्होंने अपने पुत्र के शिक्षक को पत्र लिखा था ,जो एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया है। 

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 2- अब्राहम लिंकन ने अपने पत्र में किस तरह के व्यक्तियों के बारे में लिखा है? 

उत्तर :- अब्राहम लिंकन ने अपने पत्र में खुशामद करने वालो तथा स्वार्थी लोगों से सावधान रहने के बारे में लिखा है, और यह भी लिखा है, कि, दुनिया में अच्छे व बुरे दोनों प्रकार के व्यक्ति रहते है। 

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 3 -किताबों की मनमोहक दुनिया के साथ-साथ प्रकृति की सुन्दरता को निहारने की सलाह लिंकन ने क्यों दी है?

उत्तर :- किताबों की मनमोहक  दुनिया के साथ -साथ प्रकृति की सुंदरता को निहारने की सलाह इसलिए दी है , जिससे की उनका पुत्र यह जान सके कि सच्चे सुख की अनुभूति क्या होती है। अर्थात उनके पुत्र का लगाव प्रकृति से हो और उसका मन प्रकृति के समान विशाल और सुन्दर हो जाये। 

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 4-  अमरीकी राष्ट्रपति की स्कूल से क्या अपेक्षाएँ हैं और क्यों ?

उत्तर :- अमरीकी राष्ट्रपति की स्कूल से यही अपेक्षाएं है, कि विद्यालय उनके पुत्र को जीवन के दोनों पक्षों से अवगत कराए। अर्थात जीवन में सुख व दुःख में समान  व्यवहार करना और उसके मन -मस्तिष्क में यह अवश्य शामिल हो कि नकल करके पास होने से अच्छा है कि वह फेल हो जाए। क्योंकि कभी -कभी हमारे लिए जीवन में जो सीख सफलता नहीं दे सकता वो हमे असफलता सीखा  देती है। 

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 5- अमरीकी राष्ट्रपति शिक्षक के माध्यम से अपने पुत्र को क्या-क्या सिखलाना चाहते थे?

उत्तर :-अमरीकी राष्ट्रपति शिक्षक के माध्यम से अपने पुत्र को नेक इंसान बनाना ,जनता का  हितैषी राजनीतिज्ञ ,मेहनत से पैसे कमाना ,राजद्वेश से दूर रहना ,मुसीबत को हसकर टालना ,बदमाशों को काबू में करना ,पक्का विश्वास ,नेक व्यवहार ,किताबों का महत्व ,भीड़ से अलग चलने की हिम्मत ,दुसरो की बात सुनकर अच्छाई को ग्रहण करना  ,दुःख में भी हसना आदि सीखाना चाहते थे।   

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 6- प्रकृति की सुंदरता का चित्रण अब्राहम लिंकन ने किस प्रकार किया है ?

उत्तर :- प्रकृति की सुंदरता का चित्रण अब्राहम लिंकन ने नीले आसमान में उड़ते आजाद पक्षी ,सुनहरी धूप में गुनगुनाती मधुमक्खियां और पहाड़ के ढलान पर खिलखिलाते जंगली फूलो की हंसी के माध्यम से एक बड़ा ही मनमोहक  चित्र प्रस्तुत किया। 

Page no : 13 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 7- “नकल करके पास होने की बजाय फेल होना बेहतर है” अब्राहम लिंकन ने ऐसा क्यों कहा है? क्या आप इस कथन से सहमत हैं ?

उत्तर :- जी हाँ !हम इस कथन से पूरी तरह से सहमत है। कोई भी माता -पिता अपने बच्चो को या शिक्षक अपने शिष्यो को यह कभी नहीं सिखाते की जीवन में कोई भी गलत कार्य कर के सफलता हासिल की जा सकती है। वरन वे हमेशा अपने बच्चो या शिष्यों को सिखाती है ,कि नकल करके पास होने की बजाय फेल होना बेहतर है ,क्योंकि नक़ल करके पास तो हो जायेंगे ,किन्तु विषय ज्ञान के अभाव में वह किसी काम का न रहेगा। अर्थात जीवन की सम्पूर्ण सीख से वह वंचित हो जायेगा और गलत करने की आदत से उसका भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। जिसके परिणामस्वरूप वह कुछ समय बाद इन असफलताओ का दोष अपने माता -पिता व गुरुजनों पर देता चला जायेगा। उसके मन मस्तिष्क में ज्ञान के अभाव में हीन भावना का जन्म पूरे समाज के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। 

