CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 2 स्थानीय परिवेष, कला और संस्कृति Chapter 2.3 कलातीर्थ: खैरागढ़ का संगीत विश्वविद्यालय are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 2 स्थानीय परिवेष, कला और संस्कृति Chapter 2.3 कलातीर्थ: खैरागढ़ का संगीत विश्वविद्यालय
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. भारतीय संस्कृति को श्रेष्ठ क्यों माना गया है?
उत्तर :- भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता का कारण कलात्मकता है| भारतीय सभ्यता के साथ ही पुरानी कलाएं एवं कला पद्धतियां हैं | कला के अनेक रूप देश के चारों दिशाओं में व्याप्त है | कलात्मक सौंदर्य का जीवन और समाज से गहरा संबंध होता है | कला के द्वारा युग की उपलब्धियां तथा सीमाएं भी प्रकाश में आती हैं | इसलिए कला को भारतीय जीवन में महत्वपूर्ण स्थान प्राचीन काल से ही मिलता रहा है | कला से जीवन में रस सुकुमारता एवं सहृदयता को पोषण मिलता है | इससे मानवीय संवेदनाएं पुष्ट होती हैं | हमारी संस्कृति में प्रारंभ से ही कला समाविष्ट होकर उसकी संवाहक रही है |
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Q.2. पाठ के आधार पर खैरागढ़ राज्य के इतिहास पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :- खैरागढ़ गाँव भारत के मध्य में स्थित “धान के कटोरा” के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगाँव जिले में हैं | जहां ग्रामीणों द्वारा सुख मय जीवन यापन व शांत वातावरण में स्थापित विश्वविद्यालय का कला साधना में विशेष योगदान है |स्व. लाला प्रद्युम्न सिंह द्वारा रचित ग्रंथ “नागवंश” के अनुसार वर्तमान खैरागढ़ में नागवंशी राजाओं के इतिहास का आरंभ खड़गराय से हुआ | वे खोलवा राज्य के सोलहवें तथा नई राजधानी खैरागढ़ के प्रथम राजा थे | उन्होंने पिपरिया मुस्का तथा आमनेर नदी के मध्य अपने नाम से एक नगर बसाया नगर के चारों ओर खैर वृक्षों की अधिकता थी इतिहासकार दोनों मान्यताओं से सहमत हैं कि राजा खड़गराय या खैर वृक्षों की अधिकता की वजह से नगर को खैरागढ़ कहा जाने लगा |
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Q.3. खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना किस तरह हुई?
उत्तर : – खैरागढ़ के राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी की कीर्ति कौमुदी सदैव मुस्काती रहेगी जिन्होंने अपने दिवंगत पुत्री राजकुमारी इंदिरा की स्मृति में संपूर्ण राजभवन का उदारता पूर्वक दान करके इस विश्वविद्यालय की स्थापना की |
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Q.4. विश्वविद्यालय के कुलपति पं. एस.एन. रातंजनकर के योगदान को लिखिए।
उत्तर :- विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति पद्मभूषण पं. एस.एन रंजनकर का संगीत का आरंभिक पाठ्यक्रम बनाने में महती भूमिका रही | उन्होंने संगीत की शिक्षा को घरानों की चारदीवारी से निकालकर संस्थागत किया| शास्त्र और प्रयोग को एक-दूसरे के नजदीक लाने और जोड़ने का कार्य किया | इससे गीत, संगीत और नृत्य की शिक्षा के प्रति समाज का दृष्टिकोण सकारात्मक हुआ |यही उनके योगदान का सकारात्मक स्वरूप था |
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Q.5. खैरागढ़ विश्वविद्यालय में कौन-कौन से शिक्षण विषय उपलब्ध हैं?
