CG Board Class 8 History Solutions Chapter 5 भारतीय समाज में नए विचार – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 5 भारतीय समाज में नए विचार is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 इतिहास पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 5 भारतीय समाज में नए विचार

CGBSE समाधान कक्षा 8 इतिहास अध्याय 5 – भारतीय समाज में नए विचार हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 History Solutions Chapter 5 इतिहास are given below for Hindi Medium students.


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चर्चा करें। 

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  • आज के समाज में भी इनमे से महिलाओं की कौन- कौन सी समस्याएं देखने को मिलती है?

उत्तर: आज भी हमारे समाज में महिलाओं को दूसरे स्तर का नागरिक समझ जा रहा है पुरुष प्रधान समाज होने कारण महिलाओं को घर के काम तक ही सीमित रखने की अवधारणा है शिक्षा के लिए लड़कियों को अपने ही घर में संघर्ष करना पड़ता है। आज के समाज में सबसे बड़ा अभिशाप दहेज है, जिसके कारण हजारों लड़कियां हर साल मारी जाती हैं या प्रताड़ित होती है। कहीं-कहीं पर बाल विवाह की भी खबरें मिलती है, विधवाओं को हेय दृष्टि से देखा जाता है परन्तु इस सब के पीछे महिलाओं का शोषण करने में सबसे ज्यादा महिलाएं ही शामिल होती हैं।

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1. क्या आज भी बाल विवाह होते हैं यादी हाँ तो उन्हें कैसे समाप्त किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ आज भी कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह की खबरें आती हैं जिन क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार कम है इसके लिए सिर्फ कानून काफी नहीं हमें शिक्षा का प्रचार – प्रसार बढ़ाना होगा। तथा आम लोगों में इसके हानियों के प्रति जागरूक करना होगा। 

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2. क्या आज कन्या का जन्म अशुभ मन जाता है यादी हैं तो इस भाग को कैसे बदला जा सकता है?

उत्तर: आजकल इस बात पर काफी लोगों में अलग-अलग मत है कुछ लोग कन्या जन्म को अशुद्ध मानते हैं और लड़की  को बोझ समझते हैं उसका मुख्य कारण दहेज का है तथा विवाह के बाद उनका दुसरे के घर को चला जाना है इस मानसिकता को बदलना होगा लोगों में जागृति लानी होगी कि कन्या बोझ नहीं लक्ष्मी स्वरूप है।

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3. हमेशा दहेज प्रथा का विरोध हुआ है फिर भी इसका प्रचार क्यों है?

उत्तर: दहेज प्रथा समाज की प्रमुख कुरीति है जिसका प्रचलन भारत के हर धर्म व जाति में है इस प्रथा के विरुद्ध सरकार द्वारा कठोर कानून बनाए गए हैं परंतु यह प्रथा दो परिवार द्वार यह संचालित होती है इसलिए इसकी जानकारी सरकार या प्रशासन को नहीं हो पाती है तथा हर व्यक्ति की सोच एक औसत सोच है इसके लिए हमें अपनी सोच व महिलाओं को शिक्षित व जागरूक करना होगा जब तक इस प्रथा के विरुद्ध महिलाएं आगे नहीं आएगी तब तक इसका समूल विनाश नहीं हो सकता है। 

अभ्यास

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1. खाली स्थानों को भरिए

1. शारदा एक्ट 1929 द्वारा बाल विवाह पर रोक लगाई गई।

2. सती प्रथा को बंद करवाने वाले समाज सुधारक  राजा राममोहन राय थे ।

3. आंध्रप्रदेश के एक प्रसिद्ध समाज सुधारक वीरेशलिंगम थे।

4. महात्मा गांधी ने अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ की स्थापना की।

5. छत्तीसगढ़ में निम्न वर्ग की स्थिति सुधारने का कार्य प.सुन्दरलाल शर्मा  ने किया।

6. गुरुघासीदास का जन्म बलौदाबाजार जिले के गिरौदपुरी में हुआ था।

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2. उचित संबंध जोड़िए

1. राजा राममोहन राय        सत्यशोधक समाज

2. दयानंद सरस्वती            प्रार्थना समाज

3. सर सैयद अहमद खाँ      ब्रहम समाज

4. महादेव गोविंद रानाडे     आर्य समाज

5. ज्योतिबा फुले                अलीगढ़ आंदोलन

उत्तर: 

1. राजा राममोहन राय ब्रहम समाज

2. दयानंद सरस्वती आर्य समाज

3. सर सैयद अहमद खाँ अलीगढ़ आंदोलन

4. महादेव गोविंद रानाडे प्रार्थना समाज

5. ज्योतिबा फुले सत्यशोधक समाज

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प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

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1. गुरु घासीदास जयंती कब मनाई जाती है?

उत्तर: गुरु घासीदास जयंती 16 दिसंबर को मनाई जाती है।

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2. सती प्रथा निषेध कानून कब और किस गवर्नर जनरल ने लागू किया था?