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प्रश्न 8 – मेहनत से कमाया एक पैसा भी हराम में मिली नोटों की गड्डी से कहीं अधिक मूल्यवान होता है। आशय स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर :- मेहनत से कमाया पैसा चिरस्थायी होता है क्योंकि उसमें स्वयं की मेहनत होती है इसलिए इसका महत्व भी ज्यादा होता है। बिना मेहनत की मिली नोटों की गड्डी का महत्व तुच्छ होता है। अतः वह जल्दी ही समाप्त हो जाता है। अर्थात अब्राहम लिंकन ने अपने शब्दों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है कि कठिन परिश्रम द्वारा कमाया  थोड़ा सा भी धन गलत कार्यो से कमाए गए धन की अपेक्षा अधिक मूलयवान होता है। मेहनत से कमाया हुआ धन हमें लम्बे समय तक सुख व मन की शांति का बोध कराता है।   

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प्रश्न 9- लिंकन अपने बेटे को निम्नलिखित बातें सिखाने के लिए गुरु जी पर जोर क्यों दे रहे थे। 

(क)बदमाशों को करारा जवाब देना सिखाने के लिए

उत्तर :- संसार अच्छे व बुरे दोनों ही तरह की लोगो से भरी -पड़ा है। हमे भले लोगो से नेक व्यवहार करना चाहिए और जो बुरे लोग है उन्हें मुहतोड़ जवाब देना चाहिए। जिससे वे आपका प्रशस्ति का मार्ग कभी भी अवरुद्ध न कर पाए। 

(ख)भीड़ से अलग होकर रास्ता बनाने की हिम्मत के लिए 

उत्तर :- जब सभी लोग भेड़ो की तरह एक ही रास्ते पर चल रहे है तो उस भीड से अलग होकर अपना रास्ता बनाने की हिम्मत होना चहिये। अर्थात व्यक्ति की पहचान भीड़ के साथ चलने से नहीं होती अपितु भीड़ से अलग होकर स्वयं रास्ता बनाने की हिम्मत यदि है तो लोग आपके द्वारा बनाये रास्ते का अवश्य ही अनुसरण करेंगे। 

(ग)अपनी आत्मा और अपने ईमान को कभी न बेचने के लिए 

उत्तर :- किसी भी व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरूप ही कार्य करना चाहिए तथा अपने शरीर व दिमाग के बलबूते ही धन अर्जित करना चाहिए अर्थात अपनी आत्मा और ईमान को नीलाम करके कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। आत्मा और ईमान बेचकर काम करने वाला मनुष्य अंदर से खोखला हो जाता है। और किसी भी समस्या का सामना  बहादुरी से नहीं कायरता से करने लगता है। 

(घ) चाटुकारो से सावधान रहने के लिए 

उत्तर :- लिंकन ने अपने पुत्र के गुरुओं से आग्रह किया कि वह उनके पुत्र को यह भी बताएं कि  रोना हारना नहीं होता अर्थात रोना कोई शर्म की बात नहीं है। जीवन में हमें आलोचकों  को नजरअंदाज करना तथा चाटुकारों से सावधान रहना चाहिए। आलोचक से अधिक हानि हमें ये चापलूस लोग पहुंचाते है। अतः हमें ऐसे व्यक्तियों से सचेत रहना चाहिए जो हमेशा हमें गलत और सही की जानकारी न देते है और न ही किसी और को देने देते है। 

पाठ से आगे –

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 1 – पत्र में लिंकन ने गुरु जी से अपनी अपेक्षाएँ बताई हैं। आप की भी अपने गुरु जी से अनेक अपेक्षाएँ होंगी। उन्हें साथियों से बातचीत कर लिखिए और कक्षा में सुनाइए ।

उत्तर :- प्रत्येक माता -पिता और अध्यापक अपने बच्चो व शिष्यों का समय -समय पर दिशा निर्धारित करते रहते है। हमें जीवन में कुछ अच्छा करने व महान व्यक्तित्व की पहचान हमारे अभिभावक और गुरुजन ही कराते है। जिस प्रकार प्रस्तुत पत्र में लिंकन जी ने अपने पुत्र के शिक्षकों से अपनी अपेक्षाओं की अभिव्यक्ति का चित्रण किया है। उसी प्रकार प्रत्येक माता -पिता व शिष्य अपने गुरुओ से यही अपेक्षाएं रखते है। चापलूसों से बचने की  कला तथा सत्य व अहिंसा का मार्ग हमें शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है। 

