CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 5 पर्यावरण एवं प्रकृति Chapter 5.3 बूढ़ी पृथ्वी का दुख are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 5 पर्यावरण एवं प्रकृति Chapter 5.3 बूढ़ी पृथ्वी का दुख
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अभ्यास-
पाठ से –
Q.1. पेड़ों के चित्कारने से आप क्या समझते हैं?
उत्तर :- विकास कालीन समय में निरंतर वृक्षों को काटा जा रहा है | पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने वाले एवं हमारी संस्कृति व परंपरा के प्रतीक वृक्ष मानव की तरह सुख एवं दु:ख का अनुभव करते हैं | वृक्ष हमारे जीवन के लिए जीवनदायिनी हैं | जिनसे हमें भोजन, प्राणवायु, सुकून मिलता है | हम उन्हें ही काटते जा रहे हैं | पेड़ पौधों पर जब कुल्हाड़ी आदि धारतार औजारों का प्रहार किया जाता है तो वह भी हमारी तरह अपनी सहस्त्र टहनियों रुपी हाथों को हिला कर अपने को बचाने के लिए चित्कार करते हैं | वृक्ष हम से अनुरोध करते हुए कहते हैं कि यदि इसी तरह हम नष्ट होते जाएंगे तो फिर सृष्टि पर मौजूद सभी जीवो का जीना मुश्किल हो जाएगा | अतः हमारी सुरक्षा करो ना कि हमें काटो यही मनुष्यों का दायित्व है |
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Q.2. नदी मुँह ढाँप कर क्यों रो रही है?
उत्तर :- नदी मुँह ढाँप कर इसलिए रो रही है क्योंकि उसे लोगों के द्वारा प्रदूषित करने पर भी वह निर्बाध गति से बहती चली आ रही है | हम कल कारखानों आदि के दूषित व रासायनिक जल को नदियों में बहने तथा मानव द्वारा कपड़े आदि धोकर, पशुओं को जल में नहलाकर, बहते हुए जल को प्रदूषित कर देते हैं | हम लोगों को यह समझ नहीं आता कि नदियों के जल का प्रयोग आज भी बहुत से लोग पीने, पूजा करने, खेतों की सिंचाई आदि काम में करते हैं | इसी कारण से नदी अंधेरे में मुँह ढाँप कर रोती है |
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Q.3. गुमसुम बूढ़ी पृथ्वी कभी किसी से कोई शिकायत नहीं करती। ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर :- गुमसुम बूढ़ी पृथ्वी कभी किसी से कोई शिकायत नहीं करती है | क्योंकि इस पृथ्वी पर स्थित नदी, पहाड़, पेड़-पौधों पर जो प्राकृतिक संसाधन है उनका दोहन होते वह चुपचाप देख रही है, किंतु शिकायत नहीं करती | पृथ्वी मूक की तरह बोल नहीं पाती है और वद सभी तरह के अत्याचार व प्रदूषण को सहन करती है |
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Q.4. ख़ून की उल्टियाँ करते देखा है कभी हवा को
(क) इस पंक्ति में किस समस्या की ओर संकेत किया गया है?
(ख) इस समस्या को कम करने के क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर :- (क) इस पंक्ति में जहरीले विषैले धुएँ, कारखानों से निकलने वाली गैस, वातावरण को प्रदूषित कर रही है जो मानव जन के लिए बहुत ही हानिकारक है | इस पंक्ति में वायु प्रदूषण की ओर संकेत किया गया है | जिसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां जैसे टीवी, अस्थमा आदि तेजी से फैल रही है | जिसके कारण मानव जाति निरंतर मृत्यु की ओर बढ़ रहे हैं |
(ख) इस समस्या को कम करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाए जाएँ, कारखानों की चिमनियां ऊँची लगाई जाएँ तथा कारखानों की चिमनियों में फिल्टर लगाए जाएँ, इस प्रकार का उपाय कर हम वायु प्रदूषण की समस्या को सुलझा सकते हैं |
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Q.5. कविता के अंत में कवयित्री ने आदमी के आदमी होने पर संदेह क्यों व्यक्त किया है?
