CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 1 प्रेरक प्रसंग Chapter 1.2 गुल्ली-डंडा – CGBSE Solutions PDF

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CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 1 प्रेरक प्रसंग Chapter 1.2 गुल्ली-डंडा


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अभ्यास-

पाठ से –

Q.1. लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है?

उत्तर:- गुल्ली – डंडा खेलो का राजा इसलिए है, क्योंकि इस खेल में पैसे खर्च नहीं करने पड़ते | अर्थात यह लकड़ी से बनता है जिसे हम आस-पास से ही प्राप्त कर सकते हैं | उसके लिए कोई खर्च नहीं करना पड़ता | यह सभी को बड़ी ही सुलभता से प्राप्त भी हो जाता है | और इस खेल में भरपूर आनंद भी मिलता है | अतः लेखक ने गुल्ली-डंडा को खेलों का राजा कहा है |

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Q.2. ’’मुझे न्याय का बल था। वह अन्याय पर डटा हुआ था’’ लेखक खेल में पराजित होने के बाद भी अपनी ओर ‘न्याय का बल’ क्यों मानता है और ‘वह’ (गया) को ‘अन्याय पर डटा’ क्यों कहता है?

उत्तर :- लेखक गया से बिना दाँव दिए भाग जाना चाहता था किंतु गया उसे जाने नहीं दे रहा था | लेखक ने उसे अमरुद खिलाया था, इसलिए वह दाँव दिए बिना जाकर कोई गलत नहीं कर रहा था| गया ही उसे दाँव देने के लिए जबरदस्ती रोक रहा था | अतः गया उसके साथ अन्याय कर रहा था |

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Q.3. पिताजी अपने तबादले से दुःखी थे, जबकि लेखक खुश था। क्यों?

उत्तर :- पिताजी के तबादले से लेखक अत्यंत खुश था. क्योंकि वह नई दुनिया, नई जगह, देखने की खुशी थी | नए मित्र, नए शहर, नए-नए लोगों से मुलाकात होगी इस बात पर वह फूला नहीं समा रहा था | अर्थात नए शहर में जाने की उसकी खुशी को वह संभाल नहीं पा रहा था | किंतु पिताजी दु:खी थे | यहां आमदनी अच्छी होती थी, यहां सब वस्तुएं सस्ती थी, नई जगह महंगी होगी, जिससे उनको कठिनाइयों का सामना करना पड़ता | इसी कारण से लेखक के पिताजी दु:खी थे, जबकि लेखक बहुत खुश था |

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Q.4. बीस साल बाद जब लेखक फिर से उस कस्बे में पहुँचा, तो उस क़स्बे और लेखक दोनों में क्या-क्या बदलाव हो चुके थे?

उत्तर:- ‘20 साल’ बाद जब लेखक फिर से उस कस्बे में पहुंचा तो, वह इंजीनियर साहब बन चुका था | उस स्थान को देखते ही इतनी मधुर बाल स्मृतियां हृदय में जाग उठी कि मैंने छड़ी उठाई और कस्बे की सैर करने निकला| आँखें किसी प्यास पथिक की भांति बचपन के उन क्रीड़ा स्थलों को देखने के लिए व्याकुल हो रही थी | पर उस परिचित नाम के सिवा वहाँ कुछ परिचित न था | जहाँ खंडहर था, वहाँ पक्के मकान खड़े थे, जहां बरगद का पुराना पेड़ था, वहाँ अब एक सुंदर बगीचा था, स्थान की कायापलट हो गई थी | अगर उसके नाम और स्थिति का ज्ञान ना होता तो मैं उसे पहचान भी ना सकता था | बचपन की संचित और अमर स्मृतियाँ बाँहे खोलें अपने उन पुराने मित्रों से गले मिलने को अधीर हो रही थी | मगर वह दुनिया बदल गई थी | ऐसा जी होता था कि उस धरती से लिपट कर रोऊँ और कहूँ तुम मुझे भूल गई | मैं तो अब भी तुम्हारा वही रूप देखना चाहता हूँ |

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Q.5. लेखक के साथ खेलते हुए गया के मन में गुल्ली-डंडा के प्रति वही जोश और उत्साह देखने को नहीं मिला, जो बचपन में हुआ करता था। गया के व्यवहार में इस परिवर्तन के पीछे कौन से कारण रहे होंगे?

