CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 18 ब्रज माघुरी is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 18 ब्रज माघुरी
CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 18 – ब्रज माघुरी हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 18 हिंदी are given below for Hindi Medium students.
अभ्यास :
पाठ से :
Page no : 98 (ब्रज-माधुरी)
प्रश्न 1: ‘चितै-चितै चारों ओर’ इस छंद में कौन बार-बार चौंककर इधर-उधर देख रहा है और क्यों ?
उत्तर :- चितै -चितै चारों ओर छंद में श्री कृष्ण दही चुराते हुए बार -बार चौक कर इधर -उधर देख रहे है ,कि कही से कोई आ तो नहीं रहा है। इसलिए वे अपने मित्रों के साथ चौकन्ने है।
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प्रश्न 2: कमल में भौंरा कैसे बंद हो गया ?
उत्तर :- भौरा रसपान करने के लिए कमल पर बैठ रहा शाम होते ही कमल की पंखुड़ियां बंद हुई और वह बंद हो गया।
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प्रश्न 3: कमल कोष में बंद भौंरा मन ही मन क्या सोच रहा था ?
उत्तर :- भौरा मन ही मन सोच रहा था कि सूर्योदय के साथ कमल की पंखुड़ियाँ खुलेगी और वह पुनः रसपान करेगा।
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प्रश्न 4: भौंरे की इच्छाओं का अंत कैसे हुआ ?
उत्तर :- सुबह होते ही हाथी ,कमल फूल को खा जाता है ,और भौरे की इच्छाओं का अंत हो जाता है।
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प्रश्न 5: नैन अघाने का क्या आशय है ?
उत्तर :-नैन अघाने का आशय है कि बिना कृष्ण की मोहनी सूरत को देखे ,आँखे तृप्त नहीं होती है।
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प्रश्न 6: नायिका अपनी सखी से मन को किन दुविधाओं का उल्लेख करती है ?
उत्तर :- नायिका अपनी सखी से अपने मन को दुविधा का उल्लेख करते हुए कहती है,कि सखी मै क्या करू ,कहाँ जाऊ ,जब तक मोहन को सूरत नहीं देखती तब तक मानों मेरी आँखों को संतुष्टि नहीं होती है। मुझे मोहन ही मोहन सभी तरफ ओर हर समय दिखाई देते है।
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प्रश्न 7: भाव स्पष्ट कीजिए –
सुमिरन वही ध्यान उनको ही मुख में उनको नाम।
दूजी और नाहिं गति मेरी बिनु मोहन घनश्याम।।
उत्तर :- संदर्भ :- प्रस्तुत पद्यांश “ब्रज माधुरी”से लिया गया है ,इसके कवि भारतेंदु कवि है।
प्रसंग :- प्रस्तुत पद्य खंड में एक सखी अपनी दूसरी सखी से मन को व्यथा कह रही है।
व्याख्या :- प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते है ,कि मै जब याद करता हूँ तो मेरे मुँह से हरि अर्थात श्री कृष्ण का ही नाम निकलता है ,क्योंकि उनके ही कारण मेरी ये दशा हो गयी है। उनके बिना मेरा जीवन निरर्थक है।
पाठ से आगे :
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प्रश्न 1: भौंरे के मन में ढेर सारी इच्छाएं थीं जो अगले पल में ध्वस्त हो गईं! हमारे मन में भी ढेर सारी इच्छाएं जन्म लेती हैं पर वे पूर्ण नहीं हो पातीं क्यों ? साथियों के साथ विचार कर लिखिए।
