CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 जैव विविधता एवं वर्गीकरण are given below for hindi medium students.
CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 1 जैव विविधता एवं वर्गीकरण
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अभ्यास-
Q.1. सही विकल्प चुनें-
i) वर्गीकरण में –
अ) गुण की पहचान जरूरी नहीं |
ब) वर्ग के सदस्यों में अधिक से अधिक समानता है |
स) समूह के सदस्यों में समानताएं नहीं होती |
द) कोई आधार नहीं है |
ii) निम्न में से द्विबीजपत्री पौधा है –
अ) प्याज ब) घास
स) केला द) सरसों
iii) मछली एवं कबूतर के बीच एक जैसा मिलने वाला लक्षण नहीं है –
अ) धारा रेखित शरीर ब) अंडे देना
स) कशेरुक दंड की उपस्थिति द) पंखों की उपस्थिति
उत्तर :- i) (अ) , ii) (द) , iii) (द) |
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Q.2. रिक्त स्थान की पूर्ति करें :-
i) समूहीकरण व ……………… की प्रक्रिया में आधार चुनना आवश्यक है |
ii) ……………….जगत में प्रोकैरियोटिक जीवों को शामिल किया जाता है |
iii) पाँच जगत वर्गीकरण……………… ने दिया |
उत्तर :- i) वर्गीकरण ii) मोनेरा , iii) आर. एच. व्हिटेकर |
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Q.3. फंजाई जगत के कोई दो विभेदक लक्षण लिखें ?
उत्तर :- फंजाई जगत के लक्षण :-
i) इस जगत के जीव में हरित लवक नहीं पाया जाता है।
ii) इनका शरीर तन्तुमय जाल बनाते हैं।
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Q.4. उभयचर एवं सरीसृप में कोई दो अंतर लिखें ?
उत्तर :- उभयचर एवं सरीसृप में अंतर :-
| उभयचर | सरीसृप |
| 1. इसकी त्वचा नमी युक्त होती है2. शरीर पर शल्क पाए जाते हैं उदाहरण :- रोहू, कतला | | 1.इसकी त्वचा में नमी का अभाव होता है |2. शरीर पर शल्क अनुपस्थित होता है उदाहरण :- छिपकली, कछुआ | |
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Q.5.फंजाई की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति पाई जाती है, फिर भी उन्हें प्लांटी जगत के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता ? क्यों कोई एक कारण लिखें |
उत्तर :- फंजाई में कोशिका भित्ति पाई जाती है | लेकिन इसे प्लांटी जगत में नहीं रखा जाता क्योंकि इसमें क्लोरोफिल का अभाव होता है | जिसके कारण यह विषमपोषी होते हैं |
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Q.6. सर्प एवं कछुए को एक साथ रखने का क्या आधार है ?
उत्तर :- i) रीड़ की हड्डी की उपस्थिति |
ii) त्वचा पर बाल का ना होना|
iii) शरीर पर पंख का ना होना |
iv) नमी युक्त त्वचा का अभाव
यह सभी लक्षण दोनों में पाए जाने के कारण इसे एक साथ रखा गया है |
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Q.7.ऐसे पाँच पौधों के नाम बताएँ जिनके बीजों में दो बीजपत्र पाए जाते हैं ?
उत्तर :- i) आम , ii) सरसो , iii) चना , iv) मूंग , v) मटर |
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Q.8.वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
उत्तर :- हमारी पृथ्वी में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं | इन सभी का एक साथ अध्ययन करना संभव नहीं है | अतः समस्त जीव-जंतुओं को उनमें समानताओं और असमानताओं के आधार पर उन्हें अलग-अलग विभाजित किया जाता है जिससे हमें अध्ययन करने में सुविधा हो |
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Q.9.द्विनामपद्धति से आप क्या समझते हैं ?इसके अंतर्गत जीवों के नाम किस प्रकार लिखे जाते हैं कोई दो उदाहरण दें |
उत्तर :- एक ही जीव को अलग-अलग जगह अलग-अलग नाम से जानते हैं | जिससे जीवों को पहचानने में असुविधा होती है | इस असुविधा के लिए कैरोलस लीनियस ने समस्त जीव-जंतुओं को द्विनाम पद्धति दिया ताकि हमें जीवो को पहचानने में सुविधा हो | कैरोलस लीनियस के द्विनाम पद्धति में पहला नाम वंश एवं दूसरा नाम जाति होता है |
i) इस नाम को पहले वंश के पहले अक्षर को बड़े एवं अन्य को छोटे अक्षरों में लिखा जाता है |
ii) दोनों नाम को तिरछे अक्षरों में लिखा जाता है |
उदाहरण:- मनुष्य :- Homo sapiens
मेंढक :- Rana tigrina
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Q.10.चूहा और चमगादड़ में समान लक्षण कौन-कौन से हैं ?+
उत्तर :- चूहें एवं चमगादड़ में समान लक्षण –
i) दोनों स्तनधारी प्राणी है।
ii) दोनों में चार कक्षीय ह्रदय होती है
iii) इनके शरीर पर बाल होते हैं।
iv) ये दोनों गर्म रक्त वाले होतें हैं।
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Q.11.पाँच जगत वर्गीकरण के क्या आधार हैं ? वह पाँच जगत कौन-कौन से हैं विस्तार से समझाएँ |
उत्तर :- पाँच जगत वर्गीकरण का आधार :-
जैसे-जैसे कोशिकाओं की आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी मिलती गई और नए जीवो का पता चलता गया, वैसे-वैसे वर्गीकरण के लिए आधार मिलते गए और आर.एच. व्हिटेकर ने वर्गीकरण के नए तरीके खोजे जिनका आधार निम्न है :-
i) केंद्रक की अनुपस्थिति व उपस्थिति (प्रोकेरियोटिक व यूकेरियोटिक )
ii) संगठन का स्तर ( एककोशिकीय व बहुकोशिकीय )
iii) पोषण प्राप्त करने की विधि (स्वपोषी और विषमपोषी)
– आर एच व्हिटेकर ने सम्पूर्ण जीव जगत को पांच जगत में वर्गीकृत किया :-
पांच जगत
मोनेरा प्रोहिस्टा फंजाई प्लांटी ऐनिमेलिया
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Q.12.”आधार बदल जाने पर वर्गीकरण का स्वरूप भी बदल जाता है |”इस कथन से आप सहमत हैं या नहीं कारण सहित लिखें ?
उत्तर :- आधार बदल जाने से वर्गीकरण का स्वरूप भी बदल जाता है क्योंकि समय समय पर प्रकृति में प्रजातियों की विलुप्ति एवं नई-नई प्रजातियों का विकास सतत चलती रहती है| ऐसा प्रतीत होता है कि पांच जगत प्रणाली भी ज्ञात जैव विविधता को समेटने के लिए अपर्याप्त है | क्योंकि जैसे-जैसे नए-नए जीवो की खोज होती रहेगी और जैव विविधता के आयाम बदलते जाएंगे वैसे-वैसे ही वर्गीकरण के आधार भी बदलते जाएंगे एवं वर्गीकरण का स्वरूप भी |