उत्तर :- गया के व्यवहार में इस परिवर्तन का कारण यह रहा होगा कि लेखक एक बड़ा इंजीनियर साहब बन गया था और गया एक मजदूर था | अगर दोनों के बीच गुल्ली-डंडा का खेल हुआ और उसमें गया जो गुल्ली-डंडा का चैंपियन था लेखक को हरा देता तो वह अपने आप को माँफ नहीं कर पाता क्योंकि एक मजदूर से एक साहब हार गया | कुछ इसी प्रकार के असमंजस से वह जूझ रहा होगा |

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Q.6. निम्नांकित कथनों के क्या अभिप्राय हैं:-

(क) ’’वह बड़ा हो गया है, मैं छोटा हो गया हूँ।’’

(ख) ’’हमारे कई दोस्त ऐसे भी हैं, जो थापी को बैसाखी से बदल बैठे।’’

उत्तर :- (क) प्रस्तुत कथन का अभिप्राय स्पष्ट प्रतीत हो रहा है, जिसमें ‘गया’ कहता है कि गुल्ली-डंडा खेलने वाले मेरे मित्र बचपन में तो साथ खेलते थे, क्योंकि हम सहचरी थे | परंतु अब स्थिति पहले जैसी नहीं है, अब मेरा मित्र एक बड़ा इंजीनियर साहब हो गया है, और मैं उसके आदेश पर काम करने वाला एक मजदूर मात्र हूँ | हम दोनों में अब कोई समानता नहीं है | अतः अब मैं उसे अपने समकक्ष नहीं मान सकता | वह अब बड़ा हो गया है, और मैं छोटा हो गया हूं |

(ख) लेखक प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से यह कहना चाहता हैं कि गुल्ली-डंडा खेल की अपेक्षा क्रिकेट खेल केवल महंगा ही नहीं अपितु अधिक खतरनाक है | गुल्ली-डंडा खेल से सिर आँख ही फूटने का भय रहता है, जबकि क्रिकेट खेल से सिर,आँख फूटना क्या हाथ- पैर भी टूट जाता है | क्रिकेट खेल वैशाखियों पर चलने के लिए विवश कर देता है | 

अर्थात कई बार अक्सर यह देखने में आता है कि यदि कोई दोस्त बड़ा अधिकारी या अफसर बन जाता है तो वह अपने बचपन के दिन भूल जाता है और नई स्मृतियां में खो जाता है | भौतिक जगत की चकाचौंध उसे अपने आगोश में कुछ इस तरह से ले लेती है कि वह अपना-पराया भूल जाता है | इसी उहापोह में बचपन की मधुर स्मृतियां भी ध्वस्त हो जाती हैं |

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पाठ से आगे –

Q.1.गुल्ली-डंडा एक ऐसा भारतीय खेल है जिसके लिए पैसे खर्चने की जरूरत नहीं पड़ती।अपने आसपास/परिवेश में प्रचलित ऐसे खेलों की सूची बनाइए। वर्तमान समाज में इन खेलों के प्रति घटते आकर्षण के क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर :- आधुनिक डिजिटल युग में बच्चों का ज्यादातर समय वीडियो गेम के बीच ही बीतता है | ऐसे में उनसे खो-खो, गुल्ली-डंडा और पिट्ठू गरम जैसे खेलों के बारे में पूछना नादानी होगी |

हमारे परिवेश में प्रचलित ऐसे कई खेल हैं :-

  1. गुल्ली-डंडा 

  2. खो-खो 

  3. छुपन-छुपाई 

  4. कंचा (गोली) 

  5. रस्सा कशी 

  6. पिट्ठू गरम 

  7. रस्सी कूदना 

  8. लंगड़ी टांग 

  9. म्यूजिकल चेयर (कुर्सी दौड़) 