उत्तर :- कविता के अंत में कवित्री ने आदमी के आदमी होने पर संदेह इसलिए व्यक्त किया गया है क्योंकि आदमी अपने हाथों से ही अपने विनाश के सामान को इकट्ठा करने पर अमादा है | मनुष्य धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी अपनी बुद्धि बल के कारण कहलाता है | किंतु एक बुद्धिमान प्राणी अपने ही विनाश का कारण क्यों बनेगा इसलिए कवयित्री को आशंका होती है कि आदमी, आदमी है भी कि नहीं |
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Q.6. पृथ्वी को बूढ़ी कहने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर :- पृथ्वी को बूढ़ी कहने का तात्पर्य यह है कि पृथ्वी में प्रकृति से प्राप्त पेड़-पौधे, पहाड़, नदियाँ सब कुछ है, किंतु आज का मनुष्य उनका दोहन करने में लगा है | जिसको वह चुपचाप देख रही है | जिस प्रकार एक बूढ़ा व्यक्ति अपने सामने सब कुछ गलत होते देखकर निर्बल होने के कारण चुपचाप देखते रहता है उसी प्रकार पृथ्वी भी बूढ़ी हो गई है |
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पाठ से आगे-
Q.1. कविता के माध्यम से प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाली किन-किन समस्याओं को उभारा गया है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :- कविता के माध्यम से प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण की समस्याओं को उभारा गया है |
वायु प्रदूषण :- जिस तरह पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं उससे लोगों का जीना दूभर हो गया है| कारखानों से निकलने वाली विषैली गैस धुएँ के रूप में वायु में घुलती चली जा रही है| जिससे मनुष्य को कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है |
जल प्रदूषण :- जल प्रदूषण से नदी, तालाब व जलाशयों में जानवरों को नहलाने से, कपड़े धोने से, कूड़ा-कचरा डालने से प्रदूषित हो रहे हैं | जिससे जल से फैलने वाली अनेक प्रकार की बीमारियाँ पैदा होती जा रही है |
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2. वर्तमान में पहाड़ों को लगातार तोड़ा जा रहा है या दोहन किया जा रहा है।
(क) आपके अनुसार इसके क्या कारण हैं? लिखिए।
(ख) इससे पर्यावरण में किस प्रकार का असंतुलन बढ़ रहा है? चर्चा कीजिए।
उत्तर :- (क) पहाड़ों को तोड़ने का तात्पर्य है कि दुर्गम जगहों पर रास्ता बनाने व आने जाने के लिए आवागमन के साधन जुटाने के लिए पत्थरों को काटकर रास्ते बनाए जा रहे हैं चट्टानों को तोड़कर रास्ते बनाए जा रहे हैं कारखाने लगाए जा रहे हैं इस प्रकार प्रकृति का दोहन किया जा रहा है
(ख) इससे हवा, पानी आदि का संतुलन बिगड़ गया है | अर्थात पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है | क्योंकि जंगल के पेड़ों की कटाई करके चट्टानों को तोड़कर लगातार पर्वतों के माध्यम से पृथ्वी का दोहन किया जा रहा है जो भूकम्प आने तथा ज्वालामुखी विस्फोट आदि के कारण हो सकते हैं। पृथ्वी से कोयला इत्यादि निकालने से भी पृथ्वी के धसने का डर भविष्य में हो रहा है। तथा पृथ्वी की उर्वरता में भी कमी आ रही है।
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Q.3. यदि सचमुच में पेड़, नदी और हवा बोल पाते तो वे अपनी पीड़ा किस प्रकार व्यक्त करते? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :- यदि सचमुच में पेड़, नदी, हवा बोल पाते तो वे अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अवश्य ही आवाज उठाते | अर्थात वे अपने अंधाधुंध दोहन का विरोध करते | नदी में प्रदूषण होता तो वह कह पाती कि प्रदूषण मत करो, मैं तुम सब जीवों की प्यास बुझाती हूं| पेड़ अपने आप को काटने का विरोध प्रकट करते हुए कहते कि मैं तुम्हें प्राणवायु देता हूं और बादलों को रोककर वर्षा करता हूं | अतः मुझे नहीं काटो | हवा कहती कि मैं तुम्हें जीवन देती हूं मुझे कल कारखानों के धुएं से प्रदूषित मत करो | इस प्रकार वे सभी अपनी अपनी पीड़ा को व्यक्त कर पाते |
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Q.4. हमारे आसपास किन-किन प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है? इन्हें रोकने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है? लिखिए।
