CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.4 समुद्र तटीय मैदान और द्वीप समूह – CGBSE Solutions PDF in Hindi

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CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.4 समुद्र तटीय मैदान और द्वीप समूह


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भारत के राजनैतिक एवं प्राकृतिक मानचित्र, दोनों को देखिए एवं पता कीजिए कि-

प्रश्न 1. पश्चिम तटीय मैदान का विस्तार किन-किन राज्यों में है ?

उत्तर :- पश्चिम तटीय मैदान का विस्तार गुजरात, महाराष्ट्र ,गोवा ,कर्नाटक और केरल राज्य में है |

प्रश्न 2. पूर्वी तटीय मैदान किन राज्यों में फैला है ?

उत्तर :- पूर्वी तटीय मैदान का विस्तार तमिलनाडु आंध्र प्रदेश और उड़ीसा राज्यों में फैला है|

प्रश्न 3. पूर्वी तटीय मैदान पर स्थित बंदरगाहों के नाम उत्तर से दक्षिण के क्रम में बताइए।

उत्तर :- पूर्वी तटीय मैदान पर स्थित बंदरगाह के नाम, उत्तर से दक्षिण के क्रम में निम्न है :-  पारादीप , विशाखापट्टनम , मछलीपट्टनम , चेन्नई , रामेश्वरम| 

प्रश्न 4. पश्चिमी तटीय मैदान के बंदरगाहों के नाम दक्षिण से उत्तर के क्रम में बताइए।

उत्तर :- पश्चिम तटीय मैदान पर स्थित बंदरगाह के नाम दक्षिण से उत्तर के क्रम में निम्नलिखित है:-  कांडला , सूरत , मुंबई,  मार्मा गोवा ,  बेंगलुरु , कोच्चि |

प्रश्न 5. निम्नलिखित बंदरगाह किन राज्यों में हैं? राज्यों के नाम बताइए।

क. मुंबई………………                  ड. तिरुवनन्तपुरम् …………… 

ख. कोच्चि  ………………              च. मार्मागोआ  ……………… 

ग. पारादीप  ………………             छ. विशाखापट्नम ……………… 

घ. चेन्नई ………………

उत्तर :- क) महाराष्ट्र , ख) केरल , ग) तमिलनाडु ,घ) आंध्र प्रदेश ,  ड.) केरल , 

च) उड़ीसा ,  छ) गोवा |    

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प्रश्न 6.रेल मार्ग, हवाई मार्ग तथा समुद्री मार्ग में सबसे सस्ता साधन कौन-सा है?

उत्तर :-  रेल मार्ग, हवाई मार्ग और जल मार्ग में सबसे सस्ता साधन जलमार्ग है, क्योंकि जलमार्ग में लागत कम रहती है और ज्यादा से ज्यादा माल का परिवहन किया जाता है जिससे इसकी लागत कम हो जाती है |

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प्रश्न 7.आपके यहां नदी में जो नाव है उनमें और कट्टुमरम में क्या-क्या अंतर दिखता है ?

उत्तर :- कट्टुमरम :- यह 5 या 7 या अधिक लकड़ी के लट्ठे को रस्सी से बांधकर बनाई जाती है, बस इसी के सहारे मछुआरे समुद्र में उतरते हैं इसे समुद्र के किनारे पाल के छांव में मछुआरे या बढ़ई  बनाते हैं | प्रायः अधिकांश  छोटे मछुआरे कट्टुमरम की सहायता से मछलियां पकड़ते हैं, लेकिन इससे समुद्र में ज्यादा दूर तक मछली पकड़ने नहीं जाया जा सकता है |

नाव :- नाव का निर्माण लकड़ी के पटरों से किया जाता है, और इसके निर्माण केवल कुशल बढ़ई कारीगरों द्वारा ही संभव है | इसका निर्माण कार्यशाला में किया जाता है, और यह कट्टुमरम की तुलना में मजबूत और टिकाऊ होते हैं | नाव का उपयोग मछुआरे लंबे समय तक कर सकते हैं | इसमें मोटर आदि लगाकर इसे और भी उन्नत बनाया जा सकता है |

प्रश्न 8.मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछलियों को कैसे बेचा जाता है?

