CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.2 आ रही रवि की सवारी – CGBSE Solutions PDF

CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.2 आ रही रवि की सवारी are given below for Hindi Medium Students.

CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 7 विविध Chapter 7.2 आ रही रवि की सवारी


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अभ्यास-

पाठ से :-

Q.1. ‘बादलों-से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी’ पंक्ति का क्या आशय है?

उत्तर :- सूर्य की किरणें प्रातः काल बादलों में फैलती हैं तो ऐसा लगता है कि बादल सोने की पोशाक धारण किए हुए हैं | अर्थात सवेरा होने पर पुष्प विकसित हो चुके हैं जो कि उस दृश्य को और भी मनमोहक बना रहे हैं | आसमान में विचरण करने वाले बादल धूप पड़ने के कारण स्वर्णिम हो गए हैं | स्वर्ण जैसे चमकते हुए वस्त्र धारण किए हुए बादल अनुचरों (सेवकों) की भांति सूर्य के पीछे पीछे चल रहे हैं | सूर्य का अनुपम सवारी के साथ आगमन हो रहा है |

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Q.2. रात का राजा किसे कहा गया है और वह भिखारी बनकर क्यों खड़ा है?

उत्तर :- रात के राजा चंद्रमा को कवि ने कहा है कि जो प्रातः काल सूर्योदयोपरान्त कुछ समय भिखारी के समान दिखाई देता है और रात के अंधकार के साथ तारक समूह अदृश्य हो जाते हैं | अर्थात जिस प्रकार सूर्य अपने प्रकाश से संपूर्ण संसार को प्रकाशित करके सभी प्राणियों को जीवन देता है, उसे दिन का राजा कहा गया है | ठीक उसी प्रकार चंद्रमा भी रात्रि के अँधेरे में अपनी चाँदनी बिखेर कर रात्रि को ध्वलित करते हुए ठंडक प्रदान करता है,रात्रि को सुहावनी बना देता है | चंद्रमा को ही रात का राजा कहा गया है | सूर्य की चमक के समक्ष दिन में चंद्रमा अस्तित्वहीन हो गया था, सँवेरे सूर्य के निकलने पर चंद्रमा भी दिखाई दे रहा था, जिस प्रकार राजा के आने की प्रतीक्षा तथा कुछ पाने की लालसा से भिक्षुक रास्ते में दोनों तरफ खड़े रहते हैं, ठीक उसी प्रकार आकाश मार्ग में सूर्य के निकलने पर भिखारी की भांति खड़ा दिखाई दे रहा था |

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Q.3. रवि की सवारी आने पर क्या-क्या हो रहा है? उसे अपनी भाषा में लिखिए।

उत्तर :- रवि की सवारी आने पर उनका रथ सोने से बना हुआ सजा हुआ है | उनके सहयोगी सोने की पोशाक पहने हुए हैं, तथा जिस रास्ते से वह गुजरने वाला है वहाँ फूल खिले हुए हैं, जो उनका स्वागत करते हैं, तथा पक्षीगण उसके यशोयान के लिए गीत गा रहे हैं | सूर्योदय के मनोहारी दृश्य को देखकर कवि का मन मयूर नर्तन करना चाहता है, किंतु चंद्रमा को देखकर ठिठक जाता है | अर्थात स्मरण रहे कि सुबह-सुबह चंद्रमा कम ही दृष्टिगोचर होता है | 

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Q.4. ‘‘चाहता, उछलूँ विजय कह,

पर ठिठकता देखकर यह-

रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी।’’

उपर्युक्त पंक्तियों को कुछ इस प्रकार भी लिखा जा सकता है-

’’मैं चाहता हूँ कि विजय कहकर उछल पड़ूँ, लेकिन यह देखकर ठिठक जाता हूँ कि रात का राजा (चंद्रमा) राह में भिखारी बन कर खड़ा हुआ है।’’

इसी प्रकार आप अपनी भाषा में नीचे दी गई पंक्तियों को लिखिए।

‘‘विहग, बंदी और चारण,

गा रहे हैं कीर्ति-गायन,

छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फौज सारी।’’

उत्तर :- उपर्युक्त पंक्तियों को कुछ इस प्रकार भी लिखा जा सकता है :- 

            मैं चाहता हूं कि विजय कहकर उछल पड़ूँ, लेकिन यह देख कर ठिठक जाता हूं कि रात का राजा (चंद्रमा) राह में भिखारी बन कर खड़ा हुआ है |

      मेरी सवारी के आते ही (पक्षी,बंदी) चारण, कवि बनकर मेरे आने की खुशी में यशोगान कर रहे हैं और तारों की फौज जो खड़ी थी वह मैदान छोड़कर भाग रही है | अर्थात

