CG Board Class 8 History Solutions Chapter 1 आधुनिक यूरोप का उदय – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 1 आधुनिक यूरोप का उदय is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 इतिहास पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 1 आधुनिक यूरोप का उदय

CGBSE समाधान कक्षा 8 इतिहास अध्याय 1 – आधुनिक यूरोप का उदय हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 1 इतिहास are given below for Hindi Medium students.


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  • क्या आप बता सकते है की आधुनिक काल की जानकारी किन किन स्रोतों से प्राप्त हुई है?

उत्तर :- पुस्तके, सरकारी दस्तावेज, ऐतिहासिक भवन, चित्रकला, मूर्तिकला। 

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  • आप अपने आसपास कुछ ऐसी चीजें पुस्तकें या इमारत खोज सकते हैं जिससे आधुनिक युग के इतिहास से जुड़ी जानकारियां दे सकती हो?

उत्तर :- टाउन हॉल, राजकुमार कॉलेज, महंत घासीदास संग्रहालय। 

                                                        अभ्यास प्रश्न

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1. उचित जोड़ियाँ बनाएँ

(1) कॉपरनिकस पोप के वर्चस्व को मानने से इंकार                                                                

(2) कोलम्बस खगोल वैज्ञानिक

(3) मार्टिन लूथर धर्म-व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचारों का विरोध

(4) हेनरी अष्टम यूरोप से अमेरिका तक के समुद्री मार्ग की खोज

उत्तर:

(1) कॉपरनिकस खगोल वैज्ञानिक

(2) कोलम्बस यूरोप से अमेरिका तक के समुद्री मार्ग की खोज

(3) मार्टिन लूथर धर्म-व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचारों का विरोध

(4) हेनरी अष्टम पोप के वर्चस्व को मानने से इंकार

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2. प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1. छपाई कला के आविष्कार से क्या-क्या लाभ हुए ?

उत्तर: छपाई कला का आविष्कार होने के कारण यूरोपीय  समाज में जबरदस्त बदलाव हुए जिनका लाभ समाज को प्राप्त हुआ। एक वैचारिक क्रांति का आगाज हुआ जो पुस्तके सिर्फ सामंतों व धर्मगुरुओं तक सीमित थी, वह आम -जन तक पहुंचने लगी तथा नए-नए लेख लिखे जाने लगे। जो जनता के जीवन की समस्याओं से जुड़े होते थे. लोगों में तेजी से शिक्षा का प्रसार हुआ तथा पारम्परिक रूढ़िवादी विचारो का विरोध लेखो के माध्यम से हुआ। अन्य क्षेत्रो में भी जैसे शिल्प – कला विज्ञान के नए-नए विचार सामने आये तथा साहित्य की नयी कृतियों का जन्म हुआ। जैसे – उपन्यास ,वृतांत, आत्मकथा, निरक्षण, आलोचना तथा वृत्तांत तथा नयी आधुनिक कविताएं शामिल है। लोगों में तर्क तथा बौद्धिक समीक्षा के आधार पर विचारों व परम्पराओं का समर्थन व विरोध करने का नजरिया विकसित हुआ। 

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2. अरब व्यापारी क्या-क्या वस्तुएँ यूरोप के व्यापारियों को बेचते थे ? 

उत्तर: अरब व्यापारी रत्न सूती कपड़े, रेशमी कपड़े, तथा शक्कर व बहुमूल्य सामग्री यूरोपीय व्यापारियों को बेचते थे।यह माल इटली के जेनेवा, वेनिस मिलान इत्यादि शहरों में उतारा जाता था वहां से यूरोपीय व्यापारी उस माल को भरी चुंगी देकर खरीदते थे और यूरोप के अन्य भागों में बेचते थे |  

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3.मार्टिन लूथर के अनुयायियों को प्रोटेस्टेंट कहा जाता है। क्यों?

उत्तर: मार्टिन लूथर एक जर्मन विचारक थे।  जिन्होंने उन दिन यूरोप में व्याप्त  कुरीतियों का विरोध किया। धर्म ग्रंथ जो कि लैटिन भाषा में था, उनको सभी आमजन को आम भाषा में पढ़ने के लिए प्रेरित किया जिससे आमजन उसको समझ सके तथा धर्म गुरुओं द्वारा किए जा रहे शोषण को समाप्त करने का प्रयास किया।  उन्होंने धर्मगुरु (पोप) द्वारा संचालित संस्थाओ के शोषण व दुराचारो की खुली निंदा की जिसके कारण एक धार्मिक क्रांति उत्पन्न हुई जिसके समर्थन में जनता का एक बड़ा वर्ग खड़ा हुआ तथा कुछ शासकों ने भी उनका समर्थन किया। ये सब प्रोटेस्ट द्वारा किया गया इसलिए उनके अनुयायियों को प्रोटेस्टेंट कहा जाता है। 

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4.  यूरोपीय व्यापारियों ने व्यापारिक कंपनियों की स्थापना की। क्यों ? 

