CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.2 उत्तर का विशाल मैदान are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.2 उत्तर का विशाल मैदान
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प्रश्न 1.पंजाब और हरियाणा के मैदानों में वर्षा कम होती है, फिर अधिक पैदावार कैसे संभव हो पाई?
उत्तर : पंजाब और हरियाणा का क्षेत्र वेट या दोआब (दो नदियों के बीच की भूमि) है जिसके कारण यह क्षेत्र बहुत ही उपजाऊ है, तथा यहां वर्षा कम होने के बावजूद जो नदियां बहती है उनके साल भर पानी रहता है, जिसके कारण यहां सिंचाई की बहुत सारी सुविधाएं जैसे नहर ट्यूबेल आदि होने के कारण इस क्षेत्र में कृषि पैदावार अच्छी होती है। इसमें इस क्षेत्र में बहने वाली नदियों जैसे सतलुज, व्यास,रावी,चिनाब,तथा झेलम का महत्वपूर्ण योगदान है इन्हीं नदियों के कारण भूमि उपजाऊ और सिंचाई के अनेक साधन संभव हो सके ।
प्रश्न 2.ऐसा क्या कारण है कि इन नदियों में साल भर पानी रहता है जबकि यहां वर्षा कम होती है?
उत्तर : इन नदियों (रावी,झेलम,चिनाब,सतलुज,ब्यास) में साल भर पानी होने का प्रमुख कारण है कि वे नदियां हिमालय के ग्लेशियरों से निकलती है, यहां निरंतर बर्फ पिघलती रहती है, और उसका पानी सदैव ही इन नदियों में प्रवाहित होती रहती है।
प्रश्न 3.यहाँ सिंचाई के प्रमुख स्रोत क्या है?
उत्तर : यहां सिंचाई के प्रमुख स्त्रोत नदियों के जल है | क्योकि इस क्षेत्र (पंजाब और हरियाणा ) में नदियों में साल भर पानी रहता है, जिसके कारण बांध आदि बनाकर, नहरों की सहायता से पानी यहां के सभी कृषि क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है, और इसके अलावा भूमिगत जल भी एक प्रमुख स्त्रोत है, जिसे किसान ट्यूबवेल, कुओं आदि माध्यम से प्राप्त कर के सिंचाई की समुचित व्यवस्था कर लेते हैं।
प्रश्न 4.हम जिस क्षेत्र में रहते हैं वह मैदानी है या पठारी? कुएँ बनाना कहाँ ज़्यादा आसान है और क्यों?
उत्तर : हम छत्तीसगढ़ के रायपुर क्षेत्र में निवास करते हैं, यहां कि भूमि मिश्रित है, अर्थात् कही-कहीं केवल भूमि है, और कही पत्थर भी है। जिस कारण कुछ स्थानों पर यहां कुएं बनाना आसान है, और कुछ स्थानों पर कठिन है, और वर्तमान समय में ज्यादा कठिन है, क्योंकि इस समय यहां का भूगर्भ जल स्तर बहुत ही नीचे है। कुएं का निर्माण सबसे सरल गंगा के मैदानी क्षेत्रों में होता है, क्योंकि यहां पत्थर भी नहीं होते और भूजल स्तर भी ऊपर होता है।
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प्रश्न 5. निम्नांकित प्राकृतिक विशेषताओं को रिक्त स्थानों में भरिए-
उत्तर :
| क्रमांक | बिन्दु | सिन्धु का मैदान | गंगा का मैदान | ब्रह्मपुत्र का मैदान |
| 1 | मिट्टी | वेट | कांप | कांप |
| 2 | नदियां | सतलज, रावी, झेलम,चिनाब, | गंगा,जमुना,घाघरा, कोसी | ब्रह्मपुत्र आदि |
| 3 | फसलें | गेहूं, ज्वार, बाजरा, गन्ना, आदि | गेहूं,ज्वार,बाजरा, धान, गन्ना, दलहन की फसले आदि सभी सब्जियां | जूट, चावल |
| 4 | प्रमुख नगर | अमृतसर, चन्दीगढ़ | लखनऊ, दिल्ली आदि | गुवाहाटी |
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प्रश्न 6.गन्ने का रस निकालकर बेचने वाले दुकानदार से चर्चा करें कि वे गन्ना कहाँ से लाते हैं? उन्हें कितना मुनाफा होता है?