उत्तर :- जो भी मछली पकड़ी जाती है उसे जब मछुआरे लेकर तट पर आते हैं, तो महिलाएं उन मछलियों को टोकरियों में रखती है और वहीं पर व्यापारी आकर मछलियों की बोली लगाते हैं,  और इस प्रकार व्यापारी मछली खरीद कर बाजार में मछलियों की बिक्री करते हैं |

प्रश्न 9.राजन अपनी मछलियों को बोली में क्यों नहीं बेच सका?

उत्तर :- राजन कर्ज के बोझ से दबे होने के कारण और उसकी मछलियां पर व्यापारी द्वारा कब्जा कर लिए जाने के कारण, बोली नहीं लगा सका | अर्थात राजन ने अपनी बहन की शादी के लिए व्यापारी से उधार ले रखा था, व्यापारी ने उधार इसी शर्त पर दिया था कि वह अपनी मछली सिर्फ उसे ही बेचेगा, तथा सस्ते दाम पर बेचेगा | उस कारण राजन अपनी मछलियों को बोली में नहीं बेच सका |

प्रश्न 10.महिलाएँ मछली पकड़ने क्यों नहीं जाती होंगी? क्या आपको लगता है कि वे समुद्र में नाव नहीं चला सकती हैं ?

उत्तर :- समुद्र में नाव चलाना बड़ी ही मेहनत का काम होता है, लगातार पतवार चलाना पालकों  हवा की दिशा के अनुसार घुमाना, भारी-भारी जालों को खींचना, कोई आसान काम नहीं है| समुद्र में मछली पकड़ना  न  केवल मेहनत का काम है, बल्कि जोखिम भरा भी है, महिलाएं चाहे तो क्या नहीं कर सकती, परंतु उन्हें घर और बच्चे भी संभालना होता है, उनकी शारीरिक क्षमता पुरुषों की अपेक्षा कम होती है | अतः मुझे लगता है यही कारण होगा कि महिलाएं मछली पकड़ने नहीं जाती हैं | समुद्र में नाव चलाना कोई आसान काम नहीं है, यदि महिलाएं चाहे तो यह भी कर सकती है, परंतु घर परिवार और व्यापार दोनों में समान सहभागिता निभाना पुरुषों को अक्षम कर देगा| अतः यह कार्य पुरुषों को ही शोभा देता है |

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प्रश्न 11.एन्टोनी जैसे बड़े मछुआरों के पास काम करने वाले मज़दूर कम मज़दूरी पर क्यों काम करते हैं? क्या इस तरह मजबूरी में काम करने वाले मजदूर आपके गाँव/शहर में भी है? इन्हें उचित मजदूरी मिले, इसके लिए क्या उपाय करना चाहिए?

उत्तर :- एंटोनी जैसे बड़े मछुआरों के पास 50-60 मजदूर उसकी नाव पर काम करते हैं, उसके पास कई कट्टुमरम नावें तथा विभिन्न आकार प्रकार की जाले हैं | उसके पास जो मजदूर थे उनमें से अधिकतर मजदूरों ने एंटोनी से उधार ले रखा था, और इस कारण कम मजदूरी पर उसके यहां काम करते थे | मशीन-युक्त नाव बड़े मछुआरे खरीद पाए, क्योंकि इसकी कीमत ₹2,00,000 है | मशीन-युक्त नाव से समुद्र में दूर तक जाकर मछलियां पकड़ सकते हैं, परंतु किनारे पर मछली कम हो जाती है, तब भी मशीन युक्त नाव वालों को अच्छी मछली मिल जाती है | मशीन-युक्त नाव से तेज हवाओं और तेज लहरों में भी कोई खतरा नहीं होता है, इसके अतिरिक्त छोटी नावों से  तट के किनारे ही मछली पकड़ना संभव था| जिससे उन्हें कम मछलियां मिलती थी, जिससे परिवार का भरण पोषण कठिन हुआ | मछुआरों को उचित मजदूरी मिले इसके लिए भी कानून नियमों की व्यवस्था की जानी चाहिए | साहूकारों वह महाजनों पर सख्त कानूनी कार्यवाही व सरकारी योजनाओं और व्यवस्थाओं से मछुआरों को अवगत करते हुए उन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है|

प्रश्न 12.मशीन-युक्त नाव कौन खरीद पाए ?