उत्तर: वास्कोडिगामा द्वारा नए समुद्र मार्ग की खोज के पश्चात यूरोपीय व्यापारी सीधे भारत तथा एशिया के देशों  तक आने लगे। परन्तु समुद्र मार्ग तथा इसकी यात्रा की कठिनाइयों से बचने के लिए तथा वस्तुओं को इतनी दूर ले जाना-लाना, भण्डारण, सुरक्षा तमाम तरह के कार्यों का किसी एक व्यक्ति द्वारा करना संभव नहीं था। उसके लिए यूरोपीय व्यापारियों ने व्यापारिक कंपनियों की  स्थापना की। 

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5.मध्यम वर्ग आधुनिक सामाजिक व्यवस्था की रीढ़ बन गया क्यों ?

उत्तर: यूरोप में व्यापारिक गतिविधियों का तेजी से विकास होने के कारण एक नए वर्ग का जन्म हुआ। जिसमें हिसाब-किताब रखने वाले तथा अन्य छोटे कम करने वाले लोग तथा कारीगर, ब्रोकर, छोटे दुकानदारों, छोटे निर्माता आदि शामिल थे। जिनको मध्यमवर्ग कहा गया। जो कि वैचारिक क्रांति के बाद धार्मिक रूढ़िवादियों के विचारों से बाहर आने को प्रयासरत था तथा स्वतंत्रता का समर्थक यही मध्यम वर्ग अपने खुले विचार तथा नए कामों की वजह से व्यापारी गतिविधियों की रीढ़ बन गया। 

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6.पुनर्जागरण का स्वरूप स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पुनर्जागरण का अर्थ हम धर्म सुधार के संबंध में कर सकते है। छापा खानों के अस्तित्व में आने के बाद जब स्थानिय भाषा में उपलब्ध धार्मिक ग्रंथों तथा लेखो को लोगों द्वारा पढ़ा व जाना गया। विज्ञान द्वारा की गयी नई खोजों, जो धर्म ग्रंथों की लिखी बातों का खंडन करती थी, वे बाते लोगों की समझ में आने लगी कि धर्मगुरुओं द्वारा परंपराओं व धर्म के नाम पर हमारा शोषण दमन किया जा रहा है तथा एक नई विचारधारा का उदय हुआ फल स्वरूप पुनर्जागरण का स्वरूप बना। 

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7.औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप समाज में कौन-कौनसे तीन वर्ग प्रमुखता से अस्तित्व में आए? इनकी स्थिति पर संक्षिप्त में प्रकाश डालिए। 

उत्तर: औद्योगिक क्रांति के बाद व्यापारिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ावा मिला। पूंजीवादी व्यवस्था की स्थापना हुई तथा व्यापारिक कार्यों के लिए तीन प्रमुख वर्गों का उदय हुआ। जिनमें बड़े कारखानों तथा व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित करने वाले पूंजीपति थे तथा दूसरा वर्ग उनके रख -रखाव  व हिसाब-किताब रखने वाले, उनको चलवाने में सहयोग करने वाले, बाबू, दलाल, तथा छोटे दुकानदार थे। तीसरा वर्ग श्रमिक वर्ग यानी जो श्रम के द्वारा  उनको चलाने तथा समानों के उत्पादन में सहयोग करता था ।

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8.सामंतवाद का पतन किस तरह हुआ ?