उत्तर :- हमारा मन जीवन को वास्तविकता को प्रकट करता है ,कि जीवन क्षणभंगुर है। यह कभी भी नष्ट हो सकता है। मनुष्य को इच्छाएं असीमित होती उसके पास जितना है उससे ज्यादा पाने को इच्छा रखता है। उसकी संतुष्टि नहीं हो पाती है। इच्छा एक के बाद एक जन्म लेती रहती है। मनुष्य का जीवन एक बुलबुले के समान है जो कभी भी फूट सकता है अर्थात इच्छाएं अधूरी रह सकती है।
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प्रश्न 2:बाल श्रीकृष्ण की लीलाओं को आपने अपने बड़े-बुजुर्गों से सुना और पुस्तकों में पढ़ा होगा, जो लीला आपको प्रभावित करती है उसे लिख कर कक्षा में सुनाइए।
उत्तर :- कहानी सुनना या सुनाना केवल माता -पिता के बीच संबंध को गहरा करने का तरीका है। भगवान श्री कृष्ण को बालहठ लीलाओ की चर्चा हमने सदैव अपने बड़ो से सुनी है जो हमें हमेशा ही प्रभावित करती रही है। श्री कृष्ण हठ से अपनी सभी बातों को मनवाने में सदैव कामयाब हो जाते थे। श्री कृष्ण कहते है कि मुझे तो राधा दुल्हनिया चाहिए। कजराही आंखों वाली ,गोरी नाजुक कलाइयां लंबे केश ,चेहरे पर मुस्कुराहट भरा ,चाँद सा चहेरा मेरी राधा का है। उनकी जिद्द थी कि “मेरी जल्दी से शादी कर दो ना मइया। ” मुझे सजा दो और काली कमली भी पहना दो , सिर पर मुकुट बांध कर मैया मुझे जल्दी से दुल्हा बना दो। वो अपनी यशोदा मैया से कहते है ,कि हाँ ! माँ जब राधा शादी करके हमारे घर आएगी तो पायल पहन कर छम -छम डोलेगी और मैया वो भी तुम्हे मैया कह कर बुलाएगी।
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प्रश्न 3: जिस तरह श्रीकृष्ण बाँसुरी (वाद्य यंत्र) बजाते थे वैसे ही आप भी कोई वाद्य यंत्र बजाते होंगे। आप किस प्रकार का वाद्य यंत्र बजाना पसंद करेंगे कारण सहित अपना अनुभव लिखिए।
उत्तर :- जिस प्रकार कृष्ण बांसुरी बजाते थे, वैसे ही हम सितार बजाते है। मुझे सितार की आवाज बड़ी ही मनमोहक लगती है। मेरी माँ भी सितार बजाती है। मैंने ये कला उन्ही से सीखी है। सितार बजाना सिखने में समय लगता है। परन्तु घर में ही रहने के कारण मै बड़ी छोटी ही उम्र में माँ को देखकर सितार बजाना सीख गई। परन्तु अभी पारगत होने में समय लगेगा। मैंने अनुभव किया है ,कि सितार बजाने से हाथों में मजबुती आती है और ध्यान केंद्रित होता है। सितार बजाने से मेरा आनन्द भी दुगुना हो जाता है। मेरे जीवन की मेरी सच्ची सहेली सिर्फ मेरी सितार है, अन्यथा में अपना समय और जीवन व्यर्थ ही गंवा बैठती।
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प्रश्न 4:पद में सखी के मन में उलझन है कि वह क्या करे और कहाँ जाए? ऐसी ही हमारे जीवन में अनेक उलझने हैं जिसे हम किससे कहें। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? इस विषय पर अपने साथियों के साथ चर्चा कर अपने अनुभवों को लिखिए।
उत्तर :- हाँ ,हमारे साथ भी ऐसा होता है , जब हम किसी परेशानी में होते है ,तो अपने मन के भाव व्यक्त करने के लिए हमें अपने सहपाठी, मित्र ,रिश्तेदार ,पास पडोसी को जरुरत होती है। कभी -कभी तो ऐसी घटना घटित होती है कि हम किसी से भी चाहकर नहीं कह सकते है। हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई उलझन या परेशानी जरूर होती है।
