CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.1 पद are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.1 पद
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. अवसर बीत जाने के पश्चात् पछताना क्यों पड़ता है? पद में दिए गए उदाहरणों के भाव लिखिए।
उत्तर :- जीवन में व्यक्ति के समक्ष सुंदर समय का सदुपयोग करने का समय प्राप्त होता है लेकिन व्यक्ति किसी कारण वश जब हाथ आए उस सुअवसर को छोड़ या उस पर ध्यान या उपेक्षित कर देता है वह अवसर दुबारा नहीं आता है | व्यक्ति को तब पश्चाताप करना पड़ता है | यह मानव शरीर के दुर्लभ योनियों में से सर्वश्रेष्ठ योनि का है | इसमें समय रहते ईश्वर को आराधना, पूजा या नाम स्मरण मात्र से संसार से आवागमन से मुक्त हो सकता है | लेकिन सागर के चक्कर में पड़कर भजन करने वाले समय में भजन नहीं करता है, मृत्यु कब हो जाए यह किसी को पता नहीं होता या अंत समय में ईश्वर का नाम भी मुख से नहीं निकलता है | यहां ईश्वर भक्ति में इस मानव शरीर को लगाना आवश्यक है, क्योंकि राजा बलि एवं रावण जैसे पराक्रमी राजाओं को भी खाली हाथ इस संसार से विदाया मृत्यु को प्राप्त हुए हैं, पुत्र – स्त्री आदि पूरा-पूरा परिवार स्वार्थी है | अंत समय में यह सभी अकेले छोड़ देते हैं |
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Q.2. ‘अंत चले उठि रीते’ पंक्ति का भावार्थ क्या है?
उत्तर :- व्यक्ति संसार में जन्म लेता है यहां ईश्वर की आराधना से विमुख होकर सांसारिक माया मोह के बंधन में पड़कर अपनी संतति के लिए धन, दौलत, घर, द्वारा आदि बनाता या सँवारता रहता है | भगवान का नाम जो सार है, उसका स्मरण नहीं करता है | जब मृत्यु को प्राप्त होता है, उस समय उसके साथ किसी भी प्रकार की संपत्ति नहीं जाती है, खाली हाथ ही वह संसार से विदा होता है |
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Q.3. ’सूरस्याम देखते ही रीझैं, नैन-नैन मिली ठगोरी’ से कवि का क्या आशय है?
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति से कवि का आशय है कि राधा के मनमोहक रूप को ही देखकर श्याम उस पर रीझ जाते हैं | आँखों से आँखें मिलने पर दोनों ठगे से रह गए हैं | एक दूसरे के रूप पर मुग्ध होकर प्रेम में बंध गए | अर्थात राधा के अप्रतिम सुंदर को देखकर कृष्ण उन पर मोहित हो जाते हैं, और जब उनसे उनके नैन मिलते हैं तो वे ठगे से रह जाते हैं | उन्हें कुछ नहीं सूझता |
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Q.4. कबीर के पद में जग के बौराने का क्या अभिप्राय है?
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति से कवि का आशय है कि संसार पागल हो गया है | सत्य कहने पर मारने के लिए दौड़ता है, तथा असत्य की ओर संसार भागता है | सत्य तो ईश्वर नाम स्मरण है तथा संसार नश्वर तथा असत्य है, लोगों के द्वारा सत्य ईश्वर का नाम न जपकर असत्य का सहारा लिया जाता है | इसलिए कबीर ने संसार को पागल कहा है |
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Q.5. ’मरम’ से कबीर का क्या आशय है?
उत्तर :- कबीर के मरम का आशय ‘रहस्य’ से है | क्योंकि ईश्वर एक है लेकिन हिंदू उसे राम तथा मुसलमान अल्लाह कहते हैं | यह दोनों ही ईश्वर एक है, जो सर्वत्र विद्यमान है | यह रहस्य नहीं जानते हैं |
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Q.6. कबीर ने किसके ज्ञान को थोथा कहा है? और क्यों?
