CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 1 प्रेरक प्रसंग Chapter 1.3 अपूर्व अनुभव are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 1 प्रेरक प्रसंग Chapter 1.3 अपूर्व अनुभवv
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अभ्यास-
पाठ से –
Q.1. पेड़ पर चढ़ना एक सुखद अनुभव है, इस पर अपने विचार रखिए और बताइए कि यासुकी-चान इस अपूर्व अनुभव से वंचित क्यों था?
उत्तर :- पेड़ पर चढ़ना सचमुच एक अत्यंत सुखद अनुभव है | जमीन से ऊपर पेड़ की शाखाओं पर चढ़कर हरी-भरी पत्तियों के स्वम्ं बीच पाकर मन मयूर नर्तन करता हुआ आनंद से भर उठता है | दृष्टि भी थल की अपेक्षा दूर तक जाती है | हम उम्र यदि पेड़ पर चढ़े हो तो पेड़ पर चढ़ने का आनंद दुगना हो जाता है | यासुकी-चान को पोलियो था इसलिए वह पेड़ पर चढ़ने के सुखद अनुभव से वंचित था |
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Q.2. “तोत्तो-चान” ने माँ से कहा कि वह यासुकी-चान के घर डेनेनचोफु जा रही है’ यह बात कहते हुए उसकी नजरें जूतों के फीते पर क्यों गड़ी रहीं? वह कौन सी स्थितियाँ होती हैं, जब तोत्तो-चान अपने बड़ों से आँखें चुराते हैं। लिखिए।
उत्तर :- जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है या कोई घृणित कार्य अथवा नियम विरूद्ध बुरे कार्य करते हुए पकड़ा जाने की आशंका से घिरा हुआ, सच्चाई का सामना कर पाने में अक्षम होने के कारण व्यक्ति लज्जित होकर सिर झुकाए खड़ा रहता है | और इसी ग्लानि के कारण जब तोत्तो-चान मां से झूठ बोल रही थी इसलिए उसने मां की आंखों में नहीं झांका | इसी तरह जब हम अपने से बड़ों या माता-पिता से झूठ बोलते हैं या कभी कुछ ऐसा काम कर जाते हैं जिसे हमें नहीं करना चाहिए तब हम अपने बड़ों से आंखें नहीं मिला पाते हैं |
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Q.3. तोत्तो-चान की हार्दिक इच्छा थी कि यासुकी-चान उसके पेड़ पर चढ़े, आपके अनुसार वह कौन-कौन से कारण रहे होंगे जिसकी वजह से तोत्तो-चान उसे अपने पेड़ पर चढ़ाना चाहती थी?
उत्तर :- “तोत्तो-चान” यासुकी-चान को अपने पेड़ पर इसलिए चढ़ाना चाहती थी क्योंकि उसे यासुकी-चान से सहानुभूति थी | पेड़ पर चढ़ना एक अपूर्व अनुभव है उसकी द्विशाखा तक पहुंच कर वहां आराम करना अपूर्व अनुभव के प्रत्येक पात्र को मनभावन लगता है | यासुकी-चान पोलियो से ग्रस्त था और पेड़ पर चढ़ने के अपूर्व अनुभव से वंचित था | तोत्तो-चान ने सोचा कि क्यों ना वह उसे अपने पेड़ पर चढ़ने के लिए आमंत्रित करें | तोत्तो-चान की हार्दिक इच्छा थी कि यासुकी-चान उसके पेड़ पर चढ़े और उसे उस द्विशाखा के आराम देह स्थान का आनंद ले | अपने पेड़ के सुखद अनुभव तोत्तो-चान, यासुकी-चान को देना चाहती थी |
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Q.4. ’’तो ऐसा होता है पेड़ पर चढ़ना’’ यासुकी-चान के इस कथन को ध्यान में रखते हुए पेड़ पर चढ़ने के बाद हुई खुशी को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :- पेड़ पर चढ़ना हर किसी के लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है | जिसने कभी पेड़ पर चढ़ना सीखा ही नहीं हो उसके लिए भी और जो किसी भी बड़े से बड़े पेड़ पर आसानी से चढ़ जाए उसके लिए भी | पेड़ की शाखाओं के बीच ठहर कर आराम करना, पेड़ों पर खेलना, मौज-मस्ती सभी कुछ संभव होता है | इसलिए “यासुकी-चान” ने कहा है कि ऐसा होता है, ‘पेड़ पर चढ़ना’ |
