CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 16 भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 16 भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप
| Page No. – 238प्रश्न 01 : इस तालिका के आधार पर कृषि क्षेत्र में क्या – क्या बदलाव हुए है समझाइए | उत्तर : वर्ष सकल घरेलू उत्पाद में का योगदान कृषि का योगदान रोजगार में | वर्ष 1950 – 51 55% 72%वर्ष 1009 – 10 15% 53% |
| Page No. – 238प्रश्न 2. इस तालिका के आधार पर कृषि क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव हुए? समझाएं।उत्तर :- स्वतंत्रता के बाद सकल घरेलू उत्पाद में सन् 1950-51 में 55 भागीदारी थी और कृषि क्षेत्र में रोजगार की स्थित 72 प्रतिशत थी। सन् 2009-10 में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र की भागीदारी 15 प्रतिशत हो गई और कृषि क्षेत्र में रोजगार 53 प्रतिशत हो गया| Page No. – 239प्रश्न 3. वृत्त आरेख 16.2 को पूरा करते हुए निष्कर्ष निकालिए।उत्तर : वृत्त आरेख के अनुसार 2009-10 में कृषि क्षेत्र में 53 प्रतिशत लोगों को रोजगार प्राप्त था और बाकी 47 प्रतिशत अन्य क्षेत्रों में रोजगार रत थे। वृत्त आवृत के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद में सन् 2009-10 में कृषि का योगदान 15 प्रतिशत ही रहा था। अन्य क्षेत्रों का योगदान 85 प्रतिशत रहा था। Page No. – 239प्रश्न 4. क्या आप अपने आस-पास प्रच्छन्न बेरोज़गारी के उदाहरण देखते हैं?उत्तर : किसी कार्य क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों या सदस्यों का होना प्रच्छन्न बेरोजगारी कहलाता है। जैसे शहर या मोहल्ले में देखने को मिलता है कि एक ही किराने की दुकान पर पूरे परिवार के पांच-छः लोग कार्यरत होते हैं जबकि आवश्यकता दो आदमियों की होती है। Page No. – 240प्रश्न 5. अनाज संग्रहण के क्या तरीके हो सकते हैं जो छोटे किसानों को सुरक्षा प्रदान करें?उत्तर : सरकारी गोदामों और कोल्ड स्टोरेज में मुफ्त भंडार की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाए | Page No. – 240प्रश्न 6. जैविक खेती किसे कहते हैं? अपने शिक्षक से चर्चा करें।उत्तर : जैविक खेती के अंतर्गत ऐसी खेती जिसमें रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है जैविक खेती में प्राकृतिक रूप से तैयार खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का ही प्रयोग करते हैं उसे जैविक खेती कहते हैं।प्राकृतिक रूप से खाद या उर्वरक तैयार करने के लिए गोबर, पत्तियां घास और बेकार खाद्य और बेकार घास वस्तुओं का उपयोग कर जैविक उर्वरक तैयार किया जाता है जिसकी लागत भी कम होती है और यह किसी प्रकार से हानिकारक भी नहीं होता है। इसी प्रकार जैविक कीटनाशकों में नीम का तेल, नीम की बाली, आदि का प्रयोग कर जैविक कीटनाशक तैयार किये जाते है जो फसल और मनुष्यों दोनों के लिए ही हानिकारक नहीं होते हैं। Page No. – 241प्रश्न 7. क्या जैविक खेती से खाद्यान्न का उत्पादन उतनी ही मात्रा में किया जा सकता है जितना हम रासायनिक खादों के उपयोग से कर रहे हैं? चर्चा करें।उत्तर : जैविक कृषि पद्धति से प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया गया है कि खाद्यान उत्पाद रासायनिक खाद के प्रयोग की तुलना में कम नहीं होता है। गोबर और अन्य प्राकृतिक उपशिष्ट पदार्थों से तैयार उर्वरक को जैविक उर्वरक कहते हैं यह लागत में रासायनिक उर्वरक की अपेक्षा सस्ता होता है। इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी बढ़ती है। पौधे और फसलों पर कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं पड़ता है। इसका प्रयोग भी किसानों के लिए सुरक्षित है और किसान इसे स्वम् ही तैयार भी कर सकते हैं। जब मिट्टी की उर्वरा क्षमता ठीक रहेगी तो उत्पाद भी अच्छा होगा। इसलिए जैविक उर्वरक के प्रयोग से खाद्यान उत्पादन में किसी प्रकार की कमी और नुकसान नहीं देखने को मिला है। Page No. – 241प्रश्न 8. जैविक खेती छोटे और लघु किसानों के लिए किस तरह से कारगर हो सकती है? चर्चा करें।