उत्तर :- खैरागढ़ विश्वविद्यालय में संगीत कला, चित्रकला, मूर्तिकला, छपाईकला, लोककला, तथा साहित्य संबंधी डिप्लोमा, स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित है | यहाँ बी.ए. संगीत, नृत्य लोक संगीत तथा बी. ए/ एम. ए/ एम. एफ.ए. के पाठ्यक्रम संचालित हैं |
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Q.6. टिप्पणी लिखिए-
(क) ग्रंथालय (ख) ललितकला
उत्तर :- (क) ग्रंथालय :- “ग्रंथों के आलय” अर्थात “ग्रंथों का घर”| जहां अनेक प्रकार की पुस्तकें संग्रहीत की जाती हैं | खैरागढ़ विश्वविद्यालय में बहुत बड़ा ग्रंथालय है | जहां 45 हजार से अधिक पुस्तकें हैं | ग्रंथालय में सभी प्रकार की पुस्तकें पाई जाती हैं | जो घटनाक्रम, समसामयिक, ज्ञान-विज्ञान, भाषा साहित्य, कला विषयों से संबंधित है | ग्रन्थालय में वाचनालय एवं भव्य श्रव्य कक्ष है | जहां विद्यार्थी-शोधार्थी बैठकर अपनी रूचि एवं आवश्यकता अनुसार ज्ञानार्जन करते हैं |
(ख) ललितकला :- स्वर ,लय, ताल ,नृत्य आदि से बंधा हुआ संगीत ही ललित कला है| उसमें भारतीय कला-चिंतन में कला को साधना तर्क व भक्ति का स्वरूप माना है | ललित कला में वीडियो स्लाइड, लोक एवं जनजातीय कलाकारों के कला नमूनों के उल्लेखनीय संग्रह होते हैं | भव्य से भव्य कक्षा जहां विद्यार्थी ,शोधार्थी कला जिज्ञासु अपने विषय के अनुरूप महान कलाकारों के ऑडियो वीडियो कैसेट द्वारा ज्ञान अर्जन करते हैं ,शास्त्री एवं लोक संगीत के वाद्यों की कला विधि का भी मनोहारी होती है।
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Q.7. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को कलातीर्थ क्यों कहा गया है?
उत्तर :- इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में भारत के कई प्रांतों तथा श्रीलंका, मॉरीशस, नेपाल, अफगानिस्तान, मलेशिया आदि देशों से विद्यार्थी एवं शोधार्थी कला व संगीत की शिक्षा व शोध के लिए यहां आते हैं | यहां की अनूठी प्रकृति विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध पारिवारिक भारतीयता के ज्ञानार्जन की अनुभूति कराती है, इसलिए इस विश्वविद्यालय को कला तीर्थ कहा जाता है |
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पाठ से आगे :-
Q.1. कलाएँ हमारे जीवन को किस तरह खुशहाल व परिपूर्ण बनाती हैं?
उत्तर :- कला के माध्यम से हम लोगों के बीच अपनी कला का प्रदर्शन कर ख्याति प्राप्त कर सकते हैं | संगीत, गीत-गायन, वादन में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त कर अपने आप को खुशहाल व परिपूर्ण बना सकते हैं |
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Q.2. ललितकलाएँ कौन-सी हैं और उन्हें ललितकलाएँ क्यों कहा गया है?
उत्तर :- प्रमुख ललित कलाएँ निम्नवत है :- चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, छायाकला, संगीतकला, नृत्यकला, ललितकला, आदि | ललितकला उन कलाओं को कहते हैं जिनकी अभिव्यक्ति में सौंदर्य की अपेक्षा होती है | ये कलाएँ मानव जीवन को पूर्णता प्रदान करती है | तथा मानवता के प्रांज्वल बनाती है | इससे व्यक्ति भास्वर होता है एवं समष्टि चेतना की समुचित रूप में प्रज्वलता प्रदान करती है |
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Q.3. कलाकार क्या विशिष्ट व्यक्ति होते हैं या आप और हम भी कलाकार हो सकते हैं? आपस में विचारकर लिखिए।
उत्तर :- कलाकार एक आम आदमी भी हो सकता है, किंतु उसमें उस कला के प्रति सहज रुचि-ललक, जानने-सुनने तथा ग्रहण करने के लिए समर्पित भाव का होना नितांत आवश्यक है | कुछ में जन्मजात कला संबंधी प्रतिभा हो सकती है | साथ ही कुछ को तो वंशानुगत कला प्रतिभा की प्राप्ति हो जाती है, परंतु प्रयत्न और अभ्यास की बड़ी महिमा है एवं कलाकार अपनी कला से अवश्य विशिष्ट व्यक्ति बन जाता है |