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 2- अपने आस पास बहुत से लोगों को आप सामान्य बातचीत कहते सुनते हैं कि ‘वह एक नेक या सच्चा इंसान हैं आप अपने अनुमान, अनुभव और समझ से ऐसे लोगों की खासियत को लिखिए ।

उत्तर :- इंसान वही होता है जिनमे मानवता यानी इंसानियत हो। मनुष्य के हृदय में दयालुता का भाव  होना एक स्वाभाविक गुण है जो व्यक्ति हमेशा दयारूपी भाव से ओत -प्रोत होता है, उसमें दुसरो का हमेशा भला करने का भाव ही विद्यमान रहता है ऐसे व्यक्ति न्यायप्रिय,मृदुभाषी तथा अहिंसा को मानने वाला और सत्यवादी होता है। ऐसे व्यक्ति के मन मस्तिष्क में हमेशा परोपकार की भावना ,दयालुता तथा स्नेह विद्यमान होते है ,प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है कि वह समाज में सभी लोगों के प्रति मानवता का भाव रखे। 

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 3-  अब्राहम लिंकन मानते थे कि शिक्षक छात्रों को आदर्श नागरिक बना सकता है। आपके विचार से शिक्षक के अलावा और कौन से लोग हो सकते हैं जो एक छात्र को आदर्श नागरिक बन पाने में सहयोग कर सकते हैं और कैसे? विचार कर लिखिए।

उत्तर :- अब्राहम लिंकन मानते थे कि शिक्षक छात्रों को आदर्श नागरिक बना सकता है। हमारे विचार से शिक्षक के अलावा घर के बुजुर्ग लोग दोस्त ,शिक्षित पड़ोसी ,अभिभावक  आदि छात्रों को आदर्श नागरिक बनने में सहयोग कर सकते है। क्योंकि छात्र सबसे ज्यादा समय इन्ही लोगों के साथ व्यतीत कर सकता है। ये छात्र को शिक्षाप्रद कहानियां सुनाकर ,चित्र दिखाकर ,खेल द्वारा आदि तरह से आदर्श नागरिक बनाने में सहयोग कर सकते है। 

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 4-  पाठ में लिंकन ने जिन गुणों की चर्चा की है उसमें से जो गुण आपको अच्छे लगते हैं। उनको शामिल करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखिए । पत्र में यह भी बताइए कि वे गुण आपको अच्छे क्यों क्यों लगते है ?

उत्तर :- दिनांक -26 अगस्त 2023 

            नई दिल्ली (छात्रावास)

            नई दिल्ली (भारत)

प्रिय मित्र श्याम ,

              सप्रेम नमस्ते !

                       मित्र ,मै यहाँ कुशलपूर्वक रहते हुए ईश्वर से तुम्हारी कुशलता की कामना करता हूँ  कि तुम भी स्वस्थ्य और आनंद पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे होंगे। मित्र में आपकी ईमानदारी और साहस से बहुत अधिक प्रभावित हूँ। इसी प्रभाव के कारण मै आपको पत्र लिख रहा हूँ। मुझे वो  दिन  आज भी याद है जब मै और तुम एक ही बस में एक साथ सफर कर रहे थे तो बस से उतरते समय हमें अपनी ही सीट के बगल में एक लावारिस बैग मिला था जिसमे बहुत से पैसे और गहने थे। उस बैग के मालिक का आधार भी उसी में था और गहनों  के बिल के साथ उनका पता तथा मोबाइल भी मिल गया था, जिसे तुमने अतिशीघ्र उस पते पर पहुंचाने का प्रयत्न किया।  जब मै और तुम उस उस पते पर पहुंचे तो उस शादी के घर में मातम सा माहौल देखकर तुमने अतिशीघ्र बैग उन्हें सौंप दिया। तुम्हारे बैग देते ही लड़की की माता -पिता ने जब तुम्हे गले से लगाया तो सच मानो मेरी हर्ष और ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था। मै स्वयं को बड़ा ही भाग्यशाली मानता हूँ कि मै तुम्हारा मित्र हूँ। अगले दिन इस घटना की चर्चा जब अख़बार में छपी तो सभी हतप्रथ रह गए थे क्योंकि जिनका वो बैग था वो एक पत्रकार थे। उन्होंने तुम्हारे ईमानदारी की चर्चा फोटो सहित अख़बार में छापी थी और विवाह के उपरांत वो अपने पूरे परिवार के साथ तुमसे मिलने आये। तुम्हारे माता -पिता के चरण स्पर्श करने आये थे। मै वो दिन कभी भी नहीं भूल पाता हूँ। कुछ भी गलत करने की इच्छा जब मन में जाग्रत होती है तो मै तुम्हारा वो सम्मान याद कर लेता हूँ और मेरा मन मस्तिष्क स्वयं ही आत्म नियंत्रित हो जाता है।

