CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 अपन चीज के पीरा – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 अपन चीज के पीरा is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 अपन चीज के पीरा

CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 12 – अपन चीज के पीरा हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 12 हिंदी are given below for Hindi Medium students.


अभ्यास : 

पाठ से :

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 1:परसराम के सुभाव कइसे रहिस ?

उत्तर :-परसराम अक्खड़ अउ अड़ियल स्वभाव वाला घमंडी रिहिस।  

(परसराम अक्खड़ एवं अड़ियल स्वभाव वाला घमंडी था। )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 2:गोदावरी ह काकर बारी म जा के चरय ?

उत्तर :-गोदावरी ह रूपउ के बारी म जाके चरय। 

(गोदावरी रूपउ के बाड़ी में जाकर चरती थी। )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 3:रुपउ ह गोदवरी ल पकड़े खातिर का जतन करिस ?

उत्तर :-रुपउ ह गोदावरी ल पकडे खातिर कुदारी से अपन बाड़ी के राचर के आगू म खड्ढा खन दिस। अउ ओला डारा -पाना म तोप दिस ,जेखर ले गोदावरी बारी में चरे बर आवय ता ओ खड्ढा में गिरजाये। 

(रूपउ ने कुदाली से अपनी बाड़ी के दरवाजे के सामने गड्ढा खोद दिया और उसे डाली -पत्री से ढक दिया जिससे गोदावरी उसके बाड़ी में चरने आये तो उस गढ्ढे में गिर जाये )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 4:रुपउ का सोंच के डर्रात रहय ?

उत्तर :-रूपउ ह ये सोच के डर्रात रहिस कि कहू गाय के गोड़ टूट जही त उल्टा गोर करलई हो जही। मर जाही त गउ हत्या लगही। 

(गाय का पैर टूट गया तो मेरी मुसीबत हो जाएगी। यदि गाय मर गई तो गौ -हत्या का पाप मुझे लगेगा।)

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 5:गाँव वाले मन परसराम ल का डाँड़ डाँड़िन अउ ओला का चेतइन ?

उत्तर:- गांव वाले मन परसराम ल दू सौ रुपिया के डाँड़ डॉडिन अउ ओला चेतईन “आजलें कखरो खेत -खार ल झन चराबे ,गाय ल झन ढिलबे समझे। “

 (गांव वालो ने परसराम को दो सौ रूपये का दंड दिया और उसे चेतावनी देते हुए कहा “आज तुम किसी के खेत ,बाड़ी को नहीं चुराओगे तथा गाय को खुला नहीं छोड़ोगे ,समझ गए। )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 6:रमेसर ह अपन दाई-ददा ले का बात बर बातिक-बाता होवय ?

उत्तर :- रमेसर ह अपन दाई -ददा ले गोदावरी गाय ल ढिल्ला छोड़ के दूसर के बारी ल चराय के नाम पर बातिक -बाता होवय। 

(रमेसर का अपने माता -पिता से गोदावरी गाय को खुला छोड़कर दूसरे की बाड़ी चरवाने के नाम पर बहस (झड़प)होती थी। )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 7:रमेसर ह नाचा देखे बर काबर नइ गिस ?

उत्तर :- रमेसर ह अपन दाई -ददा ल सबक सिखाना चाहत रिहिस। एखर खातिर वोहा नाचा देखे बर नई गिस। 

(रमेसर अपने माँ -बाप को सबक सिखाना चाहता था इसलिए वह नाचा देखने नहीं गया। ) 

पाठ से आगे  :

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 1:परसराम ह अपन गाय ल रोज रात कुन छेल्ला चरे बर ढिल देवय, ओखर ये काम ह सहीं रहिस के गलत ? अउ गलत रहिस त काबर ? अपन बिचार लिखव।

उत्तर :- परसराम ह अपन गाय (गोदावरी )ल रोज रातकुन छेल्ला चरे बर ढिल देवय ,ओखर ये काम ह सरासर गलत रिहिस ,काबर कि वोकर गाय ह रात भर में दूसर के खेती बारी चर के ओखर नुकसान करत रिहिस। पर के जिनिस के नुकसान ह कोनो अच्छा बात नई हे। 

(परसराम अपने गाय को रोजाना रात को स्वतंत्र एवं खुला चरने के लिए छोड़ना यह सरासर गलत है। क्योंकि उसकी गाय रोज रात भर में दूसरे के खेती बाड़ी को चरकर नुकसान पहुँचाती थी। दुसरो की वस्तु को नुकसान पहुँचाना कोई अच्छी बात नहीं है।)

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 2:तुँहर घर के कोनो बड़े सियान मन ले परसराम सही कोनो अनियाँव के काम करही ओला तुमन कइसे सुधारहू लिखव।

                      काम                       सुझाव
1. ……………………………………………2. …………………………………………… 1. ……………………………………………   2. ……………………………………………. 

