CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 20 मिनी महात्मा is specifically designed for Hindi medium students of Class 8 studying in Chhattisgarh Board of Secondary Education. यह समाधान कक्षा 8 हिंदी पुस्तक छात्रों को अवश्यक अपने अध्ययन को सुगम बनाने के लिए इस समाधान पुस्तक का उपयोग करना चाहिए।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 20 मिनी महात्मा
CGBSE समाधान कक्षा 8 हिंदी अध्याय 20 – मिनी महात्मा हिंदी माध्यम में छात्रों के लिए बनाए गए हैं। यह समाधान छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है और सीजीबीएसई बोर्ड के कक्षा 8 के छात्रों के लिए उपयुक्त है।
CG Board Class 8 Hindi Solutions Chapter 20 हिंदी are given below for Hindi Medium students.
अभ्यास :
पाठ से :
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 1: वह जरा सी बात क्या थी, जिसकी वजह से मोहन लगातार रोए जा रहा था ?
उत्तर :– वह जरा – सी बात यह थी कि पुलिस अंकल ने मोहन को एक चपत लगा दी थी ,जिसके कारण मोहन ने बड़ा बखेड़ा खड़ा कर रखा था। क्योंकि मोहन गाँधी जी को अपना आदर्श मानता था
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 2: ‘‘जा-जा कुछ नहीं हुआ। पीट दिया हमने। कर ले जो कुछ करना हैं।’’ अब शेर सिंह के भीतर बैठा ‘पुलिसवाला’ बोला इस कथन में ‘पुलिसवाला’ लिखने के पीछे लेखक का क्या भाव है ?
उत्तर :- इस कथन में पुलिस वाला लिखने के पीछे लेखक का भाव यह है कि पुलिस वाला अपने वर्दी का रौब झाड़ता है। पुलिस सभी के मदद के लिए होती है। किंतु पुलिस वाला मोहन के जीवन के साथ अन्याय कर रहा था। इससे उसके क्रोध भाव का पता चलता है।
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 3: सबके समझाने के बाद भी मोहन घर क्यों नहीं जा रहा था ?
उत्तर :- मोहन के मन के एक ही बात चल रही थी कि पुलिस अंकल के बिना किसी कारण के उसे चपत लगा दी। मोहन पुलिस अंकल से अपना कसूर पूछना चाहता था। इसलिए मोहन घर नहीं जा रहा था।
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 4: शेर सिंह की पत्नी ने लोगों से क्या और कैसे कहा ?
उत्तर :-शेर सिंह की पत्नी ने लोगो से हाथ जोड़कर वहां से चले जाने को कहा।
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 5: मोहन ने अपने व्यवहार में विरोध को शामिल कर साबित किया कि अत्याचार को सहना उसे बढ़ावा देना है। कैसे ?
उत्तर :– मोहन को बिना कसूर के शेर सिंह ने मारा था इसलिए वह शेरसिंह के दरवाजे तक कसूर पूछने चला गया और शेरसिंह को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 6: ‘लड़का जिरह किए जाता है। इसे कौन समझाए?’ लोग किस आधार पर ऐसा कह रहे थे?
उत्तर :- लोग मोहन को समझा -समझा कर थक गए कि अगर पुलिस अंकल ने उसे एक चपत लगा भी दी तो क्या हो गया ?किन्तु मोहन सुनने के लिए तैयार नहीं था। उसका तर्क था कि कोई बड़ा उन्हें रोकता टोकता तो क्या वह उसको चाटा जड़ देते। मुझे इसलिए पीट दिया कि मै बच्चा हूँ छोटा और कमजोर हूँ। इसलिए लोग कह रहे थे कि लड़का कुठ मगज है ,जिरह किये जाता है।,इसे कौन समझाए।
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 7: इस पाठ में कुछ वाक्य ऐसे हैं जिनमें बालकों की बात पर ध्यान न देने का भाव छिपा है। ऐसे चार वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
उत्तर :- (1) “अरे भाई ,बड़े है ,जरा जल्दी होगी ,किसी ने उन्हें नहीं टोका। एक तुम्ही उनके आड़े आ गए।”
(2)कोई बड़ा उन्हें रोकता -टोकता तो क्या वह उसको चाटा जड़ देते ?
