CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 14 आतिथ्य is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 14 आतिथ्य
CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 14 – आतिथ्य हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 14 हिंदी are given below for Hindi Medium students.
अभ्यास :
पाठ से :
Page no : 82 (आतिथ्य)
प्रश्न 1:लेखक के द्वारा की गई पदयात्रा का कारण क्या था ?
उत्तर :- लेखक के द्वारा की गई पद यात्रा का कारण अपने चलने के सामर्थ्य की परीक्षा करने का था और उसे ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थानों का भ्रमण भी करना था।
Page no : 82 (आतिथ्य)
प्रश्न 2: हेडमास्टर जी ने लेखक को अपने घर पर न ठहरने की क्या वजह बताई ?
उत्तर :- हेड मास्टर जी ने कहा यहा आसपास कई चोरियां हो गयी है। हम अपने घर किसी को नहीं ठहरने देते है।
Page no : 82 (आतिथ्य)
प्रश्न 3:थकावट के दुःख से भी अधिक दर्द था मर्माहत अभिमान का’ लेखक द्वारा इस तरह कहे जाने का क्या कारण हो सकता है?
उत्तर :- लेखक को मास्टर जी पर अति विश्वास था कि उन्हें उनके यहां आराम करने को मिलेगा किन्तु उनके मना करने पर वह अपनी थकान का दुःख भूल गया और उनका अभिमान चूर -चूर हो गया , जिसमे दुःख लेखक को ज्यादा था।
Page no : 82 (आतिथ्य)
प्रश्न 4:थके हुए लेखक के मन में हेडमास्टर जी के घर ठहरने को लेकर कौन-कौन सी भावनाएँ उठ रही थीं ?
उत्तर :- थके हुए लेखक के मन में आराम करने की चेष्टा थी और वह मास्टर जी से अधिकार स्वरूप मिलकर उनके यहां रात रुकने का मन बना रहे थे।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 5:हेडमास्टर से मिलने से पूर्व और उसके बाद में लेखक के मनोभावों में क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर :- हेडमास्टर से मिलने से पूर्व लेखक हेडमास्टर के प्रति सम्मान एवं सज्जन व्यक्ति की परिकल्पना लिए पहुंचा था।किन्तु उनसे मिलने के बाद उनके व्यवहार में जो रूखापन एवं निर्यदया का भाव देखा तो लेखक का अभिमान समाप्त हो गया और मन में क्रोध उत्पन्न हुआ।
Page no : 83(आतिथ्य)
प्रश्न 6:परिचय-पत्र देखकर हेडमास्टर के विचारों में किस प्रकार का परिवर्तन हुआ होगा? सोचकर लिखिए।
उत्तर :- परिचय पत्र देखने के बाद हेडमास्टर के मन में लेखक के प्रति जो दुर्भावना थी कि कहीं वह चोर तो नहीं है। वह परिवर्तित होकर सहानुभूति जाग्रत हुई होगी। इसलिए उन्हें पुनः धर्मशाला पहुंचाने के लिए एक आदमी दिया गया।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 7:लेखक चोर नहीं था, इस बात का विश्वास दिलाने के लिए उसने क्या किया?
उत्तर :- लेखक चोर नहीं था इस बात का विश्वास दिलाने के लिए उसने अपना परिचय पत्र दिखाया।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 8:लेखक के अनुसार जीवन के पथ पर अकेले चलना क्यों कठिन है ?
उत्तर :- जिस प्रकार जीवन पथ पर अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है वैसे ही राह पर चलते समय सहारे की आवश्यकता होती है। जीवन अकेले नहीं जिया जाता है और राह चलने के लिए हमसफ़र जरुरी है इसलिए अकेले चलना कठिन है।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 9:गहरी सहानुभूति दिखाने वाले की आज्ञा का उल्लंघन आसान नहीं होता’’ इस पंक्ति के द्वारा लेखक अपने दुखिया भिक्षुक मित्र के किन भावों को बताना चाहता है?
