CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 कटुक वचन मत बोल – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 कटुक वचन मत बोल is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 कटुक वचन मत बोल

CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 19 – कटुक वचन मत बोल हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।

CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 19 हिंदी are given below for Hindi Medium students.


अभ्यास : 

पाठ से :

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 1: लुकमान ने बकरे के शरीर के सबसे अच्छे और बुरे हिस्से के चयन में जीभ को ही क्यों चुना?

उत्तर :- लुकमान ने बकरे के शरीर के सबसे अच्छे और बुरे हिस्से के चयन में जीभ का चयन इसलिए किया क्योंकि यदि शरीर में जीभ अच्छी है, तो सब अच्छा ही होता है और जीभ बुरी है, तो सब बुरा ही होता है। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 2: चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के कथन के जरिए लेखक क्या बताना चाहता है ?

उत्तर :- चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस द्वारा जीभ और दांत के उदाहरण के जरिये लेखक ने मीठी वाणी को सत्कार और कटु वचन को तिरष्कार के रूप में स्पष्ट किया है। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 3: लेखक ने हृदय को तोड़ने वालों को क्षमा न देने की बात क्यों कही है?

उत्तर :- कटुवाणी के आहत से हृदय के टूटने के पश्चात् उसे जोड़ना बहुत कठिन होता है ,वह जीवन भर उस पीड़ा  से व्याकुल रहता है। इसलिए लेखक ने ऐसे लोगों को क्षमा न देने को बात कही है। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 4: किसी के द्वारा प्रयोग किए कठोर वचन शरीर में चुभते हैं। क्यों ? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- कठोर वचन सुनकर व्यक्ति का हृदय विदीर्ण हो जाता है। तीर के घाव का इलाज किया जा सकता है किन्तु कठोर वचन रूपी तीर से आहत व्यक्ति का इलाज सम्भव नहीं है, इसकी चुभन जीवन भर बनी रहती है। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 5: श्रीमती शास्त्री का क्रोध का पारा किस शेर को सुनकर नीचे उतर गया और क्यों ?

उत्तर :- श्रीमती शास्त्री के नौकर से कोई काम बिगड़ गया था ,जिसके चलते श्रीमती शास्त्री उससे  सख्ती से पेंश आ रही थी ,तब शास्त्री जी ने उनके क्रोध को शांत करने के लिए एक शेर सुनाया –

जो बात कहो साफ हो ,सुथरी हो ,भली हो। 

कड़वी न हो ,खट्टी न हो ,मिश्री की  डली हो।।

इस शेर को सुनकर श्रीमती शास्त्री का क्रोध का पारा नीचे उतर गया। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 6: श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने शेर के माध्यम से अपनी पत्नी को क्या समझाने का प्रयास किया, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :- श्री लाल बहादुर शास्त्री जी  ने समझाया की  सभी बातें ऐसी नहीं हो सकती ,जो दूसरों को प्रिय ही लगे। सत्य कभी कभी कड़वा होता है। कुछ बाते कहनी ही पड़ती है ,किन्तु ऐसे अवसर पर होना चाहिए कि बात भी कह दी जाए और दुसरो को बुरी भी न लगे।  

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 7: दोनों ज्योतिषियों ने राजा को एक ही बात कही, उनके कहने के तरीके में आपको क्या अंतर लगता है?

उत्तर :- एक ज्योतिष ने अपनी बात सीधे -सीधे कह दी जिससे राजा को दुःख हुआ दूसरे ज्योतिष ने वही सत्य प्रिय और मधुर बनाकर प्रस्तुत किया और राजा खुश हुआ। दोनों के कहने के ढंग में अंतर था। 

Page no : 103 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 8: लोकप्रिय बनने के लिए आपको क्या करना होगा ?

उत्तर :- लोकप्रिय बनने के लिए हमें अपनी वाणी में संयम ,लचीलापन रखना होगा एवं वाणी को  प्रिय और मधुरता बनाये रखना  होगी। 

पाठ से आगे  :

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 1: ‘‘जीभ कोमल है, दांत कठोर हैं। जिसमें लचीलापन होता है, जो नम्र होता है, वह अधिक समय तक जीता है। इस उक्ति पर आप अपना अभिमत दीजिए।

उत्तर :- जीभ  कोमल होती है और वह प्रत्येक व्यक्ति के जन्म के साथ ही शरीर में स्थापित रहती है दांत कठोर होते है इसलिए वह जन्म के साल भर बाद आते है और मृत्यु के पहले टूट जाते है। नम्र व्यक्ति भी इसी तरह लम्बे समय तक जीवित रहता है। कठोर व्यक्ति में जड़ता होती है और वह असमय समाप्त हो जाते है। 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 2: वाणी तो सभी को मिली हुई है, परंतु बोलना किसी-किसी को ही आता है। ऐसा कहा जाता है। क्या आप इस तरह के लोगों से मिले हैं जो बातें करते समय बिना सोचे-समझे बोल जाते हैं। उनके बारे में लिखिए।