उत्तर :- मशीन-युक्त नाव योजनाओं की कीमत ₹2,00,000 थी जो कि छोटे मछुआरों के बस के बाहर की बात थी | अतः यह मशीन-युक्त नाव केवल एंटोनी जैसे बड़े मछुआरे ही खरीद पाए |

प्रश्न 13.मशीन-युक्त नावों से मछली पकड़ने में क्या सुविधाएँ हैं?

उत्तर :- मशीन युक्त नावों से तट से दूर समुद्र में जाकर बड़ी व ज्यादा मछलियां और तटों के आसपास से झींगा मछलियां पकड़ने में सुविधाएं हुई | अतः मशीन युक्त नाव से समुद्र में काफी दूर तक जाकर मछली आसानी से पकड़ी जा सकती है, जिसके कारण अधिक से अधिक मछली मिल सकती है |

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प्रश्न 14.मशीन-युक्त नावों के मालिक झींगा क्यों पकड़ना चाहते थे?

उत्तर :- पिछले 20 25 वर्षों में विदेशों में झींगा की मांग बढ़ने लगी, तो उसकी कीमत बढ़ी | बड़े-बड़े व्यापारी मछुआरों से झींगे खरीद कर कारखाने में ले जाते हैं, वहां पर उन्हें साफ करके नमक के साथ पानी में उबाल लेते हैं, उसे बर्फीले कमरों में रखकर बर्फ के साथ जमा देते हैं, और इन्हें विदेशों में भेज देते हैं| जहां उसकी अच्छी कीमत मिल जाती है | अतः मशीन युक्त नाव के मालिक भी झींगा पकड़कर अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं |

प्रश्न 15.मशीन-युक्त नावों के कारण छोटे मछुआरों को अधिक उधार क्यों लेना पड़ा?

उत्तर :- मशीन युक्त नावों  के मालिक अधिक फायदा के लिए तीन-चार किलोमीटर अंदर जाकर मछली पकड़ते हैं | इसी क्षेत्र में छोटे मछुआरे अपना जाल बिछाकर मछली पकड़ते हैं, मुनाफे के चक्कर में कई बड़े मछुआरों ने अपनी मशीन युक्त नाव इस क्षेत्र में लगा दी. जैसे-जैसे मशीन युक्त नावों का प्रचलन बढ़ा, वैसे वैसे छोटे मछुआरों को मछली मिलना बंद हो गया | अब यह समुद्र से अक्सर खाली हाथ ही लौटने लगे, इससे छोटे मछुआरों और मजदूर परेशान होने लगे, उन्हें आए दिन घर का काम चलाने के लिए उधार लेना पड़ता है |

प्रश्न 16.कक्षा में चर्चा कीजिए कि छोटे मछुआरे एन्टोनी जैसे बड़े मछुआरों पर किस तरह रोक लगा पाएँगे?

उत्तर :- छोटे मछुआरों को चाहिए कि वह सभी एकजुट होकर अपने काम को अंजाम दे, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए, लोन व सब्सिडी का उपयोग कर मशीन युक्त नाव (ट्रॉलर) खरीदें, जिससे यह भी समुद्र के भीतर तक जाकर ज्यादा मछलियां पकड़ कर अपना आय बढ़ाएं और साहूकारों के चंगुल से बचें तभी एन्टोनी जैसे बड़े मछुआरों की मुनाफाखोरी पर अंकुश लगा पाएंगे |

प्रश्न 17.जब मछली पकड़ने के लिए मशीनों का उपयोग शुरू हुआ तब बहुत लोगों को लगा कि अब मछली उत्पादन बढ़ेगा – मछुआरों की दशा सुधरेगी। मगर वास्तव में क्या हुआ?