  10.चोर सिपाही 

  11.कित-कित 

 वर्तमान समय में इन खेलों के प्रति घटते आकर्षण के निम्न कारण हो सकते हैं | यह सच है कि वक्त के साथ दुनिया बदलती है, विकास होता है, हमारी सोच और आदतें बदलती है, प्राथमिकताएं बदलती है, लेकिन इन बदलती हुई प्राथमिकताओं में कई बार हम से वह चीजें पीछे छूट जाती हैं जो कभी हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करती थी| जैसे वह खेल जिसके साथ हम सब बढ़े हुए | हमारा सामाजिक परिवेश जिसमें सिर्फ दिखावापन रह गया है | हम इन सब खेलो को खेलना निम्न कोटि का मान बैठे हैं | पुराने समय के खिलौने की जगह अब मोबाइल, वीडियो गेम, कंप्यूटर ने ले ली है | जो कुछ कमी बची थी उसे किताबों से भरे बैग ने पूरी कर दी है | देख कर तो लगता है पुराने खेल कहीं इतिहास के पन्नों में न दर्ज हो जाए और हमारी आने वाली पीढ़ी इसे सिर्फ कागजों में खोजती रह जाए |

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Q.2. गुल्ली-डंडा कहानी में इस खेल से जुड़े कुछ शब्द आए हैं; जैसे- दाँव, पदना/पदाना, हुच, गुल्ली आदि।अपने आसपास प्रचलित खेलों से जुड़ी शब्दावलियों की एक सूची बनाइए-

उत्तर :-

खेल के नाम खेल से जुड़े शब्द
1कंचे दाँव, पदाना
2छुपन-छुपाईरेश, टीप
3क्रिकेटनो वॉक, स्लिप ,रन ,एल.बी.डब्ल्यू आदि 

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भाषा के बारे में –

Q.1. सामान्य अर्थ को छोड़कर विशेष अर्थ को प्रकट करने वाले वाक्यांश मुहावरे तथा वाक् लोकोक्ति कहे जाते हैं। लोकोक्ति लम्बे लोक अनुभव को व्यक्त करने वाला सूत्र वाक्य होता है। कहानी में कई मुहावरे और लोकोक्तियों का प्रयोग हुआ है; जैसे-लोट-पोट हो जाना, हर्रे लगे न फिटकरी रंग चोखा आए, पिंड न छोड़ना आदि। इन मुहावरों केअलावा कहानी से अन्य मुहावरे भी ढूँढ़िए और उनका वाक्य में प्रयोग करते हुए अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:-1 बिना हर्रा-फिटकरी के रंग चोखा -कम मेहनत में ज्यादा फायदा होना –

प्रयोग :- करोनाकाल में सभी बच्चें बिना पढ़े ही बोर्ड परीक्षा में पास हो गये ये तो वही मिसाल है कि न हर्रे न फिटकरी फिर भी रंग चोखा-चोखा ।

2. लोट-पोट हो जाना – अत्यधिक हंसना – कपिल शर्मा के शो हमें लोटपोट कर देते हैं |

3. खुशी से फूला ना समाना – अत्यधिक प्रसन्न होना – कक्षा में प्रथम स्थान देखकर राम खुशी से फूला नहीं समा रहा है |

4. अरुचि हो जाना – अच्छा ना लगना – आजकल के लोग अपने पुराने सभी खेल भूल चुके हैं | ऐसा लगता है जैसे उन्हें इन सब में अरुचि हो गई है |

5. सिर मढ़ना – विवश करना –  हमें अपना कार्य दूसरों के सिर नहीं गढ़ना चाहिए |

6.जमघट होना –  इकट्ठा होना –  सड़क पर दुर्घटना देखते ही लोगों के जमघट लग गए  |

7.गला छुड़ाना –  पीछा छुड़ाना – गरीबों की मदद करने की अपेक्षा लोग अपना गला छुड़ाना उचित समझते हैं |

8. गले मिलना – आलिंगन करना – मां हमें देखते ही गले लगाने आ गई |

9. ताल ठोकना –  लड़ने के लिए ललकारना- दुश्मन को सामने देखकर उसने ताल ठोक कर कहा कि अगर हिम्मत है तो दो-दो हाथ कर लो |

10.कचूमर निकालना – दुर्दशा करना –  कुश्ती के मुकाबले में हमारे गांव के बलबीर पहलवान ने दूसरे गांव के पहलवान का कचूमर निकाल दिया |

