CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 पचराही – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 पचराही is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 पचराही

CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 4 – पचराही हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 4 हिंदी are given below for Hindi Medium students.


अभ्यास :

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 01 : पंचराही के नाँव  परे के कारण बतावव | 

(पचराही के नाम पड़ने  कारण बताईये। )

उत्तर :- पचराही गांव के सियान मन कहिथे कि इहा ले पांच राह माने रास्ता रतनपुर ,मंडला ,सहसपुर ,भोरमदेव (चौरागढ़)अउ लजिका (लंजिका) बर निकले है। तेखर सेती एखर नाव पंचराही परे है।  

(पंचराही गांव के बुजुर्ग कहते है कि यहाँ से पांच राह मतलब रास्ता रतनपुर ,मंडला ,सहसपुर, भोरमदेव चौरागढ़ और लंजिकाके के  लिए निकले है। इस कारण से इसका नाम पचराही पड़ा है। )

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 02 : पंचराही म मिले अवशेष मन के संबंध को कोन – कोन धरम ले है? 

(पचराही में कौन -कौन से धर्म से सम्बंधित मंदिर के अवशेष मिले है? )

उत्तर :- पंचराही म वैष्णव ,शाक्त अउ जैनधर्म से सम्बंधित  मंदिर के अवशेष मिले हे। 

(पंचरही में वैष्णव ,शाक्त और जैनधर्म से सम्बंधित मंदिर के अवशेष मिले है। )

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 03 : पंचराही म मिले जीवाश्म के बारे में बतावव | 

(पचराही में कौन -कौन से जलीय प्राणी के जीवाश्म मिले है ?)

उत्तर :-पचराही म मोलूस्का (घोंघा)अउ पाइला  (सीप) जलीय प्राणी के अवशेष मिले हे। 

 (पंचरही में मोलूस्का  और पाइला  जलीय प्राणी का अवशेष मिले है। )

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 04 :कोन – कोन ठउर ल छत्तीसगढ़ के कला – संस्कृति के अगासदीया केहे गे है?

(कौन कौन सी जगह छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति के आकाशदीप कहे जाते है ?) 

उत्तर :- राजिम ,शिवरीनारायण ,सिरपुर ,मल्हार ,ताला ,रतनपुर ,डीपीडीह ,भोरमदेव ,घटियारी ,बारसूर ,दंतेवाड़ा हमर कला -संस्कृति के अगासदिया आय जेकर अंजोर दुनिया म बगरत हे। 

(राजिम ,शिवरीनारायण ,सिरपुर ,मल्हार ,ताला ,रतनपुर ,डीपीडीह ,भोरमदेव ,घटियारी बारसूर ,दंतेवाड़ा हमारे कला संस्कृति के अगासदीप कहे जाते है।  )

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 05 : पचराही  के खोदई ले मिले जिनिस मन के सूची बनावव |

(पचराही की खुदाई से मिलने वाले चिन्हों की सूची बनाओ )

उत्तर :- पचराही के खोदाई ले मिले जिनिस मन के सूचि –

(i)कुम्हार अउ लोहार मन के उपयोग के जिनिस।(कुम्हार और लोहार के उपयोग  वस्तुओं का चिन्ह ) 

(ii)लईका मन के खिलौना। (बच्चों के खिलौना )

(iii)माटी के माला। (मिट्टी की बनी मालाएं)

(iv) लोहा ,तांबा के औजार अउ गहना गुठा आदि। (लोहा,तांबा के औजार और गहना आदि )

पाठ से आगे : 

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 01 : पंचराही तीर भोरमदेव मंदिर है ओकर ऊपर एक नानकुन निबंध लिखव? 

उत्तर :-भोरमदेव मंदिर :- भोरमदेव मंदिर म विख्यात ऐ स्थल कवर्धा ले 18 किमी दूर हावे। 11 वी सदी म बनाये गे हे ऐ मंदिर संदेल स्थापत्य कला के उत्कृष्ट छाप हारे। ऐ ह  अपन सुंदरता अउ धार्मिक मान्यता बर बिख्यात हे। ए मंदिर ला छत्तीसगढ़ के खजुराहो मंदिर कहे जाते। छपरी गांव के तीर म बसे ए मंदिर ह मैकल पर्वत श्रेणी में घिरे हावे। ए मंदिर म नृत्य के आनी बानी मुद्रा म हाथी ,घोड़ा ,भगवान गणेश नटराज के चित्र पखना में उकेरे गेहे। ए मंदिर के भीतरी के प्रवेश दुवार म एकठन करिया चमकदार पथरा ल लगाए हावे जे ह एखर जस म अउ बढ़ोत्तरी करत हे। 

