CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 6 विज्ञान एवं तकनीकी Chapter 6.2 प्लास्टिक: कल का खतरा, आज ही जागें are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 6 विज्ञान एवं तकनीकी Chapter 6.2 प्लास्टिक: कल का खतरा, आज ही जागें
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. ’’द ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच’’ क्या है? इसे आधुनिक सभ्यता का क्रूर प्रतीक क्यों माना जाता है?
उत्तर :- प्रशांत महासागर में कैलिफोर्निया के तट से 800 कि.मी. और जापान के तट से 3 कि.मी. की दूरी पर एक ऐसी पट्टी है जिसे आधुनिक सभ्यता का क्रूर प्रतीक माना जा सकता है| इसे “द ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच” (प्रशांत कचरा) पट्टी कहते हैं | यह भारत से 4 गुना बड़ा है | इसमें कूड़ा करकट के अतिरिक्त प्लास्टिक की मात्रा अधिक है | चूंकि प्लास्टिक अघुलनशील, अपघटित हीन एवं रासायनिक तौर पर अपेक्षाकृत निष्क्रिय होता है| प्लास्टिक विशुद्ध रूप से अधिक जहरीला होता है | इससे कैंसर आदि कई बीमारी हो सकती है | तथा अन्य जीव-जंतु, पशु-पक्षी आदि भी प्रभावित होते हैं | इसलिए इसे आधुनिक समस्या का क्रूर प्रतीक माना जा सकता है |
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Q.2. प्लास्टिक आज हमारे दैनिक जीवन में इतना जरूरी और लोकप्रिय क्यों हो गया है?
उत्तर :- प्लास्टिक जिसे 20 वीं सदी में चमत्कारिक पदार्थ की उपाधि से नवाजा गया था| अब हमारी आधुनिक सभ्यता के निष्ठुर चेहरे के रूप में उभर रहा है | इसका प्रयोग हर क्षेत्र में हो रहा है, जैसे पैकेजिंग, भवन निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि, खेल सामग्री, एवं वस्त्र उद्योग एवं मेडिसिन, डिस्पोजल आदि का व्यापक इस्तेमाल होता है | चायलाँन, पॉलिएस्टर, पॉलीथिन ,टेफलॉन, बहुउपयोगी तथा सस्ता होने के कारण अत्यधिक लोकप्रिय हो गया है | जब प्लास्टिक की खोज हुई तो मनुष्य के जीवन में जैसे क्रांति आ गई | वस्तुओं को खराब होने से बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय करने पड़ते थे, यह सब प्लास्टिक ने आसान कर दिया |
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Q.3. 20 वीं सदी का सबसे चमत्कारिक पदार्थ आज आधुनिक सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। प्लास्टिक के बारे में यह कथन हमें क्या संकेत देता है?
उत्तर :- 20 वीं सदी में प्लास्टिक को चमत्कारिक पदार्थ की उपाधि से नवाजा गया था | जो हमारे आधुनिक सभ्यता के निष्ठुर चेहरे के रूप में उभर रहा है | इसके जैसा लचकदार पदार्थ प्रकृति में और कोई नहीं है | यह टिकाऊ है, वाटर प्रूफ है, बहुत हल्का सस्ता है, और सबसे बड़ी बात इसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता है | हर दिन इसमें नए-नए गुण जोड़े जा रहे हैं, जिससे प्लास्टिक की उपयोगिता और बढ़ती जा रही है | यह अघुलनशील अपघटित हीन तथा जहरीले रसायनों से मिलकर बनाई जाती है, इसलिए एक पक्ष में लाभ मिलता है तो दूसरे पक्ष में हॉर्मोनिक प्रक्रियाओं में बाधा, कैंसर आदि घातक बीमारियां भी हो सकती है | प्लास्टिक को जलाने पर कार्बन मोनोऑक्साइड और यूटॉन जैसी जहरीली गैस हवा में फैलकर स्वास्थ संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं | बरसात के समय नालियों में बह कर कभी ना कभी नालियों के पानी को रोक देती है, जिससे घरों में पानी प्रवेश कर जाता है तथा वातावरण को दूषित कर देती है, जल भी प्रदूषित हो जाता है, जिससे मानव एवं अन्य जीवो पर गहरा प्रभाव होने का खतरा हो सकता है | प्लास्टिक का प्रयोग पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है तथा सेहत के लिए भी नकारात्मक असर दिखाई देता है |
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Q.4. लेखिका ने प्लास्टिक की समस्या से निपटने का सबसे उत्तम उपाय क्या बताया है?