उत्तर:  औद्योगिक तथा पुनर्जागरण क्रांति के कारण लोगों में नए विचारों का उदय हुआ जिसके कारण से लोगों में स्वतंत्रता की भावना का संचार हुआ और सत्ता धीरे धीरे केंद्रीय होने लगी। लोगों में राष्ट्रवाद की भावना आने लगी।  जनता के द्वारा सामंतो का विरोध किया गया तथा उनसे हटकर दूसरे कार्यों की तरफ प्रवृत्त होने लगे। फल स्वरूप धीरे-धीरे सामंतो का लोप हो गया तथा राजतंत्र का उदय हुआ।

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9. व्यापार में वृद्धि का यूरोप पर क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर: व्यापार की वृद्धि के कारण यूरोप की सामाजिक व राजनैतिक स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुए   प्रथम तो एक नए वर्ग जन्म जो रूढ़िवादी धार्मिक विचारो से सहमत नहीं था वह स्वंतंत्र विचारो का था, विज्ञान का तेजी से विकास तथा प्रचार – प्रसार हुआ। लोगों का अध्ययन की तरफ रुझान बढ़ा। व्यापार गतिविधियों से पूँजीवादी व्यवस्था  अस्तित्व में आयी। राष्ट्रों द्वारा व्यापार को प्रोत्साहन प्रदान किया गया तथा व्यापारियों  की प्रतिष्ठा बढ़ी मजदूरों की समस्याओ का ध्यान किया गया। उत्पादन में वृद्धि के कारण सभी वस्तुएँ जनसाधारण के पहुँच में आयी। सामंतों का खात्मा हुआ विदेशो तक पहुँच हुई लगभग हर क्षेत्र में बदलाव हुआ ।

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10. इस पाठ की उस बात का उल्लेख करें जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

उत्तर: इस पाठ की सबसे महत्वपूर्ण बात आमजन की दास प्रथा से मुक्ति तथा शिक्षा का प्रसार व धार्मिक आजादी थी तथा व्यापारिक प्रसार के कारण आमजन के जीवन स्तर में सुधार का आना और इन सभी तत्वों को मिलाकर एक नए समाज का निर्माण किया जो सभ्य समाज कहलाता है। 

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3 . प्रयास कीजिये –

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(1) विश्व के मानचित्र पर एशिया और अफ्रीका के अंग्रेजी उपनिवेशों को दर्शाइए।

उत्तर: भारत , सऊदी अरब , दक्षिण अफ्रीका ,मिस्र , सूडान। 

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(2) शिक्षक विद्यार्थियों से उनके दादा-दादी और अन्य पारिवारिक सदस्यों के नए कुछ ऐसे फोटोग्राफ्स का संकलन करने को कहें जिनसे जुड़ी कुछ बातों का उल्लेख भी कर सके।

उत्तर: फोटो में हमारे दादा-दादी जी है वह बताते हैं कि हमारे जमाने में इतनी सुविधाएं नहीं थी स्कूल कॉलेज नहीं थे ,लोग कच्चे घरों में रहते थे।  कुएं का पानी पीया जाता था तथा चूल्हे – लकड़ी पर खाना बनाना पड़ता था। लोग सिर्फ खेती का काम ही करते थे, परन्तु इतना प्रदूषण नहीं था। लोग सीधे-साधे थे, देश में फिरंगियों के शासन में पक्की सड़क भी नहीं थी पापाजी  हमें बताते है कि हम लोगों को पढ़ने के लिए दूर के गांव में जा पड़ता था फिर उच्च शिक्षा के लिए दूर शहर में जाते, साइकिल ही अपना साधन था। परंतु धीरे धीरे प्रगति व विकास हुआ और बहुत सारे आविष्कार हुए जिन्होंने हमारे जीवन को आसान बनाया।

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(3) मार्टिन लूथर नामक जर्मन धर्मगुरु ने धार्मिक संस्थाओं की निंदा करते हुए एक खुला वक्तव्य जारी किया जिसमें उन्होंने जनता से कहा कि आप लोगों को गुरुओं  के कथन को ही धर्म न मानकर स्वयं बाइबिल पढ़ना चाहिए और धर्म के तत्वों को समझना चाहिए । मार्टिन लूथर के इस कथन पर आपके  क्या विचार है ?

उत्तर: मार्टिन लूथर के विचार देन है कि यूरोप में पुनर्जागरण हो सका तथा इस विचार से प्रभावित लोगों द्वारा धर्म शास्त्रों का अध्ययन किया, जिसे अब तक धर्मगुरुओं द्वारा सदियों से अपने स्वार्थ के परिप्रेक्ष्य में परिभाषित किया था और लोगों की धारणा बादली लोगों ने असलियत जानी धर्मगुरुओं के पाखंड तथा चर्चो की गुलामी तथा दुषचरित्रता  से मुक्ति पाई, मार्टिन लूथर ने ही बताया कि ईश्वर किसी माध्यम का मोहताज नहीं है आप उपयोग सर्वशक्ति से प्रार्थना स्वयं कर सकते हैं ईश्वर चर्चो  में नहीं मानवता में वास करता है। 


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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