उत्तर :- कबीर ने ऐसे व्यक्ति जो शाश्वत ईश्वर जो सूक्ष्म है, हर आत्मा में विद्यमान है, उसकी आराधना अर्थात सजीव (प्रत्यक्ष) को न मानकर अप्रत्यक्ष (निर्जीव) पाषाण की प्रतिमा का पूजन करते हैं | उनके ज्ञान को थोथा (दिखावटी) कहा है |
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Q.7. धनी धरमदास के पद में सत्य-व्यापार की बात की गई है। सत्य-व्यापार से कवि का क्या आशय है?
उत्तर :- ईश्वर नाम ही सत्य है जो नित्य एवं शाश्वत है | इसके व्यापार अर्थात “नाम स्मरण” मात्र से लाभ होता है | व्यक्ति ईश्वर को प्राप्त कर आवागमन के मार्ग से मुक्ति को प्राप्त कर लेता है | इसका व्यवसाय करने में लाभ ही लाभ है | इसमें किसी तरह की लागत भी नहीं लगती है | यह निष्फल नहीं होता है |
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Q.8. ’पूँजी न टूटै नफा चौगुना’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :- किसी भी व्यवसाय को प्रारंभ करने तथा विकसित करने में धन-संपत्ति अर्थात पूँजी लगाना आवश्यक है | व्यापार विकसित होने पर लाभ होता है, लेकिन कभी-कभी धंधा न चलने पर लागत धन भी चला जाता है, अर्थात हानि हो जाती है | इस भगवान नाम स्मरण से व्यापार में पूँजी डूबने पर डर नहीं होता बल्कि 4 गुना लाभ होता है |
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पाठ से आगे –
Q.1. अवसर निकल जाने पर पछतावा होता है। जीवन में अवसर को कैसे पहचाना जाए?
उत्तर :- व्यक्ति का जीवन संघर्षशील होता है जीवन में उतार-चढ़ाव, सुख-दु:ख आते ही रहते हैं | लेकिन कभी-कभी ऐसा मौका या अवसर व्यक्ति के सामने आ ही जाता है जब व्यक्ति को समय के साथ समझौता करना ही पड़ता है, और वह करता भी है, जिससे जीवन में आगे बढ़ सके | अर्थात अपना विकास करने का हर संभव प्रयास करता ही रहता है| लेकिन जो व्यक्ति आलस्य समय की उपेक्षा करता है, उसके विकास का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है | हाथ से गया समय लौट कर कभी वापस नहीं आता है | सर्वश्रेष्ठ योनि मानव को प्राप्त है यह योनि प्राप्त कर लेने पर भी ईश्वर का भजन न करना माया मोह में जकड़ा रहना एवं अंत समय जब शरीर जवाब दे जाता है तो उस समय ईश्वर आराधना की सोचना बल्कि कार्य रूप में परिणितन कर पाने पर मनुष्य को पश्चाताप करना पड़ता है |
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Q.2. अत्यधिक संग्रह की प्रवृत्ति सुखकर क्यों नहीं हो सकती है? अगर नहीं तो क्यों? अपने विचार लिखिए।
उत्तर :- अत्यधिक भौतिकता का संग्रह जीवन के अमूल्य समय को बर्बाद कर देता है| विकसित संसार में हर व्यक्ति अपने को भौतिक, मानसिक सुविधाओं को देने के लिए धन दौलत तथा उपयोगी साधनों का संग्रह करने में जुटा रहता है | मनुष्य की इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होती है, उन्हीं की पूर्ति हेतु मनुष्य लगा रहता है पूर्ति न करने पर दु:ख का अनुभव करता है| नहीं अत्यधिक धन संग्रह दुखदाई होता है | क्योंकि उसकी देखभाल में व्यक्ति रात दिन बेचैन रहता है | “अति सर्वत्र वर्जयेत्” इसलिए कहा गया है |
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Q.3. (क) ‘औचक ही देखीं तहँ राधा’ इस पंक्ति में औचक देखने से क्या आशय है?
(ख) आप किसी परिचित को अचानक अपने सामने पाते हैं, तो आपके मन में क्या-क्या भाव आते हैं?