उत्तर :- ईश्वर ने वाणी सबको दी है किन्तु समय और अवसर के अनुरूप बहुत कम लोग इसका उपयोग कर पाते है क्योंकि बोलना भी एक कला माना जाता है। 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 3: लुकमान के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं, कि जीभ अच्छी नहीं तो सब बुरा ही बुरा है। तर्क सहित अपने विचार रखिए।

उत्तर :- शरीर चाहे कितना  भी सुन्दर क्यों न हो यदि व्यक्ति की  वाणी प्रिय न हो ,तो उसके व्यक्तित्व का कोई मतलब नहीं होता है। उसके साथ बुरा होना स्वाभाविक है ,क्योंकि कहा गया है कि मधुर वचन है,औषधि कटुक वचन है तीर अर्थात मीठी वाणी दवा के समान असर करती है।  परन्तु वही कटु वचन हमेशा सीने में चुभती रहती है। 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 4: ‘एक बात से प्रेम झरता है और दूसरी बात से झगड़ा होता’ है। इस तरह के अनुभव आप सभी के भी रहे होंगे इसके बारे में आपस में बात कर लिखिए।

उत्तर :- उपर्युक्त कथन निम्न उदाहरणों से सिद्ध होता है, कि राजा ने स्वप्न देखा की  उसके दांत टूट गए है। ज्योतिषियों से फल पूछने पर एक ने कहा राजन आप पर संकट आने वाला है। आपके सभी संबंधी और प्रियजन क्रमशः मृत्यु को प्राप्त होगे  दूसरे ज्योतिषी जी ने कहा -आप अपने सारे सम्बन्धियों और प्रियजनों से अधिक काल तक सुख -ऐश्वर्य भोगेंगे । 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 5: वाक् चातुर्य से कटु वचन को प्रिय और मधुर बनाया जा सकता है, इस बात पर विचार करते हुए अपनी समझ को लिखिए।

उत्तर :- वाक् चातुर्य या वक पटुता से कुछ भी संभव है। लेखक कहता है कि जीभ से भी निकली हर सत्य वचन हृदय को ठोस नहीं पहुँचाता  है। कटु वचन को भी वाक्चातुर्य से प्रिय और मधुरता के  साथ व्यक्त किया जा सकता है। यही बोलने की  कला कही जाती है। हमारी समझ में वाकपटुता से सभी काम संभव हो सकते है। 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 6: आपके अपने अनुभव के हिसाब से जीवन में वाणी का क्या महत्व है? अपने अच्छे और बुरे अनुभवों को रखिए।

उत्तर :- जीवन को सुचारू रूप से जीने के लिए नियमित -संयमित होना अति आवश्यक है। जीवन जीना एक कला है जिसने इस कला को सीख लिया वह संसार में हर परिस्थिति का  हँसते हुए मुकाबला कर सकता है। किसी से भी अपने विचार को व्यक्त करने के लिए वाणी की  आवश्यकता होती है।  यदि हम अपनी वाणी में चातुर्य और मिठास कायम रखे तो सभी समस्याएं अपने आप ही हल  हो सकती है। प्रिय और मधुर वाणी की  भाषा तो जीव जंतु भी समझते है। मेरा अनुभव कहता है, कि यदि जानवरों से भी प्रेम पूर्वक बोला जाये तो वो हमारा हितैषी बन सकता है। मेरे पास एक बैल था ,जिसका नाम भोला था। वह बिना माँ का  बच्चा बचपन से ही हमारे साथ रहा और हमारे साथ ही बड़ा हुआ। मै उसे प्रतिदिन गुड़ -रोटी -घी खिलाती थी और यदि कोई उससे तेज आवाज में बात करता था तो वह खाना ही नहीं खाता था। उसकी  नाराजगी हमें बताती थी कि उससे मधुर वाणी में किसी  ने बात नहीं की । परन्तु जिस दिन मेरी डोली उस घर से उठी वह भोजन का त्यागकर बड़ा ही शांत होकर एक जगह ही बैठ रहा। मेरे विवाह के तीन दिन के उपरांत वह इस दुनिया को अलविदा कह गया। मै उससे बहुत प्यार करती थी। उसकी वाणी मुझे हमेशा ही समझ आती थी। आज भी मेरे अंतर्गत में उसके लिए बड़ी पीड़ा है मेरे जाने के बाद शायद किसी ने उसे प्यार से खाना नहीं दिया जिसके कारण उसने भोजन ही त्याग दिया। मै जानती हूँ मधुर और कटु वचन की  पीड़ा क्या होती है ।  