उत्तर :- लेखिका ने प्लास्टिक की समस्या से निपटने के लिए हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा | हमें कम से कम प्लास्टिक का उपयोग करना चाहिए, जहाँ इसके बगैर काम न चले वहीं करना चाहिए | स्थानीय स्तर पर उत्पन्न मौसमी पदार्थों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए, जिनके लिए पैकेजिंग की आवश्यकता कम हो तथा इनका उपयोग करने के बाद बिखेरना नहीं चाहिए बल्कि सुरक्षित स्थान पर जमा करें | कोशिश करें कि इस संसार को प्लास्टिक मुक्त बनाएं ,कम से कम इसका उपयोग करें |
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Q.5. विशुद्ध प्लास्टिक कम जहरीला क्यों होता है?
उत्तर :- विशुद्ध प्लास्टिक पानी में अघुलनशील और रासायनिक तौर पर अपेक्षाकृत निष्क्रिय होता है। इसलिए प्लास्टिक अपने शुद्ध रूप में कम जहरीला होता है। लेकिन हम विशुद्ध प्लास्टिक का उपयोग कम करते हैं।
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Q.6. प्रति व्यक्ति प्लास्टिक खपत की दृष्टि से भारत की स्थिति चिंताजनक क्यों है?
उत्तर :- प्रति व्यक्ति प्लास्टिक का सीधा संबंध प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय से है, जो देश जितना अधिक सम्पन्न है वहाँ प्लास्टिक खपत उतनी अधिक है। भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक खपत लगभग 11 किग्रा है जो 28 किग्रा के वैश्विक औसत से काफी कम है लेकिन इसमें से केवल 60 प्रतिशत का ही पुनःर्चक्रण हो पाता है। सरकारी स्तर पर प्लास्टिक को बैन करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन सख्ती के अभाव में इनका कोई असर होता नहीं दिख रहा है। इसलिए भारत की स्थिति चिन्ताजनक है।
पाठ से आगे :-
Q.1. आज प्लास्टिक के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। आप बताएँ कि कब-कब हमारा प्लास्टिक के बिना काम चल सकता है और कब नहीं?
उत्तर :- प्लास्टिक बैग्स से होने वाले पर्यावरण के नुकसान को कम करने की दिशा में हर एक इंसान कुछ बेहद जरूरी कदम उठा सकता है | सतर्कता और जागरूकता दो बेहद जरूरी चीजें हैं, जिसे प्लास्टिक के खिलाफ अपनाया जा सकता है |
1) प्लास्टिक के बैग्स को संभाल कर रखें, इन्हें कई बार इस्तेमाल में लाए, सामान खरीदने जाने पर अपने साथ कैरी बैग लेकर जाएं |
2) ऐसे प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें जिनको एक बार इस्तेमाल के बाद ही फेंकना होता है| जैसे, प्लास्टिक के पतले ग्लास, तरल पदार्थ पीने की स्ट्रा और इसी तरह का अन्य सामान |
3) मिट्टी के पारंपरिक तरीके से बने बर्तन के इस्तेमाल को बढ़ावा दें |
4) प्लास्टिक सामान को कम करने की कोशिश करें, धीरे-धीरे प्लास्टिक से बने सामान की जगह दूसरे पदार्थ से बने सामान अपनाएं |
5) प्लास्टिक की पीईटीई और एचडीपीई प्रकार के समान सुनिए | यह प्लास्टिक आसानी से रिसाइकल हो जाता है |
6) प्लास्टिक बैग और पोलिएस्ट्रीन फोम को कम से कम इस्तेमाल करने की कोशिश करें उनका रिसाइकल रेट बहुत कम होता है |
7) आप कम से कम प्लास्टिक फेंकने की कोशिश करें |
8) अपने आसपास प्लास्टिक के कम इस्तेमाल को लेकर चर्चा करें |
9) अपने प्लास्टिक वाले कचरे को ऐसे सेंटरों तक पहुंचाएं, जहाँ इसका रिसाइकल किया जाता है |
10) खुली हवा में इसे जलाएं यह फेंके नहीं |
नागरिकों की पर्यावरण के प्रति कुछ खास जिम्मेदारियां हैं, जिन्हें अगर समझ लिया जाए तो पर्यावरण को होने वाली हानि को बहुत हद तक कम किया जा सकता है | स्वयं पर नियंत्रण ही समस्या का समाधान है |
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Q.2. यदि प्लास्टिक का इस्तेमाल ही न करने दिया जाए तो आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पडे़गा?