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Q.5. तोत्तो-चान द्वारा यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाना एक जोखिम भरा काम था। आपके अनुसार तोत्तो-चान का यह कार्य उचित था या अनुचित? अपने विचार रखिए।
उत्तर :- हालांकि तोत्तो-चान द्वारा यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाना एक जोखिम भरा काम था लेकिन असंभव नहीं था | साहस और दृढ़ प्रतिज्ञ होकर जीवन में बहुत कुछ कठिन कार्य भी आसानी से हो जाता है | इसलिए कहा जा सकता है कि तोत्तो का यह निर्णय अनुचित नहीं उचित था |
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Q.6. दृढ़निश्चय और कठिन परिश्रम से पेड़ पर अपने मित्र को चढ़ाने के बाद तोत्तो-चान और यासुकी-चान को जिस प्रकार की खुशी हुई, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :- तोत्तो-चान की प्रबल इच्छा थी कि यासुकी-चान उसके पेड़ पर एक बार अवश्य चढ़े | इस हेतु तोत्तो-चान किसी भी प्रकार का कठिन से कठिन जोखिम उठाने के लिए भी तैयार थी | तोत्तो-चान को मन में यह टीस थी कि वह “येन केन प्रकारेण” एक बार यासुकी-चान को पेड़ पर अवश्य चढ़ाएं और जब तोत्तो-चान द्वारा या यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ा दिया गया तो उसे एक अपूर्व अनुभव और खुशी प्राप्त हुई | यह आनंद अनुभव तोत्तो और यासुकी की दोनों के लिए पृथक-पृथक था | यासुकी का अक्षम होकर भी पेड़ पर चढ़ जाना एक नायाब खुशी से कम नहीं था | तोत्तो को इस बात की अपूर्व प्रसन्नता थी कि वह यासुकी को पेड़ पर चढ़ाने में सफल हो गई थी |
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Q.7. “यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका था’’ सोचकर बताइए कि लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा ?
उत्तर :- यासुकी-चान पोलियो की बीमारी से ग्रसित होने के कारण खुद तो बहुत असक्षम था | पेड़ पर चढ़ने का कार्य यासुकी-चान के लिए एक बहुत ही कठिन और दुष्कर कार्य था| तोत्तो-चान की मदद के द्वारा यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाया गया था | पेड़ पर चढ़ने के लिए यासुकी-चान बहुत जिज्ञासु था लेकिन वह क्या करता ? विवश, लाचार, एवं मजबूर था| यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका था क्योंकि उसकी कौन सहायता करता और पेड़ पर चढ़ाता, तोत्तो-चान जैसे मित्र सदैव और सर्वत्र नहीं मिलते| तोत्तो-चान द्वारा उसे आसानी से नहीं अपितु बहुत कठिन परिश्रम करके पेड़ पर चढ़ाया गया था | इस बात की उसे बहुत प्रसन्नता थी | लेखिका द्वारा इसी बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है |
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पाठ से आगे-
Q.1. तोत्तो-चान द्वारा यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाना साहसिक कार्य था। हम अपने दैनिक जीवन में कौन-कौन से बहादुरी या साहस के कार्य करते हैं। उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर :- 1) हम अपने दैनिक जीवन में विद्यालय के कार्यक्रम में साहसपूर्व भाषण, कविता का व्याख्यान करते हैं. जहां सभी की नजरें हमारी ओर होती हैं |
2) शिक्षक के द्वारा प्रश्न पूछे जाने पर हम साहस पूर्वक उत्तर देने का प्रयास करते हैं |
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Q.2. यासुकी-चान जैसे शारीरिक चुनौतियों वाले व्यक्ति के प्रति सहानुभूति जताना अथवा असंवेदनशीलता दोनों ही प्रकार के व्यवहार उन्हें ठेस पहुँचाते हैं। आपकी समझ से उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए?