उत्तर : जैविक खेती छोटे और लघु किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि जैविक उर्वरक बनाने में लागत बहुत कम या नहीं लगती हैं इसके विपरीत रासायनिक उर्वरक बहुत महंगे दाम में मिलते हैं। जैविक उर्वरक तैयार करने के लिए किसानों को अपने जानवरों के गोबर को कम्पोस्ट खाद में बदल कर जैविक उर्वरक बना सकते हैं। जिससे फसल, मिट्टी और किसान तीनों के लिए हितकर और सुरक्षित है। Page No. – 241प्रश्न 9. क्या किसान कभी टोल फ्री नंबर 1800-180-1551 का उपयोग करते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।उत्तर : किसान टोल फ्री नंबर का उपयोग करते है और वे इससे अपनी फसल के बोने, सिंचाई,दवाइयों के छिड़काव रोग और मौसम के अनुसार क्या-क्या सावधानियां और उपचार किये जाये। इस ट्रोल फ्री नंबर से पता करते हैं। Page No. – 242प्रश्न 10. क्या आप तालिका को देखकर कह सकते हैं कि भूमि का वितरण असमान है? चर्चा करें।उत्तर : तालिका को देखकर यह सहज ही पता चलता है कि भूमि का वितरण असमान क्योंकि छोटे और लघु किसान जिनकी आबादी अधिक है किन्तु उनके द्वारा जुताई का प्रतिशत कम है और इसके विपरीत बड़े किसान जो कि कम संख्या में है परन्तु उनके द्वारा जुताई गई भूमि का प्रतिशत ज्यादा है। Page No. – 242प्रश्न 11. आपके क्षेत्र में कृषक अपने उत्पाद को कहाँ बेचते हैं? क्या उन्हें उचित मूल्य मिलता है? कक्षा में चर्चा आपके क्षेत्र में कृषक अपने उत्पाद को कहाँ बेचते हैं? क्या उन्हें उचित मूल्य मिलता है? उत्तर : हमारे क्षेत्र में ज्यादातर किसान अपने उत्पाद को सरकारी फसल क्रय केन्द्र पर बेचते हैं। और उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित फसल का मूल्य मिलता है। परन्तु कुछ किसान मण्डियों और अन्य जगहों पर भी अपने उत्पाद को बेचते हैं। Page No. – 243प्रश्न 12. संस्थागत और गैर संस्थागत साख में अंतर स्पष्ट कीजिए।उत्तर : संस्थागत साखगैर संस्थागत साख1.इसमें सहकारी बैंक सरकार और सरकारी बैंक द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है। 2.इसमें ज्यादातर बड़े और मध्यम वर्ग के किसान ही लाभ ले पाते हैं।3.इसमें ऋण की ब्याज दर बहुत ही कम होती है।4.इसमें कागजी कार्यवाही बहुत ही ज्यादा होती है।1.इसमें सेठ,साहूकार, बनिया, रिश्तेदार अािद से ऋण प्राप्त किया जाता है।2.इसमें ज्यादातर छोटे और गरीब किसान ही ऋण लेते हैं।3.इसमें ब्याज दर बहुत ही ज्यादा होती है।4.इसमें कागजी कार्यवाही आवश्यक नहीं होती है। Page No. – 243प्रश्न 13. क्या कारण है कि प्रायः बड़े कृषक संस्थागत व छोटे कृषक गैर संस्थागत साख प्राप्त करते हैं?उत्तर : संस्थागत साख केवल बड़े और मध्यम वर्ग के किसान प्राप्त करते हैं इसका सबसे बड़ा कारण कागजी कार्यवाही का ज्यादा होना है क्योंकि संस्थागत साख में जमीन के कागज और अन्य प्रकार के कागजी औपचरिकताओं को पूरा करना है इसलिए छोटे और गरीब किसान इसे नहीं पूरा कर पाते हैं। जिसके कारण इन्हें संस्थागत साख नहीं मिल पाती है।इसके विपरीत गैर संस्थागत साख में किसी कागजी कार्यवाही की जरूरत नहीं होती है और यह आपसी समझौता और वादों के आधार पर होती है। इसी कारण छोटे और गरीब किसान गैर संस्थागत साख प्राप्त करते हैं। Page No. – 243प्रश्न 14. कक्षा में चर्चा करें कि क्या कोई ऐसा माध्यम है जिससे गरीब किसान बिना ज़मानत दिए बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकता है?