उत्तर :- यदि प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाए तो जो सबसे आवश्यक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पूर्णरूपेण चरमरा जाएगा क्योंकि प्लास्टिक से डिस्पोजल सिरिंज कैथेटर कृत्रिम कॉर्निया श्रवण यंत्र और कैप्सूल आदि के आवरण बनाए जाते हैं, इनके लिए ऐसा कोई वैकल्पिक पदार्थ नहीं है जो प्लास्टिक जैसे प्रभावी एवं सस्ते हों | शैंपू, शैशे, दाल, चावल आदि को जूट, कपड़ा, कॉटन आदि के थैलों की आवश्यकता होगी, जो प्लास्टिक से कहीं अधिक महंगे होंगे |
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Q.3. प्लास्टिक के खतरों को देखते हुए यदि आपको प्लास्टिक के इस्तेमाल के बजाय कोई अन्य विकल्प सुझाने हों तो वे क्या होंगे?
उत्तर :- प्लास्टिक के खतरों को देखकर अन्य विकल्प निम्न हो सकते हैं :-
1) कागज से बने थैले
2) कपड़े से बने थैले
3) चमड़े के बैग
4) जूट से बने थैले या झोले
5) कॉटन के थैले
प्लास्टिक की जगह उपरोक्त वस्तुओं से बने चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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Q.4. यदि प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल को नहीं रोका गया तो भविष्य में इंसान को इसके क्या दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर :- प्लास्टिक का जैव अपघटन नहीं होता और वह विघटन की प्राकृतिक प्रक्रिया का प्रतिरोध होता है इसलिए वह प्रकृति में हजारों लाखों सालों तक ऐसे ही बना रहेगा जब घटित होता भी है तब अनेक जहरीले रसायन प्रकृति में छोड़ता है जिससे हमारी जमीन झीलें नदियां प्रदूषित हो जाती हैं यह जमीन के भीतर इस कर भूमिगत पानी को भी खराब कर देता है
समुद्र में पाई जाने वाली कम से कम 26% जीव प्रजातियों पर प्लास्टिक के कचरे का असर पड़ा है प्लास्टिक अनेक पशुओं जैसे बकरियां गायों हिरनों की आंतों में भी पाया गया है और इस कारण से बेमौत मारे भी जाते हैं पानी में बहते हवा हवा तो उड़ते और सूरज के ताप के असर से प्लास्टिक समय के साथ बहुत ही सूक्ष्म कणों में बट जाता है यह सूचना कल तक और अन्य छोटे जीवो में पहुंच जाते हैं इन्हें बड़े जीव निकल लेते हैं ऐसे में निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि प्लास्टिक हमारी खाद्य श्रृंखला में शामिल होते जा रहे हैं जिसके बहुत ही घातक व दूरगामी परिणाम होंगे |
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Q.5. प्लास्टिक कचरे के सही निस्तारण के लिए आपके क्या सुझाव हैं?