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Q.4. विभिन्न कलाओं की शिक्षा प्राप्त कर आप किस तरह के रोजगार चुन सकते हैं? तालिका में लिखिए-
उत्तर
| कला | व्यवसाय के क्षेत्र |
उदाहरण- तबला-वादन हारमोनियम -वादन सारंगी -वादनढोलक -वादन सितार -वादन | तबला वादक, तबला शिक्षक आदि।हारमोनियम वादक, हारमोनियम शिक्षकसारंगी वादक, सारंगी शिक्षकढोलक वादक, ढोलक शिक्षकसिताद वादक, सितार शिक्षक आदि |
अतः हम कह सकते हैं कि किसी भी कला में निपुण होने पर व्यक्ति या वादक बनेगा या शिक्षक वाद्य यंत्र सिखाने का या कला प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना कर व्यवसाय करेगा।
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Q.5. कला ’स्वांतः सुखाय’ भी होती है। कैसे? शिक्षक से पूछकर लिखिए।
उत्तर :- किसी भी कला का सबसे प्राथमिक प्रशंसक और आलोचक स्वयं उस कला का कलाकार ही होता है क्योंकि उस कला का सृजन स्वयं उस कलाकार के द्वारा होता है I इस कारण उस कलाकार को अपनी कला के अवलोकन मूल्यांकन और समीक्षा करने में एक अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है जिसे हम ’स्वांतः सुखाय’ कहते हैं I ’स्वांतः सुखाय’ में कलाकार स्वयं की रचना को देखकर आनंदित होता है उसे दूसरे व्यक्ति द्वारा की गई आलोचना निंदा या प्रशंसा की कोई विशेष चिंता नहीं होती है I ’स्वांतः सुखाय’ की अनुभूति एक कलाकार ही अनुभव कर सकता है इसे शब्दों में वर्णन करना अत्यंत कठिन कार्य है I
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भाषा के बारे में :-
Q.1. ’भावना’ स्त्रीलिंग संज्ञा शब्द है इसमें जब ’आत्मक’ प्रत्यय जुड़ेगा तो प्राप्त शब्द ’भावनात्मक’ एक विशेषण शब्द होगा। इसी प्रकार निम्नांकित शब्दों में ’आत्मक’ प्रत्यय जोड़कर विशेषण शब्द बनाइए-
कला, व्याख्या, तुलना, रचना।
उत्तर :- कला + आत्मक = कलात्मक
व्याख्या + आत्मक = व्याख्यात्मक
तुलना + आत्मक = तुलनात्मक
रचना + आत्मक = रचनात्मक
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Q.2. निम्नांकित शब्दों में कुछ अन्य शब्द जोड़कर नए शब्द बनाइए- जैसे साहित्य से साहित्य सम्मेलन |
(क) गायन (ख) परंपरा (ग) कला
उत्तर :- (क) गायन :- गायन समारोह या गायन सम्मेलन |
(ख) परंपरा :- परंपरागत, परंपरावादी, पारंपरिक |
(ग) कला :- कलासाहित्य, कलात्मकता, कलाभवन, कलाकार, कलासम्मेलन |
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Q.3. पाठ के चौथे अनुच्छेद में दी गई जानकारी के आधार पर राजा वीरेन्द्र बहादुर और रानी पद्मावती के बीच एक संवाद लिखिए।
उत्तर :- राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह :- रानी पद्मावती हम चाहते हैं कि अपनी पुत्री इंदिरा की याद और सम्मान में एक संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए |
रानी पद्मावती :- हाँ महाराज ; यह बड़ा ही अच्छा सुझाव है | इस कृत् के लिए हम अपनी स्वीकृति प्रदान करते हैं |
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Q.4. अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें खैरागढ़ के संगीत विश्वविद्यालय की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
प्रिय मित्र राघव,
सप्रेम नमस्ते,
दिनांक 22/09/22,
मित्र राघव,
हमें आप को यह सूचित करते हुए अपार हर्ष की प्राप्ति हो रही है कि हमारे गृह क्षेत्र में बहुत पुराना तथा एशिया का एकमात्र संगीत महाविद्यालय खैरागढ़ जिले के राजनांदगाँव में ही स्थित है | इस विद्यालय की स्थापना राजा वीरेंद्र सिंह एवं रानी पद्मावती ने अपनी दिवंगत पुत्री राजकुमारी इंदिरा की यादों को जीवंत रखने के लिए अपने संपूर्ण राजभवन का दान करके किया था | 14 अक्टूबर 1956 ई. को इसकी स्थापना की गई | जहाँ अनेक कलाओं का अध्ययन एवं अध्यापन का कार्य किया जाता है | यह महाविद्यालय देश विदेश के सभी संगीत साधकों को संगीत की शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है| आप अपनी छोटी बहन के लिए संगीत महाविद्यालय की तलाश कर रहे थे, अतः हमने इसी संबंध में आपको यह सूचना देना आवश्यक समझा | क्योंकि मेरी अपनी कोई बहन नहीं है, अतः मेरी भी प्रबल इच्छा है हमारी बहन की संगीत शिक्षा ऐसे प्रसिद्ध महाविद्यालय में हो सके |