(भोरमदेव मंदिर के लिए विख्यात यह स्थल कवर्धा से 18 किमी दूर है। 11वी  सदी में बनाया गया यह मंदिर संदेल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट छाप है। यह अपनी सुंदरता और प्रभाव के लिए विख्यात है। इस अद्भुत मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है। छपरी गांव के निकट स्थित वह मंदिर मैकाल पर्वत श्रेणी से घिरा हुआ है। इस मंदिर पर नृत्य की आकर्षक भाव -भगिमाओ के साथ -साथ हाथी ,घोड़े ,भगवान गणेश ,नटराज की मुर्तिया उकेरी गयी है। मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर लगाया गया काला चमकदार पत्थर इसकी आभा में और वृद्धि करता है।  )  

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 02 : छत्तीसगढ़ में पुरातात्विक स्थान मन के सूची बनावव अउ  गुरूजी से ओकर बारे में चर्चा करव उत्तर :छत्तीसढ़ में पुरातात्विक स्थान मन के सूचि -कतकोन मंदिर,शिवरीनारायण ,सिरपुर ,मल्हार ,ताला रतनपुर ,दीपाडी ,भोरमदेव ,घटियारी ,बारसूर ,कबीरधाम जिला पचराही आदि छत्तीसगढ़ में पुरातात्विक स्थान मिले रिहिस । पचराही ,छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला मुख्यालय ले भंडार बाजु म लगभग 45 किमी दूरिया हॉप नदी के तीर में मैकल पर्वत के कोश में बसे हे सियान मन कहिथे के इहा ले पांच राह माने रास्ता रतनपुर ,मंडला ,सहसपुर ,भोरमदेव अउ लंजिका बर निकले हे। यहां के कला संस्कृति के अगासदिया आय जेकर अंजोर दुनिया म बगरत हे। पुरातत्व जगत में ए गजब शोर उड़त हे। छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति बरजग जाहिर होथे।    

(छत्तीसगढ़ में पुरातात्विक स्थान में अनेक मंदिर शिवरीनारायण ,सिरपुर ,मल्हार ,ताला रतनपुर ,दीपाड़ी ,भोरमदेव , घटियारी ,बारसूर ,कबीरधाम जिला पंचराही आदि छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक स्थान से मिले है। पचराही छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला मुख्यालय से भंडार में लगभग 45 किमी दुर हाफ नदी के किनारे में मैकल पर्वत के कोश में बसे बुजुर्ग लोग कहते है कि इस पांच राह मतलब रास्ता रतनपुर ,मंडला ,सहसपुर ,भोरमदेव और लंजिका के लिए निकले है। यहाँ के कला संस्कृति के अगासदिया है जिसका उजाला पुरे दुनिया में फैला है। पुरातत्व जगत में ये शोर उड़ रहा है। छत्तीसगढ़ की  कला संस्कृति प्रसिद्ध है। )

Page no : 19 (पंचराही) 

प्रश्न 03 : जुन्ना जिनिस मन ले हमन का  बात के पता लगा सकथन? ये जिनिस मन ले हमन अपन ग्यान ल कईसे बढ़ा सकबो एला विचार के लिखव | 

उत्तर :- पंचराही एक नानकुन गांव हारे जिहाँ उत्खनन ले प्रागैतिहासिक ले मुग़ल काल के जुन्ना समय के चिन्हा मन प्राप्त होय हे। ए जगह हर  कबीरधाम जिला मुख्यालय में भंडार दिसा म लगभग तीन कोस के दुरिहा म हाफ नदिया के पार म बसे हवे जे हर मैकाल पहारी म बसे हावे। सियान मन के कहिना हे की  इहा ले पांच ठन रद्दा निकलते एखरे सती ऐ गांव के नाम ह पंचराही परे हावे। ऐ इस्थान ह जुन्ना काल  म व्यापार के एक ठन ठउर रिहिस। ऐ इस्थान म संस्कृति अउ पुरातात्विक विभाग के दुवारा सन 2007 ले उत्खनन के  काम चलत हवे। उत्खनन म इहा ले प्राचीन नगर के खंडहर के संग वैष्णव ,शाक्त अउ जैन धरम के मंदिर देवी देवता मन के प्रतिमा मन निकले हवे। खुदाई ले इहा 13 करोड़ बछर के आगू ले दू ठन जलीय जंतु के जीवाश्म मिले हावे। जेमा ले एक ठन ह मोलुस्क परिवार के हावे अउ दूसरा ह पाइला परिवार के हावे। पंचराही आदिमानव के निवास इस्थल रिहिस हे। इहा उत्तर पाषाण काल अउ मेसोलिथिक काल के अउजार मिले हे। पंचराही पुराण काल म स्थापत्य अउ शिल्पकला  का बहुत बढ़ केंद्र रिहिस जे राजनितिक स्थायित्व अउ धार्मिक समरसता का प्रतिक माने हे। प्राचीन काल म छत्तीसगढ़ ल दक्षिण कोसल के नाम ले जाने जाथे। पचराही के खुदाई म मिले प्रमाण छत्तीसगढ़ के इतिहास ,सभ्यता अउ संस्कृति के प्राचीन सिद्धत करथे।         