उत्तर : – हमारे शहर में बहुत जगह गन्ने का रस बेचा जाता है | मैंने उन रस विक्रेताओं में से कुछ रस विक्रेताओं से बात किया, जिनसे पता चला कि यहां के गन्ना रस विक्रेता पूरे 1 सप्ताह का गन्ना किसानों से खरीदते हैं, क्योंकि यदि ज्यादा दिन के गन्ने का क्रय करेंगे तो उनका रस सूखने लगता है, और उसे 1 सप्ताह में रस बेच देते हैं | इन सारी प्रक्रिया में उन्हें सब खर्च निकालकर बहुत ज्यादा मुनाफा प्राप्त नहीं हो पाता है ,क्योंकि हमारे रायपुर में गन्ने की खेती के अनुकूल न ही जलवायु है और न ही यहां की मिट्टी है| इसी कारण यहां गन्ने की खेती व्यावसायिक रूप से ना होकर निजी जरूरत के लिए पैदावार होती है | इसी कारण यहां गन्ने का मूल्य भी अधिक होता है, जिससे गन्ना रस विक्रेताओं को कम लाभ हो पाता है |
प्रश्न 7.बहुफसली खेती के क्या कारण हैं?
उत्तर : – बहुफसली खेती के लिए सबसे बड़ा कारण उस क्षेत्र गंगा का मैदान की भौगोलिक और क्षेत्रीय स्थितियां है | जैसे, गंगा-यमुना का मैदानी क्षेत्र है | यहां नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी जो कि बहुत उपजाऊ है, और साथ ही नदियों और वर्षा के कारण सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने के कारण इस क्षेत्र में साल भर कृषि की जाती है, और साल में ऐसे क्षेत्रों में 3 फसलों की उपज या पैदावार प्राप्त होती है | क्षेत्र की जनसंख्या बहुत सघन है, और उपजाऊ क्षेत्र होने के कारण यहां के लगभग 75% लोगों के जीविका का साधन कृषि या कृषि आधारित उद्योग हैं | इस कारण भी यहां बहुफसली खेती की जाती है, जिससे सभी को रोजी और रोजगार उपलब्ध हो सकता है |
प्रश्न 8.दीवार मानचित्र/एटलस को देखकर सिंचित क्षेत्रों की पहचान कीजिए। हमारा क्षेत्र क्या इस श्रेणी के अंतर्गत आता है?
उत्तर :- विद्यार्थी गण मानचित्र की सहायता से स्वयं करें।
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प्रश्न 9. किसानों के कई परिवार भूमि के ऐसे छोटे भूखंडों पर क्यों खेती करते हैं ?
उत्तर :- भूमि खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण है | जैसा कि हम जानते हैं कि भारतवर्ष में आजादी के पूर्व जमींदारी व्यवस्था थी, जो कि आजादी के बाद भूमि सुधार कानून बनाकर इस व्यवस्था को समाप्त किया गया | क्योंकि इसमें एक ही व्यक्ति संपूर्ण गांव या 2-3 गांव की भूमि का स्वामी होता था | भूमि सुधार कानून से इस व्यवस्था में सुधार तो हुआ, परंतु आज भी भारत में लगभग 50% किसान ऐसे हैं, जिनके पास खेती के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है | वह केवल कृषि कार्य करके अपने तथा अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर सकते हैं | साथ ही आज लगभग कुल किसानों में से एक तिहाई किसान ऐसे हैं, जो भूमिहीन हैं, हम उन्हें भूमिहीन किसान मजदूर कह सकते हैं | इसका प्रमुख कारण भूमि सुधार कानून का सही ढंग से क्रियान्वयन न होना है | क्योंकि आज भी बड़े किसान इस कानून की कमियों का सहारा लेकर बहुत ही अधिक कृषि भू- भाग पर अपना अधिकार जमाए हुए हैं| इसी कारण आज भी किसान छोटे-छोटे भू- भाग पर कृषि करने के लिए विवश हैं |
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अभ्यास-
प्रश्न 1. सही गलत बताएँ-
क. गंगा-सिंधु का पूरा मैदान भारत देश में ही है।
ख. भारत देश का कुछ हिस्सा गंगा-सिंधु के मैदान में है।
ग. गंगा-सिंधु का मैदान उत्तर के विशाल मैदान का हिस्सा है।
घ. उत्तर के विशाल मैदान की प्रमुख नदी गंगा है।
उत्तर :- क) गलत है, ख) सही है , ग) सही है , घ) सही है , |
प्रश्न 2. पंजाब-हरियाणा के मैदान में सिंचाई की ज़रूरत क्यों है ? वहाँ के लोगों को सिंचाई से क्या फायदा हुआ है?