उत्तर :- लेखक का कहना था मेरे पास वही एक साफा था ,गजं-डेढ-गज का टुकड़ा जिसे मैंने दे दिया। अंधे ने अपने हाथो से मेरी टांगो को टटोला और नीचे से ऊपर तक कसकर बांध दिया। गहरी सहानुभूति दिखाने वाले की आज्ञा का उल्लंघन आसान नहीं होता। मै वैसा ही बैठा रहा। थोड़ी देर बाद उसने मेरी टांगे खोल दी और मेरी थकावट जाती रही।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 10:‘‘उन्हें क्या मालूम कि जो उनके लिए अंधेर है, वह मेरे लिए महा अंधेर है।’’ लेखक ने महाअँधेर किसे कहा है?
उत्तर :- लेखक चलते -चलते इतना थक गया था कि उन्हें आराम की सख्त आवश्यकता थी। रात्रि हो चुकी थी वह इस शहर में अजनबी और अकेला था। ऐसे में उन्हें सहारा देना छोड़ ,चोर होने का आरोप व शक करते हुए थाने भेजने की बात हो रही थी। यही स्थिति लेखक के लिए महाअंधेर था ।
पाठ से आगे :
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 1:पाठ में लेखक ने लिखा है कि ‘बुरे आदमी में क्या अच्छाई नहीं होती? अर्थात हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई दोनों होती है। आप स्वयं की बुराई और दूसरों की अच्छाई पर समूह में बात करते हुए बातचीत के प्रमुख बिंदुओं का लेखन कीजिए।
उत्तर :- प्रत्येक व्यक्ति के अंदर गुण -अवगुण दोनों ही विद्यमान होते है। यह जरूरी नहीं कि जो व्यक्ति अच्छा है वह सर्वगुण सम्पन्न है । अच्छे व्यक्ति में बुराई और बुरे व्यक्ति में कुछ न कुछ अच्छाई तो
अवश्य ही होती है। अर्थात बुरे व्यक्ति के अंदर भी इंसानियत विद्यमान होती है। ये अच्छाईया अवसर के आने पर उनके आचरण में स्वयं ही लक्षित होती है। बुराई इंसान को कमजोर और अच्छाई इंसान को मजबूती प्रदान करती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को छोड़कर अच्छे व सही मार्ग को अपनाना चाहिए जिससे वे अपने आने वाले जीवन के प्रगति पथ पर स्वतः ही अग्रसर हो सके। जो हमे हमारी गलतियाँ बताता है वही सही मायने में हमारा सच्चा मित्र होता है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर दया ,प्रेम ,सहिष्णुता ,त्याग ,सत्यता आदि गुण विद्यमान होते है। बस उन्हें इन गुणों को जीवन में ढालने के लिए प्रयत्नशील रहने की आवश्यकता होती है।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 2:जब सभी लेखक की अवहेलना कर रहे थे तब धर्मशाला के गलियारे में भिक्षुक ने उसकी सहायता और सेवा की। भिक्षुक के इस व्यवहार को पढ़ते-समझते हुए आपके मन में कौन से भाव उत्पन्न हुए? उसे एक अनुच्छेद में लिखिए।
उत्तर :- अँधा व्यक्ति काफी उदार एवं दयालु था। उसका मन दया भाव से भरा हुआ था। वह भिखारी होते हुए भी दिल का बड़ा धनवान था। लेखक को ठण्ड लगने पर लेखक के पैरो पर कसकर कपडा बांधा ताकि थोड़ी देर बाद खोलते ही खून अपनी गति कर सके। ऐसा करते ही थकावट का दर्द मानो कम हो गया और मुझे नींद आ गयी। हमें ऐसे व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए।
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 3:पाठ के अनुसार लेखक को लोगों ने रात में चोर समझकर घेर लिया। अपने आप को इस समस्या से उबारने के लिए उसे जब कोई सहारा नहीं मिला तब उसकी अपनी ही बुद्धि काम आई है। आप इस तरह की परिस्थिति में होंगे तो क्या करेंगे? अनुमान कर के और अपने मित्रों से बात कर लिखिए।