उत्तर :- (क) प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से राधा जी, श्री कृष्ण के मनमोहक दृश्य का वर्णन करते हुए कहती हैं कि श्रीकृष्ण ने पीतांबर धारण किए हुए हैं, सिर में मोर पंख तथा शरीर में सुगंधित चंदन आदि कालेपन किए हुए हैं | तभी अचानक इतनी प्यारी और मनमोहक छवि को देखकर राधा जी आश्चर्यन्वित हो गई थी, जिसका कारण यह था कि वह श्री कृष्ण से पहली बार मिल रही थी |
(ख) अपने किसी परिचित व्यक्ति को अचानक सामने पाकर सबसे पहले आश्चर्य होता है क्योंकि पहले से उसके विषय में कोई जानकारी नहीं रहती है। परिचित को देखकर प्यार उमड़ता है। हाल – चाल जानने की उत्सुकता उत्पन्न होती है। यदि कोई अभीष्ट होता है तो उसे हृदय लगाने की चाहत उत्पन्न होती है।
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Q.4. आपके अनुसार व्यक्ति का सामाजिक व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर :- हमारे विचार से व्यक्ति का सामाजिक व्यवहार बड़ा ही शालीन होना चाहिए| सामाजिक व्यवहार को वस्तुओं के आदान-प्रदान के समान देखा जा सकता है, इस उम्मीद के साथ कि जब आप जैसा भी व्यवहार समाज को देंगे, वैसा ही बदले में आपको वापस मिलेगा | यह व्यवहार व्यक्ति के गुणों और पर्यावरणीय कारकों दोनों से प्रभावित हो सकता है | इसलिए सामाजिक व्यवहार को जीवों और उसके पर्यावरण के बीच एक अंतः क्रिया के परिणाम स्वरुप उत्पन्न होता है | श्रेष्ठ व प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक कार्य करना चाहिए, हमेशा सही मार्ग प्रशस्त करते हुए समाज में रहना चाहिए | किसी को कष्ट नहीं देना चाहिए | सभी के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए |
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Q.5. पद में किशोर कृष्ण और राधा के मिलने का वर्णन ब्रज भाषा में दिया है। आप इसे अपनी भाषा में लिखिए।
उत्तर :- भगवान श्रीकृष्ण खेलने के लिए बृज की गलियों से यमुना तट को गए थे | वे धोती व पीला दुपट्टा तथा हाथ में भौरा चक्र व रस्सी लिए हुए थे | शरीर में चंदन का सुगंधित लेप लगा हुआ था, बहुत ही प्यारी छवि थी | वहीं पर सखियों के साथ राधा भी नीले रंग का लहंगा पहने हुए थी, जिनके ललाट में बिंदी लगी हुई थी, चोटी पीठ पर हिल रही थी, तथा उनकी बड़ी-बड़ी आँखें थी | अचानक उन्होंने कृष्ण की मनमोहक सूरत को देखा तथा कृष्ण जी गौर वर्ण राधा की ओर देखते हैं, दोनों के नेत्रों में प्यार उमड़ता है | वे पहली बार मिले हुए थे |
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भाषा के बारे में-
Q.1. जहाँ एक ही ध्वनि की आवृत्ति होती है उसे अनुप्रास अलंकार कहा जाता है। जैसे-
पीपर पाथर पूजन लागे (यहाँ ‘प’ ध्वनि की एक से अधिक बार आवृत्ति हो रही है) इस
प्रकार की अन्य पंक्तियाँ पाठ से छाँट कर लिखिए।
उत्तर :- 1) पीपर – पाथर पूजन लागे – (‘प’ वर्ण की आवृत्ति)
2) कहि कछनी पीताम्बर बाँधे (‘क’ वर्ण की आवृत्ति )
3) कोई – कोई लौंग काँसा पीतल, कोई – कोई लौंग सुपारी (‘क’ वर्ण की आवृत्ति)
4) दुर्लभ देहपाई हदिवद (‘द’ वर्ण की आवृत्ति)
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Q.2. आपके घर की भाषा और इन पदों की भाषा में किस तरह का अंतर व समानता है? इस पाठ में बहुत से शब्द होंगे, जो आपके घर की भाषा में भी थोड़े फेर बदल के साथ प्रचलित होंगे। उन शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर :- खेप (राशि)
पदारथ (पदार्थ)
