CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 13 – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 13 is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 13

CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 13 – हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 13 हिंदी are given below for Hindi Medium students.


अभ्यास : 

पाठ से :

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 1: इस एकांकी की घटना किस समय की है?

उत्तर :- इस एकांकी की घटना सन्,1857 के प्रथम स्वतंत्र संग्राम के समय की है ,जो दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह जफर कानपुर के नाना साहब व झांसी की रानी लक्ष्मीबाई आदि के नेतृत्व में लड़ा गया था। 

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 2:कुँवर सिंह, विश्वनाथ पर क्यों नाराज हुए ?

उत्तर ;- विश्वनाथ कुंवर सिंह के छोटे भाई अमरसिंह को घायल समझ कर उसके भाई अमर सिंह द्वारा भेजी गयी चिट्ठी को नहीं पढता है ,तब कुंवर सिंह विश्वनाथ सिंह पर नाराज हुए।  

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 3:भीमा अपने सरदार से बाबू वीर कुँवर सिंह के बारे में क्या कहता है ?

उत्तर :- भीमा अपने सरदार से बाबू वीर कुंवर सिंह के बारे में कहता है ,कि वीर  कुंवर सिंह की बुद्धि की क्या सराहना (तारीफ)करू सरदार,कटार की  धार -सी पैनी है  । 

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 4 :कुँवर सिंह ने अपनी बाँह काटकर गंगा जी को क्यों अर्पित कर दी ?

उत्तर :- कुंवर सिंह की बाह पर अंग्रेजो की गोली लगी जिसके कारण उसका जहर फैलता जा रहा था ,चूँकि फिरंगी की गोली से उसका शरीर अपवित्र हो गया था , इसलिए वे अपनी बाह काटकर गंगा जी को अर्पित कर अपना शरीर पवित्र करना चाहते थे। 

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 5 :बच्चे-बच्चे के जबान पर चढ़े कुँवर सिंह के गीत का भाव क्या है ?

उत्तर :- राजा कुंवर सिंह गरीबो के राजा कहे जाते थे तथा हर कोई उन्हें दुआ देता था, और उनके गुणगान करता था। उनके गीत का भाव यह रहता था कि –

राजकुँवर सिंह के राज में,हर किसी के सिर पर ताज है ,हर किसी के काम पूर्ण होते है ,गरीबों के बीच राजा भगवान के समान पूजे जाते है। 

Page no : 76 (विजयबेला) 

प्रश्न 6 :आप यह कैसे सिद्ध करेंगे कि सन् 1857 के स्वतंत्रता-संग्राम में सभी वर्ग के लोगों ने भाग लिया था?

उत्तर :- सन् 1857 के स्वतंत्रता -संग्राम में दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह जफ़र कानपूर के नाना साहब, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एवं बिहार में जगदीशपुर के महाराजकुंवर सिंह ने नेतृत्व प्रदान किया तथा सभी लोगो को जनसाधारण का समर्थन प्राप्त हुआ।  

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 7 :कुँवर सिंह ने वह कौन-सी शक्ति बताई जिसके बल पर वे भोजपुर के राजा बने थे?

उत्तर :- कुंवर सिंह ने भोजपुर के गरीब रैयत किसानों ,मल्लाहों ,ग्वालों को अपनी शक्ति बतायी जिसके बल पर वे भोजपुर के राजा थे। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 8 :किसकी बदौलत कुँवर सिंह किनारे पर आ सके और कैसे ?

उत्तर :- कुंवर सिंह गंगा नदी के किनारे हर किशुन सिंह विश्वनाथ के सहारे आये और फिरंगी की गोली लगी अपनी भुजा को स्वयं तलवार से काटकर नदी में अर्पित कर दिया। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 9 :कुँवर सिंह के अनुसार युद्ध की क्या हुनर (कला) है ?

उत्तर :- कुंवर सिंह के अनुसार युद्ध में जीत और हार क्या है ?युद्ध भी एक हुनर है, युद्ध कला है। आँख मूंदकर शत्रु से भीड़ जाना युद्ध कला नहीं। । असली हुनर तो है शतरंज जैसे चालो में मात -पर -मात देने में।

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 10 :अंग्रेजों ने मेरे भोजपुर के गरीब रैयतों को सताया, जिनके अरमानों का मैं आईना हूँ’’ संवाद के द्वारा एकांकीकार कुँवर सिंह के किन भावों को व्यक्त करना चाहता है ?

