CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.1 भारतीय उपमहाद्वीप का प्राकृतिक स्वरूप – CGBSE Solutions PDF in Hindi

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CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 2.1 भारतीय उपमहाद्वीप का प्राकृतिक स्वरूप


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प्रश्न 1. उपर्युक्त पैराग्राफ पढ़कर बताइए-

1. कौन-सा नदी तंत्र सबसे बड़ा है?                                गंगा/सिंधु

2. पश्चिम दिशा में कौन-सी नदी बहती है?                         ताप्ती/रावी

3. सबसे कम संख्या में सहायक नदियाँ किस नदी तंत्र में हैं? ब्रह्मपुत्र/सिन्धु

4. महानदी इनमें से कौन-से नदी तंत्र में आएगी?                ब्रह्मपुत्र/गंगा/किसी में नही

उत्तर : 1) गंगा

          2) ताप्ती

          3) ब्रह्मपुत्र

         4) किसी में नहीं |

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प्रश्न 2. छत्तीसगढ़ और लद्दाख में होने वाली खेती में क्या-क्या अन्तर है?

उत्तर : छत्तीसगढ़ एक मैदानी क्षेत्र है, यहां के खेत समतल होते हैं, तथा यहां पर पूरे वर्ष भर सिंचाई के साधन उपलब्ध है, इसके कारण यहां पर सभी प्रकार की फसल और सब्जियां पैदा की जा सकती हैं |और यहां पर इनका व्यवसायिक स्तर पर उत्पादन भी किया जाता है। 

जबकि लद्दाख क्षेत्र की जलवायु शुष्क होती है, और यहां जल की कमी के कारण सिंचाई के साधन भी नहीं है। यहां खेती छोटे-छोटे खेत में की जाती है। यहां ज्यादातर मटर,गोभी, आलू, गेहूं, बाजरा की ही खेती की जा सकती है। यहां सीमित मात्रा में खेत, खेती के साधन उपलब्ध है, जिसके कारण यहां के लोग केवल अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही कृषि कार्य करते हैं। शेष वह प्रकृति, जंगलों और अपने पालतू जानवरों पर निर्भर रहते है।

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प्रश्न 3. ऐसे सीढ़ीनुमा खेतों के बारे में हमने और कहाँ पढ़ा था?

उत्तर : ऐसी सीढ़ी नुमा खेत पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों में पाये जाते है। क्योकि पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक संरचना ऐसी होती है कि वहां समतल भूमि का अभाव होता है, इसलिए ऐसे पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाये जाते है। भारत में उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमांचल प्रदेश, असम, नीलगिरी के पर्वतीय क्षेत्र और अरूणांचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा क्षेत्रों की अधिकता देखने को मिलती है।

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प्रश्न 4. ठंड मे वहाँ बर्फ जम जाती है और घास खत्म हो जाती है तब ये भेड़ें क्या चरती होंगी?

उत्तर : पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड के दिनों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ जम जाती है, इसलिए वहां के पशुपालक अपने जानवरों को जुलाई-अगस्त माह में पहले से नीचे उतर जाते है। पहाड़ो की तराई क्षेत्रों में घास और पेड़ों के मैदान होते है। जिसमें खासकर भेड़ों को चरने की सुविधा होती है।

प्रश्न 5. ठंड में  पहाड़ों के निचले हिस्सों में ही चारा क्यों मिलता है? समझाइए।

उत्तर : ठंड में पहाड़ो के उपरी क्षेत्रों में बहुत अधिक ठंड पड़ती है और पहाड़ो के उपरी भाग बर्फ से ढक जाते हैं। इसलिए वहां पर पशुओं को चारा मिलना बंद हो जाता है। इसके विपरीत ठंड के मौसम में हिमालय की तराई क्षेत्रों में ठंड भी कम पड़ती है और पशुओं और भेड़-बकरियों के खाने के लिए प्रचुर मात्रा में चारा भी उपलब्ध रहता है। 

प्रश्न 6. हिमालय में नए उद्योग लगाने की क्या संभावनाएं हैं?