                                                        चाचा और चाची जी को मेरा सादर प्रणाम कहना और हमारी बहन को मेरा ढेर सारा आशीष देना शेष मिलने पर।

 तुम्हारे पत्र की प्रतीक्षा में……

 धन्यवाद। तुम्हारा अभिन्न मित्र 

                                                                                                                         संचेत 

                                                                                                                        रायगढ़(छ.ग.)   

भाषा से –

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 1  -विराम चिह्न का प्रयोग-

सभी व्यक्ति न्यायप्रिय नहीं होते, और न ही सब सच बोलते हैं। यह तो मेरा बच्चा कभी-न-कभी सीख ही लेगा। ऊपर के वाक्यों में तीन तरह के अलग-अलग विराम चिह्नों का प्रयोग हुआ है-

1. (.) अल्प विराम (Comma) – अल्प विराम का उपयोग दो वाक्य खंडो के बीच किया जाता है। पढ़ते हुए अल्प समय के लिए रुकना)

उत्तर:- विराम चिन्ह के प्रकार –

1. अल्प विराम (,)आम ,केला ,नींबू  सभी में जल है। 
2. अर्द्ध विराम (;)मेहनत ही जीवन है ;आलस्य ही मृत्यु।
3. अपूर्ण विराम (:)छोटा सवाल :बड़ा सवाल 

2. (। ) पूर्ण विराम, (Fullstop) – पूर्ण विराम का उपयोग वाक्य के अंत में करते हैं (पढ़ते समय वाक्य के खत्म या पूर्ण होने पर थोड़े समय के लिए रुकना।)

उत्तर :- 

1. पूर्ण विराम (।)मंदिरा खाना खाती है।
2. प्रश्नसूचक चिन्ह (?)तुम कैसे हो?
3. संबोधक चिन्ह (!) मोहन !इधर आओ।
4. विस्मय सूचक चिन्ह (!)हाय !अब मै क्या करू ?
5. अवतरण चिन्ह (“ “)और (‘ ‘)महावीर ने कहा -”अहिंसा परमोधर्म:। ”‘राम चरित मानस ‘के रचयिता तुलसीदास है। 
6. योजक चिन्ह (-)सुख -दुःख तो आते ही रहते है। 
7. निर्देशक चिन्ह (一) काल तीन प्रकार के होते है 一 भूतकाल ,वर्तमानकाल ,भविष्यकाल
8. विविरण चिन्ह (:- )पुरुषार्थ चार है :- धर्म ,अर्थ काम और मोक्ष। 
9. हंस पद (^)      अहमदाबादमुझे आज ^ जाना है।
10. संक्षेपण चिन्ह (o){इसे लाघव चिन्ह भी कहते है। }डॉ० राजेंद्र प्रसाद हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति है। 
11. तुल्यता या समता सूचक चिन्ह (=)1 रुपया =100 पैसे
12. कोष्ठक [{()}]चेहरे का उपमा मयंक (चन्द्रमा )से ही गई है।
13. विकल्प चिन्ह (/)यह कविता कवि /कवयित्री ने लिखा होगा।

3. (-) योजक चिह्न, (Hyphen) – दो शब्दों को जोड़ने के लिए।

उत्तर :- योजक चिन्ह (-)= सुख -दुःख तो आते ही रहते है।

विशेष :- 

आपकी पाठ्यपुस्तक के अन्य अध्यायों में कई और प्रकार के विराम चिह्नों का उल्लेख और प्रयोग हुआ है। उन्हें पहचानिए और शिक्षक की सहायता से वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए।

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 2-  पाठ में इन वाक्यों को पढ़ें-