उत्तर: सती प्रथा निषेध कानून 1829 ई० में गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैटिंग द्वारा लगाया गया।

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3. विधवा-पुनर्विवाह कानून कब और किसके नेतृत्व में लागू हुआ था?

उत्तर: 1856 में बंगाल के समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नेतृत्व में लागू हुआ।

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4.बाल विवाह प्रथा कब और किस एक्ट के द्वारा समाप्त हुई थी?

उत्तर: बाल विवाह शारदा एक्ट द्वारा सन 1929 द्वार समाप्त हुई। 

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5. प्रथम बालिका स्कूल कब और कहाँ खुला था

उत्तर: प्रथम बालिका स्कूल 1849 में कलकत्ता में खुला।

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6. अंग्रेजी शिक्षा से भारतीयों को किन-किन बातों की जानकारी मिली।

उत्तर: अंगरेजी शिक्षा से भारतीयों को उनके समाज में व्याप्त कुरीतियों तथा धार्मिक अंधविश्वासों की जानकारी मिली तथा उनके प्रति लोगों में जागरूकता आई। जैसे- बाल-विवाह, दहेज प्रथा, विधवा विवाह ,जाति प्रथा , अस्पृश्यता छुआछूत व नरबलि। 

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7. सतनाम पंथ के दो प्रमुख सिद्धांत बताइए?

उत्तर: सतनाम पंथ के दो विशेषताएं प्रमुख है।  

1. सत्य ही ईश्वर है।

2. सभी मानव समान है। 

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8. विधवा-पुनर्विवाह कैसे संभव हुआ था?

उत्तर: विधवा पुनर्विवाह के लिए ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बहुत मेहनत की उसी कड़ी में उदाहरण स्वरूप रामकृष्ण गोपाल भंडारकर ने अपनी विधवा पुत्री पुनर्विवाह कराया तथा इसका रानाडे व वीरेशलिंगम द्वार समर्थन किया गया फलस्वरूप सन 1856 में विधवा पुनर्विवाह कानून के द्वारा यह संभव हो सका। 

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9. जाति प्रथा के विरोध में ज्योतिबा फुले के योगदान को बताइए।

उत्तर: जाति प्रथा के विरुद्ध ज्योतिबा ने शुद्ध देश में घूम-घूम कर व्याख्यान दिए इसके लिए उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की तथा प्राथमिक शिक्षा नि:शुल्क व अनिवार्य कर महिला, पुरुष व शिक्षाको की नियुक्ति तथा दलितों के आरक्षण किए जाने की मांग की इसके लिए उन्होंने कुछ लेख व रचनाएं भी लिखी।

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10. नारी शिक्षा हेतु विभिन्न प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: नारी शिक्षा के लिए स्वतंत्रता पूर्व से हमारे बहुत से महापुरुषों ने विशेष प्रयास किया जिनमें ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा कलकत्ता में स्कूल की स्थापना की गई रमाबाई द्वार सारे देश में संस्कृत व अन्य भाषाओं  में व्याख्यान किए गए तथा ज्योतिबा फुले ने तो समाज में नारी शिक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य किए तथा महात्मा गांधी द्वारा स्त्रियों की शिक्षा के लिए अंग्रेजों से व समाज में एक विशेष आग्रह किया गया दयानंद सरस्वती ने धार्मिक माध्यम से नारी को शिक्षित करने का संदेश दिया।

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11. जाति-प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिये आज भी समाज में किसकी आवश्यकता है ?

उत्तर: जाति प्रथा की समाप्ति के लिए आज भी हमारे देश के संपूर्ण आबादी को शैक्षिक होना जरूरी है शिक्षा द्वारा ही हम छुआछूत व भेदभाव को समाप्त कर सकेंगे इसमें महिला शिक्षा तो प्रमुख है। 

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12. आपको लगता है कि बाल विवाह गलत और विधवा पुनर्विवाह सही है कैसे इस पर अपने विचार लिखिए ।

उत्तर: बाल विवाह – बाल विवाह बिल्कुल गलत प्रथा है इस प्रथा के अनेक दोष है कम उम्र में विवाह के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो जाती है उनका स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है तथा काम उम्र में जिम्मेदारी के कारण उनका मानसिक विकास रुक जाता है खेल कूद व सामाजिक रुचियां समाप्त हो जाता है उनका बचपन छिन जाता है तथा लड़कियों को अनेक प्रकार की शारीरिक व्याथिया कम उम्र में ही घेर लेती है।

विधवा पुनर्विवाह – विधवा पुनर्विवाह बहुत आवश्यक है जो लड़कियां पति की मृत्यु के बाद  विधवा हो गई उनका विवाह कराना चाहिए इसमें उसका कोई दोष नहीं होता। उनकी बाकी की जिंदगी के लिए विवाह जरूरी है। विवाह करने की दशा में समाज में उनकी एक प्रकार की अछूत की स्थिति हो जाती है जिससे  उनको मानसिक यातना सहनी पड़ती है। उनको वह कष्ट और पीड़ा सहना पड़ता है। जिसको उन्होंने किया ही नहीं है।