उत्तर :-  कुंवर सिंह के लिए उनका राज्य जगदीशपुर मंदिर के समान था। वहां की जनता के लिए वे भगवान थे और फिरंगी ने वहां पर हमला कर ,लोगों को सताया ,जो की कुंवर साहब को मंजूर नहीं था। वे फ़ौरन जगदीशपुर पंहुचना चाहते थे। वे बेताब थे फिरंगी से बदला लेने के लिए। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 11 :अनोखी भेंट क्या है और कुँवर सिंह भेंट किसे देते हैं ?

उत्तर :-अनोखी भेँट कुंवर सिंह का एक हाथ जिस पर फिरंगी गोली लगी थी और अपने उस हाथ को  स्वयं तलवार से काटकर गंगा मैया के जल में उन्होंने भेंट चढ़ा दी।

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 12 :कुँवर सिंह, अमर सिंह का राजतिलक करते हुए क्या सीख देते हैं और क्यों ?

उत्तर :- कुंवर सिंह ,अमर सिंह को राजतिलक करते हुए उन्हें सिख दे रहे थे कि अमरसिंह नेत्र के बिना ज्योति कैसी ,प्रजा के बिना राजा कैसा ,उनका साथ न छोड़ना। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 13 :नावों को गंगा जी में डुबा देने के लिए महाराज कुँवर सिंह ने क्या  आदेश दिया था?

उत्तर :- नावो को गंगा जी में न डुबाते तो फिरंगी जनरल गोलियों से नावों को बेकार कर देते इसलिए नावों को डुबा देने का आदेश महाराज ने दिया था। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 14 :महाराज कुंवर सिंह को अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध करने में इतनी सफलता किनके कारण मिली ?

उत्तर :- महाराज कुंवर सिंह को अंग्रेजी के विरुद्ध युद्ध करने में सफलता का प्रमुख उनकी युद्ध कला की निपुणता थी। वे अपने हुनर से शतरंजी चालो को मात -पर-मात देते थे। भीमा मल्लाह उनके सैनिक भी निपुण थे। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 15 :महाराज कुँवर सिंह बहुत अधिक बीमार होने पर भी जगदीशपुर जाने के लिए क्यों बेताब थे ?

उत्तर :-महाराज कुंवर सिंह  फिरंगियों से बदला लेने के लिए वे बेताब थे इसलिए वे जगदीशपुर जाना चाहते थे। क्योंकि फिरंगियों ने भोजपुर के गरीब पंत को सताया था। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 16 :कुँवर सिंह ने भीमा से कहा था, ‘‘मुझे भी एक साल से नशा है।’’ उन्हें कैसा नशा था?

उत्तर :- कुंवर सिंह को विदेशियों से प्रतिशोध लेने का नशा था। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

प्रश्न 17 :इन पंक्तियों का अर्थ प्रसंग देकर लिखिए-

(क). मैं मौत से डरता नहीं पर मौत को न्यौता भी नहीं देता।

उत्तर :-प्रसंग :-  प्रस्तुत पंक्ति में महाराज कुंवर सिंह कहते है वे सोच ,समझकर युद्ध में  आगे बढ़ते है। 

अर्थ :- कुंवर सिंह ,भीमा से कहते है,कि मै युद्ध में मौत से डरता नहीं हूँ क्योंकि वीरो का श्रृंगार युद्ध है। किन्तु युद्ध में कमजोर बनकर मौत को सहजता से स्वीकार भी नहीं करता अर्थात उसे आमंत्रण नहीं देता। 

(ख). कलावंत अपना हुनर दिखाने में चोट खा गया तो उसकी वह चोट सिंगार हो जाती है।

उत्तर :- प्रसंग :- इस पंक्ति में कुंवर सिंह ने युद्ध में लगे घावों को वीरो का श्रृंगार बताया है। 

अर्थ :- युद्ध में केवल साहस नहीं चालाकी भी जरूरी है। यदि कला दिखाने में कोई चूक हो जाये या कला दिखाने में चोट खा जाये ,हार मिले तो वह श्रृंगार बन जाती है। क्योंकि कला प्रदर्शन के साथ हार स्वीकार करता है। 

(ग). नेह के बिना ज्योति कैसी, प्रजा के बिना राजा कैसा ?