उत्तर : हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में चूने के पत्थरों के पहाड़ बहुतायत मात्रा में पाये जाते है। इन पत्थरों से सीमेन्ट का निर्माण किया जाता है। यहां चूने के पत्थरों के उपयोग से सीमेंट के कारखाने लगाये जा सकते है, और सीमेंट की उपलब्धता के कारण पुल, बांध, घर, वन, बिजली केंद्र बनाने में आसानी होती है। जिसके कारण रोजगार का सृजन होता है। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्रों के परंपरागत उद्योग जैसे हस्तशिल्प, हथकरघों के बने कपड़ों, कशीदाकारी, लकड़ी की तराशी, जैसे उद्योग  में भी अपार औद्योगिक सम्भावनायें है, जिन्हें प्रोत्साहित कर के विश्व पठल पर लाने की आवश्यकता है। जिससे हिमालयी क्षेत्रों के लोगों को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त हो सके और उनका जीवन सुगम और सरल हो सके।

प्रश्न 7. पर्यटन उद्योग के विकास में सड़कों के बनने का क्या योगदान रहा है, समझाइए।

उत्तर : पर्यटन उद्योग की जीवन रेखा हम सड़कों को कह सकते है। क्योंकि हिमालय के क्षेत्रों बहुत ही दुर्गम और कठिन होते है। इसलिए यहां पर रेल या हवाई माध्यम से यात्रा नहीं की जा सकती है। यहां पर पहुंचने का एक मात्र साधन ही सड़क मार्ग है। हिमालय क्षेत्रों की प्राकृतिक सुन्दरता और यहां के धार्मिक स्थानों की यात्रा केवल सड़क मार्ग से ही संभव है इसलिए हम कह सकते है कि हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन के विकास के लिए सड़कों का महत्वपूर्ण और अहम योगदान रहा है।

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प्रश्न 8.भारत के राजनैतिक मानचित्र में पूर्वी हिमालय में आने वाले राज्यों को देखें एवं इनके नाम बताइए। ये पहाड़ी राज्य किस नदी घाटी को चारों  तरफ से घेरे हैं?

उत्तर : भारत के राजनैतिक मानचित्र का अवलोकन करने पर हमें यह ज्ञात होता है कि पूर्वी हिमालय में आने वाले राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और मिजोरम है। यह पहाड़ी राज्य ब्रम्हपुत्र नदी को घेरे हुए है। और यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के निकट होने के कारण यहां पर वर्षा अधिक मात्रा में होती है।

प्रश्न 9. ब्रह्मपुत्र नदी-घाटी का विस्तार किन राज्यों में है?

उत्तर : ब्रह्मपुत्र नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम (दो राज्यों) में इसका विस्तार है। 

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प्रश्न 10. झूम खेती के तरीके से मिट्टी का कटाव कैसे रोका जाता है?

उत्तर : पहाड़ों की तेज ढलानों और अत्यधिक वर्षा के कारण हिमालय में खेती करने में काफी कठिनाई होती है। तेज ढलानों पर मिट्टी को खोदकर खेत बनाये जाये तो ढीली मिट्टी 

घनघोर वर्षा में बह जायेगी। इस समस्या को हल करने के लिए झूम खेती की सहायता ली जाती हैं झूूम खेती में जंगलों को काटकर सूखी टहनियों व पत्तियों को जलाकर राख की परत को छोड़कर बारिस के पानी से जैविक खाद बन जाते हैं और इसमें फसल के बीज डालकर ढक देते हैं। जब तेज वर्षा शुरू होती है तथा फसल भी बढ़ती है इसे ही झूम खेती कहते हैं इससे मिट्टी का संरक्षण होता है।

प्रश्न 11. छत्तीसगढ़ में इस प्रकार की खेती कहाँ और कैसे की जाती है ? पता करें।

उत्तर : छत्तीसगढ़ में सीढ़ीनुमा खेती छत्तीसगढ़ की पहाड़ी क्षेत्रों में किया जाता है।