उत्तर : आज के छोटे और गरीब किसानों के लिए सरकार द्वारा तथा अन्य संस्थाओं द्वारा कई विकल्प उपलब्ध है। जिसके माध्यम से गरीब किसान बैंकों से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं। जैसे छोटे छोटे कई किसान मिलकर एक सहकारी संस्था की स्थापना करें और उसी के माध्यम से अपनी कृषि आवश्यकता की जरूरतों को पूरा करें इस संस्था के वित्तीय लेन देन के आधार पर बैंकों से आसानी से ऋण मिल सकता है। सरकार द्वारा गरीब किसान के लिए ऐसी योजनाएं भी हैं जिसमें गरीबी रेखा से नीचे के किसानों को ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था है। Page No. – 244अभ्यास- प्रश्न 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-1. ……………………….. देशों की प्रारंभिक अवस्था में कृषि और उसके संबंधित क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण रहे।2. वर्तमान में भारत की जनसंख्या के लगभग ……………………….प्रतिशत लोग कृषि एवं संबंधित क्षेत्र परनिर्भर हैं।3. ………………………………………. परिवर्तन के कारण कृषक हमेशा अनिश्चितता से जूझते रहते हैं।4. सिंचित क्षेत्र में सबसे ज्यादा सिंचाई ……………………………………….. जल के माध्यम से की जाती है। उत्तर : i) विकसित , ii) 60 प्रतिशत , iii) मानसून , iv) भूमिगत Page No. – 244प्रश्न 2. सही विकल्प चुनकर लिखिए- (अ) विकसित देशों में विनिर्माण की नवीन प्रणाली का फैलाव हुआ – (क) हरित क्रांति के बाद (ख) श्वेत क्रांति के बाद (ग) औद्योगिक क्रांति के बाद (घ) इनमें से कोई नहीं (ब) वर्तमान में भारत रोजगार के लिए किस क्षेत्र पर सबसे अधिक निर्भर है – (क) कृषि क्षेत्र (ख) उद्योग क्षेत्र (ग) सेवा क्षेत्र (घ) इनमें से कोई नहीं (स) भूमि की उर्वरा शक्ति को अधिक समय तक बनाए रखने के लिए आवष्यक है- (क) रासायनिक खाद (ख) जैविक खाद (ग) कीटनाशक दवाइयाँ (घ) इनमें से कोई नहीं (द) वर्ष 2009-10 में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान है – (क) 15 प्रतिशत (ख) 30 प्रतिशत (ग) 45 प्रतिशत (घ) 60 प्रतिशत उत्तर : i) (ग) औद्योगिक क्रांति के बाद , ii) (क) कृषि क्षेत्र , iii) (ख) जैविक खाद , iv) (क) 15 प्रतिशत Page No. – 245प्रश्न 3. भारत में रोजगार के लिए निर्भरता कृषि क्षेत्र पर ही बनी हुई है। इसके कारणों को अपने शब्दों में समझाइए।उत्तर : भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां पर कृषि क्षेत्र की परंपरागत रोजगार का साधन रहा है। आज भी देश की आधी से अधिक जनसंख्या कृषि क्षेत्र के रोजगारों पर निर्भर है, इसका मूल कारण यह है कि अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर ज्यादा नहीं हैं, और यदि उद्योग क्षेत्र या सेवा क्षेत्र की बात करें तो वहां पर ज्यादातर दक्ष लोगों और शिक्षित व्यक्तियों के लिए रोजगार उपलब्ध है। यही कारण है कि आज भी कृषि क्षेत्र पर रोजगार की निर्भरता बनी हुई है। Page No. – 245प्रश्न 4. क्या कारण है कि कृषक अनिश्चितता से जूझते रहते हैं?उत्तर : भारत का कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से जलवायु अर्थात प्रकृति पर निर्भर है। जलवायु में अनिश्चितता के कारण संपूर्ण कृषि क्षेत्र इससे प्रभावित होता है। Page No. – 245प्रश्न 5. सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना किन-किन कारणों से महत्वपूर्ण है?