CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.3 अखबार में नाम are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.3 अखबार में नाम
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. अनंतराम के बेहोश हो जाने के बाद गुरदास ने क्या सोचा और क्यों?
उत्तर :- अनंतराम के बेहोश हो जाने के बाद गुरुदास ने सोचा कि यदि वह अनंतराम की जगह बेहोश होकर गिर पड़ा होता तथा उसी के समान उसे भी चोट आई होती तो अनंतराम की तरह सबकी नजर उस पर होती और स्कूल के हेड मास्टर समेत सभी शिक्षक छात्र उसे जान जाते वह स्कूल में प्रसिद्ध हो जाता |
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Q.2. गुरदास की क्या महत्वाकांक्षा थी?
उत्तर :- गुरदास की महत्वाकांक्षा अखबार में मोटे अक्षरों में नाम छपने की थी | वस्तुतः गुरूदास को प्रसिद्ध पाने की विशेष लालसा थी |
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Q.3. गुरदास के पिता की उससे क्या अपेक्षा थी?
उत्तर :- गुरुदास के पिता चाहते थे कि उनका बेटा उनका नाम रोशन करें, ख्याति प्राप्त करें, कुछ अच्छा काम कर अपना नाम कमाए |
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4Q.. गुरदास अपनी तुलना बोरी के एक दाने से क्यों करता था?
उत्तर :- गुरुदास अपनी तुलना बोरी के एक दाने से इसलिए करता है, क्योंकि एक-एक दाना मिलकर बोरी वजनदार होती है, किंतु बोरी में एक छेद होने पर दाना नीचे गिर जाता है |वह एक दाना भी अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह किसी भूखे का पेट भर सकता है | इसी प्रकार गुरुदास एक व्यक्ति है, जो अन्य लोगों की तरह अपने पिताजी का नाम रोशन कर ख्याति प्राप्त करना चाहता है |
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Q.5. गुरदास अखबार में नाम छपवाने के लिए क्यों उतावला था?
उत्तर :- गुरुदास अखबार में नाम जुड़वाने के लिए इसलिए उतावला था क्योंकि उसे सभी लोग जानने लगे अर्थात अखबार के माध्यम से लोग उसे जाने व पहचाने, वह भी प्रसिद्ध हो जाए और लोग उसके विषय की भी चर्चा करें |
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Q.6. अखबार में देखकर अपने मुहल्ले के लोगों का नाम उस पर क्या प्रतिक्रिया होती थी?
उत्तर :- अखबार में देखकर अपने मोहल्ले के लोगों का नाम गुरदास मन मसोस कर रह जाता था | उसकी महत्वाकांक्षा उग्र हो उठती थी | वह बचपन से ही नाम कमाना चाहता था| समय के साथ ही साथ उसकी यह इच्छा तीव्र तर होती गई | वह दूसरों का नाम अखबार में देखकर दु:खी व निराश हो जाता था |
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Q.7. अदालत ने गुरदास को हर्जाना दिलाने से क्यों इंकार किया?
उत्तर :- अदालत ने गुरुदास को हर्जाना दिलाने से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि अपने बयानों में उसने यह साबित किया था कि वह अखबार में नाम छपवाने के लिए जानबूझकर मोटर के सामने आ गया था | अतः अदालत ने मोटर दुर्घटना में आहत गुरदास को हर्जाना दिलाने से इंकार कर दिया |
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पाठ से आगे
Q.1. किसी दिन का एक हिंदी अखबार लीजिए और एक पृष्ठ देखकर बताइए कि उसमें किस-किस के नाम छपे हैं? और किस बारे में उनके नामों की चर्चा हुई है?
