CG Board Class 9 Sanskrit Solutions Chapter 12 लौहतुला – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 9 Sanskrit Solutions Chapter 12 लौहतुला are given below for Hindi Medium students.

CG Board Class 9 Sanskrit Solutions Chapter 12 लौहतुला


अभ्यासः

Page No. 57

Q.1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत। 

क) कुत्र गन्तुं वणिक्पुत्रः व्यचिन्तयत्?

उत्तर :- देशान्तरं गन्तुं वणिक्पुत्रः व्यचिन्तयत् |

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ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी किम् अकथयत्?

उत्तर :- स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी अकथयत् सा तुला मूषकैः भक्षिता इति |

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ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं कया आच्छाद्य गृहमागतः?

उत्तर :-  जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं वृहत शिलया अच्छाद्य गृहमागतः |

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घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं किम् उवाच?

उत्तर :- नदीतटात्स श्येनेन हृतः इति स्नानानन्तर पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं उवाच |

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ड.) धर्माधिकारिभिः जीर्णधनश्रेष्ठिनौ कथं सन्तोषितौ?

उत्तर :- धर्माधिकारिभिः जीर्णधन श्रेष्ठिनौ परस्परं संबोध्य तुला शिशु प्रदानेन सन्तोषितौ |

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Q.2. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत ?

क) जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत् ? 

प्रश्न  :- कः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत् ? 

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ख) श्रेष्ठिनः शिशुः स्नानोपकरणमादाय अभ्यागतेन सह प्रस्थितः? 

प्रश्न  :-  श्रेष्ठिनः शिशुः स्नानोपकरणमादाय केन सह प्रस्थितः ?  

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ग) श्रेष्ठी उच्चस्वरेण उवाच श्रेष्ठी – भोः अब्रह्ममण्यम् अब्रह्ममण्यम् ?

प्रश्न  :-   कः उच्चस्वरेण उवाच – भोः अब्रह्ममण्यम् अब्रह्ममण्यम् ?

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घ) स्थूल सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ ? 

प्रश्न  :- स्थूल  कैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ ?

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Q.3. अधोलखितानां श्लोकानाम् अपूर्णोऽन्वयः प्रदत्तः पाठमाधृत्य तं पूरयत ?

क) यत्र देशे अथवा स्थाने………….भोगाः भुक्ताः …………विभवहीनः यः……….सः पुरुषाधमः।

ख) राजन्! यत्रा लौहसहस्रस्य ………….. मूषकाः ………….. तत्र श्येनः …………. हरेत् अत्र संशयः न।

उत्तर :- क) अस्माभिः, नरः, नरः, ख)तुला, खादान्ति, बालकः.|

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Q.4. तत्पदं रेखाड्ढित कुरुत यत्र। 

क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति

विहस्य, लौहसहस्रस्य, संबोध्य, आदाय

उत्तर :-  लौहसहस्रस्य

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ख) यत्र द्वितीया विभक्तिः नास्ति

श्रेष्ठिनम्, स्नानोपकरणम्, सत्त्वरम्, कार्यकारणम्

उत्तर :-  सत्त्वरम्

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ग) यत्र षष्ठी विभक्तिः नास्ति

पश्यतः, प्रहृष्टमनाः, श्रेष्ठिनः सभ्यानाम

उत्तर :-  प्रहृष्टमनाः

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Q.5. सन्धिना सन्धिविच्छेदेन वा रिक्तस्थानानि पूरयत। 

क) श्रेष्ठ्याह       =   श्रेष्ठी + आह                     (यण स्वर संधि)

ख) द्वावपि               =   द्वौ + अपि                       (अयादि स्वर संधि)

ग) पुरुषोपार्जिता     =   पुरुष + उपार्जिता             (गुण स्वर संधि)

घ) यथेच्छया               =   यथा + इच्छया                 (गुण स्वर संधि)

ड.) स्नानोपकरणम्      =             स्नान + उपकरणम्            (गुण स्वर संधि)

च) स्नानार्थम्               =   स्नान + अर्थम्                   (दीर्घ संधि)

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Q.6. समस्तपदं विग्रहं वा लिखत-

  विग्रहः             समस्तपदम् 

क) स्नानस्य उपकरणम्     = स्नानोपकरणम् 

ख) गिरे   गुहायाम्.                =           गिरिगुहायाम्

ग) धर्मस्य अधिकारी            =              धर्माधिकारी

घ) विभवेन    हीनाः                =            विभवहीनाः

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