उत्तर :-

काम सुझाव 
खाने के बेरा हमन सुधारहु कि काम करवो तो हमन एक दिन खानो ही नहीं बनावे। 
अलटेही मारना हमन सियान मन ले बोलबो दी छोड़ दिवे। 

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 3:रमेसर के जघा तुमन होतेव त का करतेव ? कारण सहित उत्तर लिखव।

उत्तर :- रमेसर के जघा हमन होतेन त इ अनियाव ल सहन नई करतेन। अउ  अनियाव ला रोके बर गांव म पंचाईत बईठा करके येखर नियाव करातेन अउ अपराधी ल सजा दिलवातेन। काबर कि दूसर के नुकसान करना कोई अच्छा बात नई होवे दूसर के पीरा ह अपन पीरा हे।  

(रमेसर के स्थान पर यदि हम होते तो ये अन्याय को सहन नहीं करते और ये अन्याय को रोकने के लिए गांव में पंचायत बैठाकर इसका न्याय कराते एवं अपराधी को सजा दिलाते क्योंकि दुसरो को नुकसान पहुँचाना कोई अच्छी बात नहीं है। दुसरो का कष्ट अपना ही कष्ट है। )

Page no : 64 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 4:तुँहर घर या पास पड़ोस में कोन-कोन बात में झगरा होथे अउ झगरा के सुधार कइसे करे जा सकथे। कक्षा में आपस में बिचारव।

उत्तर :- हमर घर या पास पड़ोस म नान-नखा ,कूड़-करमट बात म झगरा होई जाय करो म तउ हम झगरा नाहि करउ  बात म शिक्षा द्वारा समझाईव हे ता झगरा मिट जाइथे। हम करि दिए  उतउ काम जासि झगरा मिट जायथे। 

भाषा से   :

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 1:खाल्हे लिखाय वाक्य ल पढ़व –  ‘एक-दू अठोरिया के कुछू नइ जनाइस ।’ ये वाक्य म ‘अठोरिया’ के अर्थ हे-आठ दिन के समयावधि। खाल्हे लिखाय  मन ल अपन वाक्य म प्रयोग करव –  हप्ता-के-हप्ता, पंदराही, महिना-के-महिना, साल पुट।

उत्तर :- 

(1)हप्ता के हप्ता (सप्ताह के सप्ताह अर्थात 7 दिन )

वाक्य प्रयोग :- घर बनईया मजदूर मन ल हप्ता के हप्ता उखर मजदूरी मिलथे। 

(घर बनाने वाले मजदूरों को सप्ताह के सप्ताह मजदूरी मिलती है। )

(2) पंदराही (15 दिन में )

वाक्य प्रयोग :- अंधियारी अउ उजियारा पाख हर पंदराही म होथे। 

(3)महिना के महिना (30 दिन में )

वाक्य प्रयोग – सरकारी करमचारी मन ल हर महिना के महिना तनखा मिलथे। 

(4) साल पुट (साल भर में )

वाक्यप्रयोग – रामू के गाय ह साल पुट में एक -एक लईका जनमथे।  

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 2:खाल्हे लिखाय मुहावरा मन के अर्थ लिखव अउ अपन वाक्य म प्रयोग करव- लाठी अंँटियाना, लाहो लेना, छिल-छिल दिखना, छक्का-पंजा बंद होना, मुँह म पैरा गोंजना, बात लगना, बेरा चढ़ना। ये पाठ म अउ गजब अकन मुहावरा के प्रयोग करे गेहे। उनला छाँट के लिखव अउ उँखर अर्थ लिखव।

उत्तर :- (1)लाठी अंटियाना – डंडा दिखाकर अपनी बात मनवाना अर्थात लोगों को डराना ,धमकाना 

वाक्य प्रयोग :- रमेसर बाल -बात म लाठी अंटिया के बात करथे। 

(2) लाहो लेना – अति करना 

वाक्यप्रयोग :- लच्छो के टूरा ह अब्बड़ लाहो लेथे कोनो भी लईका मन ल मार के भाग जाथे। 