(3)लड़का जिरह किये जाता है ,कुढ़ मगज है ,इसे कौन समझाए ?
(4)”रोता है ,तो रोने दो कब तक रोयेगा ?”
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 8: ‘बात ‘मान भी जा बेटे! मै ं उनसे कह दूँगी, आगे से ऐसा सुलूक न करें बच्चों के साथ।’ लिखिए इस वाक्य में-
– ‘मैं’ किसके लिए आया है ?
उत्तर :-मै शब्द मोहन को माँ के लिए आया है।
– ‘उनसे’ किसके लिए आया है ?
उत्तर :- उनसे शब्द सब -इंस्पेक्टर शेरसिंह के लिए आया है।
– ‘ऐसा सुलूक’ कहकर किस सुलूक की बात कही गई है ?
उत्तर :- ऐसा सुलूक कहकर पुलिस सब इंस्पेक्टर शेरसिंह द्वारा मोहन के साथ मारपीट करने को बात कही गयी है।
– ‘मान भी जा बेटे’ में कौन-सा भाव छिपा है ?
उत्तर :- “मान भी जा बेटे” मै पुलिस सब-इंस्पेक्टर के दुर्व्यवहार को सहन कर लेने का भाव छिपा है।
Page no : 110 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 9: कहानी में आए निम्नलिखित पात्रों के बारे में आपने जो राय बनाई हो, उसे पात्रवार चार-पांच पंक्तियों में लिखिए।
उत्तर :- (क) शेर सिंह -शेर सिंह एक पुलिस सब इंस्पेक्टर है। वह सब पर अपनी वर्दी का रौब झाड़ता है। वह शीघ्र ही मार -पीट करने पर उतर आता है। वह अपने पद के घमंड में यह भी भूल जाता है कि बच्चों के साथ कैसा सुलूक किया जाना चाहिए। वह अपनी गलती स्वीकार नहीं करना चाहता।
(ख)मोहन को माँ – मोहन को माँ एक सरल स्वभाव की महिला है। वह पुलिस वालो से झंझट मोल नहीं लेना चाहती। वह दुनिया दारी को बातो को समझती है। वह जानती है कि गलती शेरसिंह की है ,पर वह उसके अन्यायपूर्ण कृत्य को चुपचाप सहन कर लेना चाहती है।
(ग)मोहन -मोहन एक स्वाभिमानी बालक है। वह पुलिस सब -इंस्पेक्टर शेरसिंह द्वारा अकारण किये गए दुर्व्यवहार को चुपचाप सहन कर लेना नहीं चाहता। वह अन्याय का डटकर विरोध करता है। उसकी तर्कसंगत बातो के आगे पुलिस अधिकारी को झुकना पड़ता है।
(घ)शेरसिंह को पत्नी – शेरसिंह की पत्नी दयायु स्वभाव की समझदार महिला है। यह मोहन को अपने पुत्र जैसा समझती है उसकी दृष्टि में मोहन ने कोई गलत काम नहीं किया है इसलिए वह मोहन और अपने पति शेरसिंह दोनों को समझती है।
पाठ से आगे :
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 1: फरीद बाबा के व्यक्तित्व का वह कौन सा पहलू है जिसके माध्यम से उन्होंने झगड़े को आसानी से सुलझा दिया। हर समाज में इस तरह के लोग होते हैं। अपने आस-पास के ऐसे लोगों के बारे में समूह में चर्चा कर उनके मानवीय पहलुओं को लिखिए।
उत्तर :- फरीद बाबा का व्यक्तित्व मानवीय गुणों से ओत -प्रोत था। अर्थात स्नेह ,प्यार ,सहानुभूति ,आदर आदि जैसे व्यक्तिगत गुणों से वे धनी थे जिसके कारण उन्होंने झगडे को आसानी से सुलझा दिया आज के इस परिवेश में ऐसे लोगों का होना तो नितान्त ही आवश्यक है। हमारे पास भी ऐसे लोग रहते है जो आपसी मतभेद को मिटाने में सहायक सिद्ध होते है। जिनमे मेरी माँ निर्मला ,मेरे अध्यक्ष श्री निजार जी भाई है जो अपनी सूझ -बुझ के कारण विवादित मामलो को बड़े ही नाजुक तरीको से और शांत होकर समस्याओ का निवारण निकाल लेते है। अर्थात ये लोग मानवीय गुणों से ओत -प्रोत है। वे हर तरह की समस्या को सुलझाने में अपनी दक्षता को प्रमाणित करते है। वे दुसरो के सुख -दुःख में बराबर से शामिल होते है और प्रत्येक तीज -त्यौहार में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते है। ऐसे व्यक्तित्व का घर और समाज में होना नितान्त ही आवश्यक होता है।