1. क्या मछली उत्पादन बढ़ा?

2. किन लोगों का नुकसान हुआ?

3. किन-किन लोगों को फायदा हुआ?

4. इस स्थिति को किस तरह सुधारा जा सकता है?

उत्तर :- 1) मछली पकड़ने के लिए मशीन युक्त नाव का प्रयोग करने से मछली उत्पादन कुछ मात्रा में बड़ा, क्योंकि मछली तथा झींगा मछली भी मिलने लगी |

2) छोटे मछुआरों को नुकसान हुआ क्योंकि छोटी नावे 4 किलोमीटर से अधिक दूर तक नहीं जा सकती है, और यही मशीन वाली नाव भी मछली पकड़ने लगी इसके अलावा मजदूरों को भी नुकसान हुआ, जहां पहले कई मजदूरों को रोजगार मिलता था, अब वही 60 मजदूरों की जगह केवल 7 मजदूरों को काम मिलता है |

3) मशीन वाली नावों से बड़े मछुआरों को फायदा हुआ इसके साथ में मछली व्यापारियों को फायदा हुआ क्योंकि वह झींगा मछली बड़े शहरों में और विदेशों में बेचकर भारी मुनाफा कमाने लगे | 

4) इस स्थिति को सुधारने के लिए बड़े मछुआरों और छोटे मछुआरों को आपस में मिल बैठ कर बात करनी चाहिए, तथा छोटे मछुआरों से मछली पकड़ने के क्षेत्र और मशीन वाली नाव से मछली पकड़ने के क्षेत्र निश्चित कर देना चाहिए, जिससे छोटे मछुआरों की आजीविका भी चलती रहे |

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अभ्यास के प्रश्न-

प्रश्न 1. दूसरे देश से आने वाले व्यापारियों ने अपनी व्यापारिक कोठियाँ तटीय मैदानों पर ही क्यों स्थापित की थी ? विचार कीजिए।

उत्तर :- दूसरे देशों से आने वाले व्यापारियों ने अपनी कोठियों तटीय मैदानों पर ही स्थापित की क्योंकि यहां उन्हें जल परिवहन की सुविधा थी अपने व्यापारिक माल लाने ले जाने की सुविधाओं के साथ-साथ कच्चे माल की सुविधा भी मिलती थी। तटीय क्षेत्रों में व्यापार के लिए सामान लाना और भारत से एकत्रित किया हुआ सामान बाहर भेजना आसान था। ये मैदान सुरक्षा की दृष्टि से भी

महत्वपूर्ण थे विदेशियों को अपने देश से सैनिक सहायता प्राप्त करने में सुविधा होती थी तथा संकट के समय तटीय मैदानों से आसानी से समुद्री क्षेत्रों में भाग भी सकते हैं। तटीय मैदानों में बहुत सारे उत्पाद होते थे जैसे मसाले आदि इनकी यूरोपीय लोगों को आवश्यकता होती थी, इसलिए यहीं उन्होंने अपनी कोठियाँ स्थापित की।

प्रश्न 2. पूर्वी एवं पश्चिमी तटीय मैदानों की तुलना कीजिए।

उत्तर :- 

पूर्वी तटीय मैदानपश्चिमी तटीय मैदान
1.पूर्वी तटीय मैदान बंगाल की खाड़ी के साथ विस्तृत मैदान चौड़ा और समतल है।2. तट एवं दक्षिणी भाग को कोरामंडल कहा जाता है।3.पूर्वी तट की प्रमुख नदियाँ महानदी, गोदावरी, कृष्णा, और कावेरी हैं जो विशाल डेल्टा बनाती है।4. ये भाग में चौड़े एवं विस्तृत है।5. इन भागों में वर्षा सामान्य होती है।1.पश्चिमी घाट के तथा समुद्र के किनारे संकीर्ण मैदान है।2. तट के उत्तरी भाग को कोंकण तट, मध्य को कन्नड़ का मैदान मालाबार तट कहते हैं।3. माही, साबरमती,नर्मदा एवं ताप्ती हैं।4. ये भाग संकरे है।5. इन भागों में वर्षा अधिक होती है।