उत्तर :- प्लास्टिक कचरे को एक जगह एकत्रित करना चाहिए या रिसाइकल करके प्लास्टिक की कुर्सियाँ आदि बनाने चाहिए। इसका उपयोग विवेकपूर्ण करना चाहिए।
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Q.6. इस पाठ के और क्या-क्या शीर्षक हो सकते हैं? चर्चा करके लिखिए।
उत्तर :- चमत्कारिक पदार्थ प्लास्टिक जहरीला प्लास्टिक भविष्य का संकट प्लास्टिक आदि शीर्षक हो सकते हैं।
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भाषा के बारे में :-
Q.1. इस पाठ में अनेक ऐसे शब्द आए हैं, जो शायद आपके लिए नए होंगे। बहुत से ऐसे शब्द भी हैं, जिन्हें आपने विज्ञान की किताबों में देखा होगा? ऐसे सभी शब्दों को पाठ से छाँटिए और इनके अर्थ भी पता कीजिए।
उत्तर :- शब्द अर्थ
विशुद्ध शुद्ध
कार्बोनेट कार्बनड्राई ऑक्साइड
आनुवंशिकी जन संबंधी वंशानुसार
उत्सर्जित निकला हुआ
पारदर्शी आर-पार दिखाने वाला
कुचालक अवरोधक
मिश्रण दो पदार्थों का मेंला
प्रतिरोधी अवरोधक
जैव अपघटन स्वाभाविक रूप से सड़ना
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Q.2. पाठ में अंग्रेजी भाषा के निम्नलिखित शब्द आए हैं। शब्दकोश में इसके अर्थ खोजिए।गार्बेज, रिसाइकल, वाटरप्रूफ, टेट्रापैक, पैकेजिंग, रैपर, एडिटिव, पीवीसी, ड्रेनेज सिस्टम
उत्तर :- शब्द अर्थ
गार्बेज कचरा
रिसाइकल पुनर्चक्रण
वाटरप्रूफ बरसाती
टेट्रापैक गत्ते का छोटा डिब्बा पैक
पैकेजिंग रैपर पैक करने के सामग्री
एडिटिव योज्य
पी.पी.सी पॉली विनाइल क्लोराइड
ड्रेनेजसिस्टम जल निकासी व्यवस्था
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Q.3. इस पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए (शब्द सीमा लगभग 200)।
उत्तर :- प्रशांत महासागर में कैलिफोर्निया से 800 किलोमीटर तथा जापान के तट से 300 किलोमीटर दूरी पर एक ऐसी पट्टी है जिसका नाम “द ग्रेट पैसेफिक गार्बेज पैच” (प्रशांत कचरा पट्टी) के नाम से प्रसिद्ध है | जिसे आधुनिक सभ्यता का क्रूर प्रतीक माना गया | जो नदियों आदि के द्वारा बहाकर समुद्र में एकत्रित किया गया है | वर्षा होने पर शहर तथा गांव के नालियों आदि के पानी बहाव को रोककर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर देता है | किंतु 20 वीं सदी में चमत्कारिक उपाधि से नवाजा गया था | आधुनिक निष्ठुर चेहरे के रूप में उभर रहा है | इसका उपयोग आजकल अधिक किया जा रहा है | हर जगह प्लास्टिक ही दिखाई देने लगा है |लोग सस्ती होने के कारण इसका उपयोग अधिक करते हैं | प्लास्टिक जैव अपघटन नहीं होता है, तो इसके निर्माण में तथा उपयोग में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए | आग लगाने पर प्लास्टिक के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड, डाइऑक्सीन, युरांन जैसी जहरीली गैस से न केवल मानव बल्कि अन्य जीव जंतु प्रभावित होते हैं, तथा कैंसर व स्वास्थ संबंधी घातक बीमारियां हो सकती हैं | जानवर तथा समुद्री जीव इसको खा कर मर जाते हैं, यह वातावरण को प्रदूषित कर देती हैं, जिससे स्वास्थ संबंधी खतरे उत्पन्न हो जाते हैं | भारत में अन्य देशों की अपेक्षा खपत अधिक हैं | चिकित्सा के क्षेत्र में इसका उपयोग आवश्यक है | अन्य क्षेत्रों में इसका उपयोग कम कर देना चाहिए | प्लास्टिक हमारे भविष्य के लिए खतरनाक साबित होगा, इसके अलावा इसके उत्पादन एवं प्रयोग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए |
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Q.4. निम्नांकित अनुच्छेद महादेवी वर्मा द्वारा लिखित संस्मरण ’मेरे बचपन के दिन’ से लिया गया है। इसे ध्यानपूर्वक पढ़िए और खाली छूटे स्थानों पर उचित सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए।