प्रश्न 12. झूम खेती में क्या बदलाव हो रहे हैं ? उसका वनों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

उत्तर : आजकल लकड़ी की बढ़ती हुई व्यवसायिक मांगो के चलते तेजी से वन क्षेत्र कम हो रहे हैं। झूम खेती के लिए पर्याप्त जंगल नहीं है। वही 20 साल परती छोड़ने के स्थान पर पांच साल में ही झूम खेती के लिए वनों की कटाई करने से जंगल तेजी से कम होते जा रहे है। और झूम खेती में पैदावार भी कम होती है। इसी कारण अब पर्वतीय क्षेत्रों के लोग झूम खेती बंद करके ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाने लगे है। जिससे वे एक ही जगह पर स्थाई रूप से खेती कर सकते है। और उन्हें हर साल जंगल काटने की भी जरूरत ही नहीं पड़ती है। इस कारण वनों का संरक्षण हो पा रहा है।

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अभ्यास-

प्रश्न 1. इनमें से कौन से राज्यों का कोई भी हिस्सा हिमालय पर्वत में नहीं पड़ता है?

    क) मध्य प्रदेश            ख) उत्तर प्रदेश                 ग) सिक्किम

    घ) हरियाणा                ङ) पंजाब

उत्तर : मध्यप्रदेश राज्य का कोई भी हिस्सा हिमालय पर्वत में नहीं पड़ता है।

प्रश्न 2. हिमालय से बहने वाली नदियों में साल भर पानी क्यों रहता है ?

उत्तर :  हिमालय क्षेत्र से निकलने वाली नदियों में साल भर पानी रहने की प्रमुख वजह है कि ये नदियां हिमालय के ग्लेशियर से निकलती है, और यह इसका उद्गम स्थल है। चूंकि हिमालयी ग्लेशियर बहुत ऊंचाई पर होते हैं। और यहाँ साल भर बर्फ रहती है, जिसके कारण वहाँ से निकलने वाली नदियों में पूरे वर्ष भर पानी रहती है।

प्रश्न 3. हिमालय के पशुपालक गर्मी की ऋतु में पहाड़ों के ऊपर क्यों जाते हैं?

उत्तर : हिमालय के पशुपालक गर्मी के ऋतु में पहाड़ों के ऊपर इसलिए चले जाते हैं  क्योंकि प्रतिवर्ष गर्मी के दिनों में हिमालय की ऊपरी हिस्सों से रसीली और मुलायम घास उगती है | इसलिए पहाड़ी लोग गर्मियों के मौसम में अपने पशुओं को लेकर पहाड़ों के ऊपर चले जाते हैं |

प्रश्न 4. ”पहाड़ों पर आबादी कम और बिखरी हुई है।“ इस वाक्य का क्या अर्थ है? समझाकर लिखिए?

उत्तर : पहाड़ों पर आबादी कम और बिखरी हुई है, इस कथन का यदि विस्तृत में चर्चा करें तो इसका मतलब होता है कि, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी होती है कि वहां एक ही स्थान पर बड़े गांव नहीं होते हैं, क्योंकि वहां समतल भूमि कम होती है, जिसके कारण पर्वतीय क्षेत्रों के गांव दूर-दूर बसे होते हैं, और यहां की आबादी भी कम होती है | पहाड़ों पर लोगों का जीवन अन्य लोगों की तुलना में कठिन और दुरूह होता है | क्योंकि वहां दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाली वस्तुएं भी बड़ी कठिनाई और मुश्किल से प्राप्त होती है, जिसके कारण यहां पर आबादी मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा कम होती है | इसी कारण यहां पर जनसंख्या भी कम होती है |

प्रश्न 5. पहाड़ी ढलानों पर क्या-क्या उगाया जाता है?

