CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.3 प्रायद्वीपीय पठार – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.3 प्रायद्वीपीय पठार are given below for Hindi Medium Students.

CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.3 प्रायद्वीपीय पठार


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प्रश्न 1.भारत का प्राकृतिक मानचित्र देखें। इसकी सहायता से हिमालय पर्वतीय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार की मध्यवर्ती उच्च भूमि में आपको निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर क्या-क्या भिन्नता दिखाई देती है-

उत्तर :- 

क्रमांक बिन्दुहिमालयमध्यवर्ती उच्च भूमि
1ढाल की दिशादक्षिण पूर्वपश्चिम एवं पूर्व
2नदियांगंगा, जमुना, रावी, सतलुजनर्मदा, महानदी, बेतवा, ताप्ती
3खनिज ………………….लोहा, एल्यूमीनियम, अयस्क, बॉक्साइट

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प्रश्न 2 . भारत के प्राकृतिक मानचित्र को देखकर बताइए कि भारत के विशाल पठार का विस्तार किन-किन राज्यों में है?

उत्तर :- भारत का विशाल पठारी क्षेत्र का विस्तार उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वत श्रृंखला और कच्छ से होते हुए लगभग यमुना और गंगा के समान्तर पूर्व में राजमहल की पहाड़ियों और उत्तर-पूर्व में शिलांग पठार तक और समस्त दक्षिण प्रायद्धीप में है। यदि हम इसे राज्यों के आधार पर देखें तो यह महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों तक इसका विस्तार है।

नोट- विद्यार्थी गण मानचित्र में राज्यों को चिन्हित स्वयं करें।

प्रश्न 3 . घाट का क्या अर्थ है?

उत्तर :- उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। प्रायद्धीपीय पठार आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों वाली कम ऊँची पहाड़ियों एवं चौड़ी घाटियों से बने स्थान को घाट कहते हैं। इनकी ऊंचाई कम होने से समुद्रतटीय तथा घाटों एवं पठारी क्षेत्र में आवागमन होता है।

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प्रश्न 4. उन विस्थापित आदिवासियों पर खदान और उद्योगों के विकास का क्या प्रभाव पड़ा, इस पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर :- जब खदान का कार्य शुरू किया गया उस समय खनन सम्बधित कोई नीति और कानून नहीं थे। यह आदिवासी जिस क्षेत्र में रहते थे उसी क्षेत्र में खनिज भण्डार होने के कारण इन्हें जबरन उनके मूल निवास स्थान से हटा दिया गया और इन्हें विस्थापित होकर अन्य जगह शरण लेना पड़ा। इन आदिवासियों के सामने रोजी रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई, मजबूरी में इन्हें खदानों में मजदूरी के कार्य करने पड़े। इसी प्रकार खनिज तथा उद्योग के विकास के लिए अंधाधुध जंगलो की कठाई की गई जिससे जंगलों पर निर्भर रहने वाले आदिवासी समूह पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा और उन्हें विवश होकर जंगल छोड़कर जाना पड़ा और मजदूरों और विस्थापितों का जीवन यापन करना पड़ा।

प्रश्न 5. यह भी पता कीजिए कि उत्खनन के कारण वनों के कटने से पर्यावरण पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलता है?

उत्तर :- खनिज सम्पदाओं के उत्खनन के कारण जंगलों की बहुत अवैज्ञानिक और अंधाधुन कटाई की गई। जिसके कारण पृथ्वी का पारिस्थिकी तंत्र बिगड़ गया। बहुत से पेड़,पौधों औषधियों आदि की प्रजातियां विलुप्त हो गयी, वनों की कटाई से उस क्षेत्र में बाढ़ गर्मी आदि जैसी प्राकृतिक आपदायें होने लगी, नदियों का मार्ग बदल गया जिसके कारण वन सूख गये। पेड़ों की कटाई तथा अनियंत्रित खनन से उस क्षेत्र के तापमान में वृद्धि दर्ज की गई जिससे अनेक प्रकार के रोगों और समस्याओं का जन्म हुआ। अर्थात् हम कह सकते हैं कि इस आधुनिकीकरण के युग में हमने जंगलों तथा प्रकृति को जो नुकसान किया है इसकी बहुत बड़ी कीमत हमें भविष्य में चुकानी पड़ेगी।

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अभ्यास-

प्रश्न 1. वैकल्पिक प्रश्न-

1. आप भारत के किस प्राकृतिक प्रदेश में रहते हैं?