बचपन की स्मृतियों में एक विचित्र-सा आकर्षण होता है। कभी-कभी लगता है, जैसे सपने में सब देखा होगा। परिस्थितियाँ बहुत बदल जाती हैं।
उत्तर :-
अपने परिवार में मैं कई पीढ़ियों के बाद उत्पन्न हुई। मेरे परिवार में प्रायः दो सौ वर्ष तक कोई लड़की थी ही नहीं। सुना है, उसके पहले लड़कियों को पैदा होते ही परमधाम भेज देते थे। फिर —– बाबा ने बहुत दुर्गा-पूजा की। —– कुल-देवी दुर्गा थीं। मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है। परिवार में बाबा फ़ारसी और उर्दू जानते थे। पिता ने अंग्रेज़ी पढ़ी थी। हिंदी का कोई वातावरण नहीं था। मेरी माता जबलपुर से आईं तब —– अपने साथ हिंदी लाईं। वे पूजा-पाठ भी बहुत करती थीं। पहले-पहल —– मुझकों ’पंचतंत्र’ पढ़ना सिखाया। बाबा कहते थे, —– विदुषी बनाएँगे। मेरे संबंध में उनका विचार बहुत ऊँचा रहा। इसलिए ’पंचतंत्र’ भी पढ़ा मैंने, संस्कृत भी पढ़ी। वे अवश्य चाहते थे कि मैं उर्दू-फ़रसी सीख लूँ, लेकिन —– मेरे वश की नहीं थी। —– जब एक दिन मौलवी साहब को देखा तो बस, दूसरे दिन —– चारपाई के नीचे जा छिपी।तब पंडित जी आए संस्कृत पढ़ाने। माँ थोड़ी संस्कृत जानती थीं। गीता में —– विशेष रुचि थी |
उत्तर :- i) मेरे , ii) उनकी , iii) वे , iv) उन्होंने , v) मुझे , vi) वे , vii)मैंने , viii)मैं, vx) उनकी |
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योग्यता विस्तार-
Q.1. यहाँ भारत द्वारा 2012-13 में किए गए प्लास्टिक उत्पादों के निर्यात के आँकड़ों को निम्नांकित पाई चार्ट में दर्शाया गया है। आप इसे ध्यान से देखिए और बताइए।
(क) भारत ने सबसे अधिक प्लास्टिक की किस सामग्री का निर्यात किया है?
(ख) भारत ने सबसे कम प्लास्टिक की किस सामग्री का निर्यात किया है?
(ग) कौन से उत्पाद ऐसे हैं जो समान मात्रा में निर्यात किए गए?
(घ) कुल निर्यात का आधा निर्यात किन उत्पादों को मिलाकर होता है? यह काम आप आँकड़ों को जोड़े बिना केवल ग्राफ देखकर कीजिए।
उत्तर :- क ) भारत में सबसे अधिक फिल्मशीट्स व प्लेट्स आदि का निर्यात किया गया है।
ख ) पाइप ट्यूब व फिटिंग का निर्माण सबसे कम किया जाता है।
ग ) बुने हुए बोरे व घरेलू सामान तथा लेखन संबंधी, व नेत्र संबंधी सामग्री का समान भारी मात्रा में निर्यात किया गया है।
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Q.2. विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों को प्लास्टिक के खतरों के प्रति जागरुक करने के लिए कुछ श्लोगन या एक लेख लिखिए।
उत्तर :- श्लोगन :- 1) प्लास्टिक हटाए जीवन बचाएं, धरती को स्वच्छ बनाएं |
2) प्लास्टिक हमारा अंत, कठोर बना देगा |
3) छीन रहा जीवन हमारा, यह प्लास्टिक है हत्यारा |
4) प्लास्टिक है जानलेवा, इसे अभी बंद करें |
5) आओ घर-घर अलख जगायें, प्लास्टिक को घर-घर से भगाएं |
विश्व पर्यावरण दिवस :- प्लास्टिक आज न केवल हर जगह है बल्कि लगभग हमेशा के लिए भी है | इससे बने बर्तनों में हम खाते पीते हैं, इसकी कुर्सी पर बैठते हैं, प्लास्टिक से बनी कारों में सफर कर रहे हैं, यह चीजें लंबे समय चले इसके लिए इन्हें ड्यूरेबल बनाया जा रहा है | उपयोग बड़े, इसके लिए कई रूपों में बनाया जा रहा है | इसमें सीलन नहीं आती और तरल वस्तुएं लीक नहीं होती | यह लचीला है, हल्का भी है | यह हीरे की तरह महंगा नहीं है, लेकिन उसी की तरह सदा के लिए बनाया जा रहा है | प्लास्टिक की यही क्वालिटी हमारी और हमारी धरती व पर्यावरण के लिए खतरा बन चुकी है | इस पर्यावरण दिवस पर इसे खत्म करने का दायित्व दिया गया है, जो हम सभी का है | यह जीवन के लगभग हर क्षेत्र में हम इसे मौजूद पाते हैं | लेकिन क्या कभी यह सोचते हैं कि जिस तरह लकड़ी, लोहे अथवा कागज की वस्तुओं के अनुपयोगी होने पर हम उन्हें फेंक देते हैं, क्या प्लास्टिक की वस्तुओं को भी फेंकना सही है ? क्या होता है जब हम इसे मिट्टी या पानी में फेंकते है ? क्या होता है जब इसे जलाते हैं यह किसी अन्य तत्व या जैविक चीजों की तरह पर्यावरण में घुलता नहीं, बल्कि सैकड़ों साल वहां वैसे ही बना रहता है,जहां इसे फेंका गया था। साथ ही उस जगह को अपने कैमिकल से जहरीला भी बनाया जाता है। जिस मिट्टी में यह प्लास्टिक जाता है, उसे बंजर बना देता है। पानी में जाता है, तो पानी न केवल जहरीला बनाता है, बल्कि जलीय जीवों के लिए मौत का कारण बन जाता है।
प्लास्टिक थीम, भारत मेजबान :- प्लास्टिक बीते 50 वर्ष में हमने जितना उपयोग प्लास्टिक का बढ़ाया है किसी अन्य चीज का इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया | 1960 में दुनिया में 50 लाख टन प्लास्टिक बनाया जा रहा था, आज यह बढ़कर 300 करोड़ टन के पार हो चुका है। यानी हर व्यक्ति के लिए करीब आधा किलो प्लास्टिक हर वर्ष बन रहा है | पर्यावरण से लेकर हमारे जीवन तक पर इसका बुरा असर सामने आ रहा है, फिर भी प्लास्टिक का उत्पादन बढ़ता ही जा रहा है |
प्लास्टिक से होने वाले नुकसान :-
माइक्रो प्लास्टिक :- वैज्ञानिकों के अनुसार कॉस्मेटिक्स में उपयोग हो रहा माइक्रोप्लास्टिक या प्लास्टिक बड्स पानी में घुलकर पानी का प्रदूषण बढ़ा रहे हैं | इसकी मौजूदगी जलीय जीवो में भी मिली है | भारत सहित कई देशों ने जुलाई 2017 में इस पर बैन लगाया, लेकिन अब तक जितना नुकसान इस ने किया है हमारे वातावरण को उसकी भरपाई में कितना समय लगेगा कहना मुश्किल है |
समुद्र में प्लास्टिक :- रीसाइक्लिंग से बचें और बेकार हो चुके प्लास्टिक का बड़ा हिस्सा हमारे समुद्रों में डंप हो रहा है | वैज्ञानिक अध्ययनों का अनुमान है कि 2016 में समुद्र में 70 खरब प्लास्टिक के टुकड़े मौजूद हैं, जिनका वजन 3 लाख टन से अधिक है |
बचाव में आर्थिक नुकसान :- संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक से बचाव में हो रहा निवेश विभिन्न देशों को आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचा रहा है | अमेरिका अकेले 13 सौ करोड़ डॉलर अपने समुद्र तटों से प्लास्टिक साफ करने में खर्च कर रहा है | भारत जैसे देशों के लिए भी बड़ा भार है |
इस तरह किए जा रहे खत्म करने के उपाय :-
सड़क निर्माण :- दुनिया के कई हिस्सों में अनुपयोगी प्लास्टिक कचरे से सड़कें बनाई जा रही हैं |
रिसाइकल :- इस समय दुनिया का एक तिहाई प्लास्टिक ही रिसाइकल हो पा रहा है| वैज्ञानिकों के अनुसार प्लास्टिक को अधिक से अधिक मात्रा में रिसाइकल करने की जरूरत है |
अभियान :-मुंबई का वर्सोवा तट लोगों द्वारा प्लास्टिक से मुक्त करने के अभियान का एक अनूठा उदाहरण बना है | ऐसे ही अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में चलाए जा रहे हैं |
पायरोलाइसिस :- एक तकनीकी है जिसके जरिए प्लास्टिक हुई धन के रूप में बदला जाता है |
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3. जब प्लास्टिक नहीं था या सीमित था, तब माँ/दादी/दादा का इनके बिना काम कैसे चलता था? उनसे पूछकर लिखिए।
उत्तर :- जब प्लास्टिक नहीं था, या सीमित था तब कपड़ा, कॉटन, जूट, पेड़-पौधों के बड़े-बड़े पत्ते तथा चमड़े से बनें बैगों के उपयोग किये जाते थे।
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Q.4. प्लास्टिक कचरा के निराकरण या पर्यावरणीय स्वच्छता से जुड़े समाचारों की कतरनों को एकत्र कर शाला की भित्ति पत्रिका में पढ़ने के लिए लगाइए।
उत्तर :- छात्र स्वयं करें |