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 7: ’कड़वी बात ने संसार में न जाने कितने झगड़े पैदा किए हैं’- कोई पौराणिक या ऐतिहासिक घटना को आधार बनाकर इस कथन की सत्यता सिद्ध कीजिए।

उत्तर :- उक्त सम्बन्ध में महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध प्रसिद्ध है कि  द्रौपदी के कटु वचन के द्वारा  दुर्योधन के मन में द्वेष की भावना भरने के कारण हुयी  जिसके परिणाम था  कौरव -पांडव का भीषण युद्ध था । अर्थात कटुवचन का सबसे बड़ा उदाहरण रामायण और महाभारत में देखने को मिलता है। 

राम -रावण का और कौरव -पांडवों का भीषण युद्ध हुआ। महाभारत में द्रौपदी ने अंधे का पुत्र अँधा कहकर दुर्योधन की  हंसी उड़ाई थी तथा रामायण में कैकेयीन पूत्र मोह में फंसकर राम को वनवास भेजा था। अतः इतिहास में कई ऐसी घटना है जो बालो के द्वन्द से शुरू होती है। 

भाषा से  :

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 1: पाठ में विनम्र स्वभाव, मधुर वाणी, गलत प्रयोग, विनाशकारी महाभारत, अभिमानी फूल, मीठी वाणी जैसे विशेषण शब्दों का प्रयोग हुआ है अपने शिक्षक के सहयोग से पता कीजिए कि उक्त शब्द विशेषण के किन भेदों के उदाहरण हैं ?

उत्तर :-

शब्द विशेषण के भेद का नाम 
विनम्र स्वभाव गुणवाचक विशेषण 
मधुर वाणी गुणवाचक विशेषण 
गलत प्रयोग गुणवाचक विशेषण 
विनाशकारी महाभारत गुणवाचक विशेषण 
मीठी वाणी गुणवाचक विशेषण 

Page no : 104 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 2: पाठ में आए कुदरत, जबान, नापसंद, शेर, सख्ती जैसे विदेशज शब्दों के पर्यायवाची शब्द (किसी शब्द-विशेष के लिए प्रयुक्त समानार्थक शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहते हैं। यद्यपि पर्यायवाची शब्द समानार्थी होते हैं किन्तु भाव में एक-दूसरे से किंचित भिन्न होते हैं।) खोज कर वाक्य में प्रयोग कीजिए।

उत्तर :- (1)कुदरत =प्रकृति 

वाक्य प्रयोग :- (1)प्रकृति ईश्वर का ही एक रूप है। 

  1. क़ुदरत का करिश्मा देखो। 

(2)जबान -जीभ

वाक्य प्रयोग :- (1)जीभ का प्रयोग सोचकर करना चाहिए। 

(2)जीभ का स्वाद ही गायब हो गया। 

(3)नापसंद -अरुचि कर 

वाक्य प्रयोग :- (1)मुझे यह भोजन अरुचि कर लगा। 

(2)मुझे तुम्हारे शब्द नापसंद है। 

(4) शेर -कविता (उर्दू):- (1)गलिब के शेर प्रसिद्ध है। 

(2)जंगल का राजा शेर है। 

(5)सख्ती -कठोरता 

वाक्य प्रयोग :- (1)राम के साथ माँ ने सख्त व्यवहार किया। 

(2)उमा का दिल बड़ा ही कठोर है। 

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प्रश्न 3:  वाक्य संरचना को समझने के लिए निम्नलिखित उदाहरणों को देखिए-

1. उसकी प्रशंसा इधर-उधर फैलने लगी।

2. दास प्रथा के दिनों में एक मालिक के पास अनेक गुलाम थे, जिनमें एक था

लुकमान।

3. एक दिन उसके मालिक ने उसे बुलाया और कहा ‘‘सुनते हैं तुम बहुत होशियार हो।’’ पहले वाक्य में एक क्रिया अथवा एक ही विधेय है उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं। दूसरे वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य है और एक आश्रित या सहायक उपवाक्य है। यह संपूर्ण वाक्य मिश्र वाक्य है। तीसरे वाक्य में दो वाक्य हैं जो ‘और’ शब्द से जुड़े हैं और दोनों स्वतंत्र है जिन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं। पाठ से इस प्रकार के दो-दो वाक्यों को चुन कर लिखिए। यह भी जानने का प्रयास कीजिए कि मिश्र वाक्य में आश्रित उपवाक्य संज्ञा उपवाक्य है, या विशेषण अथवा क्रिया विशेषण उपवाक्य है। आप भी उक्त तीनों प्रकार के दो-दो वाक्यों की रचना कीजिए।