    (क) गंगा का मैदान                (ख) समुद्र तटीय मैदान

    (ग) थार मरुभूमि                   (घ) दक्षिण प्रायद्वीपीय पठार

2. भारत के किस प्राकृतिक प्रदेश में सर्वाधिक खनिज पाए जाते हैं?

    (क) गंगा के मैदानी भाग में,      (ख) हिमालय क्षेत्र में

    (ग) प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र में      (घ) इनमें से कोई नहीं

3. इनमें से कौन प्रायद्वीपीय पठार का भाग है?

    (क) नैनीताल                  (ख) कोडैकनाल

     (ग) मसूरी                      (घ) इनमें से कोई नहीं

4. दक्षिण एशिया के सबसे प्राचीन भूखण्ड को क्या कहते हैं?

    (क) गोंडवाना लैंड             (ख) लौरेंशिया

     (ग) थार                           (घ) शिवालिक

5. भारत का सबसे प्राचीन भू-भाग कौन है?

     (क) गंगा का मैदान           (ख) दक्कन का पठार

      (ग) कश्मीर हिमालय         (घ) शिवालिक श्रेणी

6. भ्रंश घाटी की नदियाँ हैं

      (क) गंगा और यमुना            (ख) नर्मदा और ताप्ती

       (ग) महानदी और स्वर्णरेखा   (घ) कृष्णा और कावेरी

उत्तर:- 1) (घ) दक्षिण प्रायद्वीपीय पठार, 2) (ग) प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र में, 3) (घ) इनमें से कोई नहीं, 4)  (क) गोंडवाना लैंड, 5) (ख) दक्कन का पठार, 6) (ख) नर्मदा और ताप्ती |

प्रश्न 2. सही संबंध जोड़ें 

     समूह अ                                समूह ब 

1. कोलार स्वर्ण क्षेत्र                 1. महानदी बेसिन

2. छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा      2. कर्नाटक

3. छत्तीसगढ़ का शिमला          3. ताप्ती

4. पश्चिमी प्रवाही नदी               4. मैनपाट

उत्तर :- 1) 2. कर्नाटक,  2) 1. महानदी बेसिन, 3) 4. मैनपाट, 4) 3. ताप्ती |

प्रश्न 3. घाट का क्या अर्थ है?

उत्तर :- उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। प्रायद्धीपीय पठार आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों वाली कम ऊँची पहाड़ियों एवं चौड़ी घाटियों से बने स्थान को घाट कहते हैं। इनकी ऊंचाई कम होने से समुद्रतटीय तथा घाटों एवं पठारी क्षेत्र में आवागमन होता है।

प्रश्न 4. प्रायद्वीपीय पठार की पहाड़ियों के शिखर हिमालय की पहाड़ियों की तरह नुकीले नहीं हैं, क्यों?

उत्तर :- भू-अवतलन के कारण समस्त प्रायद्धीप पठार का ऊँचा स्वरूप बना जिस पर सदियों से कटाव अपरदन की प्रक्रिया ने धरातलीय स्वरूप का निर्माण किया है। जहाँ की चट्टानें अपेक्षाकृत मुलायम थी जहाँ कटाव अधिक हुआ और कठोर चट्टान कम अपरदित हुई ।अर्थात् हम कह सकते हैं कि अपरदन के कारण यहां के पहाड़, हिमालय के पहाड़ियों की तरह नुकीले नहीं है।

प्रश्न 5. प्रायद्वीपीय पठार गंगा के मैदान से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर :- प्रायद्वीपीय पठार – प्रायद्वीपीय पठार कठोर शैलों से बना हुआ है, जिसमें आग्नेय तथा कायांतरित शैलें (ग्रेनाइट, बेसाल्ट, नीस,विशिष्ट) पाई जाती है। अर्थात हम कह सकते हैं कि प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण लावा निर्मित है।

गंगा का मैदान – गंगा का मैदान, गंगा -जमुना और उनकी सहायक नदियों द्वारा जो उपजाऊ मिट्टी बहाकर लाई जाती है, उससे हुआ है।

प्रश्न 6. दक्कन के पठार में काली मिट्टी का निर्माण कैसे हुआ?