आपका कार्य कैसा चल रहा है ? चाचा व चाची जी को मेरा सादर प्रणाम कहना तथा छोटे भाई-बहन को मेरा आशीष और ढेर सारा प्यार |
आपके पत्र की प्रतिक्षा में आपका अभिन्न मित्र
रतन सिंह
रायपुर (छ. ग)
दिनांक 22/09/22
(क) ’भावनात्मक’ शब्द में ’आत्मक’ प्रत्यय है ऐसे ही दस शब्द और बनाइए।
उत्तर :- आत्मक प्रत्यय का प्रयोग :-
1) व्यंग्यात्मक, 2) इच्छात्मक, 3) कथात्मक, 4) नकारात्मक, 5) व्याख्यात्मक,
6) विचारात्मक 7)रचनात्मक, 8) सकारात्मक, 9) अध्यात्मक, 10) प्रश्नात्मक
(ख) कल्याणकारी शब्द में ’कारी’ प्रत्यय ’करने वाला’ या करने वाली का बोध कराता है ऐसे ही आप ’कारी’ प्रत्यय लगाकर दस नए शब्द बनाइए।
उत्तर :- “कारी” प्रत्यय का प्रयोग :-
1) आज्ञाकारी , 2) शुभकारी , 3)अनिष्टकारी, 4) अनर्थकारी , 5) जानकारी , 6) सरकारी , 7) हितकारी , 8) निर्माणकारी , 9) अहंकारी , 10) प्रलपकारी |
(ग) संस्कृत से मूल रूप में बिना परिवर्तित हुए हिंदी में लिए गए शब्दों को तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे- कर्ण, अग्नि, इत्यादि। इस पाठ में आए तत्सम शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:- तत्सम शब्दों की सूची :-
1)पुष्प , 2) विहीनः , 3) साक्षात् , 4)पशुः . 5)पुच्छविषाण , 6)हीनः , 7) समष्टि-चेतना
8) भास्वर कालांतर , 9) नैसर्गिक , 10) परिकल्पना , 11) अविस्मरणाीय ,12)अर्धशती
13) आविर्भाव , 14) स्नातकोत्तर , 15) मनोरंजनात्मक , 16) स्वीकृत |
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योग्यता विस्तार :-
Q.1. संगीत में कितने स्वर होते हैं, उनके क्या-क्या नाम हैं पता लगाकर लिखिए।
उत्तर :- भारतीय संगीत में कुल 7 स्वर होते हैं |
| स्वर | नाम | पशु-पक्षी |
| सा | षड्ज | मोर |
| रे | ऋषभ | बैल |
| ग | गंधार | बकरी |
| म | मध्यम | क्रोंच |
| प | पंचम | कोयल |
| ध | धैवरा | घोड़ा |
| नि | निषाद | हाथी |
यूं तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती | परंतु फिर भी सुविधाओं के लिए सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं |
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Q.2. पता लगाकर लिखिए कि एक गायक अन्य भाषा के गीतों को किस प्रकार आसानी से गा लेता है?
उत्तर:- कोई भी गायक या गायिका जब भी किसी अन्य भाषा के गीतों का गायन करते हैं तो उसे गीत में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ और उसके भावों तथा उच्चारण की सटीक शैली का अध्ययन करना पड़ता है | क्योंकि विभिन्न भाषाओं में शब्दों का अर्थ, उसको बोलने की कला तथा उनके भाव भिन्न होते हैं | इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गायक गीत के भाषा- भाव व शैली का अध्ययन करके अन्य भाषा के गीतों का भी गायन आसानी से कर सकता है |
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Q.3. छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायकों एवं लोकगायकों की सूची बनाकर उनकी गायन शैली/विधा लिखिए।
उत्तर :- विद्यार्थी गढ़ शिक्षक की सहायता से स्वयं करें |
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Q.4. रायगढ़ के चक्रधर समारोह के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए और शाला की भित्ति पत्रिका में लगाइए।
उत्तर :- विद्यार्थी गढ़ शिक्षक की सहायता से स्वयं करें |