CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 21 सिखावन is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 21 सिखावन
CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 21 – सिखावन हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 21 हिंदी are given below for Hindi Medium students.
अभ्यास :
पाठ से :
Page no : 114 (सिखावन)
प्रश्न 1: हमन ला चाँंटी ले का-का सिखावन मिलथे ओरिया के लिखव।
उत्तर :-(1) हमन ल चाँंटी ह कड़ा मेहनत करे बर सिखाथे।
(2)हमला चाँंटी ह थके बिना काम करे बार सिखाथे।
(3)हमला चाँंटी ह मेहनत ले गुरु के मान पाय ला सिखाथे।
Page no : 114 (सिखावन)
प्रश्न 2: ‘ठाढ़े-ठाढ़े ठिहा-ठिकाना नइ मिलय’-एमा कवि के भाव ल बने अरथा के लिखव ?
उत्तर :- ठाढ़े -ठाढ़े ठिहा -ठिकाना नई मिलय के अरथ हे कि मन के ल कुछु पाय बर हाथ पैर ल हिलाय बर परथे एखर अर्थ हे कि ओला कुछु पाय बर कुछु करे ला परथे।
Page no : 114 (सिखावन)
प्रश्न 3: काकर बल म ये दुनिया ल जीते जा सकत हे, अउ ’दुनिया ल जीतना’ के का अर्थ हे ?
उत्तर :- किताब ले मितान बद के दुनिया ल जीते जा सकथे। दुनिया जीते के अरथ हे अपन लक्ष ल पाना अउ दुनियाभर म नाम कमाना।
Page no : 114 (सिखावन)
प्रश्न 4: पेड़ ल दानी काबर कहे गे हवय ?
उत्तर :- पेड़ ल दानी एखर बर कहे गए हवय काबर कि ओहा महन ल बहुत कुछ (फूल ,फर ,दवई ,लकड़ी ,हावा)देथे फेर हमर मन ले एखर बदला में लेवय कछु नहीं।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 5: ‘घाम-छांव के खेल’ के अर्थ ल बने समझ के लिखव ?
उत्तर :- घाम -छाँव के खेल के अरथ हे दुःख -सुख के खेल। मनखे के जिनगानी म दुःख -सुख त आते च रहिथे। ओला ओखर संसो करें बिना अपन आगु के काम ल पूरा करना चाही।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 6: ‘रात’ अउ ‘अँंधियार’ के अर्थ कवि के अनुसार का हो सकत हे ?
उत्तर :- रात अउ अंधियार के अरथ हे दुःख पीरा ,अड़चन बांधा। मनखे के जिनगानी अंधियारी रात
असन दुःख बितावत हे फेर ओला ओखर ले घबराना नई चाही।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 7: ‘आसा अउ बिसवास के दिया बारना’ के भाव ल लिखव ।
उत्तर :- आसा अउ बिसवास के दिया बारना के अरथ हे मनखे ल असफल होय से निराश नई होना चाही। ओला आसा अउ बिसवास के संग अपन लक्ष बर फेर महिनत करना चाही।
पाठ से आगे :
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 1: एके अवगुन सौ गुन ल, मिलखी मारत खाय। गुरतुर गुल वाला सुवा, लोभ करे,फंद जाय ।।
इसका संदर्भ क्या हो सकता है व इससे आप कहाँ तक सहमत है। विचार कर लिखिए।