उत्तर :- प्रसंग :- प्रस्तुत पंक्ति में कुंवर सिंह ने प्रजा  शक्ति बताया है। 

अर्थ :- कुंवर सिंह ,अमर सिंह को अपनी शक्ति का राज बताते हुए कहते है कि बिना प्रेम के शक्ति प्राप्त नहीं होता  है। अतः राजा को चाहिए कि वह प्रजा के प्रेम में सदैव संलग्न रहे तभी प्रजा राजा के आदेश का पालन करने के लिए सदैव तत्पर रहती है ,इसी  तरह और सच्चे  प्रजा की पहचान होती है। 

पाठ से आगे 

Page no : 77 (विजयबेला) 

1. आपने 1857 की क्रांति अथवा सिपाही विद्रोह के बारे में इतिहास की पुस्तकों में पढ़ा होगा। इस क्रांति में भाग लेनेवाले प्रमुख सेनानियों की एक सूची बनाइए।

उत्तर :- 1857 की क्रांति के प्रमुख सेनानियों के नाम इस प्रकार से है –

  1. मंगलपाण्डे 
  2. रानी लक्ष्मीबाई 
  3. रानी राजेश्वरी 
  4. नाना साहब 

Page no : 77 (विजयबेला) 

2. इस एकांकी को पढ़ते समय कौन सा पात्र आपको अधिक प्रभावित करता है और क्यो ?

उत्तर :- विजय बेला एकांकी के पात्र कुंवर सिंह ने हमे प्रभावित किया ,क्योंकि वे राजा होने के बाद भी अपने राज्य के दलित जनता के लिए ईश्वर के समान पुजे जाते थे। सेनापति किसान ,मल्लाह को भी बराबर महत्व देते थे। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

3. आपके आस-पास वैसे लोग रहते होंगे जिन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलनों में भाग लिया होगा उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर एक लेख तैयार कीजिए। 

उत्तर :- हमारे आस -पास ऐसे कई लोग रहते है ,जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। और आज वह स्वतंत्र देश के निवासी है। उन्होंने बताया कि हमने किस प्रकार से जेलों में कष्ट सहकर देश को स्वतंत्र कराया है। अंग्रेजो की दासता जरा सी बात पर कोड़े बरसाना शुरू कर देते थे। बूट की  ठोकर  तो आम बात थी। रंग -भेद जैसी नीतियों का इस्तेमाल भी अंग्रेज करते थे लेकिन आज हम खुली हवा में साँस ले रहे है तो सिर्फ वीर शहीदों के बलिदान का ही एक मात्र कारण है। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

4. मै मौत से नहीं डरता, मगर मौत को न्योता भी नहीं देता। आगे कदम बढ़ाना भी जानता हूँ और मौके पर कदम पीछे भी हटा सकता हूँ। मेरी दिलेरी के पीछे दिमाग है, कोरा दिल ही नहीं है। इस कथन से कुँवरसिंह के व्यक्तित्व के किस पहलू का पता चलता है? साथियों से बातचीत कर अपनी समझ को लिखिए।

उत्तर :- प्रस्तुत कहानी में जब भीमा कुंवर सिंह की बहादुरी का गुणगान करता है ,तो महाराज कहते है ,कि मै मृत्यु से कभी नहीं डरता हूँ। मृत्यु तो एक न एक दिन आएगी। मौत को निमंत्रण भी नहीं देता ,मौका पड़ने पर पीछे भी नहीं हटता हूँ ,मै देशभक्त हूँ मै निर्भीक हूँ ,मै वीर हूँ मै अपने देश का बाल भी बाक़ा नहीं होने दूंगा। फिरंगी चालो को नाकाम कर ,इन्हे धूल भी चटा सकता हूँ। 

Page no : 77 (विजयबेला) 

5. एकांकी में मल्लाह ग्वाले जैसे किसी जाति सूचक शब्दों का प्रयोग हुआ है क्या ऐसा प्रयोग होना चाहिए और क्यों? कक्षा में चर्चा कर अपने विचारों को लिखने का प्रयास कीजिए।

उत्तर :- एकांकी में 1857 की क्रांति में मल्लाह ग्वाले जैसे किसी जाति सूचक शब्दों के प्रयोग से यह पता चलता है कि देश की कोई भी जाति हो, यह संघर्ष करने के लिए हमेशा तैयार थी और भीमा और मैकू मल्लाह ने स्वाधीनता संग्राम में कुंवर सिंह का साथ देकर देश को  आजाद कराया  और ये सभी वीर पुरुष अंतिम साँस तक लड़ते रहे। 

भाषा से 

Page no : 77 (विजयबेला) 

1. पाठ में बहुत सारे मुहावरों का प्रयोग हुआ है जैसे लोहा मानना -श्रेष्ठता स्वीकार करना आंखों में देखते-देखते धोखा देना ,अकल मोटी होना बुद्ध ,बदन में तूफान फुकना -बेहद ऊर्जावान होना ,अमृत की घुट पीना -अमर होना ,मौत को न्योता देना जान बूझ कर मृत्यु को आमंत्रण देना मुहावरों का स्वतंत्र रूप से वाक्य में प्रयोग कीजिए और पाठ से मुहावरों को खोज कर लिखिए। 

