CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 13 अधिकार are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 13 अधिकार
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प्रश्न 01 : दास प्रथा से लोगों को किस तरह के अधिकार प्रभावित होते थे?
उत्तर : दास प्रथा बहुत ही अमानवीय प्रथा थी उस समय इनके लिए कोई अधिकार नहीं थे। ये केवल अपने मालिक के रहमो करम पर निर्भर रहते हैं। इन्हें न तो शिक्षा, स्वास्थ्य भोजन आदि जैसे मूलभूत अधिकार भी प्राप्त नहीं थे। इनके साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया जाता था। इन्हें अपने पूरे जीवन भर गुलामी का कार्य करना पड़ता है।
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प्रश्न 02 : अफ्रीका तट से लाए जाने वाले दासों की तुलना किसी भी लोकतांत्रिक देश के नागरिकों की जीवन शैली से कीजिए?
उत्तर :
| अफ्रीकी दास | लोकतांत्रिक देश के नागरिक |
| i) इन लोगों का जीवन नारकीय था उन्हें स्वतंत्रता का कोई अधिकार प्राप्त नहीं था।ii) इन्हें स्वास्थ्य शिक्षा भोजन आदि जैसी सुविधाएं प्राप्त नहीं थीiii) दासों को जीवन यापन करने के लिए मालिकों पर निर्भर रहना पड़ता है।iv) इन्हें जीवन भर अत्याचार सहना पड़ता या दासों को कानूनी अधिकार नहीं थे। | i) इनके जीवन में सभी मूलभूत अधिकार थे। गरिमामयी जीवन जीते थे।ii) इन्हें स्वास्थ्य शिक्षा जैसी अनेक सुविधाएं प्राप्त है।iii) लोकतंत्र में व्यक्ति अपने जीवन यापन करने के लिए कोई भी कार्य कर सकता है।iv) लोकतंत्र में व्यक्ति को कानूनी अधिकार प्राप्त है। जिसका वह कभी भी उपयोग कर सकता है। |
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प्रश्न 03 : अफ्रीका तथा यूरोपीय देश व्यापार के लिए एक – दूसरे पर किन – किन चीजों के लिए निर्भर थे?
उत्तर : अफ्रीकी और यूरोपीय देशों में व्यापार मुख्य रूप से दासों का ही होता था। यूरोप, फ्रांस, इंग्लैंड, के व्यापारी मुख्य रूप से अपने यहां बगानों और कारखानों में कार्य करने के लिए अफ्रीका और एशिया से दासों का ही व्यापार करते थे।
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प्रश्न 04 : सार्वजनिक स्थान किन्हें कहते है कुछ उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर : ऐसे स्थान जिसका प्रयोग कोई भी व्यक्ति कर सकें उस स्थान को सार्वजनिक स्थान कहते हैं। जैसे – बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, सिनेमा हाल, सड़क, फुटपात, हास्पीटल आदि।
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प्रश्न 05 : इस भाषण में अश्वेतों की किन – किन वेदनाओं का उल्लेख किया गया है?
उत्तर : मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने भाषण में अमेरिका में हो रहे अश्वेत लोगों पर अत्याचार का जिक्र करते हैं, उस समय अश्वेत लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया था | अश्वेत लोग वहां के श्वेत लोगों के साथ नहीं रह सकते थे | अश्वेत बच्चों के साथ भेदभाव का बर्ताव किया जाता था | इनकी स्थिति बहुत दयनीय थी | इन्हें अलग बस्तियों में बसाया जाता था, जहां पर किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं होती थी | इनके पास रोजी रोजगार नहीं थी, और ना ही इन्हें संवैधानिक रूप से बराबरी का सम्मान और अधिकार प्राप्त था |
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प्रश्न 06 : इस भाषण में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के स्वप्नों का अमेरिका किस तरह का है? स्पष्ट कीजिए |
उत्तर : मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा कि “मेरा एक स्वप्न है जो कि स्वतंत्र, समृद्ध और प्रगतिशील अमेरिका के स्वप्न से जुड़ा हुआ है | एक दिन यह देश अपने स्वार्थों से ऊपर उठेगा और अमेरिकी होने का वास्तविक अर्थ समझेगा | उनका सपना था कि पूरे अमेरिका में दास (अश्वेत लोग) अपने क्षेत्र भाइयों (श्वेत लोग) के साथ मिलकर बैठेंगे और अमेरिका की प्रगति में समान रूप से एक-दूसरे के साथ सहयोग करेंगे | अमेरिका एक दिन ऐसा राष्ट्र बनेगा जहां पर लोगों को उसके रंग से नहीं ,वरन उसके चरित्र और विशेषताओं से पहचाना जाएगा और सभी के बच्चे (श्वेत अश्वेत) एक साथ खेलेंगे और प्रगति करेंगे |
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प्रश्न 07 : अमेरिकी अश्वेतों द्वारा मताधिकार की प्राप्ति के लिए चलाए गए आंदोलन में किन – किन तरीकों का प्रयोग किया गया?
उत्तर : अमेरिका में पहले अश्वेतों को मताधिकार का अधिकार नहीं था | इसके लिए उन्होंने जगह-जगह पर सभाएं की, प्रदर्शन किए, धरने दिए, पैदल यात्राएं कर प्रदर्शन किया और बड़ी-बड़ी सभाओं का आयोजन कर अपने मताधिकार को प्राप्त करने का सतत प्रयत्न किया |
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प्रश्न 08 : अधिकारों के बिना किसी व्यक्ति को किन – किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर : अधिकारों के बिना हम जीवन में सभ्य समाज की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. क्योंकि जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार की आवश्यकता पड़ती है. लोकतांत्रिक शासन में अधिकार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं | क्योंकि सरकार बनाने और चलाने के लिए जन भागीदारी आवश्यक हो जाती है | यदि सरकार में जनभागीदारी नहीं होगी तो सरकार की नीतियां और कानून पक्षपात पूर्ण होने की आशंका रहती है और लोगों को इस पर विचार रखने तथा बदलने का अधिकार भी नहीं होगा | यदि अधिकार नहीं होंगे तो समाज में लिंग, रंग, नस्ल, जाति, धर्म, क्षेत्र, के आधार पर भेदभाव की स्थिति पैदा हो जाएगी, इसलिए सभी व्यक्तियों को समान अधिकार मिलना अत्यंत आवश्यक है|
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प्रश्न 09 : किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में अधिकार किस तरह से सहायक होते है?
उत्तर : स्वतंत्र व्यक्ति के अधिकार हमें सृजनात्मक और मौलिक होने का मौका देते हैं | जैसे संगीत, नृत्य, शोध, आदि के क्षेत्र | प्रत्येक व्यक्ति का यह अधिकार है कि वह अपनी रूचि योग्यता के आधार पर अपना भविष्य का निर्धारण कर सकता है | शिक्षा का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है, इसके आधार पर हम अपनी योग्यता और क्षमता के अनुरूप किसी भी क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं |
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प्रश्न 10 : अधिकारों को कैसे सुनिश्चित किया जाता है?
उत्तर : हम इतिहास की घटनाओं के अनुभव के आधार पर यह कह सकते हैं कि अधिकारों को सुरक्षित करने की सबसे सटीक और महत्वपूर्ण भूमिका लोकतांत्रिक प्रणाली ही है, क्योंकि लोकतंत्र संविधान के अनुरूप चलता है और संविधान का निर्माण जनभागीदारी से होता है, इसलिए इसमें प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार सुरक्षित होता है और संविधान सभी को समान अधिकार के लिए आश्वस्त करता है | न्यायालय में स्वतंत्र और निष्पक्ष होना भी हमारे अधिकार को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | प्रत्येक नागरिक अपने अधिकार के साथ साथ कर्तव्य का पालन भी अधिकारों को सुरक्षित करता है |
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प्रश्न 11 : अधिकारों को कानूनी मान्यता कैसे मिलती है?
उत्तर : अधिकार आमतौर पर उस स्थिति में ही अधिकारों का दर्जा हासिल करते हैं, जब लोगों की आवश्यकताओं को कानूनी रूप से मान्यता दी जाए | जब तक किसी अधिकार को कानून रूप नहीं मिलता, तब तक किसी भी अधिकार के लिए वास्तव में लोगों का राज्य के प्रति दावा नहीं जानता है |
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प्रश्न 12 : शिक्षा के अधिकार के बिना हमारा जीवन कैसा था? चर्चा करें |
उत्तर : सन 2002 में संसद ने 86 वें संविधान संशोधन में शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किया | उस समय से हमारी शिक्षा व्यवस्था में आधारभूत परिवर्तन देखने को मिलते हैं | इस अधिकार से पहले बच्चों की शिक्षा पर सरकार ज्यादा जागरूक नहीं थी और शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास नहीं के बराबर होते थे, किंतु इस कानून के बनने के बाद इसके प्रोत्साहन के लिए मुफ्त शिक्षा, मिड डे मील योजना, मुफ्त में कॉपी किताबों का वितरण आदि जैसी अनेक सुविधाएं आज मिलती है, जिससे समाज का हर वर्ग शिक्षा प्राप्त कर सकें |
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प्रश्न 13 : निम्नलिखित कथन अधिकार है या नही , स्पष्ट कीजिए –
अ ) राजा का आदेश
ब ) किसी समाज द्वारा तय नियम
स ) संसद द्वारा बनाया नियम
द ) संसद द्वारा नियम बनाकर प्रदान की गई कोई सुविधा
उत्तर : निम्नलिखित कथन में अधिकार है या नहीं स्पष्ट करें-
अ) राजा का आदेश – अधिकार नहीं |
ब) किसी समाज द्वारा तय नियम – अधिकार नहीं |
स) संसद द्वारा बनाया नियम – अधिकार है।
द) संसद द्वारा नियम बनाकर प्रदान सुविधा – अधिकार है।
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प्रश्न 14 :(i) यह हमारा कौन सा अधिकार है?
उत्तर : समानता का अधिकार
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प्रश्न : (ii) यह हमारा कौन सा अधिकार है?
उत्तर : i) आजीविका और भरण पोषण का अधिकार
ii) विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार
(iii) यह हमारा कौन सा अधिकार है?
उत्तर : शोषण के विरुद्ध अधिकार |
iv) ये हमारे कौन से अधिकार हैं?
उत्तर : i) नहीं बलि का अधिकार नहीं है | (पशु क्रूरता अधिनियम )
ii) नहीं | ( धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ) |
v) उक्त कथन कौन से मौलिक अधिकार के गलत इस्तेमाल के अंतर्गत आता है?
उत्तर : और संस्कृति का अधिकार |
vi) यह संरक्षण संविधान के किस मौलिक अधिकार के द्वारा दिया जाता है?
उत्तर : जीवन की स्वतंत्रता का अधिकार |
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प्रश्न 15 : इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए हम उच्च या उच्चतम न्यायालय में किस मौलिक अधिकार के तहत मुकदमा दायर कर सकते है?
उत्तर : यह सभी अधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकार हैं | इसे प्राप्त करने के लिए जीवन रक्षक अधिकार के तहत मुकदमा दायर कर सकते हैं |
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प्रश्न 16 : जहां मानव अधिकार आयोग नहीं होता , वहां लोगों को कौन – कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? क्यों?
उत्तर : हमारे देश में आज भी लोगों को अपने अधिकारों की सही जानकारी नहीं है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में | इसलिए ऐसी जगहों पर मानव अधिकार आयोग बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और लोगों पर हो रहे अत्याचार पर सबका ध्यान आकृष्ट कर उन्हें न्याय दिलाने में मदद करता है | मानव अधिकार के अभाव में घरेलू हिंसा, महिलाओं के प्रति अत्याचार, बच्चों को प्रताड़ना, बाल श्रम, अन्य तरह के भ्रष्टाचार और अपराध देखने को मिलते हैं|
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प्रश्न 17 : क्या मानव अधिकार आयोग वास्तव में सभी लोगों के अधिकारों को संरक्षण दे पाता है?
उत्तर : मानव अधिकार आयोग सभी लोगों के अधिकारों को संरक्षण नहीं दे पाता है | जब मानवाधिकार हनन संबंधित मामले आयोग के संज्ञान में लाए जाते हैं या आयोग स्वतः उस पर संज्ञान लेता है, तब उसमें यह संरक्षण दे पाता है | घरेलू हिंसा तथा दूर क्षेत्रों में हुए अत्याचार आयोग की नजर में नहीं आ पाते हैं | इस प्रकार बहुत बड़ा जन समुदाय अपने अधिकारों से वंचित रह जाता है, और इसमें मानव अधिकार की कोई मदद नहीं मिल पाती है |
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प्रश्न 18 : जब सूचना का अधिकार नहीं था तो लोगों को विभिन्न विभागों से जानकारी लेने में किन – किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा होगा? आपस में चर्चा करें?
उत्तर : जब सूचना का अधिकार नहीं था तब किसी भी विभागीय कार्यालय से कोई भी सूचना प्राप्त करना बहुत ही कठिन कार्य था | पहले तो विभाग जानकारी आवेदनों को स्वीकार ही नहीं करती थी, यदि करते थे तो जानकारी देने की कोई समय सीमा नहीं होती थी, और विभाग जानकारी के बदले पैसों की मांग करते थे, और यह भी सुनिश्चित नहीं था कि जो जानकारी हमें मिली है वह प्रमाणित है या नहीं |
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प्रश्न 19 : सूचना का अधिकार आने से विभिन्न विभागों के कार्यों में पारदर्शिता कैसे आई थी?
उत्तर : जन सूचना का अधिकार आने से सरकारी और गैर सरकारी विभागों में पारदर्शिता आई | क्योंकि सूचना के अधिकार के तहत कोई भी उनके द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी मांग सकता है, और ऐसी कोई भी जानकारी एक निश्चित अवधि के अंदर देने को बाध्य है | सामान्य जानकारी 30 दिनों के अंदर तथा जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ी जानकारी 48 घंटे में देने का प्रावधान है | सूचना के अधिकार के कारण सरकारी दस्तावेजों के रखरखाव में भी सुधार हुआ और कार्यों में सुधार हुआ | सही समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर ₹250 से लेकर ₹25000 तक के दंड का प्रावधान है और जानकारी न देने की दशा में राज्य जन सूचना आयोग में शिकायत की जा सकती है |
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प्रश्न 20 : वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य एवं केंद्र के सूचना आयुक्त कौन – कौन है?
उत्तर : छत्तीसगढ़ में धर्मेंद्र जायसवाल और मनोज कुमार त्रिवेदी दो सूचना आयोग वर्तमान में कार्यरत हैं | यह छत्तीसगढ़ राज्य के सूचना आयुक्त हैं | छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के मुख्य सूचना आयुक्त एन.के. राउत हैं |
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प्रश्न 21 : बाल श्रमिकों से आमतौर पर कौन – कौन से कार्य कराए जाते है? सूची बनाइए |
उत्तर : बाल श्रमिकों को निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य कराए जाते हैं :-
1. होटल या ढाबा
2. मैकेनिकल वर्कशॉप
3. कचरा उठाना या एकत्र करना |
4. छोटे कारखानों में
5. पटाखा फैक्ट्रियों में
6. शहरी क्षेत्रों के घरों में
7. कांच या चूड़ियों के कारखानों में
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प्रश्न 22 : बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन क्यों किया गया?
उत्तर : भारत में राष्ट्रीय तथा राज्य दोनों ही स्तरों पर बाल आयोग का गठन किया है | बाल अधिकार आयोग का बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन को रोकना है, यह उल्लंघन चाहे सामाजिक स्तर पर हो या सरकारी या किसी निजी क्षेत्र में हो | यह आयोग बच्चों पर होने वाली हिंसा, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्रय- विक्रय, उनके श्रम के शोषण जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हैं | बाल आयोग समय-समय पर राज्यों में बालकों की बड़ी स्थिति का अवलोकन करते रहते हैं और इस क्षेत्र में सुधार के लिए दिशा निर्देश जारी करते रहते हैं. जिससे बाल श्रम को रोका जा सके और बालकों के हितों की रक्षा की जा सके |
अभ्यास :
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प्रश्न 01 : रिक्त विकल्प चुनिए –
1 . सन ——— में फ्रांसीसी क्रांति हुई |
2 . ———— शताब्दी में दास प्रथा प्रारंभ हुई |
3 . महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए ———– का गठन किया गया है |
4 . संविधान के अनुसार ——– वर्ष से कम आयु के बच्चे बाल श्रमिक है |
5 . मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने ————- लोगों के अधिकार के लिए होने वाले आंदोलन का नेतृत्व किया |
6 . वर्तमान में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष है ————— |
उत्तर : 1) 1789 , 2 )17वीं , 3) 31 जनवरी 1992 को राष्ट्रीय महिला आयोग , 4 ) 14 वर्ष, 5 ) अश्वेत , 6 ) श्रीमती रेखा शर्मा
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प्रश्न 02 : सही विकल्प चुनिए –
1 हमे शिक्षा का मौलिक अधिकार किस संविधान संशोधन में मिला?
क ) 82वें
ख ) 84वें
ग ) 86वें
घ ) 100वें
2 . वर्तमान भारत में व्यस्क मताधिकार की आयु निर्धारित है –
क ) 16 वर्ष
ख ) 18 वर्ष
ग ) 21 वर्ष
घ ) 25 वर्ष
3 . अश्वेत मूलतः निवासी है –
क ) अमेरिका
ख ) यूरोप
ग ) अफ्रीकी
घ ) एशिया
उत्तर : 1) ग ) 86 वें, 2) ख ) 18 वर्ष, 3) ग ) अफ्रीकी |
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प्रश्न 03 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
प्रश्न 01 : दास प्रथा किसे कहते है?
उत्तर : इस प्रथा का प्रचलन 17 वीं शताब्दी से प्रारंभ है। इस प्रथा में फ्रांस इग्लैण्ड और बड़े उपनिवेशक देश अफ्रीका और एशिया से लोगों को जबरन बन्दी बनाकर अपने देश ले जाते थे। और वहां पर कार्य करने के लिए इनका विक्रय किया जाता था। इन लोगों के पास कोई मानवीय अधिकार नहीं थे। इनके साथ पशुओं जैसा बर्ताव किया जाता था।
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प्रश्न 02 : समन का क्या आशय है?
उत्तर : जब न्यायालय या कोई आयोग किसी व्यक्ति को अपने समकक्ष उपस्थित होने का आदेश देता है तो उस आदेश का समन कहते है।
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प्रश्न 03 : मानवाधिकारों का हनन कैसे होता है?
उत्तर : विश्व के प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से या संवैधानिक रूप से जीवन को यापन करने के लिए कुछ अधिकारों की आवश्यकता होती हैं। जिन्हें हम मौलिक अधिकार की संज्ञा दे सकते है जब व्यक्ति की स्वतंत्रता शिक्षा स्वास्थ्य विकास रोजी शेषकर में किसी प्रकार अतिक्रमण या प्रतिबंध लगने लगता है, तो उसे मानवाधिकार का हनन कहते है।
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प्रश्न 04 : अधिकारों का संरक्षण मानव अधिकार आयोग किस प्रकार करता है |
उत्तर : जब किसी क्षेत्र में व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तथा उसमें मानवाधिकार हस्तक्षेप कर उनके अधिकारों का संरक्षण करता है। आयोग मानव अधिकार में प्राप्त शिकायत पर कार्यवाही करता है, और आयोग को यह भी अधिकार है कि वह स्वत संज्ञान लेकर उस पर कार्यवाही कर सकता है, और समन भेजकर गवाहों को तलब कर सकता है, तथा जांच कमेटी का गठन कर सकता है। और संबंधित दस्तावेजों का तलब कर सकता है।
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प्रश्न 05 : अमेरिका में रहने वाले अश्वेत लोगों को व्यस्क अमताधिकार प्राप्त हुआ?
उत्तर : सन् 1964 में अमेरिका में रहने वाले अश्वेत लोगों को मताधिकार का अधिकार प्राप्त हुआ था।
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प्रश्न 06 : भारतीय संविधान में कौन – कौन से मौलिक अधिकार भारतीयों को प्रदान किए गए है ?
उत्तर : भारतीय संविधान में निम्नलिखित मौलिक अधिकार प्रदान किये है –
1 . समानता का अधिकार
2 . स्वतंत्रता का अधिकार
3 . शोषण के विरुद्ध का अधिकार
4 . धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
5 . सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधित अधिकार
6 . संवैधानिक उपचार का अधिकार
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प्रश्न 07 : महिला आयोग कौन – कौन से कार्य करता है?