उत्तर :- शारीरिक चुनौतियों वाले व्यक्तियों से सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करना चाहिए जिससे उसे यह न लगे कि वह मजबूर है | उससे दोस्ताना व्यवहार कर उसकी शारीरिक कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे उसे लगे कि वह भी एक सामान्य व्यक्ति के समान है |
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Q.3. तोत्तो-चान ने माता-पिता से झूठ बोलकर अपने मित्र यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने जैसा साहसिक कार्य किया। आपने भी यदि किसी की सहयोग के लिए या किसी अच्छे कार्य के लिए झूठ का सहारा लिया हो, तो निःसंकोच उल्लेख करें।
उत्तर :- मैंने भी यासुकी-चान की तरह ही झूठ बोल कर अपने विद्यालय के चपरासी की मदद की थी | उसकी बेटी की शादी के लिए पैसे कम पड़ रहे थे, और मुझे मेरे पापा ने लेपटॉप खरीद कर दिया था, जिसे मैंने बेचकर उसकी मदद कर दी थी | फिर घर में उसे खो जाने की बात कही थी | मुझे नहीं पता है कि मैंने सही किया या नहीं परंतु मेरे एक छोटी सी मदद के कारण एक व्यक्ति अपनी लड़की की शादी आराम से कर सका | हमें दूसरों के हितों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए |
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Q.4. यासुकी-चान जैसे शारीरिक चुनौतियों से जूझने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधा की आवश्यकता होती है। विद्यालयों अथवा सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे कौन-कौन से भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।आपसी चर्चा के पश्चात् एक सूची तैयार कीजिए।
उत्तर :- विशेष चुनौतियों से जूझने वाले व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थलों व विद्यालयों में निम्न भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है – 1) रैंप, 2) कम बोर्ड शौचालय,
3) व्हील चेयर, 4)ट्रॉय साइकिल आदि |
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भाषा के बारे में –
Q.1. द्विशाखा, तिपाई जैसे शब्दों का उल्लेख इस पाठ में हुआ है। इन शब्दों का पहला पद संख्यावाची विशेषण है। इस तरह के शब्दों से बने संख्यावाची पदों को द्विगु समास कहते हैं। जब संख्यावाची पदों से किसी विशेष अर्थ का बोध होता है तब वहाँ बहुब्रीहि समास होता है, जैसे- दशानन। द्विगु और बहुब्रीहि समास के पाँच-पाँच उदाहरण लिखिए।
उत्तर :- 1) द्विगु समास :- द्विगु समास का प्रथम पद संख्यावाची होता है ऐसे अनेक शब्द हमारे व्यवहार में आते रहते हैं –
उदाहरण :- पंचतंत्र
पंचवटी
शताब्दी
नवरात्र
चौराहा
2) बहुब्रीहि समास :- इस समास में समस्त पद ही विशेषण का कार्य करते हैं |
उदाहरण :- त्रिनेत्र
आशुतोष
तिरंगा
दिनेश
चंद्रमौली
लंबोदर
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Q.2. नीचे दी गई पंक्तियों में उचित विराम चिह्नों का प्रयोग करें-
यासुकी-चान डाल के सहारे खड़ा था कुछ झिझकता हुआ वह मुस्कराया तब उसने पूछा क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ | उस दिन यासुकी-चान ने दुनिया की एक नई झलक देखी जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा था तो ऐसा होता है पेड़ पर चढ़ना यासुकी-चान ने खुश होते हुए कहा |
उत्तर :- यासुकी-चान डाल के सहारे खड़ा था | कुछ झिझकता हुआ, वह मुस्कुराया तब उसने पूछा, “क्या मैं अंदर आ सकता हूं” | उस दिन यासुकी-चान ने दुनिया की एक नई झलक देखी थी जिसे उसने पहले कभी ना देखा था | “तो ऐसा होता है पेड़ पर चढ़ना यासुकी-चान ने खुश होते हुए कहा |
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Q.3. ’इस भेद का पता न तो तोत्तो-चान के माता-पिता को था न ही यासुकी-चान को।’ इस वाक्य में भेद शब्द का प्रयोग राज़ या गुप्त बात के लिए हुआ है। भेद शब्द का प्रयोग कई बार अंतर बताने (जैसे-मनुष्य और पशु में भेद होता है।), प्रकार बताने (संज्ञा शब्द के तीन भेद होते हैं।) आदि के लिए होता है। आप भी भेद शब्द का विभिन्न अर्थो में प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
उत्तर :- 1) भाजपा और कांग्रेस के विचारों में भेद है |
2) नेताओं के भाषण जातिगत भेद प्रदर्शित करते हैं |
3) नस्ल भेद भी हिंसा के कारण होता है |
4) स्त्री पुरुष की शारीरिक क्षमताओं में भेद होता है|
5) अपंग और स्वस्थ शरीर में भी भेद होते हैं |
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Q.4. कुछ क्रियाओं से संज्ञा शब्द बनते हैं जैसे- रोना से रुलाई, धोना से धुलाई इत्यादि। यहाँ ओ-‘उ’ में तथा आ-‘ई’ में बदल जाते हैं। कुछ इसी तरह की क्रियाओं से संज्ञा शब्द बनाइए और यह भी देखिए कि इसके लिए उनमें किस तरह के बदलाव की जरूरत पड़ती है?