उत्तर :- साधारण वाक्य –

  1. कड़वी बात ने संसार में न जाने कितने झगडे पैदा किये है। 
  2. संसार के सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को ही मिला। 

संयुक्त वाक्य :- 

  1. अगर शरीर में जीभ अच्छी नहीं है तो फिर सब बुरा ही बुरा है 
  2. उन्होंने नौकर को बहुत डांटा और उसके साथ सख्ती से पेश आई। 

मिश्र वाक्य:- 

      (1)लुकमान था  तो गुलाम। किन्तु वह बड़ा बुद्धिमान था। 

      (2)जिसमे लचीलापन होता है ,जो नम्र होता है, वह अधिक समय तक जीता है। 

Page no : 105 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 4: पाठ में दुर, सद, वि, तथा अभि उपसर्ग के योग से बने शब्द यथा दुरूपयोग (दुर +उपयोग), सदुपयोग – सत् + उपयोग, विनम्र (वि + नम्र) एवं अभिमानी (अभि + मानी) आए हैं। वे शब्दांश जो शब्द के पूर्व में जुड़कर शब्द के अर्थ में परिवर्तन अथवा विशेषता उत्पन्न करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। आप भी इन उपसर्गों से बने पाँच-पाँच शब्द लिखिए।

उत्तर :- दुर -दुर्गम ,दुराचारी ,दुष्कर ,दुर्जन ,दुर्लभ 

सद -सच्चरित्र ,सद्गामी ,सद्व्यवहार ,सदाचरण ,सदावतार 

वि – विजय ,विनम्र ,विदेश ,विनाश ,विपक्ष 

अभि -अभिज्ञान ,अभिमान, अभिसार ,अभियोग ,अभिलाषा। 

Page no : 105 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 5: इस पाठ का एक छोटा अनुच्छेद श्रुतलेख के लिए बोलिए। उŸार पुस्तिकाओं का अदल-बदल कराकर विद्यार्थियों से उनका परीक्षण कराएँ। शिक्षक श्यामपट पर अनुच्छेद लिखेंगे।

उत्तर :- स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री अपने विनम्र स्वभाव और मधुर वाणी के लिए प्रसिद्ध थे। प्रयोग में एक दिन उनके घर पर किसी नौकर से कोई काम बिगड़ गया। श्रीमती शास्त्री का क्रोध में आना स्वाभाविक था। उन्होंने नौकर को बहुत डांटा और उसके साथ सख्ती से पेश आई। शास्त्री जी भोजन कर रहे थे। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा अपनी जबान क्यों ख़राब कर रही हो। लो मै तुम्हे एक शेर सुनाता हूँ “कुदरत को नापसंद है सख्ती जबान में। इसलिए तो दी नहीं हड्डी जबान में।।”

Page no : 105 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 6:  दीर्घजीवी शब्द दीर्घ$जीवी दो शब्दों से मिलकर बना है। इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर पांच नए शब्द और बनाइए, जैसे- काम+चोर से बना कामचोर।

उत्तर :- 

कमजोरकम +जोर 
कटुवाणीकटु +वाणी
प्रिय जन प्रिय +जन
महाभारतमहा +भारत
लोकप्रियलोक +प्रिय 
ऊटपटांगऊट +पटांग
लचीलापनलचीला +पन 
सदुपयोगसद +उपयोग

Page no : 105 (कटुक वचन मत बोल) 

प्रश्न 7: इस पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर :- कवि ने ठीक ही कहा है “मधुर वचन है औषधि ,कटुक वचन है तीर” यह कथन अक्षरशः सत्य है। मीठी वाली का प्रभाव मनुष्यो पर ही नहीं ,पशु पक्षीयो तक पर पड़ता है। मधुर वचन दुसरो को प्रसन्न कर देता है ,तो कड़वे वचन उसके चित्र को अशांत एवं उत्तेजित करता है मधुर वचनो से बिगड़े काम आसानी से बन जाते है। मीठी वाणी दूसरों का दिल जीत लेती है। हम संसार में ऐसी कोई काम है जो मधुर वचनों के द्वारा न कराया जा सके। अतः हमे ध्यान रखना चाहिए कि बोलते समय हमारी वाणी में मिठास हो कि  भी कड़वाहट है।


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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.

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