वरत (व्रत)
नेमी (नियम करने वाला)
झुकझोरना (झकझोरी)
जड़ (मूर्ख)
तजेंगे (त्याग देना)
रीतें (खाली)
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योग्यता विस्तार-
Q.1. अपने घर परिवार और बड़े बूढ़ों से पता कीजिए कि कबीर के कौन-कौन से भजन गाए जाते हैं, अपने दोस्तों के साथ मिलकर उनका एक संकलन तैयार कीजिए।
उत्तर :- कबीर की सखियाँ एवं पद गाये जाते है।
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Q.2. ब्रज, अवधि एवं छत्तीसगढ़ी के अन्य भक्तिकालीन कवियों की रचनाएँ ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर :- ब्रज = सूरदास, रहीम, रसखान, केशव, घनानंद, बिहारी इत्यादि।
सूरदास = सूरसागर
रहीम = श्रृंगार सतसई
रसखान = मानुस हौं तो वही
केशव = रसिका प्रिय
घनानंद = सवैया
बिहारी = कादम्बरी
अवधी = प्रतापनारायण मिश्र = प्रेम पुष्पावली
जगजीवन साहब = यह नगरी महँ परिऊँ भुलाई
तुलसीदास = रामचरित मानस
मुल्लादाऊद = मंगलाचरण
एवं अन्य कवियों ने अवधी व मैथिली में रचनाएँ की है।
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Q.3. नीचे कबीर के कुछ दोहे दिए गए हैं इन्हें भी पढ़िए। अर्थ के बारे में साथियों से चर्चा कीजिए।
उत्तर :-
तिनका कबहुँ न नींदिये, जो पाँयन तर होय।
कबहुँ उड़ आँखिन परै, पीर घनेरी होय।। 1।।
अर्थ :- कबीरदास जी कहते हैं कि अपने जो शरणागत है, अर्थात नीच जाति के या गरीब वर्ग हैं, उन्हें कभी भी निंदा या उन्हें दुत्कारना नहीं चाहिए, क्योंकि ये उसी प्रकार जैसे पैर के नीचे पड़े हुए घास के तिनकों को उछालने से उड़कर आँखों में पड़ जाने से अत्यधिक कष्टदायी होते हैं, ये भी कष्टदायी होते हैं |
रात गँवाई सोय के, दिवस गँवाया खाय ।
हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय।। 2 ।।
अर्थ :- यह मानव शरीर प्राप्त करना एक बहुमूल्य हीरे के समान अमूल्य है | इस शरीर को प्राप्त कर जो व्यक्ति रात्रि में सोने तथा दिन में भोग विलास करके अपना अमूल्य समय इन व्यर्थ के कार्यों में व्यतीत कर देते हैं, ईश्वर का स्मरण नहीं करते हैं, उनका जन्म व्यर्थ है, अर्थात जो मानव शरीर प्राप्त कर भजन आदि सत्कर्म नहीं करते हैं, उनका जन्म कौड़ी के समान व्यर्थ है | उनकी कोई कीमत नहीं होती है |
माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख ।
माँगन से मरना भला, यह सतगुरु की सीख।। 3 ।।
अर्थ :- कबीरदास जी कहते हैं कि किसी वस्तु को माँगना एवं मरना दोनों समान है | इसलिए भिक्षा किसी से मत माँगो अर्थात किसी के सामने हाथ मत फैलाओ | माँगने की अपेक्षा मरना श्रेयस्कर है | यही सतगुरु की शिक्षा है |
दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय ।
बिना जीव की श्वास से, लौह भस्म हो जाय।। 4 ।।
अर्थ :- कबीरदास जी कहते हैं किसी गरीब व निर्बल व्यक्ति को दुखित व पीड़ा नहीं पहुँचानी चाहिए | जिसकी अंदर से दुखित हृदय की उच्छवास निकलती है, जिस प्रकार से बिना जीव वाली लोहार की धौकिनीं की खाल को बार-बार चलाने से वह लोहे जैस सख्त वस्तु को गला देती है, इसी प्रकार गरीब लोगों की हाय भी उसे नष्ट कर सकती है |
प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय ।
राजा-परजा जेहि रुचै, शीश देई ले जाय।। 5 ।।
अर्थ :- प्रेम की पैदावार बगिया (खेती भूमि) में नहीं होती है | और न ही अन्य वस्तुओं की भांति यह हाट बाजार आदि में बिकता है | अमीर गरीब जो जिसे अच्छा लगे या रुचिकर हो वही उसके लिए शिरोधार्य होता है |