उत्तर : पहाड़ी ढलानों पर अधिकतर लोग मटर, गोभी, आलू, गेहूं, बाजरा, मक्का, ज्वार, तिल, तंबाकू, मिर्च और कद्दू आदि की कृषि करते हैं | अर्थात हम यह कह सकते हैं कि पहाड़ी ढलानों पर वही अनाज और सब्जियां उगाई जाती है, जिनमें पानी की कम से कम आवश्यकता होती है |

प्रश्न 6. हिमालय में सड़कों के बनने के कारण वहाँ की खेती और पर्यटन में क्या-क्या बदलाव आए हैं?

उत्तर : पहाड़ों पर सड़कों के बनने से वहां के पर्यटन उद्योग और पहाड़ी सब्जियों, फलों और हस्त कलाकृतियों के उद्योग के क्षेत्र में एक असाधारण प्रगति हुई है | क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में मार्गों के अभाव से लोगों की पहुंच नहीं हो पाती थी किंतु आज अधिकतर पर्वतीय क्षेत्र सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं, जिसके कारण पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और लोगों के आजीविका का परंपरागत साधन के साथ-साथ आधुनिक व्यवसाय भी पनपने लगे हैं | चूंकि सड़कों के माध्यम से पर्यटक और व्यावसायिक गतिविधियों को सुगमता और सुविधा मिली है | जिससे हम यह कह सकते हैं कि आज के पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन, पर्यटन और व्यवसाय के दृष्टिकोण से बहुत ही सकारात्मक परिवर्तन आए हैं |

प्रश्न 7. हिमालय में किन कारणों से भूस्खलन हो रहा है?

उत्तर : हिमालय में भूस्खलन के लिए निम्नलिखित परिस्थितियों को जिम्मेदार माना जा सकता है।

1 बढ़ते औद्योगिकरण के कारण जंगल की अनियंत्रित कटाई।

2 सीमेन्ट उद्योग के लिए चूना पत्थरों का अवैज्ञानिक तरीके से खनन।

3 कल कारखानों की स्थापना करने हेतु पहाड़ों को खोद कर समतल बनाना।

4 बढ़ती हुई आबादी तथा बांधो का निर्माण ।

5 कुछ प्राकृतिक कारण है जैसे हिमालय क्षेत्र के चट्टान बहुत कठोर नहीं है जिस कारण भी भूस्खलन होता है।

6 कभी-कभी भयंकर वर्षा या हिमपात के कारण भी भूस्खलन की घटनाएं होती रहती है।

प्रश्न 8. पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के साधन सीमित क्यों हैं?

उत्तर : पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित रोजगार का सबसे बड़ा कारण वहां की भौगोलिक संरचना है। पर्वतीय क्षेत्रों में चूंकि भूमि समतल नहीं होती है इसी के कारण यहां सीमित मात्रा में कृषि कार्य किया जाता है और इसी कारण उद्योग आदि स्थापित करने में कठिनाई होती है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहां यातायात और व्यवसाय के लिए सड़क मार्ग बहुत ही जटिल है। ठंड के दिनों में बर्फ तथा बरसात के मौसम में भूस्खलन के कारण सड़क मार्गो का बार-बार अवरूध होना भी प्रमुख कारण है।

प्रश्न 9. पूर्वी हिमालय में बहुत घने वन क्यों होते हैं? उन वनों में कौन-कौन से पेड़ उगते हैं?

उत्तर : पूर्वी हिमालय क्षेत्रों में घने वनों के होने  में वहां की जलवायु की प्रमुख भूमिका है। क्योंकि पूर्वी हिमालय की भौगोलिक स्थित ऐसी है कि जहां एक तरफ पूरब में हिमालय के उंचे पहाड़ है। और दूसरी तरफ पश्चिम में ब्रम्हपुत्र और बंगाल की खाड़ी निकट होने के कारण यहां वर्षा सबसे ज्यादा होती है। केवल साल में दिसम्बर से लेकर फरवरी तक कम बारिस होती है। लगातार बारिश के कारण यहां बहुत घने वन उगते हैं।यहां पर बांस, बेल, तेजपत्ता, बड़ी इलायची, दालचीनी, आदि जैसे मसालों के पेड़ बहुत पाये जाते है।

प्रश्न 10. पेड़ों की कटाई से लेकर, फसल की कटाई तक झूम खेती में क्या-क्या होता है, अपने शब्दों में वर्णन करें ?