(पंचराही एक छोटा सा गांव है ,जहां उत्खनन से प्रागैतिहासिक काल से मुगल काल तक के पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह कबीरधाम जिला मुख्यालय से उत्तर दिशा की ओर लगभग 45 किमी की दूरी पर हॉप नदी के किनारे मैकल पर्वत की श्रेणी में स्थित है। बड़े बुजुर्गो का कहना है कि यहाँ से पांच रास्ते निकलते है। इसलिए इस गांव का नाम पचराही पड़ा। यह स्थान प्राचीनकाल में व्यापार का एक बड़ा केंद्र था। इस स्थान पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा सन 2007 से उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। उत्खनन से यहाँ प्राचीन नगर के खंडहर के साथ -साथ वैष्णव ,शाक्त  और जैन धर्म के मंदिर एवं देवी -देवताओं की प्रतिमाए प्राप्त हुई है। खुदाई से यहां लगभग 13 करोड़ वर्ष पहले के दो जलीय प्राणी के जीवाश्म मिले है। जिसमें से एक मोलूस्क परिवार  का है। और दूसरा पाईला परिवार का है। किसी जलीय प्राणी का जीवाश्म प्राप्त हुआ है। पचराही आदिमानव का वास् स्थल रहा है। यहाँ उत्तर पाषाण काल और मेसोलिथिक काल के औजार मिले है। पचराही प्राचीनकाल में स्थापत्य और शिल्पकला का बहुत बड़ा केंद्र था जो राजनीतिक स्थायित्व और धार्मिक समरसता का प्रतिक माना जा सकता है। प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ को दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था। पचराही के खुदाई में मिले प्रमाण छत्तीसगढ़ के इतिहास ,सभ्यता और संस्कृति को प्राचीन सिद्ध करते है।)   

भाषा से : 

Page no : 20 (पंचराही) 

प्रश्न 01 : खाल्हे म लिखाए सब्द मन ल पढ़व अउ ऊखंर हिन्दी समानार्थी सब्द बतावव-नानकुन, पहिली,पाछू, उपर, सरलग | 

उत्तर :-

(i) नानकुन  छोटा सा या लघु 
(ii) पहिली   पहला 
(iii) उपर  ऊपर
(iv) सरलग   लगातार 

Page no : 20 (पंचराही) 

प्रश्न 02 : ए सब्द मन ल पढ़व बैपरिक – केंद्र , नवा – परदेस , गजब दिन , चाकर ईटा , जुन्ना जिनिस। 

उप्पर लिखे सब्द मन जोड़ी अस दिखत हे मने ओमन दू सबद ले बने हे | एक सबद एमा दुसर सबद के बिसेसता बतायें बिसेसन (विशेषण) कहे जाये | छत्तीसगढ़ के अइसने सब्द मन ल खोज के (10 सब्द ) लिखव | 

उत्तर :-विशेषण बताने वाले छत्तीसगढ़ शब्द निम्न है –

सुग्घर मूर्ति
राजपुरुष 
सरगलखुदाई
जुन्नापथरा 
कंकालीमंदिर 
पाछू –साल 

Page no : 20 (पंचराही) 

प्रश्न 03 : पचराही ह कबीरधाम जिला के भंडार म हे 

छत्तीसगढ़ म लोहा अउ कोइला के भंडार हे | उपर लिखाय वाक्य म भंडार सब्द दुनो वाक्य म हे फेर ओकर मतलब दुनो म अलग – अलग हे | पहिली भंडार के मतलब हे दिशा, अउ दुसर भंडार के मतलब हवय खजाना | छत्तीसगढ़ अउ हिन्दी के अइसने सब्द ल खोज के लिखव | 

उत्तर :- कनक -कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय 

(1)    कनक – सोना 

        कनक – धतूरा  

(2) माला फेरत युग ,भया ,फिरान मन का फेर कर का मनका डारी ,मन का मनका फेर 

(3) केकी ख की नुपुर ध्वनि सुन जगती जगती को मूक प्यास। 

(4) जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे है। 

(5) हटी ,हटी रूप दिया मीरा को 

(6) जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे है 

(7) काली घटा का घमंड घटा


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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