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 2: मोहन सच्चाई पर अड़ा रहा और अंत में उसकी विजय हुई। शेर सिंह को अपनी गलती को स्वीकार करना पड़ा। क्या आपने अपने आस-पास में ऐसी कोई घटना देखी या सुनी है जिसमें सच्चाई की जीत हुई हो। अपना अनुभव लिखिए।
उत्तर :- मैंने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में सत्य को विजित होते ही देखा है देर आवश्य लगती है परन्तु जीतता तो सत्य ही है। मेरे भी आस पास ऐसी बहुत से घटनाये घटी जिनमें जीत हमेशा सत्य को हुयी है। एक बार हमारी सोसायटी में साइकिल चोरी हो गयी जिससे उस वक्त तैनात सुरक्षा गार्ड जी आरोपी बनाया गया। परन्तु हमारे अध्यक्ष को सूझ -बूझ वह त्वरित गति से पता चल गया कि एक बच्चे ने किसी से कुछ उधार खरीद रखा था अतः उसने उसे पैसे को जगह पर अपने ही अभिन्न मित्र को सायकिल देदी जो को बड़ी ही महँगी थी। यह घटना सोसायटी में लगे कैमरे में कैद हो गयी थी। अध्यक्ष महोदय की समझदारी के कारण एक निर्दोष को सजा से बचा लिया गया और बच्चे तथा उसके माता -पिता को भी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। बच्चे ने स्वयं सुरक्षा गार्ड से माफ़ी भी मांगी और अपनी गलती को स्वीकार किया।
इस प्रकार सत्य को विजय हुयी और असत्य पराजित हो गया।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 3:मिनी महात्मा’ शीर्षक कहानी में मोहन ने महात्मा गांधी के किन सिद्धांतों का पालन किया? अपने मित्रों से बात कर लिखिए।
उत्तर :- मोहन ने महात्मा गाँधी के सिद्धांत अत्याचार को सहना उसे बढ़ावा देना है। का पालन किया।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 4: कतार में लगकर कोई भी सामान लेने के क्या फायदे और नुकसान आपको लगते हैं। अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।
उत्तर :- कतार में लगकर समान लेना अच्छा है। इससे सभी को सुविधा होती है। नियम यह कृत प्रति व्यक्ति को नियमित संयमित रहने की प्रेरणा देता है। नियम के अनुसार जो व्यक्ति पहले आएगा वह कतार में पहले खड़ा होगा। कतार बनाकर समान लेना -देना दोनों ही कार्य सुविधा जनक लगने लगता है और समय की भी बचत होती है। इससे हम सभी के अंदर समानता का भाव भी उत्पन्न होता है। यदि ऐसा न किया गया तो सम्बंधित स्थान पर पूर्ण रूप से अव्यवस्था व्याप्त हो जाएगी और सभी का समय बर्बाद होगा।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 5: फरीद बाबा ने पुलिस अंकल को भीतर जाकर क्या समझाया होगा, जिसे सुनकर पुलिस अंकल अपनी गलती स्वीकार करने आ गए ?