उत्तर :- 1. लोहा मानना – श्रेष्ठता स्वीकार करना 

वाक्य प्रयोग : -अंग्रेजों को भगाकर हम भारतीयों ने अपना लोहा मनवा ही लिया। 

 2. आँखों में धूल झोंकना :- देखते देखते धोखा देना। 

वाक्य प्रयोग :- हमें अपने माता पिता की आँखों में धूल नहीं झोकना चाहिए। 

3. अकल मोटी होना -कम बुद्धि 

वाक्यप्रयोग :- अजय की अकल मोटी होने  से ही आज उसे व्यापार में घाटा सहना पड़ रहा है। 

 4. बदन में तूफ़ान फूकना – बेहद ऊर्जा वान होना। 

वाक्य प्रयोग :- कुंवर सिंह ने भीमा के बदन में तूफान फूक दिया था। 

5. अमृत का घूँट  पीना – अमर होना 

वाक्य प्रयोग :- माँ को अपनी सत्यता के कारण परिवार में अमृत का घूट पीना पड़ा। 

6. मौत को न्योता देना – जानबूझकर मृत्यु को आमंत्रण देना। 

वाक्य प्रयोग :- जब विनय को गाड़ी ठीक से चलाना नहीं आता तो वो जानबूझकर मौत को न्योता क्यों  देता है ?

7. कूच का डंका – सेना का युद्ध के लिए निकलना 

वाक्यप्रयोग :- राजा का आदेश मिलते ही पूरी सेना कूच का डंका बजाते हुए निकल पड़ी। 

8. अरमानों का आईना – इच्छाओ की अभिव्यक्ति 

वाक्यप्रयोग :- माँ ने जब हमें अपने अरमानों का आईना दिखाया तो हम सभी आश्चर्यचकित रह गए। 

9. मौत से डरना – परेशानियां  से घबरा जाना 

वाक्य प्रयोग :- मृत्यु सभी की  होगी ,इसलिए मौत से डरना नहीं चाहिए तथा दुःखी होकर वर्तमान भी खराब नहीं करना चाहिए। 

Page no : 78 (विजयबेला) 

2.  पाठ में ध्वन्यात्मक शब्दों का प्रयोग हुआ है. जैसे पानी के लिए छप-छप वैसे ही निम्नलिखित संदर्भों के लिए ध्वन्यात्मक शब्द लिखिए –

तेज हवा का प्रवाह  ________

उत्तर :- साँय -साँय 

नदी की धारा         ________

उत्तर :- कल -कल 

पैरो की ध्वनि        ________

उत्तर :- थप -थप या ठक-ठक

खाली हवेली या घर ________

उत्तर ;- साँय -साँय

आग की लपटें       ________

उत्तर :- धूं -धूं 

अँधेरा सूना रास्ता  _________

सुन -सुन या साँय-साँय 

Page no : 78 (विजयबेला) 

3 पाठ में प्रयुक्त जातिवाचक और भाववाचक संज्ञा का चुनाव कीजिए-

जहरीला ,दिलेरी ,हाहाकार ,कलाकारी, हरकारा, सरदार ,सरदारी, दिलेर, कलावंत,जर्राह ,शातरंजी जासूसी बेताबी , जहर ,नालायकी। 

उत्तर :- 

भाववाचक हाहाकार जहरीला दिलेरी कलाकारी शतरंजजासूसी  बेताबी नालायकी जातिवाचक 
दिलेर हरकारा सरदार कलावंत जहर जर्राह सरदारी 

Page no : 78 (विजयबेला) 

4. पाठ में प्रयुक्त ‘भला’ शब्द के कितने अर्थ निकलते हैं। आप ऐसे दो वाक्य बनाइए जिनसे उनके अर्थ का अंतर स्पष्ट हो जाए।

उत्तर :- भला -(अच्छा व्यक्ति )

भले आदमी को सब भला ही होता है। 

भला – ईश्वर सबका भला ही करता है। 

Page no : 78 (विजयबेला) 

5. इस एकांकी की कथा को संक्षेप में लिखिए।उत्तर :- प्रस्तुत एकांकी में 1857 की क्रांति व अंग्रेजो के खिलाफ लड़े गए प्रथम स्वाधीनता संग्राम की कहानी वर्णित है। जिसमे बिहार के महाराज कुंवर सिंह ने अंग्रेजो को मार भगाया। अपनी शतरंजी चालो के माध्यम से और फिरंगी की कोशिशों को नाकाम कर देश को स्वतंत्र कराया। इसी बीच फिरंगी के गोली लगे हाथ को गंगा मैया में समर्पित कर धैर्य साहस ,देशभक्त ,प्रजा ,वात्सल्य ,सहन ,शांति ,वीरता आदि का परिचय दिया।


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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