उत्तर :- पंजाब तथा हरियाणा के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा कम होती है | यदि कृषि की पैदावार केवल वर्षा के जल पर निर्भर रहती तो केवल यहां एक या दो फसल का ही उत्पादन हो सकता था, किंतु आज इन क्षेत्रों में नहरों, सरकारी तथा निजी सिंचाई के माध्यम से साल भर कृषि कार्य किए जाते हैं, और वर्ष में तीन फसलों की पैदावार किया जाता है | इस कारण यहां के लोग कृषि का व्यवसायिक स्तर पर पैदावार करने में सफल हुए, इसका प्रमुख कारण यहां की सिंचाई व्यवस्था थी | इसी कारण यहां के किसान साधन संपन्न और खुशहाल हैं |
प्रश्न 3. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके में नहर बनाना क्यों आसान है?
उत्तर :- उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाके में नहर का निर्माण करना इसलिए सरल है, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र मैदानी क्षेत्र है | इस पूरे क्षेत्र का निर्माण नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी के कारण हुआ है | इस कारण इस क्षेत्र में नहरों का निर्माण आसानी से किया जाता है, तथा यहां नदियों में पूरे वर्ष भर पानी होने से नहरों के निर्माण की सार्थकता को बल मिलता है |
प्रश्न 4. हमारे इलाके से मीरपुर गांव में क्या-क्या अंतर है?
उत्तर :- 1. हम छत्तीसगढ़ प्रदेश में रहते हैं, हमारे प्रदेश में भूजल स्तर 200-400 फुट नीचे है | जबकि मीरपुर गंगा- जमुना के मैदानी क्षेत्र में है, जहां भूजल स्तर बहुत ऊपर लगभग 40-60 फुट पर है |
2. छत्तीसगढ़ क्षेत्र में मिश्रित मिट्टी पाई जाती है | अर्थात कहीं कृषि योग्य तो कहीं बंजर इसके विपरीत मीरपुर मैदानी क्षेत्र है, जो गंगा की जलोढ़ मिट्टी से निर्मित है और यह क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ है |
3. हमारे क्षेत्र में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है, जबकि मीरपुर में सिंचाई की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है |
प्रश्न 5. तराई और डेल्टा में समानता और अंतर बताइए।
उत्तर :
| तराई | डेल्टा |
| अंतर:- 1.भाबर क्षेत्र में विलुप्त हुई नदियां मैदानी भाग में दिखती है और इनका जल विस्तृत क्षेत्र में फैला होता है| इसे तरई कहते हैं | 2. यह क्षेत्र दलदली होता है.3. इस क्षेत्र में समुचित कृषि नहीं की जा सकती है | समानता;-1. तराई के निर्माण नदियों के द्वारा होता है 2. इस क्षेत्र में कृषि कार्य किए जाते हैं | | अंतर:- 1.जबकि डेल्टा का निर्माण दो नदियों के बीच बने मैदानी भाग को कहते हैं |2. डेल्टा क्षेत्र की मिट्टी अपेक्षाकृत नरम होती है | 3.यह क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल होता है. समानता :- 1. डेल्टा का भी निर्माण नदियों के द्वारा संपन्न होता है |2. इस क्षेत्र में भी कृषि कार्य किए जाते हैं | |
प्रश्न 6. गोखुर झील और आपके गाँव/शहर के तालाब में क्या अन्तर है?