11. अदब पाना – सम्मान पाना – शिक्षा से हमेशा अदब प्राप्त होता है |

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Q.2. कहानी में ‘बचपन’, ‘लड़कपन’ जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है। ‘बच्चा’ और ‘लड़का’ में ‘पन’ प्रत्यय जोड़ने से यह नया शब्द बना है। ‘बच्चा’ और ‘लड़का’ जातिवाचक संज्ञा शब्द हैं, जबकि ‘बचपन’ और ‘लड़कपन’ भाववाचक संज्ञा शब्द हैं। कहानी से जातिवाचक संज्ञा शब्दों को छाँटकर उसका भाववाचक रूप बनाइए-

उदाहरण

जातिवाचक संज्ञा शब्द  भाववाचक संज्ञा शब्द
आदमीआदमियत
मास्टर मास्टरी

उत्तर :- 

    जातिवाचक संज्ञा शब्दभाववाचक संज्ञा शब्द
डॉक्टरडॉक्टरी
खेलखिलाड़ी
आत्माआत्मीयता
नाटकनाटकीय
व्यक्तिव्यक्तिगत 

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Q.3.‘सोहन बस्तर में रहता है और वह रोज स्कूल जाता है।’ वह इस वाक्य में वह निश्चयवाचक सर्वनाम है, जिसका प्रयोग सोहन के लिए हुआ है। जबकि कहानी से ली गई वह अग्रलिखित वाक्यों में वह का प्रयोग सर्वनाम के रूप में किसी व्यक्ति को सूचित नहीं करता है। हिन्दी भाषा वह में वह सर्वनाम शब्द का प्रयोग कई बार दूर या अनुपस्थित व्यक्ति को सूचित करने के अतिरिक्त भाव या विचार वह के लिए भी होता है।

 जैसे-

वह प्रातःकाल घर से निकल जाना, वह वह पेड़ पर चढ़कर टहनियाँ काटना और गुल्ली-डंडे बनाना, वह उत्साह, वह खिलाड़ियों के जमघट, वह पदना और पदाना, वह लड़ाई-झगड़े, वह  सरल स्वभाव, जिससे छूत-अछूत, वह अमीर-गरीब का बिल्कुल भेद न रहता था, जिसमें अमीराना चोंचलो की, प्रदर्शन की, अभिमान की गुंजाइश ही न थी, यह उसी वक्त भूलेगा जब …. जब …

Q.1. उपर्युक्त वाक्यों की तरह वह का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए। 

उत्तर :- वह का प्रयोग:- 

    1. वह मुझे जानता है |

    2.वह मेरा काम नहीं था|

    3. वह बहुत बीमार है |

    4.वह तो बस एक मजदूर था |

    5.वह खुशियां कहां जो पहले थी |

    6. वह बड़े ही अनमने मन से जी रहा है |

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Q.2. उसी वक्त भूलेगा जब …. जब … वाक्य को पूरा कीजिए।

उत्तर :- उसी वक्त भूलेगा जब समाज में विलासिता,भेदभाव,जाति-पाती तथा अमीर- गरीब में अंतर ना समझते हुए आपस में सच्ची मित्रता से एकजुट होकर कार्य किया जाए| बचपन की यादें हमेशा बनी रहती है वह उसी वक्त भूलती है जब व्यक्ति के पास समय का अभाव हो गया हो या जब उसका अंतिम समय हो गया हो |

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योग्यता विस्तार –

Q.1. छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों से जुड़ी जानकारियों को पत्र-पत्रिकाओं से इकट्ठा कीजिए और उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं और प्रसंगों को कक्षा में साझा कीजिए।

उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें ।

Q.2. ‘पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे ख़राब’ समाज में प्रचलित इस मान्यता से आप कहाँ तक सहमत हैं। इस पर कक्षा में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।

उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें ।

Q.3. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा लिखित निबंध खेल भी शिक्षा ही है खेल भी शिक्षा ही खेल भी शिक्षा ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें ।

Q.4. क्रिकेट खेलने के लिए किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन सामग्रियों की बाजार में कीमत पता कीजिए तथा किसी भी देशी/स्थानीय खेल में आने वाले खर्च से इसकी तुलना कीजिए।

उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें ।

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