प्रश्न 3. तटीय मैदान आर्थिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है । स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- तटीय मैदानों में घनी आबादी के निम्न कारण है –

1. यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण होते हैं।

2. यहां की मिट्टी उपजाऊ होने के कारण कृषि कार्य व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है।

3. यहां की जलवायु में सभी ऋतुएं संतुलन कायम रखती है।

4. इन तटों पर नारियल, सुपारी, रबर, केले, व गरम मसाले की खेती होती है। पहाड़ी ढलानों पर काजू,कहवा, चाय व गरम मसालों के बगीचें लगाए जाते हैं।

5. इस क्षेत्र में मछली पालन का व्यवसाय बड़ी ही तेजी के साथ होता है। यहां पर सीप से मोती निकालने का कार्य भी किया जाता है।

6. कहीं-कहीं तटीय क्षेत्रों में विशेषकर गुजरात तट पर मोती हेतु सीप पालन किया जाता है।

7. ये तटीय मैदान खनिज पदार्थों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, इन क्षेत्रों के बालू में महत्वपूर्ण खनिज मोनाजाइट, इल्मेनाइट, आदि मिलते हैं।

8. ये तटीय मैदान परमाणु ऊर्जा के विपुल स्रोत माने जाते हैं।

9. इन क्षेत्रों में खनिज तेल के भण्डार भी पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र मुंबई हाई और कावेरी खनिज तेल के भण्डार यहीं है।

10. भारत के सभी बड़े बंदरगाह जैसे पराद्वीप, विशाखापट्टनम , कोचीन, रामेश्वरम, चेन्नई, सूरत, मार्नागोवा, आदि बंदरगाह इसी तटों पर स्थित है। जो कि आर्थिक व्यवसायिक और सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 4. तटीय मैदानों में घनी आबादी क्यों है?

उत्तर :- भारत के तटीय मैदानों में खनिज सम्पदा व्यावसायिक गतिविधियों और रोजी रोजगार की बहुत अधिक सम्भावना उपलब्ध है। समुद्री तट होने के कारण समुद्री व्यवसाय, मछली व्यवसाय अधिक होता है। जिसका यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है जिससे इन तटीय क्षेत्रों की आबादी घनी होती है।

प्रश्न 5. तटीय मैदानों पर बसे मछुआरों को समुद्र से मछली पकड़ने के लिए किन-किन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है? ये चीज़ें वे कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तर :- तटीय मैदानों में बसे मछुआरों को मछली पकड़ने के लिए मुख्यतः बड़े जाल, नावें, या कट्टुपरम आदि की आवश्यकता होती है। पहले तो यह सभी चीजें मछुआरे स्वयं व्यवस्था करते है, परन्तु जब से मछली के व्यवसाय का आधुनिकीकरण हुआ है तब से सरकार उन्हें कम कीमत पर लोन दिलवा कर और सरकारी सब्सिडी और अन्य तरह से सहायता देकर उपलब्ध करवाती है।

प्रश्न 6. अपने शब्दों में छोटे मछुआरों की दिनचर्या का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- छोटे और मझोले मछुआरे सुबह तीन बजे उठकर दैनिक कार्य से निपटकर और कुछ खाने के पश्चात् लगभग 4 बजे सुबह तक समुद्रों में मछली पकड़ने चले जाते हैं। चूंकि रात के समय हवा का रूख समुद्र की ओर होता है इसलिए ये समुद्र में ज्यादा दूरी तक आसानी से जाते हैं और जब दिन में हवा का रूख तटीय क्षेत्र की तरफ होता है तब लगभग 10 या 12 बजे तक यह समुद्र से मछली पकड़कर वापस आ जातें हैं। तट पर पहुंचते ही इनके द्वारा पकड़ी गई मछलियों की बोली व्यवसायियों द्वारा लगा कर उन्हें बेचा जाता है और कुछ मछुआरें स्वम् ही इन मछलियों की बिक्री बाजार में जाकर करते हैं। सुबह से शाम तक इसी क्रम में इनकी दैनिक दिनचर्या चलती रहती है।

प्रश्न 7. मछुआरों को अपने व्यवसाय में किन जोखिमों का सामना करना पड़ता है ?