उत्तर :-फरीद बाबा ने पुलिस अंकल को समझाया होगा कि मोहन तो अबोध बालक और छोटी उम्र का भी है। परन्तु तुम तो बड़े और समझदार दोनों ही हो ,अतः क्षमा में ही बड़प्पन्न होता है और इस प्रकार को बातो को सुनकर पुलिस अंकल ने अपनी गलती स्वीकार कर ली होगी।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 6: इस कहानी को पढ़कर आपकी क्या राय/समझ बनती है? लिखिए।
उत्तर :- इस कहानी में “अत्याचार को सहना अत्याचार को बढ़ावा देना है।”यह लोगो के लिए बहुत बड़ी सीख है। इस कहानी में न की मोहन को दृढ़ता और प्रतिकार को शक्ति को अभिव्यक्त किया गया है बल्कि यह कहानी संबंधो के सौंहार्द को भी बनाए रखने का प्रयास करती है।
अतः मोहन के द्वारा दिए गए व्यवहार से हम पूर्ण रूप से सहमत है।
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 7: मोहन के प्रति शेरसिंह ने जो दुर्व्यवहार किया था, मोहन उसका विरोध गांधी जी द्वारा सुझाए गए मार्ग पर चलकर कर रहा था। महात्मा गांधी जी द्वारा इस संबंध में क्या मार्ग सुझाया गया था? मोहन द्वारा किए जा रहे उक्त व्यवहार से आप कहाँ तक सहमत हैं? लिखिए।
उत्तर :- मोहन के प्रति शेर सिंह ने जो व्यवहार किया था वह अत्याचार को श्रेणी में आता है। गाँधी जी के अनुसार सहना भी अत्याचार को बढ़ावा देने के बराबर है अतः इस नियम के अनुसार मोहन का व्यवहार उचित था।
भाषा से :
Page no : 111 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 1: पाठ में ‘सर आँखों पर’ तथा ‘पहाड़ टूटना’ जैसे मुहावरों का प्रयोग हुआ है, इसी प्रकार ‘कुत्ते की दुम, टेढ़ी की टेढ़ी’ लोकोक्ति भी आई है। कोई भी ऐसा वाक्यांश जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करे, वह मुहावरा कहलाता है। जबकि लोकोक्ति लोक-अनुभव से बनती हैं । किसी समाज ने जो कुछ अपने लंबे अनुभव से सीखा है उसे एक वाक्य में बाँध दिया है। ऐसे वाक्यों को ही लोकोक्ति कहते हैं। इसे कहावत, जनश्रुति आदि भी कहते हैं। मुहावरा वाक्यांश है और इसका स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं किया जा सकता। लोकोक्ति संपूर्ण वाक्य है और इसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है। जैसे-‘होश उड़ जाना’ मुहावरा है। ‘बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी’ लोकोक्ति है। अब आप पाँच मुहावरे और पाँच लोकोक्तियाँ खोज कर लिखिए और उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :- (1)मुहावरा :- (1)टस से मसन होना –
अर्थ -अपनी जगह सेन हिलना।
(2)पहाड़ टूट पड़ना – भारी विपत्ति आना
वाक्य प्रयोग -राम के वन गमन के उपरांत अयोध्या पर जैसे दुःख का पहाड़ टूट पड़ा।
(3)बिल का ताड बनाना -छोटी से बात तो बढ़ा -चढ़ा कर पेश करना।
वाक्य प्रयोग -कभी कभी अख़बार वालो के कारण छोटी सी खबर तिल का ताड बन जाती है।
(4)दिन रात एक करना -कठिन परिश्रम करना।
वाक्य प्रयोग -करोना काल के बाद सुचारु रूप से पढ़ने के लिए छात्रों को दिन -रात एक करना पड़ा।
(5)नजर आना – दिखाई पड़ना
वाक्य प्रयोग -राधा आज बहुत दिनों के बाद नजर आई है।
लोकोक्तियाँ
(1)दूध का दूध और पानी का पानी -निष्पक्ष निर्णय वाक्य प्रयोग -पंचायत के निर्णय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
(2)अन्धो में काना राजा -मूर्खो के बीच थोड़ा पढ़ा -लिखा होना।