उत्तर :- हमारे आस पास कई प्राकृतिक संसाधनों का दुरूपयोग देखने को मिलता है, जिसमें प्रमुख रूप से पेड़ पौधे से निर्मित वस्तुएं, कोयला, लोहा और अन्य प्राकृतिक वस्तुएं है। हमें इनका उपयोग सावधानी से करना चाहिए क्योंकि प्राकृतिक संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध है। यदि हम इनका उपयोग चरणबद्ध तरिके से और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से करें और इनका अन्धाधुन दोहन न करें तो यह मानव समाज के लिए लम्बें समय तक उपयोग और उपभोग के लिए उपलब्ध रह सकती है। ऐसे प्राकृतिक साधनों का उपयोग में हमें अतरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जिससे हम इन संसाधनों का प्रयोग अधिक समय तक कर सके। और यदि सम्भव हो तो इनके विकल्प और पुनः प्रयोग के बारें में हमें प्रयास करने होंगे। जिससे इनका दोहन कम किया जा सके।
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Q.5. हमारी संस्कृति व परंपराओं में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जिनमें पेड़ों को बचाने के प्रयास नज़र आते हैं,जैसे पेड़ों को राखी बाँधना, गोद लेना और किसी न किसी व्रत व पर्व में उसकी पूजा करना आदि।
क्या आपके परिवेश में पेड़ों से जुड़े पर्व या व्रत हैं? इनके बारे में जानकारी इकट्ठा कर निम्नलिखित सारणी में लिखिए।
उत्तर :-
| पेड़ का नाम | इनसे जुड़े व्रत पर्व | जुड़ी मान्यताएँ | फलदार हैं या नहीं | पत्तियों के बारे में |
| उदाहरण :- पीपल | पितृ :- अमावस्या | पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है | फलदार है परंतु खाने के लिए उपयोगी नहीं | गहरे हरे रंग की दिल के आकार की चिकनी एवं जालीदार |
| बरगद | ज्येष्ठ माह की अमावस्या तथा वट सावित्री व्रत पूजन | पति की रक्षा एवं आयु वर्धन हेतु | फलदार है परन्तु खाने के लिए उपयोगी नहीं है | गहरे हरें रंग की अण्डे के आकार की चिकनी एवं जालीदार |
| नीम | देवी शीतला माता की पूजा एवं हरेली का त्योहार | पूजनीय है तथा औषधी व शुद्ध हवा के लिए उपयोगी है | फलदार है परन्तु खाने योग्य नहीं है | कटीली झाड़ी जैसी नुकीली पत्तियाँ होती हैं |
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भाषा के बारे में –
Q.1. कविता में पेड़ों, नदियों, पहाड़ों आदि को मानव के समान व्यवहार करते बताया गया है, जैसे पेड़ चीत्कार कर रहे हैं, नदी रो रही है, आदि।
इस प्रकार के प्रयोग को ’मानवीकरण अलंकार’ कहा जाता है।
मानवीकरण अलंकार का प्रयोग जिन-जिन पंक्तियों में हुआ है, उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर :- मानवीकरण अलंकार के उदाहरण :-
- सपनों में चमकती कुल्हाड़ियों के भय से पेड़ों की चित्कार |
- बचाव के लिए पुकारते हजारों हजार हाथ |
- अंधेरे में मुंह ढांप कर किस कदर रोती हैं नदियां |
- मौन समाधि लिए बैठे पहाड़ का सीना |
- हथौड़ो की चोट से टूटकर बिखरते पत्थरों की चीख |
- खून की उल्टियां करते देखा है कभी हवा को |
- कभी शिकायत ना करने वाले गुमसुम बूढ़ी पृथ्वी से उसका दुःख |
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Q.2. कविता में ऐसे शब्दों का प्रयोग हुआ है जिनमें स्थानीय/बोलचाल की भाषा का प्रभाव झलकता है। जैसे‘महसूसा’ अर्थात् ‘महसूस किया’, ‘बतियाया’ अर्थात् बात की। इसी प्रकार के अन्य शब्दों को स्वयं से ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर :- हजारों – हजार हाथ
भीतर धमस
मुँह ढ़ांप
किस कदर
महसूसा
दुपहरिया
पिछवाड़े
बतियाया
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Q.3. नीचे लिखे वाक्यों को पढ़िए-
(क) किस कदर रोती हैं नदियाँ। कदर
(ख) हम आपकी बहुत कदर करते हैं। कदर
दोनों वाक्यों में ’कदर’ शब्द के अर्थ अलग-अलग हैं। पहले वाक्य में इसका अर्थ ‘के समान’ और दूसरे वाक्य
में ’सम्मान/आदर’ है। ऐसे शब्द जिनके एक से ज्यादा अर्थ होते हैं, उन्हें हम अनेकार्थी शब्द कहते हैं।
नीचे दिए गए शब्दों के अलग-अलग अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
सीना, जीना, उत्तर, अंक, चरण
उत्तर :- 1) सीना – छाती- जवानों के हौंसले को देखकर सीना चौड़ा हो गया।
सीना – सिलाना – माँ को कपड़े सीना आता है।
2) जीना – जीवित रहना – कितनी भी परेशानी क्यों ना आ जायें पर जीना तो पड़ता है।
जीना – सीढ़ी – मकान का जीना लोहे का बना हुआ है।
3) उत्तर – जबाव – तुम्हें मेरे प्रश्नों के उत्तर तो देने ही पड़ेंगे।
उत्तर – दिशा – राम का घर उत्तर दिशा की ओर है।
4) अंक – संख्या – मुझे परीक्षा कें कम अंक मिले हैं।
अंक – गोंद – बच्चें के लिए माँ के अंक हो सुरक्षित कोई जगह नहीं।
5) चरण – पद – कई पद पढ़ने के बाद कविता समझ आई।
चरण – पैर – बड़ों के चरण – पद स्पर्श करने चाहिए।
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Q.4. ‘क्या‘ शब्द का प्रयोग करके बनाए गए प्रश्नवाचक वाक्यों को पढ़िए-
(क) क्या आप घर जा रहे हैं?