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प्रश्न 5: बालक कृष्ण के दही चुराने के पीछे क्या मकसद हो सकता है कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर :- बालक कृष्ण के दही चुराने के पीछे उनका मकसद खेल ,नटखट पन ,हास्य व्यंग्य तथा गोपियों के मन में प्रेम भाव जाग्रत करना आदि हो सकता है। श्री कृष्ण के सभी साथी कृष्ण से माखन खाने की बात कहते है ,तो कृष्ण उनकी उदर पूर्ति के लिए अपने नटखट से सभी सखियों से माखन मांगना ,न देने पर उन की मटकी कंकड़ से फोड़ना उनके हास्य व्यंग्य को प्रदर्शित करता है और दही ,माखन चुराकर खाना उनकी आदत थी।
भाषा से :
Page no : 99 (ब्रज-माधुरी)
प्रश्न 1: ब्रज माधुरी पाठ के पद ब्रजभाषा में लिखे गए हैं। ब्रजभाषा के निम्न शब्दों को छत्तीसगढ़ी में क्या कहते हैं? ढूँढ़ कर लिखिए, जैसे-सिहात है, काँधे, पाँव, मीत, आजु लौ, कित, उरहानौ, होइगो, प्रात, सखी, बरजौ, खीजौ, काह।
उत्तर :-
| ब्रज भाषा | छत्तीगढ़ भाषा |
| सिहात है | इरखा करत हे। |
| काँधे | कंधा ,खँदमे |
| पाँव | गोड़ |
| मीत | संगवारी ,मितान |
| आजु लौ | आज ही /आज ले |
| कित | कतका ,किथे |
| उरहानौ | लिगरी ,बोली मारना |
| होइगो | होंगे ,होइथे |
| प्रात | बिहनिया ,मुँह झु |
| सखी | गुइया ,गुहिया |
| बरजौ | बजरथे |
| खीजौ | खिसियात |
| काह | काखर |
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प्रश्न 2: चितै-चितै चारो ओर चौंकि-चौंकि परै त्योंहि, पंक्ति में ‘च’ वर्ण की आवृति हुई है जो अनुप्रास अलंकार है। इस अलंकार के अन्य उदाहरण कविता से ढूँढ़ कर लिखिए।
उत्तर :- अनुप्रास अलंकार के उदाहरण इस प्रकार है –
- जहाँ -तहाँ ,जब तब खटकत (2)डरनि डराने से उठाने।
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प्रश्न 3: कुछ शब्दों के दो या दो से अधिक अर्थ होते हैं जो उसके सन्दर्भ के आधार पर अर्थगत भिन्नता रखते हैं जैसे ‘भाग’ शब्द का अर्थ भागना और हिस्सा है। निम्नलिखित शब्दों के अर्थगत भिन्नता को स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-काल, भीत, जग, रोम, मन, मोहन, घनश्याम, आन।
उत्तर :- (1)काल :- समय /मृत्यु
(1) आज दोपहर के समय मै आऊंगा।
(2)कल काका की मृत्यु हो गई।
(2)भीत :- दीवार /डरपोक
(1)राधा के घर की दीवार गिर गई।
(2)रामु तुम तो डरपोक हो।
(3)जग :- संसार /पानी का पात्र
(1)जग का निर्माण ईश्वर ने ही किया है।
(2)मुझे जग में पानी दे दो।
(4) रोम :- शरीर के रोए /एक देश का नाम
(1)मेरा रोम -रोम तुम्हारा कर्जदार है।
(2)मुझे रोम जाना है।
(5) मन :- एक राजा /दिल
(1)मन नाम का एक राजा था।
(2)मेरा मन आज अच्छा नहीं है।
(6)मोहन :-श्रीकृष्ण /व्यक्ति का नाम
(1)मोहन पढता है।
(2)श्री कृष्ण को मनमोहन भी कहते है।
(7) घनश्याम :- श्रीकृष्ण /बादल
(1)घनश्याम बंसी बजाते थे।
(2)काले बादल घिर -घिर आ रहे है।
(8) आन :- रोक /आना
(1)श्याम मुझे रोक लो
(2)आज तुम्हें आना होगा।