उत्तर :- विद्यार्थीगण स्वयं करें |
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Q.2. अपने आस-पास के व्यक्तियों के अच्छे कार्यों को जानिए और उनके कार्यों के बारे में लिखिए।
उत्तर :- मेरे घर के पास में एक अध्यापक रहते हैं जो पहले एक सरकारी विद्यालय में अध्यापन का कार्य करते थे | हमने हमेशा उन्हें समय का पाबंद और समाजसेवी के रूप में ही देखा है | सेवानिवृत्त होने के बाद अब वह सभी वर्ग के लोगों को मुफ्त में शिक्षा देने का कार्य करते हैं | उन्हें कभी भी धर्म, जाति या छोटा-बड़ा देखकर मदद करते किसी ने नहीं देखा होगा | उनकी इस सेवा भाव को देखकर सभी लोग उनका बड़ा सम्मान करते हैं| उन्होंने अपने जीवन के कठिन समय को बड़े ही नजदीक से देखा है | परंतु आज भी उन परेशानियों की सिकन उनके माथे पर नहीं दिखती | वह हमेशा कहते हैं कि इंसान अकेला ही इस दुनिया में आया है और अकेला ही जाएगा | परंतु जो इंसान का कर्म होता है वह उसे सदियों तक जिंदा रखता है |
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Q.3. ‘ये आदमी चलता-चलता अखबार पढ़ने में इतना मगन था कि उसने सुना ही नहीं।’ इस वाक्य में गुरदास के अखबार पढ़ने में मगन होने की बात कही गई है! आप किस-किस काम में मगन होते हैं? लिखिए।
उत्तर :- मुझे पुस्तकें पढ़ना बहुत ही अच्छा लगता है | नई पुस्तके देखते ही मेरा मन उस पर अपने आप मोहित हो जाता है | मैं येन-केन प्रकारणेन उसे पाने के बारे में सोचने लगता हूं | कई बार ऐसा करना मुझे खतरे में भी डाल देता है | परंतु इस प्रबल इच्छा का अंत होने का नाम ही नहीं लेता है |
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Q.4. ’’अखबार में अपने नाम छपने की लालसा लिए विचार मग्न गुरुदास सड़क पर चलते हुए मोटर की ठोकर से दुर्घटनाग्रस्त हो गया।’’ गुरुदास द्वारा सड़क पर चलते हुए विचार में खो जाना कहाँ तक उचित था ? सतर्क उत्तर दीजिए।
उत्तर :- इंसान का मन बड़ा ही चंचल होता है, कुछ ही पलों में ना जाने उसमें कितने विचार आते हैं | जिसका वर्णन करना संभव ही नहीं हो पाता है | उसी प्रकार से प्रसिद्ध होने की लालसा गुरुदास के मन को पल प्रतिपल विचलित करती रहती है | वह किसी भी प्रकार से अपनी फोटो अखबार में छपी हुई देखना चाहता है, परंतु वह कर्म को सही दिशा दिए बिना ही यह सब संभव करने का प्रयास करता है, जो कि असंभव है | अतः मेरा मानना है कि इंसान को अपने कर्म और कर्तव्य को ध्यान में रखना चाहिए, जिससे वह प्रसिद्धि और प्रगति दोनों को ही ग्रहण कर सकता है | परंतु यदि यह प्रसिद्धि बिना कर्म और मेहनत के मिले तो न हीं उसका महत्व होगा न ही वह बहुत दिनों तक याद रखा जाएगा | अंन्तः प्रसिद्धि का विचार आना तो अपने वश में नहीं है, परंतु उसे सार्थक बनाने का यदि प्रयास किया जाए तो अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी |
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भाषा के बारे में :-
Q.1. अनन्त को अनंत, सम्बन्ध को संबंध, चञ्चल को चंचल की तरह भी लिखा जा सकता है। शब्द को संक्षिप्त कर लगाया गया बिंदु अनुस्वार कहलाता है। दिए गए उदाहरण के आधार पर आप भी पाठ में आए कुछ शब्दों को विस्तारित व संक्षिप्त कर लिखिए। यह भी बताइए कि अनुस्वार लगे शब्दों को विस्तारित करने के नियम क्या हैं?