उत्तर :- समुद्र में नाव चलाना बहुत ही मेहनत और जोखिम (खतरे) का कार्य होता है। समुद्र में अक्सर तूफान और समुद्री चट्टानों का भय रहता है। और इन्हीं कारणों से अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कभी-कभी बड़ी मछलियों द्वारा मछुआरे स्वमं इन मछलियों का शिकार हो जाते हैं अतः यह समुद्र में मछली पकड़ना बहुत ही जोखिम और खतरे का कार्य व्यवसाय है।

प्रश्न 8. किन महीनों में अधिक मछली पकड़ी जाती है? कारण भी बताएं।

उत्तर :- नदियों का मीठा जल समुद्र में जून-जुलाई से सितम्बर-अक्टूबर में ज्यादा से ज्यादा पहुंचता है इसी समय समुद्र में मछलियां बहुतायत संख्या में पकड़ी जाती है। चूंकि इन चार पांच माह में मीठा जल समुद्र में अधिक मात्रा में पहुंचता है और यह समय और स्थित मछलियों के लिए अनुकूल होती है जिस कारण से इस समय मछलियां बहुतायत संख्या में प्राप्त होती है।

प्रश्न 9 मशीन युक्त नावों से क्या-क्या नुकसान हुआ और क्या फायदे हुए?

उत्तर :- मशीन युक्त नाव जिसे “ट्रालर” भी कहा जाता है। इनके प्रयोग से मत्स व्यवसाय में कांतीकारी बदलाव आये। मशीन युक्त नाव के प्रयोग से मछुआरों की सुरक्षा बड़ गई और मछुआरे,  मछलियों को पकड़ने के लिए समुद्र में ज्यादा से ज्यादा दूर तक जा सकते हैं। इनकी चलने की गति भी ज्यादा होती है, जिससे कम समय में ज्यादा से ज्यादा मछलियां पकड़ी जा सकती है। झींगा आदि जैसी मछलियां जो कि गहरे समुद्र में पाई जाती है, उनका भी शिकार आसान हो गया। तथा मशीन युक्त नाव से मजदूरों पर निर्भरता भी कम हुई, जिनसे मछली पकड़ने में लगने वाली लागत भी कम हुई और मछुआरों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलने लगा। किन्तु जो मछुआरे गरीब और निर्धन थे या जो लोग इस क्षेत्र में दैनिक मेहनत और मजदूरी करते थे, उनका रोजगार छिन गया और बहुत भारी संख्या में गरीब और निर्धन मछुआरे बेरोजगार हो गये। 

प्रश्न 10. लक्षद्वीप समूह के वन का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर :- लक्षद्धीप समूह की जलवायु उष्ण और आर्द्र होती है इसके कारण यहाँ सदाबहार वन क्षेत्र देखने का प्राप्त होते हैं। चूंकि यहां पर वर्ष भर वर्षा होती है इसलिए इन क्षेत्र के वन बहुत सघन और घने होते हैं। यहां के प्रमुख वृक्ष महोगनी, एलोन, रोजवुड, ताड़, बांस अदि प्रमुख होते है। यहां नारियल के वृक्ष बहुतायत देखने को मिलते है। समुद्री किनारे पर ज्वारीय वनस्पतियां भी मिलती है। यहां केला, सब्जियां, और कुछ अनाज की भी पैदावर किया जाता है। यहां पर मसालों की भी खेती की जाती है। जैसे – कालीमिर्च आदि।

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