(3)छिल -छिल दिखना -चमकदार ,सुन्दर स्वस्थ दिखना 

वाक्यप्रयोग – परस के गईया गोदावरी के शरीर ह बाहिर म चर -चर के छिल -छिल दिखथे। 

(4) छक्का -पंजा बंद होना – बोलती बंद होना 

वाक्यप्रयोग – अपन गईया के चोरी पकडाईस त परस के छक्का -पंजा बंद होंगे। 

(5)मुँह म पैरा गोजना – हक मारना 

वाक्य प्रयोग – हमन ल ककरो मुँह पेरा नई गोंजना चाही। 

(6) बात लगना – बुरा मानजाना। 

वाक्यप्रयोग – मोहन ल मास्टर जी के बात लग गए अउ ओहा परीक्षा म पास होके देखा दिस 

(7)बेरा चढ़ना – सुबह से दोपहर होना 

वाक्यप्रयोग – बेरा चढ़गे फिर अभी ले दुकालू ह खेत घर ,खाय बार नई आय हे। 

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 3:खाल्हे लिखाय वाक्य ल पढ़व – ‘अइसन गाय के चाल-चलन ल देखके सियनहा मन हाना पारे होहीं-पइधे गाय, कछारे जाय।’ ये वाक्य म ‘पइधे गाय, कछारे जाय’, ह एक ठन कहावत आय। चार ठन छत्तीसगढ़ी कहावत खोज के लिखव अउ अपन वाक्य म प्रयोग करव ।

उत्तर :- (1) तइहा केला बईहा लेंगे। 

(2) कुत्ता भूखे हजार ,हाथी चले बाजार। 

(3) जेखर घर म डौकी सियान ,तेखर होथे मरे बिहान। 

(4) अब आईस उट पहार के नीचे। 

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 4:खाल्हे लिखाय उदाहरण ल पढ़व अउ समझव- मनखेच ल – मनखे ल ही इहाँ ‘मनखे’षब्द म ‘च’ प्रत्यय लगा के ‘मनखेच’ षब्द बनाय गेहे। इहाँं ‘च’ के अर्थ हे ‘ही’। ‘च’ प्रत्यय लगाके ‘मनखे’ षब्द उपर जोर दे गे हे। खाल्हे लिखाय षब्द मन म ‘च’ प्रत्यय जोड़ के नवाँ षब्द बनावव अउ अपन वाक्य म प्रयोग करव – अलगे, काली, मोर, खेत, सबो ।

उत्तर :- (1) अलगे +च =अलगेच 

वाक्यप्रयोग :- रमेसर सबभाई ले अलगेच दिखथे। 

(2) काली +च =कालीच 

वाक्यप्रयोग :- सुरेश कालीच गांव ले आईस हे ,आज फेर जावत हे। 

(3) मोर +च =मोरेच 

वाक्यप्रयोग :- दीनू कक्षा म  मोरेच तीर आके बईठथे। 

(4)खेत +च =खेतेच 

वाक्यप्रयोग :- बिसाल ह खेतेच म मिलही। 

(5) सबो +च =सबोच 

वाक्यप्रयोग :- रामू ह सबोच खजानी ल अकेला खाहू कहिथे। 

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 5: ए पाठ म सामिल मुहावरा मन ले कोनो तीन मुहावरा मन ल लिखके ओखर बरोबर हिन्दी मुहावरा लिखव हिन्दी म ओकर वाक्य प्रयोग करव।

उत्तर :- (1) भुस -भुस जाना :- शंका होना। 

वाक्यप्रयोग :- मुझे रामू पर शंका है ,कि वह कुछ भी नहीं करेंगे। 

(2) बिंदरा – बिनास करना -तहस -नहस करना 

वाक्य प्रयोग :- हमारी सेना ने आतंकियों का कैंप तहस -नहस कर दिए। 

(3) डेहरी के दिया बुताना – वंश का नष्ट हो जाना। 

वाक्यप्रयोग :- महाभारत युद्ध में कौरवो का तो वंश ही नष्ट हो गया। 

Page no : 65 (अपन चीज के पीरा) 

प्रश्न 6:ये पाठ के संदेस ल अपन भाषा म लिखव।

उत्तर :- ए पाठ म अनियाव के विरुद्ध नियाव के सन्देश देय गे हे।”जइसन ल तइसन”के सन्देश घलो ए पाठ म देय गेय हे। जब तक मनखे ल खुद के नुकसान नई होवे तब तक वो मन दूसर के पीरा ल नई समझय एखरे बर गोस्वामी तुलसी दास ह केहे हे -”परहित सरिस धरम नहि भाई ,पर पीड़ासम नहि अधमाई।”


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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