उत्तर :- अनंतराम = अनन्तराम
अनंत = अनन्त
परंतु = परन्तु
निर्द्वद्वं = निर्द्वद्वंव
प्रशंसा = प्रशन्सा
संतोष = सन्तोष
संचित = सन्चित
बसंत = बसन्त
तंग = तन्ग
संध्या = सन्ध्या
चिंताजनक = चिन्ताजनक
भयंकर = भयन्कर
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Q.2. पूर्ति, प्रारूप, पर्व, प्रखर, क्लर्क, राष्ट्र शब्दों में ’र’ के भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं।
पूर्ति – प + ऊ + र् + त + इ
प्रारूप – प् + र + आ + र + ऊ + प्
राष्ट्र – र + आ + ष् + ट् + र
पर्व – प् + अ + र् + व
क्लर्क – क् + ल् + अ + र् + क
प्रखर – प् + र + ख् + अ + र
(जहाँ ’र्’ के साथ स्वर है वहाँ ’र’ पूरा है जहाँ स्वर नहीं है वहाँ ’र्’ आधा है।)
इसी तरह भिन्न रूप में प्रयुक्त ’र’ वाले शब्दों की सूची बनाइए और इनकी प्रकृति को समझिए।
उत्तर :- प्रश्न = प् + ट् + अ + श् + न् + अ
प्रचुर = प् + ट् + अ + च् + उ + र् + अ
प्रथम = प् + र + अ + थ् + अ + म् + अ
प्रकार = प् + र् + अ + क् + आ + र् + अ
प्रभात = प् + र् + अ + भ् + आ + त् + अ
प्रमाण = प् + र् + अ + म् + आ + ण् + अ
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Q.3. इन वाक्यों को पढ़िए-
(क) राम सेब ही खाता है।
(ख) राम सेब भी खाता है।
दोनों वाक्यों में दो शब्द ’भी’ और ’ही’ आगे आने वाले शब्दों में अर्थ को बदल रहे हैं। पहले वाक्य के संदर्भ में कहा जा सकता है कि राम केवल सेब खाता है, कोई अन्य फल नहीं। यहाँ ’ही’ का प्रयोग ’एकमात्र’ का अर्थ देता है और वाक्य में विशेष बल देता है।
दूसरे वाक्य में ’भी’ में समावेशन का प्रभाव है कि राम सेब के साथ-साथ अन्य फल भी खा सकता है। इसी तरह से आप ’ही’ व ’भी’ का प्रयोग करते हुए पाँच-पाँच वाक्य बनाइए।
उत्तर :- 1) रीता आम ही खाती है
रीता आम भी खाती है |
2) श्याम ही पुस्तक पढ़ता है
श्याम भी पुस्तक पढ़ता है |
3) रजत ही नहीं आया
रजत भी नहीं आया |
4) हमें कल ही जाना है
हमें कल भी जाना है |
5) रीत ही अच्छी लड़की है
रीत भी अच्छी लड़की है |
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योग्यता विस्तार :-
Q.1. अपने गाँव, मुहल्ले या कस्बे में घटी किसी घटना को एक खबर के तौर पर लिखिए।
उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें।
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Q.2. कहानीकार ’यशपाल’ की जीवनी अन्य स्रोतों से पढ़कर लिखिए।
उत्तर :- यशपाल की जीवनी :- यशपाल का जन्म 3 दिसंबर 1903 में फिरोजपुर छावनी के एक खत्री परिवार में हुआ था | उनके पिता हीरालाल एवं माता प्रेमा देवी आर्यसमाजी थे| पंजाब के क्रांतिकारी नेता लाला लाजपत राय से उनका संपर्क हुआ तो वह बड़े होकर स्वाधीनता आंदोलन से भी जुड़े | भगत सिंह से यशपाल की घनिष्ठता थी. उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बीए किया तथा नाटककार उदयशंकर से उन्हें लेखन की प्रेरणा मिली| देशभक्त क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव से प्रेरित होकर इन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया | वे एक निर्भीक वक्ता, स्पष्ट वादी और राष्ट्रवादी लेखक थे | अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन करते हुए अनेक बार जेल गए | क्रांतिकारी दल से जुड़े रहने के कारण उनमें थोड़ी उग्रता देखी गई | यशपाल भारतीयता के साथ-साथ पाश्चात्य विचारधारा से भी प्रभावित रहे हैं |
यशपाल को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में कौन कौन सा पुरस्कार प्राप्त हुआ :-
