CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 5 पर्यावरण एवं प्रकृति Chapter 5.1 ग्राम्य जीवन are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 5 पर्यावरण एवं प्रकृति Chapter 5.1 ग्राम्य जीवन
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अभ्यास-
पाठ से –
Q.1. कवि ने किसानों को छल-कपट और द्वेषहीन के साथ चतुर भी क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- कवि ने किसानों को छल कपट और द्वेषहीन के साथ चतुर इसलिए कहा क्योंकि वह सीधे साधे व सहज स्वभाव के होते हैं | तथा अपने घर आए हुए मेहमान के सत्कार में कमी नहीं करते | प्राकृतिक सौन्दर्यता से परिपूर्ण, प्रदूषण रहित, स्वच्छ गाँवों में किसान छल कपट और ईर्ष्या से दूर रहकर सहज सरल सादा ढंग से प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन बिताते हैं | वहीं शहरी व्यक्ति प्रदूषण युक्त, भीड़ से भरे अशांत वातावरण में नरकीय जीवन जीते हैं | शहर की अपेक्षा गाँव का जीवन सुखमय होता है |
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Q.2. गाँव के लोग किस प्रकार से झंझटहीन जीवन बिताते हैं?
उत्तर :- गाँव के लोग शांतिपूर्ण वातावरण में रहते हैं और वहां सुखदाई जीवन जीते हैं | गाँव के लोग छल कपट व अन्य किसी भी प्रकार की उलझन रहित कृषि कार्य में हमेशा व्यस्त रहते हैं तथा समृद्धि पूर्ण प्रसन्न मन से प्रकृति की गोद का आनंद लेते हुए शांतिपूर्ण प्रदूषण रहित जीवन जीते हैं | उनका सहज स्वभाव होने के कारण सब अपने-अपने कार्यों में लीन रहते हैं और धर्म के नाम पर दान करके सुखी जीवन बिताते हैं |
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Q.3. कविता में गाँव के बाग-बगीचों की सुन्दरता का चित्रण किन पंक्तियों में किया गया है?
उत्तर :- कविता में गाँव के बाग बगीचों की सुंदरता का निम्नलिखित पंक्तियों के माध्यम से सजीव चित्रण किया गया है :-
आसपास में फुलवारी, कहीं कहीं पर बाग अनूप,
केले, नारंगी के तरूगण दिखलाते हैं सुन्दर रूप,
नूतन मीठे फल बागों से नित खाने को मिलते हैं,
देने को फुलेल-सा सौरभ पुष्प यहाँ नित खिलते हैं ।
अर्थात गाँव के आसपास सुंदर पुष्पों से युक्त फुलवारी सजी हुई है | जिसमें से निकलने वाली सुगंध से गाँव के वातावरण को मनमोहक एवं सुगंधित कर देती है, और कहीं-कहीं गाँव में बगीचे हैं, जिनमें केला, नारंगी आदि के वृक्ष अपनी सुंदरता को प्रदर्शित कर रहे हैं| जिसमें अनेक प्रकार के फलदार वृक्षों के कारण हर ऋतु में मधुर (मीठे) फलों का आस्वादन किया जाता है | फुलवारी में ऐसे पुष्प खिलते हैं जिनकी महक इत्र की तरह होती है |
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Q.4. बहता हुआ झरना हमें किस प्रकार से जीवन जीने का संदेश देता है?
उत्तर :- बहता हुआ झरना हमें निरंतर जीवन के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अर्थात् झरना कल-कल ध्वनि करता हुआ। रात दिन थकान रहित आबाध गति से प्रवाहित होता रहता है। हमें भी झरनें की तरह बिना रूके अपने लक्ष्य के प्रति प्रसन्न मन से अबाध गति से आगे बढ़ते जाना चाहिए। यहाँ कल-कल की ध्वनि झरने की प्रसन्नता का प्रतीक है। अर्थात् व्यक्ति प्रसन्न मूड किसी झरने की तरह गीत गुन गुनाता है। अतः हमें झरने की तरह ही तरंगमय जीवन जीने की कला आनी चाहिए।
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पाठ से आगे –
Q.1. आपके गाँव/शहर की ऐसी कौन-कौन-सी खास बातें हैं, जिसे आप सभी को बताना पसंद करेंगे? लिखिए।
उत्तर :- हमारा गाँव गंगा नदी के किनारे बसा एक बड़ा ही दर्शनीय गाँव है। माँ गंगा की आरती और धर्म गुरूओं का जमावड़ा लगभग सालभर देखने को मिलता है। हमारे गाँव में आम का बगीचा भी है। जहाँ हम सभी बच्चे खेलने जाते हैं। गाँव में दो तालाब भी बने है। जिसका पानी स्वच्छ और निर्मल है। ये तालाब आम के बगीचे के समीप है। आम के पेड़ की डालियाँ तालाब के पानी को चुमती रहती है। अधिकांश बच्चे इन पेड़ों पर चढ़कर तालाब में कूद कूद कर नहाते हैं। तथा बगीचे में आम लगते हैं तो हम उन्हें तोड़ तोड़कर खाते हैं। जब भी जरा सी तेज हवा या आँधी आती है तो गाँव के सभी लड़के-लड़कियाँ उसी आम के बगीचे की ओर दौड़ पड़ते है। इन्हीं पेड़ो पर सावन में झूले भी पड़ते है कुछ झले तो सदाबहार है जो कि पूरे साल डले हुए रखते हैं। जिसमें झूल झूल कर सभी बच्चे खेलते हैं। इसी बगीचे में कुछ इमली के पेड़, जामुन के पेड़ और अमरूद के पेड़ भी है। अतः हम हर मौसम में कोई ना कोई फल खाने को पा ही जाते हैं। यही नहीं बल्कि कटहल नीबू संतरा मौसमी आँवला और करौंदे के पेड़ भी इस उद्यान की शोभा में चार चाँद लगाते है। गाँव के बाहरी हिस्से में एक प्राथमिक विद्यालय और महाविद्यालय भी विद्यमान है। जहाँ विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा भी प्राप्त होती है। हमारे गाँव में एक कृषि विद्यालय भी विद्यमान है। बैंक अस्पताल और मवेशियों के लिए चिकित्सालय भी हमारे गाँव में स्थित है। गाँव की गलियाँ व नालियाँ स्वच्छ और साफ है। मेरे गाँव की अद्धितीय सौन्दर्य हम सब की गाँव से जोड़े रखता है। ये सभी विशेषताएं हमें हमारे गाँव व मातृभूमि से जोड़े रखती है।
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Q.2. आपने या आपके मित्र ने ऐसे किसी गाँव का भ्रमण किया हो, जहाँ के प्राकृतिक परिवेश/सुंदरता ने आपको प्रभावित किया हो, तो उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर :- हाँ हमने अपने मित्र का गाँव भ्रमण किया है जहाँ नदी के किनारे लहलहाते खेत हैं। उस गाँव का नाम राजनांदगाँव है। यह गाँव खैतगढ़ गाँव के अन्तर्गत आता है। खैरागढ़ में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय है। जहाँ देश विदेश से छात्र संगीत की शिक्षा ग्रहण करने आते है। गाँव का परिदृश्य जहाँ नदी के किनारे लहलहाते खेत में फसल फूलों के बाग व केला पपीता तथा अमरूद के बगीचे है। मेरे मित्र ने बताया कि खैरागढ़ विश्वविद्यालय संगीत आदि ललित कलाओं से युक्त मानव जीवन को पूर्णता प्रदान करने वाला संस्कृति एवं कलात्मकता की प्रतिमूर्ति भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इस विश्वविद्यालय की इमारत जो नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित कराई गई थी अपने आप के अद्वितीय एवं अनुपम है। इसके चारो ओर बड़े बड़े खैर तथा अन्य छायादार वृक्ष होने के कारण इसमें और भी चार चाँद लग जाती है। इसकी शोभा हमारे गाँव को और भी अधिक समृद्धि प्रदान करती है। इस गाँव की छटा हमारे मन को मोह लेती है।
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Q.3. कविता में गाँव में पाए जाने वाले पेड़-पौधों, फलों एवं फसल की बात की गई है। आपके आसपास के क्षेत्रों में कौन-कौन से पेड़-पौधों, फलों व फसल की पैदावार होती है? वर्णन कीजिए।