(ख) आपने नाश्ते में क्या खाया?
भाषा में प्रश्नवाचक वाक्य दो प्रकार के होते हैं: ‘‘हाँ-ना‘‘ उत्तरवाले प्रश्नवाचक वाक्य और सूचनाओं की
अपेक्षा रखनेवाले प्रश्नवाचक वाक्य। पहलेवाले प्रश्नवाचक वाक्य का उत्तर हाँ/नहीं में ही होगा। इसमें क्या
का प्रयोग हमेशा वाक्य के शुरू में ही होगा।
(क) ’हाँ-ना’ उत्तरवाले पाँच प्रश्नवाचक वाक्य सोचकर लिखिए।
उत्तर :- प्रश्न वाचक वाक्य दो प्रकार से बनाये जाते है :-
(क) हां या न उत्तर वाले प्रश्नवाचक क्या से प्रारंभ होने वाले वाक्यों का उत्तर हां या नहीं में होता है।
1) क्या आप घर जा रहे है।
उ. हां या नहीं
(ख) प्रश्नवाचक शब्द हिन्दी वाक्य के बीच में आने वाला जिनका उत्तर लम्बा होता है।
उदाहरण :- प्र. आपने नाश्ते में क्या खाया ?
उ. मैने नाश्ते में सेव खाया |
i) इसी तरह आप भी निम्नलिखित वाक्य से सूचनात्मक प्रश्नवाचक वाक्य बनाइए ?
वाक्य :- हथौड़ों की चोट से कहीं दुपहिया में भी पत्थर चीख उठे |
प्रश्नवाचक वाक्य :- किस की चोट से भरी दुपहरिया में भी पत्थर चीख उठें
या
हथौड़ों की चोट से कब पत्थर चींख उठे ?
सूचनात्मक :- हथौड़ो की चोट कि दुपहरिया में पत्थर चीखते हैं।
या
क्या हथौड़ों की चोट से भरी दुपहरिया में पत्थर चीख उठतें है ?
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योग्यता विस्तार :-
Q.1. चिपको आंदोलन पर्यावरण रक्षा का आंदोलन है। इसे किसानों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। एक दशक से भी ज्यादा चले इस आंदोलन में भारी संख्या में स्त्रियों ने भाग लिया था। ’चिपको आंदोलन’ के बारे में शिक्षकों से अथवा पुस्तकालय से और भी जानकारी इकट्ठा कीजिए तथा इस जानकारी को निम्न बिन्दुओं के अनुसार लिखिए-
(क) यह आंदोलन कहाँ हुआ?
(ख) इसके सूत्रधार कौन थे?
(ग) इसके पीछे क्या सोच/विचार था?
(घ) इसकी सफलता किस हद तक रही?
उत्तर :- (क) चिपको आंदोलन की पहली लड़ाई 1973 की शुरूआत में उत्तराखंड के चमोली जिले में हुई।
(ख) इस आंदोलन की शुरूआत चंडी प्रसाद भट् और गौरा देवी की ओर से की गई थी और भारत के प्रसि़द्ध सुन्दरलाल बहुगुणा ने इसे आगे बढ़ाया तथा स्वयं इसके सूत्रधार बने।
(ग) चिपको आंदोलन एक पर्यावरण रक्षा आंदोलन था इसके पीछे का उद्देश्य वृक्षों की कटाई को रोकना तथा पर्यावरण को दूषित होने से बचाना था।
(घ) वनों की कटाई के खिलाफ यह आन्दोलन काफी हद तक सफल रहा। इसे न केवल लोगों का समर्थन मिला बल्कि मीडिया में अच्छा कबरेज मिला सरकारी महक में मान्यता भी मिली। क्योंकि कटाई पर तो रोक लगी, जो अब तक भी जाती है।
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Q.2. तेजी से बढ़ते शहरीकरण व औद्योगिकीकरण से किस प्रकार पर्यावरण प्रभावित हो रहा है? इस विषय पर समूह में चर्चा कीजिए।
उत्तर :- विद्यार्थी गण शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।