यशपाल (3 दिसंबर 1903- 26 दिसंबर 1918) हिंदी साहित्य के प्रेमचंदोत्तर युगीन कथाकार हैं | ये विद्यार्थी जीवन से ही क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े थे | इन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1960 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था |
यशपाल द्वारा लिखित उपन्यास :- यशपाल जी का ‘दिव्या’ एक काल्पनिक ऐतिहासिक उपन्यास है | उन्होंने इसे मार्क्सवादी दृष्टिकोण से लिखा है | इस उपन्यास की नायिका दिव्या अनेक प्रकार के संघर्ष झेलती हैं |
यशपाल की कहानियों में किस विचारधारा का प्रभाव दिखता है :- वे एक सफल कहानीकार, निबंधकार, नाटककार रहे हैं | यशपाल मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित रहे हैं, अतः उनकी रचनाओं पर मार्क्सवाद का प्रभाव है |
यशपाल की रचनाएं :- यशपाल एक समर्थ लेखक रहे हैं | 1940 से 1976 तक उनके कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं | 17 वाँ संग्रह मृत्युप्रान्त प्रकाश में आया, जिनमें कुल 206 कहानियां संग्रहित है | आपने तीन एकांकी, 10 निबंध संग्रह, तीन संस्मरण पुस्तकें तथा 8 बड़े व 3 लघु उपन्यास लिखे, जो प्रकाशित हो चुके हैं | सिंहावलोकन नाम से आप ने अपनी आत्मकथा लिखी | आपने विप्लव नामक पत्रिका का संपादन भी किया , यशपाल की प्रमुख रचनाओं का नामोंउल्लेख इस प्रकार है :-
कहानी संग्रह :- तर्क का तूफान ,धर्म युद्ध ,ज्ञानदास ,फूलों का कुर्ता |
उपन्यास :- देशद्रोही , मनुष्य के रूप , झूठा सच , दिव्या आदि |
निबंध संग्रह :- चक्कर, बात बात में |
यशपाल की कहानी कला :- यशपाल ने अपने कथा साहित्य में सामाजिक यथार्थ का चित्रण किया है | उन्होंने मिथ्या नैतिक आदर्शों पर तीव्र कटाक्ष किया है | उनकी कहानियों में सामाजिक स्वतंत्रता, आर्थिक विषमता तथा यौन भावना की प्रधानता देखी जाती है | उनकी कहानियों का कथानक चुस्त, व्यंजक और वास्तविक चरित्रों पर आधारित होते हैं| जैसे उनकी कहानी दु:ख में यह सिद्ध किया है कि निम्न वर्गीय श्रमजीवी व्यक्ति का दु:ख और परोपजीवी उच्च वर्ग के व्यक्ति का दु:ख एक नहीं होता |
पुरस्कार :- देव पुरस्कार, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, पद्म भूषण, मंगला प्रसाद पारितोषिक, साहित्य अकादमी पुरस्कार |
मृत्यु :- यशपाल जी उत्कृष्ट श्रेणी के उपन्यासकार थे | इन्होंने शहीद भगत सिंह के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई भी लड़ी | पद्मभूषण यशपाल जी की मृत्यु 24 जुलाई 2017 को नोएडा, उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल में हुई |
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Q.3. समूह में चर्चा कीजिए कि सड़क पर चलते हुए हमें किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
उत्तर :- सड़क पर चलते समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :-
1) सड़क पर चलते समय हमें बाएँ तरफ चलना चाहिए |
2) हमें सड़क पर चलते समय दोनों तरफ दाएँ और बाएँ देखकर सड़क को पार करना चाहिए |
3) सड़क पर चलने के लिए बाएँ तरफ बने फुटपाथ का प्रयोग करना चाहिए |
4) सड़क को पार करते समय जेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग करना चाहिए |
5) सड़क पर हमें अकेले चलना चाहिए, झुंड बनाकर नहीं चलना चाहिए |
6) सड़क पर चलते समय हमें मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए |
7) सड़क पर चलते समय हमें ईयरफोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए |