CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 10 उपनिवेशवाद are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 10 उपनिवेशवाद
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प्रश्न 01 : क्या आप अनुमान लगा सकते है की यूरोप के देशों ने हजारों किलोमीटर दूर स्थित दुसरे देशों पर कैसे कब्ज़ा किया होगा? वे ऐसा किस उद्देश्य से कर रहे थे? शेष दुनिया के देश क्या कर रहे होगें जब यूरोप के देशों ने उन कब्ज़ा किया? यूरोपीय देशों के शासन का उनके अधीनस्थ देशों पर क्या प्रभाव पड़ा? वे स्वतंत्र कैसे हुए?
उत्तर : यूरोपीयन देश के लोग शुरुआती दौर में आशेज्ञित तथा बर्वर किस्म की जाती के इन्होने भारत का बहुत ख्याति सुनी थी। उसी कारण से वे लोग समुद्र के रास्ते दूर -दूर की यात्राएं करते थे। तथा वहां पर कर वहां की स्थानीय जनता तथा राजाओं को व्यापार के नाम पर धीरे -धीरे अपनी सेनाएं तैयार कर उस देश पर अपना औपनिवेश स्थापित कर वहां की पूंजी लूट कर अपने देश स्थानांतरित कर देते और उनकी सरकार द्वारा इस कार्य पर पूरी तरह उनकी मदद कर पाती थी | भारत की खोज में वह अमेरिका पहुंचे तथा वहां के भोले भाले आदिवासी समाज को बेवकूफ बनाकर वहां भी अपना औपनिवेश स्थापित कर लिया,तथा धीरे -धीरे वे अपने अधीनस्थ देशो को रोजगार तरस नहस कर दिया तथा वहां की संस्कृति को दूषित कर दिया था| उपनिवेश देशो का कच्चा माल ले कर अपने देश का तैयार सामान उपनिवेषिक देशो में पुनः बेच कर भारी मुनाफा कमाया तथा सत्ता पर कब्ज़ा कर वहां की जनता पर तरह तरह के कर लगा कर, वहां के पारम्परिक घटकों को तहस -नहस कर दिया, जिससे जनता में भारी आक्रोश उत्पन्न हुआ तथा जनता द्वारा अपनी आजादी की मांग उठाना प्रारम्भ हुआ, एक लम्बी लड़ाई जिसमे हिंसा -अहिंसा हर प्रकार की लड़ाई लड़ी गई, लाखों लोगो के बलिदान के बाद स्वंत्रता प्राप्त हुई।
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प्रश्न 02 : विश्व के मानचित्र में तालिका में दिए गए देशों को पहचानिए तथा और लिखिए कि वह किन महाद्वीपों में है, अनुमान से लिखिए कि इनमें कौन से साम्राज्यवादी देश और कौन उपनिवेश थे ?
उत्तर :
| देश | महाद्वीप | साम्राज्य- उपनिवेश |
| भारत | एशिया | ब्रिटेन |
| चीन | एशिया | |
| अर्जेंटीना | अमेरिका | ब्रिटेन |
| पुर्तगाल | यूरोप | फ्रांस |
| ब्राजील | अमेरिका | |
| इंडोनेशिया | एशिया | ब्रिटेन |
| फ्रांस | यूरोप | |
| इंग्लैंड (ब्रिटेन) | यूरोप | |
| जापान | एशिया | |
| दक्षिण अफ्रीका | अफ्रीका | ब्रिटेन |
| मैक्सिको | अमेरिका | स्पेन |
| नाइजीरिया | अफ्रीका | फ्रांस |
| जर्मनी | यूरोप | |
| लाओस | एशिया | |
| वियतनाम | एशिया | |
| चिली | अमेरिका |
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प्रश्न 03 : शुरू में इंग्लैंड के लोग भारत में किन उद्देश्यों से आए थे? उनके और स्पेन के लोगों के अमेरिका जाने के उद्देश्यों की तुलना करें |
उत्तर : इंग्लैंड के लोग भारत में व्यापारी उद्देश्य के लिए आये, उन्होंने उस समय के स्थानीय तथा राजाओं से सिर्फ व्यापार के लिए अनुमति ली थी। परन्तु स्पेन के लोगो द्वारा भारत की खोज में अमेरिका पहुंचे, अनजाने में उसे भारत समझ कर. परन्तु जब उन्हें पता चला की यह भारत नहीं तो उन्होंने यूरोप की बढ़ती जनसंख्या के लिए वहां जमीनों पर कब्जा कर लिया तथा दूसरी अपवाह कि सोने-चांदी की खाने भी थी तथा धर्म प्रचार भी एक कारण था।
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प्रश्न 04 : स्पेन के लोग कैसे इतने बड़े राज्यों पर इनती जल्दी और आसानी से विजयी हुए होंगे- क्या आपको कोई कारण समझ में आ रहा है? इसी तरह इंग्लैंड के लोग मुग़ल साम्राज्य पर इतनी आसानी से विजयी क्यों नहीं हुए होंगे?
उत्तर :- उस समय अमेरिका के मुख्य रूप से दो ही सत्ता थी और वहां की जनता को शिक्षा तथा ज्ञान का अभाव था | लोगों में तमाम तरह के अंधविश्वास तथा कुरीतियां भी थी ताकि राजाओं द्वारा अपने क्षेत्रों में प्रकार -प्रकार के देवताओं का प्रतिबंध था। जिसका लाभ स्पेनियों द्वारा उठाया गया तथा आसानी से राजसत्ता पर नियंत्रण हो गया तथा जनता को अशिक्षा के कारण चमत्कार की आशा दे कर शोषण तथा धर्म परिवर्तन कराया गया।
परन्तु भारत में स्थितियाँ इसके विपरीत थी, जिसका कारण मुख्यतः शिक्षित समान तथा धर्म के प्रति आस्था व कुटीर उद्योग भी थे आत्मनिर्भरता थी ,तथा भारत के लोग पारम्परिक रूप से युद्ध के आदि थे। जिस कारण से भारत में मुगलों से युद्ध की अपेक्षा प्रलोभन तथा छल से सत्ता लेनी पड़ी, जिसमे अंग्रेजो को काफी समय लगा।
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प्रश्न 05 : क्रियोल लोगों को स्पेनी उच्च अधिकारियों से क्या शिकायतें हो सकती थी?
उत्तर : क्रियोल लोग मूलतः स्पेनी ही होते थे, परन्तु ये स्थानीय रूप से वहां बस गए थे, वे लोग थे जिन पर स्पेन द्वारा भेजे गए उच्च वर्गीय अधिकारियों द्वारा शासन किया जाता था, यह महत्वपूर्ण पदों पर नहीं जा सकते थे, यह केवल उद्योग धंधे, या व्यापार करते थे, परन्तु शासन में दखल न होने के कारण इनमें भारी असंतोष प्राप्त था।
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प्रश्न 06 : अफ्रीकी दास और अमेरिकी मूलनिवासी आदि को शासन में भागीदारी क्यों नहीं दी जाती होगी? क्या आप इसका कोई कारण सोच सकते है?
उत्तर :- अफ्रीकी व अमेरिकी लोगों को सबसे निचले स्तर का नागरिक बना कर रखा गया था। उन्हें किसी प्रकार के अधिकार प्राप्त नहीं थे, एक प्रकार से वे गुलाम थे, उन्हें भरपेट खाना नहीं मिल पाता। वही क्रियोल लोग आराम का जीवन व्यतीत करते थे, तथा सभी उद्योग तथा खेतों और शासन सिर्फ स्पेनी लोगों का कब्जा था, इसका मूल कारण वहां की व्यवस्था को स्पेन साम्राज्य द्वारा संचालित किया जाना था।
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प्रश्न 07 : कल्पना करे की आप एक अमेरिकी मूलनिवासी है | कल्पना करें की आप एक स्पेनी पशुपालक है जो व्यापारिक उद्देश्य से पशुपालन करते है | कल्पना करें की आप अफ्रीकी दास हा जो स्पेनी जमींदारों के खेतों पर काम करते है | इन तीनों रूपों में आपको स्पेन के शासन से किन – किन बातों पर शिकायत होती?
उत्तर :- यदि अपने ही देश में गुलामो की भांति जीवन व्यतीत करना पड़े तथा विदेशियों द्वारा अत्याचार सहना पड़े तथा अपने काम व सेवा का उचित मूल्य प्राप्त न हो तथा दैनिक स्वंत्रता चाहे व धार्मिक हो या आर्थिक या पारिवारिक सामाजिक हो तो हमें उस हर बात से शिकायत होगी, हम किसी स्पेनी का पशुपालन करे उनके राज्यों से हमें प्रताड़ना प्राप्त हो या किसी जमींदार की गुलामी करे सिर्फ, भोजन पर स्वंत्रता का कोई मूल्य नहीं होता है।
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प्रश्न 08 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के किस नेता की आप सीमोन बालिवार से तुलना कर सकते है?
उत्तर :-जिस प्रकार से अमेरिकी स्वतंत्रता के लिए बैलिबार ने अपने रणनीतिक कौशल को लोकतांत्रिक विचारों द्वारा तथा सभी चाहे वह कोई हो किसान, मजदुर तथा देशी, विदेशी सभी का सहयोग लिया, उसी प्रकार से भारतीय स्वतंत्रता के लिए नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने भी किया , उन्होंने जर्मनी, जापान तथा हिन्दू, मुस्लिम सभी को साथ लिया।
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प्रश्न 09 : हैती के स्वतंत्रता संघर्ष और दक्षिण अमेरिका के संघर्ष में क्या समानता और अंतर आपको दिखता है ?
उत्तर : हैती के स्वतंत्रता संघर्ष और दक्षिण अमेरिका के संघर्ष में अंतर –
(1) हैती का स्वतंत्रता संग्राम एक दास द्वारा नेतृत्व किया गया, जबकि अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम एक क्रिओल द्वारा किया गया।
(2) हैती में सिर्फ दासो ने विद्रोह किया ,जबकि अमेरिका में जमींदारों ,किसानों ,दासो ने मिलकर विद्रोह किया।
(3) हैती का विद्रोह केवल हैती तक ही रहता, परन्तु अमेरिका का विद्रोह पुरे अमेरिका तक फ़ैल जाता।
हैती के स्वतंत्रता संघर्ष और दक्षिण अमेरिका के संघर्ष में समानता –
(1) दोनों का विद्रोह हिंसक रहे।
(2) दोनों के पास प्रथम दसों की युक्ति मिली।
(3) दोनों देशों में अपनी सत्ता स्थापित हो गयी।
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प्रश्न 10 : क्या आपके राज्य में कहीं पर भी इस तरह के बागान है?
उत्तर : अपने राज्य में इस प्रकार के बागान कहीं भी नहीं है।
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प्रश्न 11: भारत में कौन सी फसल आज भी ऐसे बगानों में उगाई जाती है और किन राज्यों में उनके बारे में बताएं |
उत्तर :-भारत में इस प्रकार के फसल असम में चाय के खेती, लखनऊ में आम, तथा दक्षिण भारत के क्षेत्रों में अंगूर तथा उत्तरप्रदेश की प्रतापगढ़ में आंवला तथा बिहार के मुजफरपुर क्षेत्र में लीची आदि के बागान है।
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प्रश्न 12 : पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में एशिया में यूरोपीय देश क्यों अपना साम्राज्य नहीं बना पाए , सोच कर बताएँ |
उत्तर :-पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी को यूरोप का जाने टाइम (अंधकार युग्म) कहते है। जिसमे की ज्यादातर यूरोप के लोग जंगलो में निवाश करते थे तथा उनको शिक्षा तथा सभ्यता का ज्ञान नहीं था, परन्तु अठारहवीं सदी आते-आते उन्होंने पानी के जहाज की जानकारी प्राप्त की, जिसका प्रभाव वह समुद्री डाकू बने तथा लूटपाट के लिए दूर दूर की यात्राएं की तथा अपने छल से साम्राज्य स्थापित किया।
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प्रश्न 13: मसालों के व्यापार पर एकाधिकार के लिए पुर्तगालियों और डचों ने क्या किया?
उत्तर :-सर्वप्रथम डचों ने, पुर्तगालियों ने, इंडोनेशिया के जंगलों का विनाश किया तथा उस स्थान पर मसालों के खेती आरम्भ कराई। इसके बाद उन्होंने सन् 1700 तक योजनाबद्ध तरीके से उत्पादन तथा बिक्री दोनों पर नियंत्रण कर लिया तथा सुल्तान को दखल कर दिया।
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प्रश्न 14 – पुर्तगाली समुद्री साम्राज्य से आप क्या समझते है ?इसका एशिया के व्यापारियों पर क्या प्रभाव पड़ा होगा।
उत्तर :- पुर्तगाली साम्राज्य के पास आधुनिक समुद्री जहाज उपलब्ध थे, जो बहुत से माल व मसालों को लाद कर यूरोप तक पहुंचा सकते थे, तथा एशिया के देशो पर जैसे इंडोनेशिया या गोवा आदि क्षेत्रों पर, खेतो पर, अधिकार के कारण एशिया के व्यापारी सिर्फ अपने देश में ही व्यापार कर पाते पर पुर्तगाली अपना सामान यहाँ पर भी बेच सकते थे और सस्ते में यहाँ से लेकर यूरोप आदि में बेचते, इस कारण से स्थानीय व्यापारी से ज्यादा मुनाफा कमा लेते थे, एशिया स्थानीय व्यापारियों का धंधा ख़त्म हो गया तथा वे समाप्त प्रायः हो गए।
प्रश्न 15: सन 1830 से 1870 तक डच राज्य की कृषि नीति का इंडोनेशिया के किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : डचों के नीति के प्रभाव के कारण इंडोनेशिया के तमाम जंगल खत्म हो गए, जिससे उनकी संस्कृति पर बुरा प्रभाव पड़ा तथा स्थानीय किसानों को सामान की कम कीमत देते, तथा उनसे अधिक मजदूरी कराते तथा किसानों को मजदूरी कम देते थे, तथा उनका सारा उत्पादन कम मूल्य पर ले लेते, जिसके कारण से वहां किसानों की आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब हो गई |
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प्रश्न 16: बागान के लिए इंडोनेशिया में व्यापक पैमाने पर भूमध्यरेखीय वन काटे गए | इसका वंहा के लोगों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?
उत्तर : मसालों की खेती के लिए पहले डचों व पुर्तगालियों द्वारा वनों का विनाश किया गया तथा उसके बाद वहां की सत्ता द्वारा भी यही किया गया, जिसके कारण वन आधारित वनों में रहने वाले तथा आदिवासी समूह का पारंपरिक व्यवसाय नष्ट हुआ तथा उनकी संस्कृति को भी नष्ट किया गया, जिसके प्रभाव से एक नया बेरोजगार वर्ग बन गया. जो सिर्फ श्रमिक था, जो भूमिहीन तथा दिशाहीन था, जिसका लाभ वहां की सरकार तथा धनदेव ने उठाया और पारंपरिक खेती को नष्ट कर दिया, जिससे खाद्यान्न का अभाव उत्पन्न हो गया |
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प्रश्न 17 : क्या आप सोचकर बता सकते है की औद्योगिक देश उपनिवेशों में रेल लाइनों और खदानों में ही क्यों धन लगाना चाहते थे? वे कारखाने क्यों नहीं लगा रहे थे ?
उत्तर : भयंकर साम्राज्यवाद विस्तार के कारण अमेरिका व यूरोपीय देशों में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी, परंतु उनके पास तैयार माल बेचने के लिए बाजार नहीं थे, भारत और चीन एक बड़ा देश था. आबादी के कारण अच्छे बाजार थे, तथा रेल लाइन द्वारा वह खदानों से वे कच्चे माल को अपने देश हेतु बंदरगाहों तक पहुंचा सकते थे, ताकि उसका तैयार माल अपने देश के कारखानों में रख सके. यहां पर कारखाने लगाने में उन्हें अपने देश की बेरोजगारी समाप्त करने में मदद नहीं मिलती तथा तैयार माल को लाकर पूरे देश में वितरण हेतु रेलवे एक सस्ता माध्यम था| खदानों में सस्ते मजदूर जो गुलामी से उपलब्ध भी थे, इसी कारण रेलवे व खदानों में निवेश उपनिवेशों में करते तथा कारखाने अपने देशों में लगवाते थे |
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प्रश्न 18: इस तरह के विदेशी हस्तक्षेप का चीनी समाज और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ा होगा?
उत्तर : चीन एक बहुत बड़ा देश था और विविधता वाला देश था. वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी बहुत ही भिन्न-भिन्न है, क्योंकि चीन पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं
था. वहां के सम्राट भी लगभग पूरे देश पर नियंत्रण नहीं रख पाते थे, तथा सम्राट को कई देशों की संधियों के कारण बहुत बड़ी रकम हर्जाने के रूप में इन देशों को देनी पड़ती थी तथा यूरोपियों के पास आधुनिक हथियार भी थे, जिस कारण वह जनता का उत्पीड़न करते थे व सम्राट कुछ कर नहीं पाते थे तथा वहां के अधिकारियों में भी बड़े भ्रष्टाचार का बोलबाला था. वह गुटबंदी थी. जिससे हर प्रकार से जनता का शोषण हुआ और धीरे-धीरे जनता में आक्रोश हुआ तथा अर्थव्यवस्था बदतर होती गई |
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प्रश्न 19 : चीन की किसी और देश के साथ व्यापार करने में कोई दिलचस्पी क्यों नहीं थी?
उत्तर : वस्तुतः चीन पूरी तरह से आत्मनिर्भर देश था तथा वहां के शासक अपने देश को किसी बाहरी देश के प्रभाव से मुक्त रखना चाहते थे, इसका मुख्य कारण राज्य की व्यवस्था तथा उच्च अधिकारी का दल जो लगान तथा करो की उचित व्यवस्था करता था, और जरूरत के सामान तथा सोने चांदी व खाद्यान्नों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे |
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प्रश्न 20: यूरोपीय देशों ने दुनिया के बाकी हिस्सों को सीधे अपने अधीन कर लिया था लेकिन चीन में उन्होंने ऐसा न करके उनको अलग – अलग प्रभाव के दायरे में लाने की कोशिश की | आपके अनुसार ऐसा क्यों किया गया?
उत्तर : अफीम युद्ध के बाद दुनिया के देश को चीन की कमजोरी का पता चला और सभी यूरोपियन देश, चीन भौगोलिक स्थिति तथा आबादी का लाभ बाजार के रूप में उठाना चाहते थे, परंतु मित्रता के कारण किसी एक के लिए यह संभव नहीं था तथा चीनी लोग बहुत गोपनीय होते हैं, यूरोपियन देश के लिए यह आपसी झगड़े का कारण बन सकता था, इसी कारण से उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया |
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प्रश्न 21: खुले द्वार की नीति से आप क्या समझते है? अमेरिका चीन में खुले द्वार के पक्ष में क्या था?
उत्तर : जापान के आक्रमण के बाद एक बड़ा हिस्सा जापानियों के हाथ चला गया और अन्य हिस्सों पर यूरोपियन देशों ने कब्जा किया था, अमेरिका भी लंबे समय से चीन से व्यापार करता था, धीरे-धीरे इस प्रकार के कब्जे से अमेरिका को एक बड़ा बाजार खोने का डर होने लगा, जिस कारण से अमेरिका ने खुले द्वार नीति का निर्धारण किया. जिसमें सभी देश पूरे चीन में सामान व्यापार कर सकेंगे, जिसको अमेरिकी दबाव में धीरे-धीरे सभी देशों ने मान लिया |
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प्रश्न 22: क्या आप अनुमान लगा सकते है की इतने कम समय में यूरोपीय देशों में अफ्रीका पर कैसे और कब्ज़ा किया होगा? इसका वंहा के लोगो पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?
उत्तर : यूरोपीय देशों ने आपसी सहमति से अफ्रीका बांट लिया ताकि आपसी झगड़े से बचा जा सके | 19वीं सदी के मध्य तक अफ्रीका में अधिकतर कबीलों का शासन रहा पर 19वीं सदी आते-आते मजदूरी के लिए गुलामों व्यापार आरंभ हुआ, जो यूरोप के देश पर अमेरिका के लिए किया जाता था, कबीलों की आपसी झगड़े में पकड़े गए बंदियों को इन देशों को बेच दिया जाता था, परंतु इसको बंद करने के लिए यूरोपीय देशों की शर्त रखी कि हमें अफ्रीका पर अपना राज्य बनाने की जरूरत है, तथा अफ्रीका की जमीन पर कब्जा कर अपना राज्य स्थापित कर लिया. एशिया के बाद अफ्रीका ही एक ऐसा क्षेत्र था जो बाजार के लिए उपयुक्त था. इस होड़ में बहुत जल्दी अफ्रीका पर यूरोपियन का कब्जा हो गया |
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प्रश्न 23: यूरोपीय देश अफ्रीका पर कब्ज़ा क्यों करना चाहते थे?
उत्तर :- यूरोपीय देश के लिए एशिया के बाद अफ्रीका ही एक मात्रा ऐसी जगह थी जहां आसानी से श्रमिक तथा बहुमूल्य सम्पदा मिल सकती थी। तथा उन दिनों यूरोप के देशों में नश्लवाद की विचारधारा की जिम्मेदार थे। जो गोरे लोगों के ज्येष्ठ होना तथा शासक होना सिखाती थी। जिसमे ईसाइत का प्रभाव फैलाना तथा अपनी ज्येष्ठता का अनुभव कराना था। पर सब के पीछे बाजार बाद मुख्य था।
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प्रश्न 24: यूरोपीय देशों के लिए अफ्रीका पर कब्ज़ा करना क्यों आसान था?
उत्तर :-अफ्रीका मुख्यतः कबीलो का समूह था, पूरे अफ्रीका में कबीलो के अलग अलग नीतियां, देवता तथा सरदार हुआ करते, कोई संगठित राज्य न था, न ही कोई सेना की अशिक्षा भी अपनी चरम पर थी। यूरोपियन के पास सभी संसाधन थे, तथा मुख्यतः हथियार और धार्मिक चमत्कार का उन्होंने खुद उपयोग किया।
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प्रश्न 25: चित्र 10.8 और चित्र 10.11 का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए।
उत्तर :- चित्र 10.8 में यूरोपियन तथा जापानियों द्वारा चीन का बंटवारा इंगित करता है। तथा चित्र 10.11 भी यूरोपियन द्वारा अफ्रीका का बंटवारा इंगित करता है।
इन दोनों में बहुत ही समानता है कि राज्य द्वारा यह बताने की कोशिश की गयी है कि बेईमानी से स्वार्थी राष्ट्रों द्वारा दूसरे देशों का दोहन करने के लिए मंच पर आ गया और आपसी दुश्मनी को किनारे रख दिया, सबने मिलकर उपनिवेशों का शोषण किया।
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प्रश्न 26: क्या आप एडवर्ड मोरेल के विचार से सहमत है की अफ्रीकी लोग यूरोपीय शक्तियों के आगे लाचार थे?
उत्तर : एडवर्ड के अनुसार :- जो अन्याय और दुर्व्यवहार एक अफ्रीकी अपने जीवन में सहता है, उसका विरोध किसी भी अफ्रीकन के द्वारा अफ्रीका में कहीं भी संभव नहीं है. अफ्रीकी मूल के निवासी यूरोपियन श्वेत नस्ल के पूंजीवादी शोषण, साम्राज्यवाद और संवाद के सामने बिल्कुल असहाय हैं. एडवर्ड महोदय का कथन बिल्कुल सामायिक सत्य है. जो हमें इतिहास बताता है या हमने अपने देश के इतिहास में अंग्रेजों द्वारा देखी है |
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प्रश्न 27: अफ्रीका के राजनीतिक मानचित्र में अलग – अलग देशों की सीमाओं को ध्यान से देखें | कई स्थानों पर यह एकदम सीधी रेखा की तरह दिखती है | क्या आप कोई कारण बता सकते है की अफ्रीका में सीमा रेखाएं इतनी सीधी क्यों है ?
उत्तर : अफ्रीका का बंटवारा यूरोपियन के आने के पहले से नहीं था। यूरोपियो ने आपसी विवाद को टालने के लिए यह बंटवारा किया और मानवकृत बंटवारा द्वारा सीधी सीमाएं निर्धारित की। यह भौगोलिक स्थिति यह जाती धर्म के आधार पर नहीं था, यह बंटवारा सिर्फ शासन करने के उद्देश्य से किया गया |
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प्रश्न 28: इस पाठ में हमने पढ़ा की सन् 1850 तक अफ्रीका में किसी राष्ट्र राज्य का अस्तित्व नहीं था | लेकिन सन 1913 में हमें पूरा अफ्रीका अलग – अलग देशों में विभाजित दीखता है | मात्र 63 सालों में अफ्रीका में इतने सारे देश कैसे बने?
उत्तर : यूरोपियन का आगमन अफ्रीका का बंटवारा का कारण बना, उन्होंने अपनी सुविधा और कब्जे के आधार पर अफ्रीका का बंटवारा कर लिया तथा उनके जाने के बाद स्वतंत्र रूप से जहां जहां लोग सुरक्षा प्राप्त किए वहां वहां नए राज्य व राष्ट्रों का उदय हुआ |
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प्रश्न 29: नस्लवाद का सिद्धांत क्या है , आज पूरी दुनिया में नस्लीय भेदभाव को कानूनी रूप से गलत माना जाता है | आपके अनुसार नस्लवाद के सिद्धांत में क्या गलत है ?
उत्तर : नक्सलवाद का सिद्धांत मुख्यतः किसी भी वर्ग, आधार, लिंग, रंग, धर्म, रूप, अथवा स्थान के कारण अपनी श्रेष्ठता दिखाता है जो की पूरी तरह मानव निर्मित है तथा प्राकृतिक सिद्धांत के प्रतिकूल है| यह मानव द्वारा मानव को उत्पीड़न करने का माध्यम है जो कि बिल्कुल गलत है |
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प्रश्न 30: माजी – माजी विद्रोह क्यों असफल रहा ? इथियोपिया के लोग प्रतिरोध करने में क्यों सफल रहे ?
उत्तर : यह विद्रोह कोई सुनियोजित नहीं था, यह मात्र एक अफवाह के चलते हुआ कि पवित्र पानी की छिड़काव से गोलियां प्रभावहीन हो जाएगी, परंतु हकीकत में जब गोलियां चली थी भयानक नरसंहार हुआ और लोग मारे गए तथा डर और भगदड़ के कारण विद्रोह असफल हो गया | इथोपिया का विद्रोह एक सुनियोजित विद्रोह था, जो कि वहां के शासक द्वारा किया गया तथा उनसे इसके लिए पूर्व में ही अस्त्र शस्त्रों की व्यवस्था कर ली थी तथा यूरोपीय देशों को अपनी बुद्धियता से लड़कर विद्रोह में सफलता प्राप्त कर ली जिसने छल का जवाब छल और बल का जवाब बल से दिया |
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प्रश्न 31: क्या आपको लगता है कि यूरोप के देशों द्वारा अफ्रीका का बंटवारा सही था या गलत? अपने उत्तर के पक्ष तर्क दें |
उत्तर : यूरोप के देशों द्वारा अफ्रीका का बंटवारा बिल्कुल गलत था, क्योंकि यह बंटवारा अपने स्वार्थ के लिए किया गया न कि स्थानीय लोगों के हित के लिए, बंटवारे में किसी भी स्थानीय को शामिल नहीं किया गया, न ही उनके हितों का ध्यान रखा गया, न ही भौगोलिक तथा धार्मिक को आधार बनाया गया. बाजार व गुलामी की मानसिकता के आधार पर बंटवारा किया गया, जो पूर्णता अन्यायपूर्ण गलत था |
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प्रश्न 32: इथियोपिया की इटली पर विजय से यूरोपीय वर्चस्व पर क्या कोई असर पड़ा होगा ?
उत्तर : इंडोनेशिया की इटली पर विजय के फलस्वरूप यूरोप के देशों को यह लगने लगा कि अब हम अधिक समय तक यहां शासन नहीं कर सकते हैं, फलस्वरूप उन्होंने अपनी नीतियों में परिवर्तन किया तथा वहां के लोगों को कुछ सीमित अधिकार दिया जाने लगा ताकि लोग विद्रोह ना करें |
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प्रश्न 33: वाणिज्यिक खेती के विकास का आम जीवन पर क्या असर हुआ होगा?
उत्तर : खेती का भारतीय जनता पर तो अच्छा प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि यह अंग्रेजों द्वारा अपनी सुविधा अनुसार कराई गई तथा भारत के किसानों की पारंपरिक खेती कम हो गई जिससे बचने के लिए कपास या नील की खेती जो कि इंग्लैंड को कच्चा माल के रूप में मिला, परंतु इस कारण भारत में अनाज की पैदावार पर बुरा प्रभाव पड़ा, तथा लगान देने के बाद किसान को खाने के लाले पड़ गए |
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प्रश्न 34: इस तरह के विचार औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था के आधार बने | आप सोच सकते है की इसका शिक्षित लोगो पर क्या प्रभाव पड़ा होगा ?
उत्तर : अंग्रेजों की अपनी और वैदिक व्यवस्था चलाने के लिए ऐसे वर्ग की आवश्यकता थी जो कि गुलामी की मानसिकता की हो, उसके लिए मैकाले शिक्षा नीति बोले, यह जिससे शिक्षित वर्ग अंग्रेजों को सही ठहराने तथा उनकी स्थिति का गुणगान करें व सामान्य भारतीयों से अपने को अलग व श्रेष्ठ समझे तथा उनकी शासन व्यवस्था में सहयोग करें, जिसमें वह काफी हद तक सफल रहे. शिक्षा द्वारा उन्होंने क्लर्क तथा बाबू पैदा किया तथा खुद अधिकारी बने रहे तथा शिक्षित वर्ग को पालतू बना दिया जो भारतीयों का उत्पीड़न करें |
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प्रश्न 35: औपनिवेशिक शासन व्यवस्था में स्थानीय लोगों की भागीदारी किस प्रकार होती थी? दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में स्थानीय आबादी के संदर्भ में बताएं |
उत्तर : औपनिवेशिक व्यवस्था में स्थानीय लोगों की भागीदारी का प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि सिर्फ मालिक व गुलाम का संबंध होता था, भागीदारी का कोई संबंध नहीं होता था. दक्षिण अफ्रीका में तो वहां के मूल निवासियों का सफाया ही हो गया सारे मारे गए बीमारी, अकाल, युद्ध के कारण तथा उनकी जगह यूरोपियन वहां के निवासी हो गए परंतु अफ्रीका में यह भिन्न रहा, अफ्रीका के लोग दास के रूप में अमेरिका में गए, जो वहीं रह गए, परंतु वह बहुत संख्या में यूरोपियन रहे, अफ्रीका में यूरोपियन भी बसें परंतु बहुत ही अल्प संख्या में रहे |
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प्रश्न 36: स्थानीय आबादी के साथ यूरोपीय शक्तियों ने किस प्रकार व्यवहार किया? कांगो , स्पेनी , मेक्सिको और इंडोनेशिया के संदर्भ में बताएँ |
उत्तर : कांगो में बर्बरता की पराकाष्ठा यूरोपियों द्वारा पार की गई, लियोपोल्ड द्वारा निजी जांगीर बनाने के लिए सामूहिक नरसंहार तथा बड़े भूभाग पर कब्जा तथा उसकी कंपनियों द्वारा निर्धारित मात्रा में खंड हाथी दांत न देने पर लोगों के हाथ काट लेना आम बात थी, जिसके कारण 100 करोड़ लोग मारे गए, स्पेनियों ने भी क्रूरता की स्थानीय लोगों की संस्कृति सभ्यता नष्ट कर दी तथा पूरे मेक्सिको की स्थानीय आबादी को समाप्त कर दिया सिर्फ गुलाम दास का व्यवहार हर जगह किया, इंडोनेशिया में जंगलों का विनाश किया तथा सारा उत्पादन डचों द्वारा अपने देश या यूरोप के बाजार में भेज दिया जाता था,हर जगह पर स्थानीय नागरिकों पर अत्याचार, उत्पीड़न, बर्बरता पूर्ण व्यवहार यूरोपियन शक्तियों द्वारा किया गया |
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प्रश्न 37 : औपनिवेशिक प्रक्रिया में प्राकृतिक संसाधनों और मानव श्रम का शोषण किस प्रकार हुआ? दक्षिण , अमेरिका और अफ्रीका की खानों के संदर्भ में उत्तर दे |
उत्तर : हर उपनिवेशों में यूरोपियन द्वारा मानव श्रमिक का शोषण किया गया, खेतों में काम करा कर उत्पादन को औने पौने दामों पर ले गया, लगान के बहाने भूमि पर कब्जा करना तथा खदानों में तो युगो युगो से कब्जा, आदिवासी समुदायों को बेदखल कर दिया गया तथा उनकी खेती बाड़ी छुड़ाकर उन्हें खदानों में काम करने के लिए विवश किया गया तथा उन पर टैक्स लगाए गए, जिसकों भरने के लिए सभी को अफ्रीका में 3 महीने खदानों में काम करना पड़ता था, अमेरिकी खदानों में भी अफ्रीका से लाए गए दासो को बेगार के रूप में काम कराया जाता था, तथा स्थानीय जनजातियों या रेड इंडियनों को मजबूर करके काम लिया जाता था |
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प्रश्न 38 : औद्योगिक क्रांति से पहले और उसके पश्चात उपनिवेशों के शोषण के तरीकों में क्या अंतर आया? दक्षिण अमेरिका और भारत के संदर्भ में बताएँ |
उत्तर : औद्योगिक क्रांति से पहले लैटिन अमेरिका में रहने वाले मूलनिवासी को तो बिल्कुल खत्म कर दिया गया, उनकी जगह वहां पर यूरोपियन बस गए, परंतु भारत में यह बात ना रही, औद्योगिक क्रांति के बाद सारी दुनिया में एक चीज आ चुकी थी जो संघर्ष करने को तत्पर थी, तथा भारत पहले से धार्मिक तथा आर्थिक वैचारिक रूप से उन्नत था. इस कारण भारत में अंग्रेजों द्वारा शोषण का तरीका शारीरिक किया बर्बरता पूर्ण कम रहा.
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प्रश्न 39: खेती के वाणिज्यीकरण एवं खेती में पूंजी निवेश में क्या अंतर है? इंडोनेशिया और भारत के संदर्भ में बताएँ |
उत्तर : खेती का वाणिज्यीकरण के तहत किसान को मजबूर किया गया कि वह यूरोप की जरूरतों के हिसाब से खेती करें, जबकि इन पूंजी निवेश द्वारा किसान को उसकी समझही खेती के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जाती है |इंडोनेशिया के जंगलों को नष्ट कर उन्हें पारंपरिक खेती छोड़कर, मसालों की खेती के लिए मजबूर किया गया, परंतु भारत में किसानों को लगान लगाकर तथा कपास उगाने के लिए मजबूर किया गया|
अभ्यास : –
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प्रश्न 01 निम्नलिखित घटनाक्रम को समय के सापेक्ष क्रम में जमाइए – कोलंबस द्वारा वेस्टइंडीज पहुँचना , इंका साम्राज्य का नष्ट होना , एजटेक साम्राज्य का नष्ट होना , हैती का विद्रोह |
उत्तर : 1 . कोलंबस द्वारा वेस्टइंडीज पहुँचना
2 . एजटेक साम्राज्य का नष्ट होना
3 . इंका साम्राज्य का नष्ट होना
4 . हैती का विद्रोह
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प्रश्न 02 : सुमेलित करे –
हेर्नण्डो कोर्टेस = एजटेक साम्राज्य पर कब्जा
तोंसां ले ओवस्पुर = कांगो का नरसंहार
लियोपोल्ड = हैती विद्रोह
मैकाले = कोलंबिया और वेनेजुएला की स्वतंत्रता
फ्रांसिस पिजारो = इंका साम्राज्य पर कब्जा
जोस मार्टिन = भारत की शिक्षा नीति
सीमोन बॉलिवार = अर्जेंटीना की स्वतंत्रता
उत्तर : 1 . एजटेक साम्राज्य पर कब्जा
2 . हैती विद्रोह
3 . कांगो का नरसंहार
4 . भारत की शिक्षा नीति
5 . इंका साम्राज्य पर कब्जा
6 . अर्जेंटीना की स्वतंत्रता
7. कोलंबिया और वेनेजुएला की स्वतंत्रता
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प्रश्न 03 : लैटिन अमेरिका में स्पेनी कब्जेदारी के बाद किस तरह की सामाजिक संरचना का विकास हुआ?
उत्तर : लैटिन अमेरिका में स्पेनी के बाद एक नयी सामाजिक संरचना हुई, जिसमे कुछ मूल निवासी अफ्रीका जो दास के रूप में आए, यूरोपियन लोग शामिल थे | एक मिश्रित समुदाय का जन्म हुआ।
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प्रश्न 04 : फ्रांस की क्रांति का लैटिन अमेरिका के स्वतंत्रता संघर्ष पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : फ्रांससि क्रांति के बाद अमेरिका में भी रहने वाले यूरोपीय लोग उससे प्रभावित हुए जो नए लोकतांत्रिक विचारों तथा राष्ट्रवादी विचारों से परिचित थे। फलस्वरूप उन्होंने अपनी आजादी की कोशिश शुरू कर दी।
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प्रश्न 05 : स्पेन शासित अमेरिका में तीन जन समूह रह रहे थे – स्पेन के आए लोग जो शासक एवं सामान्य किसान थे , वहां के मूल निवासी एवं अफ्रीका दास | क्या औपनिवेशिक शासन में इन तीनों जन समूहों के अधिकारों में अंतर थे?
उत्तर : स्पेन शासित अमेरिका में जो स्पेन से आये थे, वह जमींदार थे, तथा सारी खेती उन्होंने अपने कब्जे में कर रखी थी, तथा जो वहां के मूल निवासी या अफ्रीका से आये या लाये गए थे, उन्हें सिर्फ श्रमिक का दर्जा प्राप्त था, जो सिर्फ उसके यहां मजदूरी कर सकते है, उन्हें किसी प्रकार की सुविधा या अधिकार नहीं प्राप्त थे।
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प्रश्न 06 : खेती के वाणिज्यीकरण से आप क्या समझते है ? भारत में किन कारणों से खेती का वाणिज्यीकरण हुआ था ?
उत्तर : खेती का वाणिज्यीकरण अंग्रेजो ने अपने हित को ध्यान में रखते हुए किया था. वाणिज्यीकरण का अर्थ खेती में उसके अंश व जरुरत के अनुसार फसलें पैदा की जाए तथा
सारा उत्पादन उनको सौंप दिया जाये, उस उत्पादन पर किसान का कोई अधिकार नहीं होगा तथा वह किसान के उपयोग में नहीं आ सकता है।
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प्रश्न 07 : भारत में वाणिज्यीकरण एकाधिकार का बुनकरों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : वाणिज्यिक एकाधिकार के कारण भारतीय बुनकर पर भूरा प्रभाव पड़ा, वह बेरोजगार हो गए, लाखो जुलाहे जो परम्परागत कपड़े के व्यवसाय में थे , वे खेतो की तरफ आये जिससे कृषि क्षेत्र में दबाव बढ़ गया।
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प्रश्न 08 : एक ओर यूरोप में स्वतंत्रता,समानता व लोकतंत्र के सिद्धांत लोकप्रिय हो रहे थे और दूसरी ओर यूरोप के ही लोग उपनिवेशों में अमानवीय व्यवहार कर रहे थे | इस विरोधाभास के बारे में विचार करें कि कैसे संभव हो पाया होगा ?
उत्तर – यूरोप की स्वतंत्रता , समानता , लोकतंत्र के सिद्धांत को उन्होंने सौ मैकाले की शिक्षा नीति के द्वारा एक आडंबर पैदा किया ताकि भारतीयों को हम लोकतंत्र समानता के पक्षधर है | भारतीयों में ही एक अलग वर्ग पैदा कर दिया जो भारतीयों का शोषण करें तथा भारतीयों में धर्म, जाति तथा स्थान का विरोध उत्पन्न कर दिया, फलस्वरूप भारतीयों में आपस में ऊंच नीच की दृष्टि हो गयी और उसके बीच वह आसानी से राज करते रहे।