CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 17 तृतीय लिंग का बोध is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 17 तृतीय लिंग का बोध
CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 17 – तृतीय लिंग का बोध हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 17 हिंदी are given below for Hindi Medium students.
अभ्यास :
पाठ से :
Page no : 95 (तृतीय लिंग का बोध)
प्रश्न 1: राम के वन गमन के प्रसंग में किन्नरों के बारे में किस कथा का वर्णन मिलता है?
उत्तर :- त्रेता युग से किन्नरों के बारे में यह कथा प्रचलित है कि जब श्रीराम 14 वर्ष के लिए वनवास जा रहे थे उस समय सभी प्रजाजन उन्हें विदाई देने के लिए सरयु तट तक आये थे। वहां पर श्रीराम ने सभी को वापस जाने के लिए कहा ,परन्तु किन्नर लोग वही रुके रहे। श्री राम जब 14 वर्ष के बाद वन से लौटे तब उन्होंने इन लोगों से पूछा कि आप लोग वापस क्यों नहीं गए ?तब किन्नरों ने कहा कि प्रभु सभी नर और नारियो को वापस जाने की आज्ञा दी गई थी हमें नहीं। श्रीराम उनकी यह भक्ति देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए उन्होंने ने किन्नरों को यह वरदान दिया कि कलयुग में इनका ही राज होगा, और किन्नरों के आशीर्वाद से लोगों का कल्याण होगा।
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प्रश्न 2: शिखंडी कौन थे और क्यों प्रसिद्ध हुए ?
उत्तर :- शिखंड़ी महाराज द्रुपद के पुत्र और द्रोपदी के भाई थे। इन्हे सती का अवतार भी माना जाता है। शिखंडी ने अपनी शिक्षा -दिक्षा विधिवत पूर्ण किया था और यह युद्ध कला में भी कुशल थे। शिखंडी ने पांडवों की सेना का नेतृत्व भी किया था और वे महारयी भी थे। धर्म की रक्षा के लिए महाभारत युद्ध में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
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प्रश्न 3: राम वनवास से वापस लौटते हुए किन्नरों को क्या आशीर्वाद दिए ?
उत्तर :-श्रीराम ने वन से लौटते हुए किन्नरों को वरदान दिया कि कलयुग में उनका राज्य होगा और किन्नरों का आशीर्वाद बहुत प्रभावी होगा जिससे लोगों का कल्याण हो सकेगा।
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प्रश्न 4: दैहार क्या है ?
उत्तर :- दैहार एक प्रकार का किन्नरों का आश्रम होता है। जिसमे इनकी शिक्षा -दिक्षा ,नृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है और इसमें (दैहारो)में इनका -पोषण भी होता है।
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प्रश्न 5: तृतीय लिंग को किन अन्य नामों से जानते हैं ?
उत्तर :- तृतीय लिंग के लोगो को किन्नर ,टीजी आदि नामों से भी जाना जाता है।
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प्रश्न 6: तृतीय लिंग के लोगों ने किन-किन क्षेत्रों में प्रसिद्धि प्राप्त की है?
उत्तर :- तृतीय लिंग समुदाय के लोगों ने कॉर्पोरेट ,समाज सेवा ,राजनीति ,फैशन ,संगीत आदि क्षेत्रों में प्रसिद्धि प्राप्त किया।
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प्रश्न 7: विकास क्रम में पीछे कौन से वर्ग है और क्यों ?
उत्तर :- आज विकाश क्रम में आदिवासी समुदाय ,किन्नर समुदाय दलित समुदाय तथा निचले स्तर के लोग पीछे है क्योंकि इनके पास शिक्षा ,रोजगार के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं है।
पाठ से आगे :
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प्रश्न 1: पाठ में प्राचीन कालों के नाम आए हैं जैसे त्रेता, द्वापर, कलयुग, ये काल क्यों प्रसिद्ध हैं? मित्रों से चर्चा कर लिखिए।
उत्तर :- हिंदी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय को नेता और द्वापर युग में बांटा गया है आज के आधुनिक काल को कलियुग कहा जाता है। त्रेता युग में श्री राम का जन्म हुआ था और रामायण की घटनाएं इसी त्रेता युग में घटित हुयी थी। इसी प्रकार द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था और महाभारत की घटनाएं द्वापर युग में घटित हुयी थी। जिसके कारण ही त्रेता द्वापर युग प्रसिद्ध है। वर्तमान काल ही कलियुग है जिस के कारण यह भी प्रसिद्ध है।
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प्रश्न 2: महाभारत, रामचरितमानस, पुराण आदि प्रसिद्ध ग्रंथों का उल्लेख पाठ में है। इन कथाओं पर आपस में चर्चा कर संक्षिप्त रूप में लिखिए।
उत्तर :- पाठ के अनुसार रामचरितमानस में यह उल्लेख है कि त्रेता युग में श्रीराम ने किन्नरों को आशीर्वाद दिया था कि कलियुग में उनका भी राज होगा और उनकी दुवाए लोगो को अवश्य ही लगेगी द्वापर युग में शिखड़ी जो किन्नर था उसकी प्रतिभा को देखकर उसे महाभारत युद्ध का सेनापति बनाया गया।