उत्तर : आज भी कृषि का लगभग आधे से ज्यादा कार्य वर्षा और मानसून पर निर्भर है क्योंकि सिंचाई की सुविधा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। इसी कारण यदि मानसून सही समय पर नहीं आता है तो फसले नष्ट हो जाती है इस आपदा से निपटने के लिए हमें सिंचित क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। Page No. – 245प्रश्न 6. घटता भू-जल स्तर चिंता का विषय है। इससे मुक्ति पाने के विभिन्न उपायों का उल्लेख कीजिए।उत्तर : पूरे देश में सिंचाई का प्रमुख साधन भू-जल है और इसके लगातार दोहन से भू-जल स्तर नीचे गिरता जा रहा है। भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए बड़े बांध का निर्माण, छोटे नाले तथा नदियों में स्टाप डैंप का निर्माण, गांवों में पोखरों , तालाबों का निर्माण, कुएं का निर्माण तथा वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपाय कर के हम भू जल को सुधार सकते है। Page No. – 245प्रश्न 7. उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही है। ऐसा क्यों? कारण बताइए।उत्तर : आज कृषि क्षेत्र का व्यवसायिकरण हो रहा है जिसमें ज्यादा से ज्यादा पैदावार लेने की होड़मची हुई है जिस कारण से अन्धाधुंध रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है।जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो रही है। Page No. – 245प्रश्न 8. मिश्रित एवं बहुफसली कृषि कृषकों के लिए लाभदायक है। समझाइए।उत्तर : परम्परागत खेती में एक मौसम में एक फसल पैदा की जाती थी। किन्तु आज मिश्रित था बहुफसलीय प्रणाली को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्धेश्य है कि कम लागत में कई तरह की फसल पैदा करना तथा यदि मौसम के मार से एक फसल खराब भी हो जाय तो दूसरी फसल के द्वारा उसकी भरपाई किया जा सके जैसे गेहूं के साथ चना मटर , मसूर सरसों आदि की खेती करना। जौ के साथ मूंग, उड़द, बाजरा आदि की खेती करना सब्जीयों में लताओं की सब्जी जैसे सेम करैली जमीन पर भिन्डी टमाटर जमीन के अंदर आलू, जिमीकंद सूरन आदि की खेती की जा सकती है। Page No. – 245प्रश्न 9. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो इसके उपाय सुझाइए।उत्तर : सरकार ने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई उपाय किये है। किसानों को अपनी फसल सरकारी किसान क्रय केन्द्र या सरकारी मंडियों में ही बेचना चाहिए जिससे उन्हें उसका उचित मूल्य प्राप्त हो सके। कुछ फसल और सब्जियों को भण्डार गृह में रख कर जब उसका उचित मूल्य मिले तब बेचना चाहिए। किसानों को अपनी फसल मध्यस्थों को नहीं बेचना चाहिए वे कम दाम में खरीद कर उसका भंडार कर के ऊंचे मूल्यों पर इन फसलों का विक्रय करते है। Page No. – 245 प्रश्न 10. अपने अनुभव को जोड़ते हुए समझाइए कि किसानों के हित में और क्या-क्या कदम उठाए जाने चाहिए।उत्तर : किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बहुत से सुधार किये जाते हैं किंतु इसमें निम्नलिखित सुधार और किये जा सकते है।1 किसानों को कम ब्याज पर मामूली कागजी कार्यवाही कर ऋण प्रदान किया जाए।2 सभी सरकार द्वारा केन्द्र और राज्य योजनाओं को ग्रामीण स्तर पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।3 किसानों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर, बैंक ऋण, फसल बीमा, फसलों की पैदावार, रखरखाव आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाय |4 सरकार द्वारा भूमि की असमान वितरण को ठीक किया जाए जिससे भूमिहीन किसान मजदूरों का कल्याण किया जा सके। 5 किसानों को व्यावसायिक, वैज्ञानिक और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए।6 कृषि के अन्य क्षेत्र पशुपालन, मछली पालन, औषधि फसल उत्पादन के लिए जानकारी और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। |