उत्तर :- सुख और दुःख हमारे जीवन के दो पहलू है जो समय -समय पर हमारे जीवन में आते -जाते रहते है जब हम सुख की घडिया स्वेच्छा से स्वीकार कर लेते है ,तो दुःख को क्यों नहीं ?हमें दोनों ही परिस्थितियों में अपने मन मस्तिष्क को काबू में रखना चाहिए। सत बुद्धि से हमें साहस मिलता है। और हम उसी के बल पर बड़ी से बड़ी मुसीबत के टालने की शक्ति प्राप्त करते है। मनुष्य अपनी बुद्धि का प्रयोग एक शस्त्र की तरह करता है ,जो मुसीबत पड़ने पर उसके काम आती है। बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना हम अपनी सतबुद्धि के कारण ही कर सकते है।
भाषा से :
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 1:‘अनधिकार’ शब्द ‘अन्’ उपसर्ग के साथ ‘अधिकार’ शब्द के मेल से बना है जिसका अर्थ होता है ‘बिना अधिकार के’। आप भी ‘अन्’ उपसर्ग से बने दस शब्दों का निर्माण कीजिये।
उत्तर :- (अन)उपसर्ग से निम्न शब्द बना है:-
| अन् | मोल | अनमोल |
| अन् | जान | अनजान |
| अन् | पढ़ | अनपढ़ |
| अन् | देखा | अनदेखा |
| अन् | चाहा | अनचाहा |
| अन् | मना | अनमना |
| अन् | इच्छा | अनइच्छा |
| अन् | सुना | अनसुना |
| अन् | भिज्ञ | अनभिज्ञ |
| अन् | सुलझा | अनसुलझा |
Page no : 83 (आतिथ्य)
प्रश्न 2: राम कहानी सुनाना, कोई चारा न होना, अपना रास्ता लेना, अथ से इति तक, अपना सा मुँह लेकर रह जाना, अक्ल गुम हो जाना, कोल्हू का बैल आदि मुहावरे हैं, जो इस पाठ में आए हैं। इन मुहावरों के अर्थ लिखिए और वाक्यों में प्रयोग भी कीजिए।
उत्तर :-
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
| राम कहानी सुनाना | आपबीती बताना | राम ने श्याम को अपनी आपबीती बताई। |
| कोई चारा न होना | कोई उपाय न होना | पढ़ते रहने के सिवा मेरे पास और कोई चारा नहीं था। |
| अपना रास्ता लेना | चले जाना | सुबह होते ही उसने अपना रास्ता लिया। |
| अथ से इति तक | शुरू से अंत तक | मैंने अपने अध्यापक को अथ से इति तक का सारा हाल बताया। |
| अपना सा मुँह लेकर रह जाना | शर्मिंदा होना | माँ की बाते सुन कर सभी अपना सा मुँह लेकर रह गए। |
| अक्ल गुम हो जाना | बुद्धि हीन होना | मुश्किलों को आते देखते ही हम सबकी अक्ल मानो गुम हो जाती है। |
| कोल्हूका का बैल | दिन रात काम में जुटे रहना | माँ दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह काम करती रहती है। |
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प्रश्न 3:(क) एक ‘स्टूल’ बैठने के लिए दिया गया और पानी का एक गिलास ।
उत्तर :- (1)आओ और खाओ फिर सो जाओ।
(2)कक्षा समाप्त हुयी और सब चले गए।
(3)सीता और गीता दोनों ही अच्छी दोस्त है।
(4)मैंने अपनी पढाई कर ली और अब मै मजे से खेलूंगा।
(5)मैंने अपना काम कर लिया है और अब मै माँ की मदद करुँगी।
(ख) जब आदमी को और कोई सहारा नहीं रहता तब बुद्धि ही उसके काम आती है। उपर्युक्त दोनों वाक्यों में ’और’ शब्द के अलग-अलग अर्थ हैं। प्रथम वाक्य में ‘और’ का अर्थ जुडाव जबकि दूसरे में ‘अन्य’ है। आप भी इसी तरह ‘और’ शब्द के भिन्न-भिन्न प्रयोग करते हुए पाँच-पाँच अन्य वाक्यों की रचना कीजिए।