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प्रश्न 3: ऐसा दिखता है कि समाज में हर तबके के लोग अपनी आजीविका के लिए परिश्रम करते हैं और इसमें समाज का सहयोग मिलता है। तृतीय लिंग के लोगों को आजीविका के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ता है विचार कर लिखिए।
उत्तर :- मध्यकाल में किन्नरों में बहुत बहुत अधिक असुरक्षा का भाव था वे अपनी आजीविका के लिए साल में एक या दो बार बधाई मांगने समूह में निकलते थे। समाज में उन्हें अच्छे नजरो से नहीं देखा जाता था। पर आज वर्तमान में इन्हे बराबर का अधिकार एवं अपनी आजीविका चलाने के अवसर भी प्रदान किये जा रहे है। आज के आधुनिक युग में इन्हे समान अवसर इनके मौलिक अधिकारों को प्रदान कराने में हमारे भारतीय संविधान और न्याय न्यायपालिका ने महत्वपूर्ण कदम उठाये है।
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प्रश्न 4:कोई मनुष्य तृतीय लिंग का है इसमें उसका क्या दोष है ? हम उससे समाज के अन्य लोगों की तरह सामान्य व्यवहार क्यों नहीं कर पाते हैं ? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर :- यदि कोई भी व्यक्ति तृतीय लिंग का है तो इसमें उसका कोई व्यक्तिगत दोष नहीं है क्योंकि यह एक शारीरिक रचना है। प्राचीन काल से लेकर आज तक इनका एक अलग ही अस्तित्व रहा है। वर्तमान में इनकी स्थिति में बदलाव लाया जा रहा है तथा इनके मौलिक अधिकारों पर ध्यान दिया जा रहा है इनको हमारे समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त कराने का भी प्रयास किया जा रहा है।
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प्रश्न 5:प्रस्तुत पाठ से तृतीय लिंग के कई प्रसिद्ध नामों का उल्लेख है इससे यह स्पष्ट होता है कि इस समुदाय के लोगों को समान अवसर मिले तो अपनी क्षमता को साबित कर सकते हैं। आपके अनुसार इन्हें अवसर क्यों नहीं मिल पाता है? साथियों से बात कर अपनी समझ को रखिए।
उत्तर :- पाठ के अनुसार हमें यह ज्ञात होता है ,कि प्राचीन काल जैसे त्रेता ,द्वापर ,आधुनिक काल में किन्नरों को समाज में समान अवसर और मान सम्मान मिला था। परन्तु मध्यकाल से इनकी स्थिति बद् से बत्तर होती गयी। किन्तु आज के आधुनिक काल तथा स्वतंत्रता भारत में इन्हे भारतीय संविधान में सम्मान अवसर व स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। जिसके कारण आज किन्नरों की दशा में धीरे -धीरे सुधार हो रहा है।
मध्यकाल में इनकी दुर्दशा का कारण सामाजिक कुरीतियाँ और हमारे समाज को संकीर्ण विचारधारा थी। हम सभी को किन्नरों के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए। जिसका घर परिवार में ऐसे बच्चे का जन्म हो उस परिवार से उन्हें प्यार व मान -सम्मान देना ही चाहिए। यदि किन्नरों को भी बचपन से ही शिक्षित किया जाये तो उनकी प्रतिभा समाज को ही नहीं वरन सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सम्मान जनक स्थान प्राप्त कराने में अपना सम्पूर्ण सहयोग दे सकते है।
भाषा से :-
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प्रश्न 1: अलग-अलग, गुरु-शिष्य, एक-दो, शिक्षा-दीक्षा उपर्युक्त शब्द पाठ में प्रयुक्त हुए हैं, जिनको लिखने में योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया गया है। योजक चिह्न का प्रयोग पुनरुक्त, युग्म और सहचर शब्दों के मध्य किया जाता है, उदाहरण स्वरूप- हानि-लाभ, जीवन-मरण, कभी-कभी खाते-पीते। आप पाठ से और अपने आस-पास प्रचलित ऐसे 10 शब्दों को लिखिए जिनमें योजक चिह्नों का प्रयोग होता हो।
उत्तर :- योजक चिन्ह के निम्नलिखित शब्द है –
(क)माता -पिता
(ख)दया -धर्म
(ग)अन्न -जल
(घ)राजा -रानी
(ड़)अंदर -बाहर
(च)पुत्र -पुत्री
(छ)भाई -बहन
(ज)पति -पत्नी
(झ)आदान -प्रदान
(ञ)नख -सिर
(ट)बेटा -बेटी
(ठ)जन्म -मरण
(ड)आदि -अंत
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प्रश्न 2: किन्नर, उर्स, आजीविका, अस्मिता, बधाई, पारंगत, प्रतिभा, विशारद शब्दों का छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रचलित अर्थ वाले शब्द लिखिए।
उत्तर :-
| हिंदी शब्द | छत्तीसगढ़ी शब्द |
| किन्नर | मेहला ,खुंसरा |
| उर्स | उरुस ,उरस |
| आजीविका | बनिहारी ,कमई |
| अस्मिता | इज्जत ,लाज |
| बधाई | बधई ,गाड़ा -गाड़ा बधई |
| पारंगत | निपुन |
| प्रतिभा | गुनीवान,कुसल |
| विशारद | वैध ज्ञानी |
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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.