वाक्य प्रयोग :- गांव में सोहन ही थोड़ा पढ़ा -लिखा है इसलिए वह अन्धो में काना राजा के समान महत्वपूर्ण व्यक्ति बना हुआ है।
(3)आम के आम गुठलियों के दाम – दोहरा लाभ
वाक्य प्रयोग :- श्याम को अपने बेटे के जन्म दिनपर इतने उपहार मिले जो खर्चे से भी दुगुने होंगे। इसी को कहते है आम के आम गुठलियों के दाम।
(4)नाच न जाने आँगन टेढ़ा -खुद का दोष दूसरे पर मढ़ना।
वाक्य प्रयोग :- हार जाने पर विकास रेफरी को दोषी ठहराने लगे ,तो उसकी बहन ने कहा कि नाच न
जाने आँगन टेढ़ा।
(5)दिन दूनी रात चौगुनी -तेजी से बढ़ना
वाक्य प्रयोग :- महगाई पर किसी का काबू नहीं है वह दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है।
Page no : 112 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 2: इन शब्दों को देखें – लम्बाई, चतुराई, बुढ़ापा, नम्रता, मिठास, समझ, चाल, दूरी, मनाही, निकटता इत्यादि। जिस नाम या संज्ञा से पदार्थ में पाए जाने वाले किसी धर्म अवस्था, गुण दोष का बोध हो वह, भाववाचक संज्ञा है। पाठ में आए निम्न शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए – ईमानदार, बेईमान, खराब, सफेद कमजोर, चालाक।
उत्तर :-
| शब्द | भाववाचक संज्ञा |
| ईमानदार | ईमानदारी |
| बेईमान | बेईमानी |
| ख़राब | खराबी |
| सफ़ेद | सफेदी |
| कमजोर | कमजोरी |
| चालाक | चालाकी |
Page no : 112 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 3: पाठ आधारित कुछ शब्द दिए जा रहे हैं जिनके अनुस्वार व अनुनासिक हटा दिए गए हैं। निम्नांकित दिए गए शब्दों में अपनी समझ के अनुसार अनुनासिक लगाएँ- उदाहरण पाँच, मुँह, डाका, हंसना, आख, गांधी, आसु, अकल, हू, गूज, मच, तखितया।
| अशुद्ध शब्द | शुद्ध शब्द |
| पाच | पांच |
| मुह | मुँह |
| डाका | डंका |
| हसना | हसना |
| आख | आँख |
| गाधी | गांधी |
| आसु | आँसू |
| अकल | अंकल |
| हू | हूँ |
| गूज | गूंज |
| मच | मंच |
| तखितया | तख्तियां |
Page no : 112 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 4: निम्न शब्द दो-दो पदों के योग से बने हैं। उन पदों को अलग-अलग करके लिखिए। महात्मा, धर्मात्मा, पुण्यात्मा, परमात्मा, पापात्मा।
उत्तर :-
| पहला पद | दूसरा पद | युगात्मक |
| महा | आत्मा | महात्मा |
| धर्म | आत्मा | धर्मात्मा |
| पुण्य | आत्मा | पुण्यात्मा |
| परम | आत्मा | परमात्मा |
| पाप | आत्मा | पापात्मा |
Page no : 112 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 5: ‘बड़ा‘ या ‘बड़े‘ शब्द का प्रयोग कई अर्थों में होता है। भिन्न-भिन्न अर्थों में इसका प्रयोग कीजिए और अर्थ भी लिखिए।
उत्तर :- (1)यह लड़का बड़ा ही होनहार है और मंदिर में बड़ा प्रागण है।
(2)महात्मा गाँधी बड़े ही ईमानदार और महान थे। वीरान क्षेत्रों में बदमाशों ने बड़े ही कहर ढाए है।
Page no : 112 (मिनी महात्मा)
प्रश्न 6: नीचे लिखे वाक्यों में कोष्ठक में अंकित मूल क्रिया का सही रूप बनाकर रिक्त स्थान भरिए-
(क) स्कूल की घंटी …………………। मंदिर में घंटा ………………..। (बजाना)
उत्तर:- बजी ,बजा
(ख) हम गांधी जयंती …………………। बच्चे बाल दिवस …………………..।(मनाना)
उत्तर :- मनाते है ,मनाते है।
(ग) प्रधानजी ने झंडा ………………..। अध्यापक ने झंडियाँ …………….। (फहराया)
उत्तर :- फहराया ,पहरायी
(घ) घर में भाई …………………। घर में बहन ………………..। (आना)
उत्तर :- आया ,आयी
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