उत्तर :- हमारे गाँव के आस पास पीपल, नीम, बरगद, महुआ, कटहल, बेर, जामुन, पपीता, अमरूद, गेहूँ, धान और अरहर की खेती की जाती है। हमारे गाँव में गेहूँ की खेती सबकी अपेक्षा कम होती है।
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Q.4. आजकल जंगली जीव-जंतु शहरों व गाँवों में क्यों घुस आते हैं? विचार कर लिखिए।
उत्तर :- आजकल जंगली जीव जन्तु शहरों व गाँवों में इसलिए घुस जाते हैं। क्योंकि जंगल लगातार काटे जा रहे है। वहाँ उन्हें भोजन की समस्या होती है। इसलिए शहर व गाँव की ओर ये जीव चले आते हैं। जंगलों में वर्षा न होने के कारण पानी की कमी हो जाती है। और जीवन निर्वहन करने के पर्याप्त साधन न होने के कारण जंगली जीव जन्तु शहरों एवं गाँवों का रूख करने लगते है।
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भाषा के बारे में –
Q.1. कविता में आए निम्नांकित शब्दों के क्या अर्थ हैं? कविता को ध्यानपूर्वक पढ़कर इन शब्दों के अर्थ पता करके लिखिए। आप इसमें शब्दकोश की मदद भी ले सकते हैं।
प्रफुल्लित अनूप तरुगण जलाशय
छली सुनिर्मल गोधन
उत्तर :-
| शब्द | अर्थ |
| प्रफुल्लितअनूपतरूगणजलाशयछलीसुनिर्मलगोधन | अति प्रसन्नअद्धितीयवृक्षों की समूह तालाब,नलकूप, कूआँधोखेबाजअति स्वच्छपशुधन, गाय रूपी धन |
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Q.2. हिन्दी भाषा की विशेषता है कि इसमें शब्दों की पुनरुक्ति की जा सकती है।
(क) ’कल-कल’, ’छोटे-छोटे’ जैसे कई शब्दों का कविता में प्रयोग हुआ है। यहाँ एक ही तरह के शब्दों का पूर्ण रूप से दुहराव हुआ है। पाठ में आए ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए।
(ख) शब्दों की पुनरुक्ति को कुछ उदाहरणों द्वारा और समझने का प्रयास करते हैं-
1)’घर-घर’ शब्द का अर्थ हैं- हर घर। इसमें संज्ञा की पुनरुक्ति हुई है।
2)’जल्दी-जल्दी’ शब्द में कोई क्रिया कैसे हो रही है, इसका पता चलता है। इसमें क्रियाविशेषण की पुनरुक्ति हुई है।
3)’काला-काला’ शब्द में काले रंग की और अधिकता का आभास होता है। यहाँ विशेषण शब्द की पुनरुक्ति हुई है।
उपर्युक्त उदाहरणों के आधार पर दी गई तालिका में ऐसे अन्य शब्दों को सोचकर लिखिए (तालिका में एक उदाहरण दिया गया है।)
उत्तर :- (क) आस – पास
कहीं – कहीं
हरी – भरी
चुप – चाप
कभी – कभी
कल – कल
(ख)
| संज्ञा | क्रिया विशेषण | विशेषण |
| घर-घर | जल्दी – जल्दी | काला – काला |
| गाँव – गाँव | कम – कम | श्वेत-श्वेत |
| शहर – शहर | अधिक – अधिक | गोरा – गोरा |
| डहर – डहर | मन्द – मन्द | लाल – लाल |
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योग्यता विस्तार :-
Q.1. समूह गतिविधि:-
मनेाहर, पीपल, शीतल, छाया, शोभा, मोटर, झरना, सुंदर, पुष्प, फसल। मनेाहर, पीपल, शीतल, छाया, शोभा, मोटर, झरना, सुंदर, पुष्प, फसल।
उपर्युक्त शब्दों का प्रयोग करते हुए साथियों के समूह में मिलकर एक नई कविता बनाइए। आप इस कार्य में अपने शिक्षक की सहायता ले सकते हैं।
इन कविताओं को कक्षा/प्रार्थना सभा में प्रस्तुत करें और कक्षा में चार्ट पेपर पर प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर :- कच्ची गलियाँ, पीपल की छाँव
जिसकी शीतल छाया में बसा है मेरा गाँव,
बस रोज याद आता है मुझे मेरा गाँव,
वो गाँव की भोर, बैलों के गले में बंधी घंटियों का शोर
वो बरगद की शोभा, मोटर का शोर
सुंदर पुष्प, झरना, फसलें करती है हमें आत्म विभोर
साँझे आँगन, साँझे चुल्हे, पेड़ों पर पढ़ते नए-नए झूले
धूप सेकता रिश्तो का डेरा
देखो ना कितना सुंदर गाँव है मेरा |
कच्चे घरों में पक्के रिश्ते, ये तो लोग नहीं है ये है फरिश्ते,
दादी का प्यार, दादा के बाहों का घर,
फल, बाग, बगीचे सब दोस्त हैं,
यार देखो ना प्यार से ये है मेरा गाँव,
जो रक्त बनकर दिन-रात बहता है मेरे मन में |