उत्तर :- सन्दर्भ :- प्रस्तुत दोहे में मनुष्य का एक अवगुण पलक झपकते ही सौ गुणों पर भारी पड़ जाता है। हम इस दोहे से पूर्णतः सहमत है क्योंकि इस दोहे में कवि ने अवगुणो से बचने की सलाह दी है अर्थात व्यक्ति को बुराई तथा लालच से बच कर रहना चाहिए नहीं तो इसका परिणाम भुगतना ही पड़ता है।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 2:जीवन बर आसा अउ बिसवास ल कवि ह जरूरी बताय हे। का तुमन घलव वइसने सोचथन बिचार करके लिखव।
उत्तर :- जीवन बर आसा अउ बिसवास ल कवि ह जरूरी बताय हे। हमन आसा अउ विसवास ल मन म आसा अउ बिसवास के जोत जगाए रखव ,निराश न होवे चाही। घोर निराशा म भी आशा का चलत व दीया बार हे।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 3 : नवा रद्दा खोजे ले जीवन म का-का परिवर्तन हो सकथे, अपन कक्षा के दू समूह बनाके सोचव अउ लिखव।
उत्तर :- नवा रद्दा अपन लक्ष्य पाए बर खोजना चाही। नवा रद्दा खोज ले जीवन म निराशा अउ संकट कटे सकत हे। नवा रद्दा खोज म लक्ष्य म पहुँच सकत हे। नवा रद्दा खोजे ले जीवन सफल बन सकत हे।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 4 : ‘अगर दुनिया में किताब या किताब लिखइया नइ होतिन ता का होतिस।’’ ए विषय में 10 लाइन लिखव।
उत्तर :-(1)अगर दुनिया में किताब या किताब लिखईया नई होतिन ता मनुष्य अच्छा -बुरा नहि सोच सकथ।
(2) दूसर के चीज ल घलो अपन चीज जइसे समझना चाही किताब ल पता चलथे।
(3)काखर पता चलत हे कि सतवंता ह सत बर अपन परान ले चलथे।
(4)किताब म पता चलय व ज्ञान होवत ओखर ये काम ह सही रिहिस के गलत ?
(5)किताब नहीं होतिन त ये दुनियाँ नही जीते जा सकथ।
(6)किताब नहीं होतिन त ये लक्ष्य पाए बर नवा रद्दा काखर खोजथे ?
(7)किताब नहीं होतिस त ये कईसे पता चलथन आजादी काखर मिलही।
(8) किताब लिखाईया नई होथे ता ये गुण ल अवगुण कईसे पता चलथे।
(9)हमन ज्ञान नहीं होय थे।
(10) पेड़ ह सब ल फूल अउ फर देथे एखर कारण पेड़ ल दानी कहे हवय किताब मा पता चलथे।
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 5 : सीख के अइसनेहे दोहा मन ल सकेल के लिखव।
उत्तर :-(1) जियत -जागत मनखे बर के धरम बरोबर होथे एक साँस आजादी के सौ जनम बरोबर होथे।
(2)दुर्लभ मानुष जनम हे देई न बारबार। तरुवर तये पत्ता झड़ै ,बहुरि न लागै डाटि।
भाषा से :-
Page no : 115 (सिखावन)
प्रश्न 1: कविता अउ लेख के भाषा म बड़ अंतर होथे। कविता के भाषा अउ लेख के भाषा ल पढ़व अउ गुनव। कविता म षब्द भले कमती होथे,फेर ओकर अर्थ ह बड़े होथे। एमा कमती शब्द म बड़ गहरी बात ल कहे के उदिम कवि ह करे रहिथे। एकरे सेती कविता के शब्द म लुकाय भाव अउ विचार ल बने देखे अउ समझे ल परथे। एकर छोड़,कवि ह अपन भाषा ल गहना-गुरिया घलो पहिराथे,तेला ‘अलंकार’ कहे जाथे। जइसे-
अ. आसा अउ बिसवास के दीया ।
ब. गुरतुर-गुन ।
पहिली डाँड़ ल पढ़व अउ गुनव। दिया ह माटी के बनथे,फेर कवि ह आसा अउ बिसवास के दिया बनाय हे। एकर माने,कवि ह आसा अउ बिसवास ल दिया के रूप दे हवय। ये ह ‘रूपक’ अलंकार के उदाहरण आय। अब दुसरइया म दू शब्द के जोड़ी हवय-गुरतुर अउ गुन। दूनो शब्द के शुरू ह ‘ग’ अक्षर ले होय हे। अइसन प्रयोग ल ‘अनुप्रास अलंकार’ कहिथें। अपन षिक्षक ले पूछके अउ आने-आने प्रयोग के बारे म जानव अउ लिखव, जइसे-