उत्तर :- पीटना पिटाई
महंगा महंगाई
बोना बुवाई
खोदना खुदाई
लीपना लिपाई
जोतना जुताई
काटना कटाई
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योग्यता विस्तार –
Q.1.अपने विद्यालय के पुस्तकालय से या शिक्षकों की मदद से निम्नलिखित के बारे में जानकारी इकट्ठा कीजिए और पढ़िए। शिवानी की कहानी ’अपराजिता’, हेलेन केलर की जीवनी, यशपाल की कहानी ’गूँगे’।
उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें |
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Q.2. शारीरिक चुनौती वाले व्यक्तियों का समाज के प्रति क्या दृष्टिकोण होता है उनसे चर्चा कर लिखिए।
उत्तर :- विकलांग व्यक्ति को न तो दया चाहिए, न वो किसी दया का पात्र है | हां किसी शारीरिक अक्षमता के चलते वह समाज की मुख्य धारा के साथ अपने आप को नहीं चला पा रहा है तो उसको हाथ बढ़ाकर साथ ले चलने की आवश्यकता है | समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी मानसिकता में सुधार कर ले तो विकलांगता जैसी समस्या समाज से स्वतः ही दूर हो जाएगी |
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Q.3. समास व इसके भेदों पर अपने शिक्षकों से जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर :- समास की परिभाषा :- समास का तात्पर्य है “संक्षिप्तीकरण” | इसका शाब्दिक अर्थ होता है छोटा रूप, जब दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर जो नया और छोटा शब्द बनता है, उस शब्द को समास कहते हैं |
समास के भेद :- 1)अव्ययीभाव समास
2) तत्पुरुष समास
3) कर्मधारय समास
4) द्विगु समास
5) द्वंद समास
6) बहुव्रीहि समास
1) अव्ययीभाव समास :- इसमें प्रथम पद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं |
उदाहरण :- यथाशक्ति शक्ति के अनुसार
यथा क्रम क्रम के अनुसार
प्रतिदिन प्रत्येक दिन
आमरण मृत्यु तक
यथा नियम नियम के अनुसार
2) तत्पुरुष समास :- जिस समास का उत्तर पद प्रधान व समासिक विग्रह करने पर कारक की विभक्ति चिन्हों का लोप होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं |
उदाहरण :- तुलसी कृत तुलसी द्वारा कृत
कामचोर काम से जी चुराने वाला
राजपुत्र राजा का पुत्र
राज महल राजा का महल
देश भक्ति देश के लिए भक्ति
3) कर्मधारय समास :- जिस समास में दोनों पद का तुलनात्मक संबंध हो तथा एक पद दूसरे की विशेषता बता रहा हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं |
उदाहरण :- कमलनयन कमल के समान नयन
नीलगगन नीला हो गगन
चरण कमल कमल के समान चरण
नवयुवक नव है जो युवक
हरी मिर्च हरी हो जो मिर्च
4) द्विगु समास :- जिस समास का पूर्व पद निश्चित संख्या का बोध कराए तथा द्वितीय पद समूह बताए, वह द्विगु समास कहलाता है |
उदाहरण :- नवरत्न नौ रत्नों का समूह
पंचवटी पांच वटों का समूह
चौराहा चार राहों का समाहार
तिराहा तीन राहों का समाहार
5) द्वंद समास :- जिस समास के दोनों पद प्रधान हो तथा स्वतंत्र व सार्थक अर्थ रखते हों तथा समासिक विग्रह करने पर योजक शब्द या चिन्ह का अभाव हो,द्वंद समास कहलाते हैं|
उदाहरण:- दिन – रात दिन और रात
माता – पिता माता और पिता
राजा – रंक राजा और रंक
दाल – रोटी दाल और रोटी
6) बहुब्रीहि समास :- जिस समाज में साधारण अर्थ के साथ एक अन्य अर्थ का बोध हो, जो व्यक्ति विशेष के लिए रूढ़ हो वह बहुब्रीहि समास कहलाता है |
उदाहरण :- दशानन रावण
अष्टभुजा दुर्गा मां
नीलकण्ठ शिव जी
लंबोदर गणेश जी