उत्तर :- गोखुर झील का निर्माण नदी मोड़ से होता है | जब कभी बाढ़ आती है तो नदी अपने घुमावदार मार्ग को छोड़कर सीधे मार्ग से बहने लगती है ,इस पर घुमावदार छूटे हुए भाग में जल भर जाता है, जिसे डाउन झील कहते हैं | इसकी आकृति गाय के खुर के समान होती है, इसलिए इसे गोखुर झील भी कहते हैं |
इसके विपरीत गांव या शहर में जो तालाब या पोखर होते हैं , इनका निर्माण प्राकृतिक रूप से नहीं होता है, और इनका आकार निश्चित नहीं होता है तथा इसका निर्माण मनुष्य जहां चाहे वहां कर सकता है |
प्रश्न 7. ‘जल’ जो उत्पादन के लिए एक प्राकृतिक संसाधन है। कृषिगत उत्पादन के उपयोग हेतु अधिक खर्च हो रहा है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- जैसा कि हम जानते हैं कि खाद्यान्न उत्पादन के लिए सबसे प्रमुख आवश्यकताओं में जल का महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि बढ़ती हुई जनसंख्या और कृषि के व्यावसायिक करण होने के कारण जल का दोहन लगातार बढ़ता जा रहा है | जल एक प्राकृतिक संसाधन है | कई क्षेत्रों में दो या तीन फसल की पैदावार लेने के लिए उस क्षेत्र में कुएं, ट्यूबवेल आदि साधना से भूमिगत जल का उपयोग किया जा रहा है, और यह बहुत ज्यादा संख्या में हो रहा है, जिसका परिणाम यह हो रहा है कि आज भूमिगत जल का स्तर लगातार घटता जा रहा है | जहां पहले भूमिगत जल 30-40 फुट नीचे प्राप्त होता था | आज वह और नीचे चला गया है | आज भूमिगत जलस्तर 80 फुट नीचे प्राप्त होता है, क्योंकि भूमिगत जल साल भर उपलब्ध रहता है और वर्षा का जल केवल वर्षा के समय उपलब्ध होता है, इसलिए हमें भूमिगत जल के संरक्षण के लिए वर्षा के जल को ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाना चाहिए, और इसे व्यर्थ न बहा कर भूमि में पुनः रिचार्ज करने का प्रयत्न करना चाहिए | जिससे कि भूमिगत जल का स्तर बना रहे और हम भूमिगत जल का उपयोग कर सकें |
प्रश्न 8. मीरपुर गाँव में किए जाने वाले व्यवसाय और आपके गाँव में किए जाने वाले व्यवसाय में क्या अंतर है?
उत्तर :- मीरपुर गांव और यमुना नदी के मैदानी क्षेत्र का गांव है और यहां की भूमि उपजाऊ होने के साथ-साथ सिंचाई के प्रमुख साधन है, इसलिए यहां के लोगों का स्वरोजगार कृषि पर आधारित है | इस क्षेत्र में कोई गन्ना का रस, गुण का व्यवसाय, डेयरी व्यवसाय, फल सब्जियों आदि कृषि आधारित व्यवसाय अच्छी तथा विकसित अवस्था में है | यहां के किसान अपने उत्पाद को बेचने तथा अच्छा मूल्य अर्जित करने के लिए शहरों में भी अपने उत्पाद को भेजते हैं, अर्थात यहां की स्वरोजगार की स्थिति अच्छी है |
इसके विपरीत हम जिस क्षेत्र में रहते हैं वहां मिश्रित भूमि है, कहीं उपजाऊ है तो कहीं बंजर है, और सिंचाई की भी समुचित व्यवस्था का अभाव है | बहुत से लोग भूमिहीन कृषक मजदूर है | इसलिए हमारे क्षेत्र के कुछ लोग ही कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, बाकी की जनसंख्या शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरी करती है | इसी कारण क्षेत्र के लोग आजीविका के लिए अन्य क्षेत्रों पर निर्भर है, और उन्हें गांव से पलायन करके अपना भरण-पोषण करना पड़ता है |
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परियोजना कार्य :-