उत्तर :-(1)जय का अब कोई और सहारा नहीं उसके माँ -बाप के सिवा।
(2)श्याम ने बंसी बजाई और सब मगन हो गए।
(3)मेरी बात कोई और भी सुन सकता है।
(4)अनाथो का और कोई सहारा नहीं ,ईश्वर के सिवा।
(5 )तुम्हारी कहीं और भी बातें मुझे याद आने लगी है।
Page no : 84 (आतिथ्य)
प्रश्न 4:(1) सुबह होते ही मैं अपना रास्ता लूंगा।
(2) मैं धीरे-धीरे पहुँच ही गया।
पाठ से उद्धृत उपर्युक्त उदाहरणों में ‘ही’ निपात का प्रयोग हुआ है। कुछ अव्यय शब्द वाक्य में किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल ला देते हैं, इन्हें ‘निपात’ कहा जाता है। इसी तरह भी, मात्र, तक, तो , भर आदि भी निपात है। आप भी इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
उत्तर :-
| निपात | वाक्य प्रयोग |
| ही | (1)आपको जाना ही होगा (2)यह तो मुझे ही कहना होगा। |
| मात्रा | (1)तुम्ही मात्र एक सहारा हो। (2)मात्र तुम्हारे आने से ही सारे काम आसान हो गए है। |
| तक | (1)तुम्हारे आने तक मै नहीं रुक पाऊंगी (2)तुम कल तक आना |
| तो | (1)मै तो अवश्य ही विद्यालय जाऊंगी (2)तुम्ही तो हो जो मेरी बात एकाग्र होकर सुनते हो। |
Page no : 84 (आतिथ्य)
प्रश्न 5:प्रातःकाल अपने साथी को न पाकर लेखक के मन में क्या विचार उठे होंगे? कल्पना करके लिखिए।
उत्तर :- वह अंधा व्यक्ति काफी उदार एवं दयालु प्रवृत्ति का था। उसका और लेखक का एक सहज सा रिश्ता कायम हो चुका था। उसने लेखक के पैरो पर कसकर कपड़ा बांधा था। परन्तु लेखक के मन में उस अंधे भिखारी के प्रति सम्मान व दया का भाव था। सूर्योदय के समय जब वह लेखक को यही मिला तो लेखक का हृदय उसके प्रति सम्मान से गदगद हो गया होगा और वह सच्चे मन से उसकी प्रतिक्षा कर रहा होगा।
Page no : 84 (आतिथ्य)
प्रश्न 6:लेखक के स्थान पर यदि आपके साथ यह घटना घटित होती तो आप इसे अपने किसी मित्र सहेली को पत्र के रूप में कैसे लिखते/लिखतीं ?
उत्तर :- शंकर नगर
अशोका रतन
रायपुर (छ.गढ़.)
दिनांक -13 /03/2023
प्रिय सखी लक्ष्मी
सप्रेम नमस्ते !
मै यहां कुशलता से रहते हुए ईश्वर से तुम्हारी कुशलता की कामना करती हूँ। सखी मै तुम्हे मेरे साथ घटित एक घटना की जानकारी देने हेतु पत्र लिख रही हूँ। मुझे विद्यालय की ओर से कुछ ऐतिहासिक स्थानों को जानने और समझने का मौका मिला तो मै वहां के लिए पैदल ही निकल पड़ी मुझे वहां पहुंचने में थोड़ी देर हो जाने के कारण मैंने एक प्रधानाध्यापक के यहां रुकने का निर्णय लिया। जैसे ही मै उनके घर पहुंची तो उन्होंने मुझे अपने यहाँ ठहराने से मना कर दिया। जिसके कारण पूरी रात मुझे धर्मशाला में बितानी पड़ी। वहां मेरी मुलाकात एक अंधे भिखारी से हुयी जो दया और प्रेम की मूर्ति थी मुझे यह नहीं पता कि कब और कैसे उसने बाते करते करते मेरे सम्पूर्ण शरीर के दर्द को चुटकियो में गायब कर दिया और उससे बातें करते करते मुझे नींद आ गई। जब मै उठी तो वह अपनी जगह पर नहीं थी। उसके अपने पन और मेरे प्रति दया के भाव को मै कभी भूल ही नहीं सकती हूँ। मैंने जो अनुभव किया वह तुमसे बता कर अब मै संतुष्ट हूँ। बाकी बातें मिलने पर बताउंगी। तुम्हारी अभिन्न सखी
सपना यती
धन्यवाद।
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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.