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टिप्पणी लिखिए

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अ. रमाबाई – रमाबाई का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन में उनके माता-पिता का देहांत हो गया जिसके कारण अपने भाई को लेकर वह घूमते-घूमते कलकत्ता पहुंची वहां उनकी व्याखान सुनकर उन्हें पंडित की उपाधि मिली वह वहां ईश्वर चंद्र विद्यासागर वह राजा राममोहन राय के संपर्क में आयी तथा महिलाओं के लिए शारदा सदन नामक एक स्कूल की स्थापना की तथा महिलाओं की शिक्षा के लिए जागरण चलाया।

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ब. डॉ. भीमराव अम्बेडकर – डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। इनका बचपन बहुत ही संघर्ष में बीता उन्होंने इंग्लैंड में बैरिस्टर की डिग्री ली तथा भारत आए भारत आने पर उन्होंने छोटी जातियों के उद्धार हेतु एक जागृति पैदा की तथा उन्होंने उनको शिक्षा तथा उनके अधिकारों के प्रति उन्हें बताया उन्हें शिक्षित होकर राजनीतिक भागीदारी करनी होगी भारत के संविधान के निर्माण में उन्होंने अहम योगदान दिया तथा संविधान में इन जातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू कराई।

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योग्यता विस्तार

1.पंडिता रमाबाई सरस्वती जैसी किसी अन्य स्थानीय महिला समाज सुधारक के बारे में पता कीजिए तथा उसका संक्षिप्त जीवन परिचय प्राप्त कीजिए।

उत्तर :- राधाबाई :- स्वतंत्रता सेनानी तथा समाज सुधारक थी। डॉ राधाबाई रायपुर नगर (छत्तीसगढ़) की प्रथम महिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में जाना जाता है। डॉ. राधा बाई ने छत्तीसगढ़ में प्रचलित किसबीन प्रथा का विरोध किया और इस प्रथा को खत्म किया।

2.अपने शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए

अ. दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप है।

ब.  जाति प्रथा – मानवता के मार्ग में बाधक सत्य है।

उत्तर: 

अ. दहेज प्रथा – एक सामाजिक अभिशाप है:- हमारे देश में दहेज प्रथा एक ऐसा सामाजिक अभिशाप है जो महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों, चाहे वे मानसिक हों या फिर शारीरिक, को बढ़ावा देता है. इस व्यवस्था ने समाज के सभी वर्गों को अपनी चपेट में ले लिया है. अमीर और संपन्न परिवार जिस प्रथा का अनुसरण अपनी सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए करते हैं वहीं निर्धन अभिभावकों के लिए बेटी के विवाह में दहेज देना उनके लिए विवशता बन जाता है. क्योंकि वे जानते हैं कि अगर दहेज ना दिया गया तो यह उनके मान-सम्मान को तो समाप्त करेगा ही साथ ही बेटी को बिना दहेज के विदा किया तो ससुराल में उसका जीना तक दूभर बन जाएगा. संपन्न परिवार बेटी के विवाह में किए गए व्यय को अपने लिए एक निवेश मानते हैं. उन्हें लगता है कि बहूमूल्य उपहारों के साथ बेटी को विदा करेंगे तो यह सीधा उनकी अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाएगा. इसके अलावा उनकी बेटी को भी ससुराल में सम्मान और प्रेम मिलेगा|
ब.  जाति प्रथा – मानवता के मार्ग में बाधक सत्य है:- भारत सदियों से बुरी जाति प्रथा के दायरे में रहा है। यह प्रणाली प्राचीन काल में अपनी जड़ें पाती है और समय के साथ इसमें बदलाव आया है। मध्यकालीन, प्रारंभिक आधुनिक और आधुनिक भारत के शासकों ने इसे अपनी सुविधा के अनुरूप ढाला। ऊँची जातियों के लोगों के साथ उच्च व्यवहार किया जाता था और निचली जाति के लोगों को नीचे देखा जाता था।आज के समय में, भारत में जाति व्यवस्था आरक्षण का आधार बन गई है जब यह शिक्षा प्राप्त करने और नौकरियों को हासिल करने की बात आती है।भारत में सामाजिक प्रथा में मूल रूप से दो अलग-अलग अवधारणाएं शामिल हैं, वर्ण और जाति। वर्ण को व्यक्ति का वर्ग कहा गया है। इसके अंतर्गत चार श्रेणियां हैं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। दूसरी ओर जाति को एक व्यक्ति की जाति कहा जाता है और एक व्यक्ति के जन्म का संदर्भ देता है। हजारों जातियां हैं और ये आमतौर पर एक समुदाय के पारंपरिक व्यवसाय द्वारा निर्धारित की जाती हैं


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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