            सूर्य के निकलने पर पक्षी चहचहाने लगे मानो वे अपने कलरव से दिन के राजा सूर्य का यशोगान कर रहे हैं |

             जिस प्रकार युद्ध के मैदान में पराजित दिखती हुई सेना मैदान छोड़कर भाग जाती है | उसी प्रकार सूर्य रूपी राजा के समक्ष आकाश में विकसित तारेगण भी छिप गए हैं |

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पाठ से आगे-

Q.1. तारों को फौज, पक्षियों को चारण और चाँद को रात का राजा कहकर संबोधित किया गया है। इसी तरह इन्हें आप क्या कहेंगे?कल्पना कर लिखिए।

उत्तर :- 

जंगल के पेड़ों को         =         राजा के सिपाही, जंगली वृक्ष, वन वृक्ष |

फूलों के बगीचे को        =         प्रजा, फलवाही, पुष्पवाटिका |

बगुलों की कतार को     =        श्वेत माला, वककतार |

सूरज को                     =         राजा दिन का राजा |

धूप को                        =         राजा की आभा, राजा का तेजोमय, सूर्य का प्रकाश |

चाँदनी को                   =         ज्योत्सना, चाँद की आभा, चाँदनी |

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भाषा के बारे में :- 

1.Q. (क) कलि-कुसुम, कीर्ति-गायन में दो शब्दों के बीच ‘-‘ का चिह्न लगा है। इस तरह के पदों को सामासिक पद कहते हैं। इनमें बीच के कुछ शब्दों का लोप होता है और उनके स्थान पर इस (-) चिह्न का उपयोग किया जाता है। इसे सामासिक चिह्न (योजक चिह्न) भी कहा जाता है।

उदाहरण- कीर्ति-गायन – कीर्ति का गायन माता-पिता – माता और पिता

(ख) इसी तरह के और भी सामासिक पद खोजकर लिखिए।

उत्तर :- (क) कीर्ति – गायन = कीर्ति का गायन

                  माता – पिता =  माता और पिता

(ख) भाई – बहन  =   भाई और बहन

       दिन – रात    =   दिन और रात

       छोटा – बड़ा  =   छोटा और बड़ा

       कम – ज्यादा =   कम और ज्यादा

       राष्ट्र – गीत    =    राष्ट्र का गीत

       बादलों से     =    बादलों के समान

       मरण समान  =    मरने के समान

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Q.2. कविता से उन पंक्तियों को छाँट कर लिखिए जिनमें मानवीकरण किया गया है?

जैसे- विहग, बंदी और चारण, गा रहे हैं कीर्ति-गायन।

उत्तर :- 1) बादलों से अनुचरों के स्वर्ण की पोषाक धारी ।

            2) छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फौज सारी ।

            3) रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी ।

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योग्यता विस्तार-

Q.1. इस कविता की एक धुन बनाइए और समूह गीत के रूप में अपने दोस्तों के साथ गाइए।

उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें।

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Q.2. कविता में सूर्योदय का वर्णन किया गया है। इसी तरह आप सूर्यास्त का वर्णन कीजिए।

उत्तर :- कवि सूर्यास्त का वर्णन करते हुए कहता है कि सूर्यास्त के समय वातावरण बहुत ही शांत एवं उदास हो जाता है | सूर्य अपने चारों ओर लालिमा छोड़ता है, और धीरे-धीरे अस्त हो जाता है | सूर्यास्त में अंधेरा घिरते देख कर बहुत अच्छा लगता है| सब पशु-पक्षी अपने-अपने घरों की ओर चल देते हैं | वातावरण इतना शांत होता है कि न चाहते हुए भी तन-मन और हृदय शांत होकर अपनी आंखें बंद कर लेना चाहता है | यह दृश्य अतुलनीय है| यह सुंदरता प्रत्येक संध्या को देखने के लिए मिलती है |

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Q.3. हरिवंश राय बच्चन की अन्य रचनाएँ अपनी पुस्तकालय से लेकर पढ़िए और उन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर :- हरिवंश राय बच्चन (27 नवंबर 1907 – 18 जनवरी 2003 ) हिंदी भाषा के एक कवि और लेखक थे | वह हिंदी कविता में उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक थे | उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है | भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं| उनकी मृत्यु 18 जनवरी 2003 में सांस की बीमारी की वजह से मुंबई में हुई थी | उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी का अध्यापन किया | बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ रहे | अनंतर राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे | बच्चन जी की गिनती हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है |

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