अ – लाखन-लाखन।
ब – ठाढ़े-ठाढ़े।
उत्तर :-
| फूलथे -फूल मितान | अनुप्रास अलंकार |
| बइठे -बइठे | अनुप्रास अलंकार |
| महर -महर | अनुप्रास अलंकार |
| फूल -फर | अनुप्रास अलंकार |
| अढे -ठाढ़े | अनुप्रास अलंकार |
| जोत्था -जोत्था | अनुप्रास अलंकार |
| नान -नान | अनुप्रास अलंकार |
Page no : 116 (सिखावन)
प्रश्न 2: ये पाठ के कविता ह दोहा छंद म बँधाय हे। छंद माने बँंधना। छंद ह कई प्रकार के होथे। कोनो छंद म ‘मात्रा’ के गिनती करे जाथे त कोनो छंद म ‘वर्ण’ के गिनती करे जाथे। जेमा ‘मा़त्रा’ के गिनती करे जाथे,तेला ‘मात्रिक छंद’ अउ जेमा ‘वर्ण’ के गिनती करे जाथे,तेला ‘वार्णिक छंद’ कहे जाथे। दोहा ह अर्धसम मात्रिक-छंद आय। एकर चार चरण होथे। पहिली अउ तीसर चरण के 13-13 मात्रा के पाछू ‘यति’ होथे । दुसरइया अउ चौथइया चरण म 11-11 मात्रा होथे। सब मिला के 24-24 मात्रा होथे। मात्रा के गिनती ल ‘गुरु’ अउ ‘लघु’ ल समझ के करे जाथे ‘गुरु’ माने दू मात्रा अउ ’लघु‘ माने एक मात्रा। गुरु वर्ण के उच्चारण म जादा समय लागथे अउ लघु वर्ण के उच्चारण म कम समय लागथे। जेन वर्ण म कोनो मात्रा नइ रहय या ‘इ’ अउ ‘उ’ के मात्रा रहिथे,तेला ‘लघु’ या एक मात्रा माने जाथे। आने मात्रा वाला वर्ण ल दू मात्रा या ‘गुरु’ माने जाथे। गुरु के चिनहा ‘ऽ’ अउ लघु के चिनहा ‘।’ जइसे होथे।
।।। । । S
उदाहरण- कमल, कमला
।। S SS S । ।। ।। S SS S। =13़+11=24
सब ला देथे फूल- फर, सब ला देथे छाँव ।
।। ।। SS S। S, ।S ।।। S S। = 13़+11=24
अइसन दानी पेड़ के, परो निहर के पाँव ।
पाठ म आय दू ठन दोहा ल लिखके मात्रा के गिनती करव ।
उत्तर :-
(1)दोहा –
| SI | ISS | SI | S | IIS | SS | SI | =13 +11 =24 |
| मीठ | लबारी | बोल | के | लबरा | पाए | मान |
| IIIISS | I | IIII | SII | IS | ISI | =13 +11 =24 |
| परसतवंता | ह | सतबर | हालत | तजे | परान |
(2)दोहा-
| SII | SII | SI | S | IIS | SI | ISI | =13 +11 =24 |
| लाखन | लाखन | रंग | के | फूलथे | फूल | मितान |
| III | S | S | II | IS | SI | IIIS | SI | =13+11=24 |
| महर | महर | जे | नई | करें , | फूल | अबिरथा | जान |
Page no : 116 (सिखावन)
प्रश्न 3: छत्तीसगढ़ी भाषा म गंज अकन मुहावरा के प्रयोग करे जाथे। एकर प्रयोग ले
भाषा के प्रभाव के ताकत बढ़ जाथे अउ भाव म गहराई आ जाथे।
उत्तर :- मुहावरा -एके अवगुण सौ गुन ल
अर्थ -एक अवगुण सौ सौ गुणों को नष्ट कर देता है।
प्रयोग -सूरज के शराब पीने का एक अवगुण होने से उसका सभी गुण बरबाद हो गया।
Page no : 117 (सिखावन)
प्रश्न 4: खाल्हे लिखाय मुहावरा मन ल अपन वाक्य म प्रयोग करव । मिलखी मारना, मीठ लबारी बोलना, पल्ला मारना ।
उत्तर: (1)मिलख मारना = पलके झपकाना।
मिलखी मारतेच चोर ह रानी के हार ल ओखर गला ले चोरी कर लिस।
(2) मीठ लबारी बोलना = चापलूसी करना
मीठ लबारी बोल के लबरा मन मान पा जाथे।
(3)पल्ला मारना= तेजी से भागना
रूपउ के खेल ल चरके गाय ह पल्ला मार के भाग गे ।
Page no : 117 (सिखावन)
प्रश्न 5: उल्टा अर्थ वाला शब्द लिखव –
अँधियार , आसा, लबरा, छाँंव, जीत ।
उत्तर :-
अंधियार = उजियारा
आसा = निरासा
लबरा = सतवंता
छाँव = घाम
जीत = हार
Page no : 117 (सिखावन)
प्रश्न 6: जेन शब्द ह संज्ञा या सर्वनाम शब्द के विशेषता बताथे, तेला ‘विशेषण’ कहे जाथे। जइसे-‘गुरतुर गुन’। एमा‘गुन’के विशेषता बताये जावत हे। कइसन गुन हे ? ये प्रश्न के उत्तर हवे ‘गुरतुर हे’। संज्ञा शब्द के साथ ‘कइसे’ या ‘कइसन’ के प्रश्न करे म ‘विशेषण शब्द के पता लग जाथे। पाठ के दोहा मन म आय ‘विशेषण’ शब्द ल छाँट के लिखव ।
उत्तर: पाठ के दोहे में आए विशेषण शब्द निम्नलिखित है –
(1)गुरतुर (2)मीठ (3)दानी (4)नवा (5)एके (6)छपटे (7)अविरथा
Page no : 117 (सिखावन)
प्रश्न 7: पाठ म आय दोहा मन के संदेश उपर दस वाक्य लिखव ।
उत्तर :- दोहे से प्राप्त शिक्षा
(1)व्यक्ति को कष्ट को परवाह न करते हुए आशा और विश्वास का दीपक लेकर अपने कार्य को करना चाहिए।
(2)एक अवगुण व्यक्ति के सौ गुणों को ख़त्म कर देता है हमें अपना कार्य ईमानदारी और लगन से बिना लोभ के पूरा करना चाहिए।
(3)मीठा -मीठा झूठ बोलकर सम्मान पाने को बजाय सत्य की राह पर चलते हुए अपने प्राण त्याग देना बेहतर है।
(4)जिंदगी में उतार -चढ़ाव तो आते ही रहते है हमें उसकी चिंता छोड़कर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए।
(5)जिस तरह बिना सुगंध के फूल का कोई अर्थ नहीं है उसी प्रकार अवगुणी व्यक्ति का इस संसार में होना नहीं होने के बराबर है।
(6)जिस प्रकार पेड़ एक दानी व्यक्ति को भांति बिना कुछ लिए हमें सब कुछ देता है उसी प्रकार हम भी निः स्वार्थ भावना से दुसरो को मदद करनी चाहिए।
(7) आलसी व्यक्ति को कुछ भी प्राप्त नहीं होता है कुछ पाने के लिए कुछ करना ही होता है।
(8) किताब के ज्ञान के बल पर दुनिया जीती जा सकती है। बड़े -बड़े महापुरुष ग्रंथो के अध्ययन से ही महान बने है। हम भी किताब का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
(9) यदि मन में उत्साह एवं लगन हो तो ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है जैसे -चींटी लगन से अपना कार्य करती है। व्यक्ति लगन से ही गुरु का मान पाता है।
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This CG Board Solutions for Class 8th textbook provides accurate answers to all the questions in each exercise and is presented in the Hindi language to cater to the convenience of the students.