उत्तर :- दक्कन का लावा क्षेत्र जिसे काली मिट्टी का प्रदेश भी कहते हैं। ढक्कन के इस क्षेत्र का निर्माण लावा के जमाव (निक्षेप) से हुआ है चूंकि यह लावा से निर्मित है इसलिए यह काली रंग की होती है।

प्रश्न 7. कोयले की खान में मजदूर कपड़े की टोपी पहन कर क्यों काम नहीं करते हैं?

उत्तर :- कोयले की खदान के कार्य जमीन के अंदर सुरंग बनाकर किया जाता है। यहां जमीन के नीचे लम्बी सुरंगों का जाल बिछा होता है और इससे घनघोर अंधेरा भी होता है। और विस्फोटों से कोयले की चट्टान को तोड़ा जाता है। सुरंगों को रोकने के लिए बांस और स्टील के राड लगाकर रोका जाता है। इसी के कारण मजदूरों और उसके कार्य करने वाले लोगों की सुरक्षा और रोशनी के लिए कपड़े और लाइट वाली टोपी हेल्मेट लगा कर कार्य करते हैं।

प्रश्न 8. सन् 1975 ई. में धनबाद के चासनाला कोयला खदान में कोयले की दीवार गिरने से खदान में अचानक पानी कैसे भर गया?

उत्तर : सन 1975 में धनबाद स्थित चासनाला को गहरी खदान के गेट नम्बर 1 और गेट नम्बर  2 के ठीक ऊपर तालाब था, जिसमें बाढ़ के कारण बहुत ज्यादा पानी भर गया था, जिसके कारण पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ जाने से खदान के अंदर कोयले की दीवार टूट गई और बाढ़ का पूरा पानी खदानों में भर गया, इस अचानक हुई दुर्घटना से वहां कार्य कर रहे मजदूरों को सम्भलने का मौका नहीं मिला और खदान के अंदर कार्यरत लगभग 400 मजदूर डूब कर मर गए, क्योंकि यह दुर्घटना बहुत ही शीघ्र और तेज गति से हुई, जिससे वहां कार्य कर रहे हजारों लोग फंस गए, बचाव और राहत कार्य भी तुरंत शुरू किए गए किंतु फिर भी लगभग 400 लोगों की मृत्यु हो गई |

प्रश्न 9. यदि खदानों से कोयला निकालना बंद कर दिया जाए तो हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर : आज का आधुनिक युग पूर्ण रूप से उर्जा पर निर्भर है और भारत जैसे विकासशील देश की ऊर्जा की लगभग आधी से ज्यादा जरूरतें कोयले से ही पूरी होती हैं | क्योंकि यह पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है | उद्योग में ताप संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए शत-प्रतिशत जरूरतें कोयले से ही पूरा किया जाता  |ताप विद्युत संयंत्र में कोयला का ही उपयोग किया जाता है | कोयला का प्रयोग सामान्य घरों आदि में भोजन पकाने और अन्य कार्यों में किया जाता है, और कोयले की खदानों में हजारों की संख्या में लोग कार्य करते हैं, और इन सब क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों का रोजी और रोजगार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयले पर निर्भर है | यदि कोयला निकालना बंद कर दिया जाए तो संपूर्ण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा | क्योंकि आज सभी कार्य कहीं ना कहीं ऊर्जा पर निर्भर है | इस कारण जब उर्जा ही नहीं रहेगी तो जनजीवन ठहर जाएगा, किंतु आज के युग में ऊर्जा के दूसरे विकल्प के बारे में तेजी से कार्य चल रहा है, जैसे कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ऊर्जा के अन्य स्रोत | हमें क्रमबद्ध तरीके से ही कोयले के निर्भरता को कम कर सकते हैं, जिससे हम अपने पर्यावरण को संरक्षित रख सकते हैं |

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