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प्रश्न 4:(क) 14 वर्षों की अवधि बीत जाने के बाद राम के न लौटने से लोग आकुल होने लगे।
(ख) तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना अवधी में की है। ऊपर के दो उदाहरण से स्पष्ट है कि सुनने में बहुत समान लगने वाले शब्द का अर्थ और प्रयोग की दृष्टि से भिन्नता रखते हैं, जिन्हें हम श्रुति समभिन्नार्थी शब्दों के रूप में पहचानते हैं निम्नलिखित ऐसे ही शब्दों का अर्थ ग्रहण करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए। कोष-कोस, रीति-रीती, अंश-अंस, दिन-दीन, चिर-चीर, अली-अलि, कूल-कुल।
उत्तर :- (1)कोष -भंडार -मेरे पास हिंदी की शब्द कोष है।
कोश -पंखुड़ी -भौंरा कमल के कोश में बंद है।
(2)रीति -(रिवाज):- भारत रीती रिवाजों का देश है।
रीती -(खाली):- मेरा गिलास खाली है।
(3)अंश -(भाग):- प्रत्येक शिशु माँ का ही अंश होता है।
अंस(कन्धा):- सैनिको के अंस बड़े मजबुत होते है।
(4)दिन (दिवस)-आज स्वतंत्रता के दिन है।
दीन (दुःखी या गरीब):-सुदाम बड़े ही दीन थे
(5)चिर (दीर्घकाल)- रामायण को गाथा चिरकाल से है।
चीर (वस्त्र)-द्रौपदी का चीर हरण हुआ था।
(6)अली -(भौरा):- अली गुन -गुन करता है।
अलि -(सखी):- मेरी अलि रमा है।
(7)कूल -(किनारा):-यह तो नदी का कूल है।
कुल -(वंश):- राम क्षत्रिय कुल के थे।
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प्रश्न 5: दैनिक जीवन में कभी हम हँसते हैं, कभी उदास हो जाते हैं, कभी क्रोधित होते हैं, कभी प्रेम करते हैं तो कभी घृणा करते हैं और कभी हमें आश्चर्य होता है। ये ही भाव कविताओं में भी प्रकट होते है । इन भावों को साहित्य में ‘रस’ कहा जाता है। रस के निम्नलिखित दस भेद हैं –
शृंगार, वीर, रौद्र, हास्य, वीभत्स, अद्भुत, करुण, शांत, भयानक और वात्सल्य। पाठ में पंकज कोष ………………इस छंद में जीवन की निरर्थकता बताई गई है। अतः यह शांत रस की रचना है। इसी तरह सखी हम काह करें ……………….इस छंद में गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम भाव प्रकट हो रहा है। अतः यहां शृंगार रस विद्यमान है। उक्त प्रकार के छंदों के एक-एक अन्य उदाहरण शिक्षक से पूछकर लिखें व समझें।
उत्तर :-
श्रृंगार रस :-पंकज कोस में भृंग फस्यौ ,करतौ अपने मन ये मनसूबा।
वीर रस :- सुकुमार मत जानो मुझे।
रौद्र रस :- रे नृप बालक कालबस ,बोलत तो हिन् संभार।
धनु ही सम त्रिपुरारी धनु विदित संकल संसार।
वीभत्स रस :- पंकज कोस में भृंग कस्यौ ,करतौ अपने मन यो मन सूबा
या
कहू धूम उठत ,बरत कतहूँ हे चिता ,कहुँ होत अरथी धरी अहै।
अद्भुत रस :- चितै -चितै चारों ओर चौकि -चौकि परै त्योंही ,जहां -तहाँ ,जब -तब खटकत पात हे।
करुण रस :- सखी हम काह करै कित जाये बिनु देखे वह मोहिनी मूरति नैना नाहि अघायै।
भयानक रस :- एक ओर अजगरहि लखि ,एकओर मृगराय ,विकल बटोही बीच ही ,परयो मूरछा खाय
वात्सल्य रस :- बैठत उठत सन सोवत निस चलत फिरत सब ठौर नैनन ले वह रूप रसीले टरतन इकपल और।
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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.