CG Board Class 8 Sahayak Vachan Solutions Chapter 12 विचार बिन्दु is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 सहायक वचन पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Sahayak Vachan Solutions Chapter 12 विचार बिन्दु
CGBSE समाधान कक्षा 8 सहायक वचन अध्याय 12 – विचार बिन्दु हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Sahayak Vachan Solutions Chapter 12 सहायक वचन are given below for Hindi Medium students.
Page No.76,Chapter :-12(बारहवीं झलक),Chapter Name- विचार बिंदु
अभ्यास
प्रश्न 1 – सत्य के जन्म को लेकर गाँधी जी लॉर्ड कर्जन के विचारों से क्यों असहमत थे ?
उत्तर :- गाँधी जी सत्य के बड़े आग्रही थे। वे सत्य को ईश्वर मानते थे। वायसराय कर्जन ने कहा था कि सत्य की कल्पना भारत में यूरोप से आयी है। इस बात को लेकर गाँधी जी बड़े ही नाराज हुए और उन्होंने वायसराय को लिखा कि आपका विचार पूर्ण रूप से गलत है। भारत में सत्य की प्रतिष्ठा बहुत ही प्राचीन काल से चली आ रही है। यहाँ सत्य को परमात्मा का ही रूप माना जाता है। सत्य ही हम सब के जीवन का सर्वोपरि सिद्धांत है और में ही स्वतः वचन और चिंतन में सत्य की स्थापना करने का प्रयत्न करता हूं । परम सत्य तो परमात्मा है। हम सत्य के रूप में परमात्मा की पूजा करते है। अतः आपका कथन निराधार हो।
प्रश्न 2 – अहिंसा से गाँधी जी का क्या आशय था ?
उत्तर :- अहिंसा को परिभाषित करना अत्यंत ही कठिन कार्य है। परंतु गांधी जी मानते थे कि मन ,वचन और शरीर से किसी को दुःख न पहुँचाना ही अहिंसा है।
प्रश्न 3 – गाँधी जी के अनुसार ब्रम्हचारी कौन कहलाता है ?
उत्तर :- गांधी जी के अनुसार जो व्यक्ति मन वचन और शरीर से इन्द्रियों को अपने वश में रखता है वही ब्रह्मचारी है.जिसके मन के विकार नष्ट नहीं हुए है ,उसे पूर्ण रूप से ब्रह्मचारी नहीं कहा जा सकता है। अर्थात जो अपने जीवन में नियमित और संयमित रहता है वही ब्रह्मचर्य का पालन कर सकता है।
प्रश्न 4 – गाँधी जी प्रार्थना करना आवश्यक क्यों मानते थे ?
उत्तर :- महात्मा गांधी जी का प्रार्थना में अटूट विश्वास था। गांधी जी प्रार्थना का अर्थ ईश्वर स्तुति ,भजन ,कीर्तन ,सत्संग अध्यात्म और आत्मशुद्धि को मानते थे। वे कहते थे कि हमने ईश्वर को तो नहीं देखा पर महसूस किया है। उसी ईश्वर को हमें हृदय में अनुभव करना चाहिए वे सत्य को ही ईश्वर मानते थे। जो कि संसार में प्रारम्भ से ही विद्मान था प्रार्थना में सत्य से एकाकार की शक्ति निहित होती है। अतः हमें भी उस परम सत्य में एकाग्रचित होने के लिए व्याकुल होना चाहिए। प्रार्थना से ही सब कुछ सम्भव होता है ।
प्रश्न 5 – गाँधी जी का समाजवाद से क्या तात्पर्य था ?
उत्तर :- गांधी जी विभिन्नता में एकता के दर्शन करने में सच्चा समाजवाद पाते थी। वे कहते थे कि हमें अपने जीवन क्रम को बदलना होगा समाजवाद एक व्यक्ति के आदर्श जीवन ग्रहण करने से प्रारम्भ होगा। लोग धीरे -धीरे जब उनका अनुसरण करने लगेंगे तो सम्पूर्ण समाज में समानता स्थापित हो जाएगी। समाजवाद स्फरिक के समान शुभ और पवित्र होता है। उस तक पहुंचने के लिए बड़े ही पवित्र साधन अपनाने होंगे। एक अहिंसा वादी व्यक्ति कभी भी समाज में अन्याय नहीं देख सकता है।
प्रश्न 6 – हिंदी की किन विशेषताओं के कारण गाँधी जी उसे राष्ट्रभाषा होने के योग्य मानते थे ?
उत्तर :-गांधी जी ने सारे देश में भ्रमण करके यह निर्णय लिया कि हिंदी ही वह भाषा है जिसे हम हिंदुस्तानी भाषा कह सकते है या हिंदी राष्ट्रभाषा होने पर हम गर्व कर सकते है। उन्होंने हिंदी ही राष्ट्रभाषा योग्य है उसकी कई विशेषताओं से हमें अवगत कराया जैसे –
- राष्ट्रभाषा वह होनी चाहिये जो कि प्रयोग करने वालों के लिए सरल हो।
- भाषा हमें धार्मिक ,आर्थिक सामाजिक और राजनितिक रूप से आपस में जोड़ सके।
- हिंदी को भारत के अधिकांश क्षेत्रों में श्रेष्ठता का दर्जा प्राप्त है। अर्थात भारत जैसे देश में बहुत से लोग हिंदी भाषी है।
अतः हम कह सकते है कि हिंदी भाषा में ये सभी लक्षण व्याप्त है अर्थात “हिंदी “की होड़ करने वाली दूसरी और कोई भाषा हो ही नहीं सकती।
अतः हिंदी हम सबकी राष्ट्रभाषा होनी चाहिए।
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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.