उत्तर : झूम खेत बनाने की प्रक्रिया दिसंबर माह में शुरू होती है | यहां स्थानीय लोग मिलकर एक स्थान का चयन करते हैं, उसके बाद उक्त स्थान पर उगे जंगल एवं खरपतवार को काटते हैं | पौधे तथा पेड़ों को ऐसे कैसे काटा जाता है कि, उनकी जड़े  जमीन में ही रहे, जिससे मिट्टी के क्षरण से  बचाव हो सके | फिर जब  पेड़-पौधे सूख जाते हैं तो उन्हें वहीं खेत में जला दिया जाता है,और उनकी राख को पूरे खेत में फैला कर एक बारिश के बाद उसमें बीजों की बुवाई की जाती है | खेतों की जुताई नहीं की जाती है क्योंकि भारी बारिश के कारण मिट्टी के बहने का भय रहता है | इन खेतों में एक साथ सभी प्रकार की फसलों और सब्जियों के बीजों का रोपण किया जाता है, और जैसे-जैसे सब्जियां और फसल तैयार होती जाती है, उनकी कटाई करते जाते हैं | यहां पर एक समुदाय एक साथ सामूहिक खेती करते हैं | यहां पर किसी एक व्यक्ति का कृषि क्षेत्र नहीं होता है, बल्कि यहां पर अलग-अलग समुदाय के कृषि क्षेत्र अलग अलग है, और एक कृषि क्षेत्र में पैदा होने वाली फसलों पर केवल एक ही समुदाय के लोगों का अधिकार होता है | यहां एक ही खेत में मक्का, ज्वार, धान, तिल, सेम, प्याज, तंबाकू, कपास, शकरकंद, मिर्ची, कद्दू, आदि की फसलें पैदा की जाती है |

प्रश्न 11. आजकल झूम खेती करने में क्या कठिनाइयां आ रही हैं?

उत्तर : झूमखेती में सबसे महत्वपूर्ण जंगल होता है चूंकि आज के आधुनिक युग में लकड़ी का उपयोग बहुत ही बढ़ गया है। जिसके कारण जंगलो के सतत कटने से झूम खेती करना संभव नहीं है। दूसरा महत्वपूर्ण कारण है कि जिस क्षेत्र में एक बार झूम खेती की जाती थी उसे लगभग 18-20 वर्ष के लिए परती छोड़ा जाता था क्योंकि पुःन वहां पेड़ और पौधे उग सके किन्तुु आज यह समयाअवधि केवल 4-5 वर्षो की हो गई है जिसके कारण खेतों की उर्वरा शक्ति कमजोर पड़ती जा रही है और पैदावार और भी कम हो जाती है। इन्हीं सब कारणों से झूम खेती करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रश्न 12. उत्तर पूर्वी राज्यों के आदिवासी किन कारणों से तेज़ी से विकास कर पाए हैं?

उत्तर : भारत के उत्तर पूर्वी हिमालय क्षेत्रों के राज्यों में ऐसा कानून है कि यहां बाह्य प्रदेशों का कोई भी व्यक्ति बिना सरकार के अनुमति के बिना नहीं जा सकता है। जमीन खरीदना व्यापार आदि करना तो दूर की बात है। इसी कारण यहां के जंगल उसके संसाधन पर स्थानीय लोगो का ही अधिकार रहा और इन लोगों ने इसका सही  तरीके से उपयोग और उपभोग किया। यहां के विकाश में आधुनिक शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान रहा। आदिवासी युवक-युवतियां, पढ़ लिखकर अपने प्रदेश और जनता के हित के लिए सतत प्रयास करते रहें। इन्हीं सबके सामूहिक प्रयासों के कारण पूर्वी राज्यों के आदिवासी तेजी से विकास करने में सफल हो सके।

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