उत्तर : महिला आयोग का कार्य मूलतः महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा उन पर हो रहे शोषण और अन्याय को रोकना तथा उन्हें न्याय दिलाना है। महिला आयोग किसी शिकायत पर या स्वतः ही संज्ञान लेकर मामले की जांच समन और संबंधित विभाग व्यक्ति को तलब कर सकता है। महिला आयोग का कार्य यह सुनिश्चित करता है कि कार्यस्थल घर समाज सार्वजनिक स्थान पर उसकी सुरक्षा स्वतंत्रता और अधिकार सुनिश्चित करना है।
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प्रश्न 08 : बाल संरक्षण अधिकार आयोग के गठन का क्या उद्देश्य है?
उत्तर : भारत में राष्ट्रीय तथा राज्य दोनों ही स्तरों पर बाल आयोग का गठन किया गया | बाल अधिकार आयोग का बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन को रोकना है | यह उल्लंघन चाहे सामाजिक स्तर पर हो या सरकारी या किसी निजी क्षेत्र में हो | यह आयोग बच्चों पर होने वाली हिंसा,स्वास्थ्य, शिक्षा, क्रय-विक्रय उनके श्रम के शोषण जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करता है | बाल आयोग समय-समय पर राज्यों में बालकों की स्थिति का अवलोकन करते रहते हैं, और इस क्षेत्र में सुधार के लिए दिशा निर्देश जारी करते रहते हैं, जिससे बाल श्रम को रोका जा सके और बालकों के हितों की रक्षा की जा सके |
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प्रश्न 09 : अमेरिका में श्वेतों द्वारा अश्वेतों के साथ भेदभाव जाने का मुख्य कारण क्या रहा होगा?
उत्तर : अमेरिका में श्वेत लोगों द्वारा अश्वेत लोगों पर अत्याचार का प्रमुख कारण रंगभेद था। श्वेत लोग अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे और अश्वेत लोगों को निम्न कोटि का समझते थे। चूंकि अश्वेत लोगों को 17 वीं शताब्दी में दास के रूप में खरीद कर यहां लाया गया था और यह प्रथा समाप्त होने के बाद ये अश्वेत लोग यहीं बस गये और इन्हें श्वेत लोग (दोयम दर्जे) निम्न स्तर का नागरिक समझते थे। इन्हीं सब कारण के वजह से उनके साथ भेदभाव किया जाता था।
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प्रश्न 10 : आपके जीवन में सूचना के अधिकार का क्या महत्व है?
उत्तर : सूचना का अधिकार आने से हमारे जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं | सरकारी कामों में पारदर्शिता आई | कार्य नियत समय में पूर्ण होने लगे | हमें अपने आवेदनों पर किए गए कार्यवाही और उसकी स्थिति की जानकारी आसानी से प्राप्त होती है | कार्यालय की कार्यवाही और दस्तावेज सुचारू रूप से संचालन होता है | किसी भी योजना, खर्च, धनराशि, लाभार्थियों, आदि की सही जानकारी उपलब्ध होती है, और भ्रष्टाचार आसानी से पकड़ में आ जाता है |
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प्रश्न 11 : चर्चा कीजिए कि मौलिक अधिकार का विश्वव्यापी रूप मानव अधिकार है?
उत्तर : सदियों से विश्व में शक्तिशाली व्यक्तियों, समूहों द्वारा मानवता को कुचला गया | जैसे-जैसे विश्व में मानव जीवन और अधिकारों के प्रति लोगों की जागरूकता बड़ी और मौलिक अधिकार के बारे में चर्चा शुरू हुई | सर्वप्रथम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस की क्रांति में यह एक प्रमुख विषय के रूप में उभरा | इसके बाद अमेरिका में हुए अश्वेतों के अधिकारों के हनन ने इसे विश्व समुदाय के सामने एक गंभीर विषय के रूप में प्रस्तुत किया. आज विश्व के ज्यादातर सरकारें खासकर लोकतांत्रिक सरकार मौलिक अधिकार के विषयों को अपने संविधान में प्रमुखता से स्थान दिया है
आज भारतीय संविधान भी अपने प्रत्येक नागरिक को गौरवमयी, विकासशील, स्वास्थ्य तथा समानता के लिए अनेक अधिकार दिए हैं | पूरे विश्व में मौलिक अधिकारों के संरक्षण और देखरेख के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई, जो यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि विश्व के प्रत्येक देश अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए विशेषकर महिलाओं और बच्चों के संदर्भ में अतिरिक्त प्रयास और सावधानी रखें |