प्रश्न 1. प्रत्येक दस वर्ष में भारत देश में जनगणना विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया जाता है और निम्नलिखित प्रारूप द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इस विवरण पत्र को अपने गाँव या आस-पास के किसी गाँव से प्राप्त जानकारी के आधार पर पूर्ण कीजिए-
उत्तर : (अ) स्थान :- मोतीपुर :- गाँव , तहसील :- पाटन, जिला:- दुर्ग, राज्य:- छत्तीसगढ़ |
(आ) कुल गाँव का क्षेत्रफल :- 300 हेक्टेयर |
(इ) प्रयुक्त भूमि (हेक्टेयर में) :- 270 हेक्टेयर |
कृषि भूमि :- 190 हेक्टेयर |
90 हेक्टेयर :- भूमि, जो कृषि हेतु उपलब्ध नहीं है (क्षेत्र जो निवास, सड़क, तालाब, चरागाह के लिए प्रयुक्त)
सिंचित भूमि :- 110 हेक्टेयर |
असिंचित भूमि :- 80 हेक्टेयर |
(ई) सुविधाएँ:
शैक्षिक :- प्राथमिक विद्यालय |
चिकित्सीय :- प्रा. स्वास्थ्य केन्द्र |
बाजार :- साप्ताहिक बाजार ग्राम में ( दिन गुरुवार )
विद्युत आपूर्ति :- जारी है | (उपलब्ध हैं )
संचार सेवा :- उपलब्ध हैं
निकटस्थ शहर :- रायपुर शहर, पाटन, दुर्ग शहर
प्रश्न 2. अपने क्षेत्र के किन्हीं दो मज़दूरों चाहे वह कृषक मज़दूर हो या निर्माण क्षेत्र के मज़दूर से चर्चा कर ज्ञात कीजिए कि वे प्रतिदिन कितना कमाते हैं ? उन्हें मज़दूरी के रूप में रूपया दिया जाता है या वस्तु? क्या उन्हें प्रतिदिन कार्य प्राप्त होता है ? क्या वे ऋणी (कर्जे में) हैं? हाँ तो ऋण कहाँ से लिया?
उत्तर : हमारे क्षेत्र में चूंकि बहुत से लोग मजदूरी करते हैं | जिसमें वह मजदूर रामखेलावन और भुवनेश्वरी देवी है | इन्हें लगभग वर्ष भर मजदूरी का कार्य मिल जाता है, क्योंकि यह लोग कृषि के समय स्थानीय क्षेत्रों में काम करते हैं, और बाकी समय (मनरेगा) जो कि राज्य और केंद्र द्वारा संचालित मजदूरों को मजदूरी देने वाले संस्था में कार्य करते हैं | इन्हें साल भर में लगभग 310 से 325 दिन तक मजदूरी का कार्य प्राप्त हो जाता है, और इन्हें मजदूरी में ज्यादातर नगद रुपया लगभग 300₹ से 350₹ रोजाना प्राप्त होता है | कभी-कभी मजदूरी में अनाज या अन्य सामग्री प्राप्त होती है | रामखेलावन ने अपने पुत्र के इलाज के लिए गांव के साहूकार से ₹5000 का कर्ज लिया है |
प्रश्न 3. आप अपने क्षेत्र के वृद्ध व्यक्ति से चर्चा कीजिए तथा पता लगाइए कि विगत तीस वर्षों में सिंचाई तथा उत्पादन के साधनों में क्या अंतर आया?
उत्तर : – हमारे गांव में मेरे मित्र के पिताजी हैं, जिनकी आयु लगभग 75 वर्ष की है, उनसे जब हमने कृषि सिंचाई की स्थिति के बारे में चर्चा किया तब पता चला कि आज से लगभग 25 से 30 वर्ष पहले सिंचाई के इतने साधन नहीं थे | उस समय सिंचाई व्यवस्था प्रमुख रूप से गांव के कुएं और जो एकाध या इक्का दुक्का ट्यूबेल पम्प पर निर्भर थी | ज्यादातर कृषि कार्य वर्षा ऋतु की बारिश पर ही निर्भर करते थे | और उस समय कृषि उत्पादन आज की तुलना में बहुत कम होता था | किंतु आज के समय में सिंचाई के समुचित साधन उपलब्ध है| यदि संभव है तो उस क्षेत्र में नहर भी है | आज सोलर पंप की सहायता से कृषि सिंचाई क्षेत्र में क्रांति सी आ गई | आज का किसान उन्नत बीज व खाद आदि के प्रयोग से अपने उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया है | इससे हम कह सकते हैं कि पिछले 25 से 30 वर्षों की तुलना में आज कृषि क्षेत्र के उत्पादन तथा किसान अच्छी स्थिति में है | और इसे बेहतर बनाने के लिए निरंतर अग्रसर है |