1 किताबों की मनमोहक दुनिया 2 उड़ते आजाद पक्षी 3 गुनगुनाती मधुमक्खियां 4 बदमाशों को आसानी से काबू में करना 5 भेड़ों की तरह एक ही रास्ते पर चलते रहना 6 अपने पुत्र को शिक्षा के लिए आपके हाथों में सौंपना। इन वाक्यों में जहाँ एक और किताबों मधुमक्खियों बदमाशों भेडों हाथों का प्रयोग हुआ है जिन्हें हम बहुवचन कहते हैं वहीं दूसरी ओर अपने पुत्र आजाद पक्षी अपने पत्र का प्रयोग हुआ है जिन्हें एक वचन कहते हैं।

अर्थात संज्ञा शब्द के जिस रूप से यह ज्ञात अथवा बोध हो कि वह एक के लिए प्रयुक्त हुआ है उन्हें एकवचन तथा एक से अधिक या अनेक के लिए प्रयुक्त हुआ हो उसे बहुवचन कहते हैं। पुस्तक के अन्य पाठों से इसी तरह के वाक्यों का चुनाव करें,जो वचन के भेद को स्पष्ट करती हैं। 

उत्तर :- एक वचन वाले वाक्य :-

1. कुछ प्रश्न पूर्ण सामग्री को  समझ कर उसके आधार पर हो सकते है। 

2. स्कूल का वार्षिकोत्सव करीब आ रहा था। 

3. प्रतिदिन नाटक का आरम्भ होता था। 

4. मुस्लमान होकर फिरंगी जवान पढ़ी ?

बहुवचन वाले वाक्य –

1. पहले उन फ्रांसीसियों के नौकर थे ?

2. कक्षा की लड़कियों तो उसकी ओर नजर उठा कर भी नहीं देखती थी। 

3. शाम को दरवाजे पर खट्- खट् हुयी तो सुधीर ने दरवाजा खोला। 

4. सबने तोहफे मेज पर रख दिए। 

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प्रश्न 3 इन शब्दों को शुद्ध रूप में लिखिए-

न्यायप्रीय, अडीग, दुस्मन, मूसिबत, धुप ,नीहारने। 

उत्तर :- 

अशुद्ध    शुद्ध 
न्यायप्रीय न्यायप्रिय 
  सिख   सीख 
    अडीग  अडिग
  दुस्मन    दुश्मन
  मुसिबत   मुसीबत 
  धुप  धूप
नीहारने   निहारने  

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 4 राजनीति शब्द में ज्ञ प्रत्यय लगाकर राजनीतिज्ञ शब्द बना है। इसका अर्थ है राजनीति जाननेवाला ।

नीचे दिए हुए शब्दों में ज्ञ प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए. उनके अर्थ लिखिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए- गणित, शास्त्र, धर्म ,मर्म, अल्प। 

उत्तर :- (i)गणित – गणितज्ञ (गणित का ज्ञाता )

वाक्य प्रयोग – शकुन्तला देवी एक प्रसिद्ध गणितज्ञ थी। 

(ii) शास्त्र – शास्त्रज्ञ (शास्त्रों का ज्ञाता )

वाक्य में प्रयोग – भारत में अनेक शास्त्रज्ञ पैदा हुए है। 

(iii)धर्म – धर्मज्ञ (धर्म का ज्ञाता )

वाक्य प्रयोग – युधिष्ठिर एक महान धर्मज्ञ थे। 

(iv)मर्मज्ञ (मर्म जानने वाला )

वाक्य प्रयोग – मुंशी प्रेमचंद एक मर्मज्ञ लेखक थे। 

(v)अल्प -अल्पज्ञ (कम ज्ञान होना )

वाक्य में प्रयोग – अल्पज्ञों को गर्व की वाणी नहीं बोलनी चाहिए। 

Page no : 14 ( अब्राहम लिंकन का पत्र) 

प्रश्न 5. जातिवाचक संज्ञाओं से भाववाचक संज्ञाएँ बनाई जाती हैं जैसे मनुष्य से मनुष्यता। निम्नलिखित जातिवाचक संज्ञाओं से भाववाचक संज्ञाएँ बनाइए

पशु,देवता, गुरु ,मित्र।

उत्तर :-

जातिवाचक संज्ञा  भाववाचक संज्ञा 
  बदमाश बदमाशी 
दोस्त दोस्ती 
पशु   पशुता 
    देवता   देवत्व 

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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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