CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 3 समसामयिक मुद्दे Chapter 3.2 अकेली are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 3 समसामयिक मुद्दे Chapter 3.2 अकेली
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अभ्यास-
पाठ से –
Q.1. पाँच रुपए और अँगूठी को आँचल में बाँधते समय बुआ के मन में क्या विचार चल रहे थे?
उत्तर:- पाँच रुपए और अँगूठी को आँचल में बांधते समय बुआ के मन मेंविचारों के द्वंद चल रहे थे | क्योंकि वह अंगूठी उनके मृत पुत्र की एकमात्र निशानी थी जिसे देखकर या स्पर्श करके वे अपने मृत पुत्र के स्पर्श की कल्पना कर सकती थी | किन्तु दूसरी तरफ उनके मन में सामाजिक मान मर्यादा तथा रिश्तो की प्रगाढ़ता का लोभ भी था और इस द्वंद में उनका पुत्र मोह हार गया तथा सामाजिक और धनी रिश्तेदारों के घर होने वाले विवाह समारोह के उमंग ने विजय प्राप्त किया |
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Q.2. सोमा बुआ अपने पति की प्रतीक्षा क्यों नहीं करती थीं?
उत्तर:- सोम बुआ के पति का स्वभाव स्नेहहीन था | वह एकांत प्रवृत्ति के हो गए थे | लोगों से मिलना जुलना उन्हें पसंद नहीं ही नहीं था | सोम बुआ पर भी अंकुश लगाया करते थे | पुत्र के मौत के सदमे ने उनके स्वभाव को और भी नीरस बना दिया था | उनके नीरस व्यवहार और अंकुश से बुआ के दैनिक जीवन की गतिविधि मंद हो जाती थी | उनका घूमना फिरना, मिलना जुलना बंद हो जाता था | पुत्र के मरने के बाद पति के सन्यासी होने पर हमेशा अकेले रहने वाली सोम बुआ एकाकीपन की आदी हो चुकी थी | उनके पति उनके साथ कभी भी मीठी बातें या प्रेम पूर्वक वार्तालाप नहीं करते थे | वे हमेशा कटु वचनों का प्रयोग करते थे | वह पति होते हुए भी एक विधवा का जीवन जीने को मजबूर थी इसलिए वह कभी पति के आने का इंतजार नहीं करती थी और ना ही उनके लिए राह में आंखें बिछाए बैठी रहती थी |
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Q.3. सोमा बुआ किशोरी लाल के घर मुंडन के कार्यक्रम में पहुँची तो उन्होंने वहाँ क्या हालात देखे? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:- सोम बुआ जब किशोरी लाल के घर मुंडन के कार्यक्रम में पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां कोई भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो रहा है | कैसे होता ? क्योंकि वहां कोई भी बड़ा या सयाना व्यक्ति ही नहीं था, जो कि कार्यक्रम को सही ढंग से करवाता | मुंडन के कार्यक्रम में विवाह के गीत बन्ना बन्नी गाए जा रहे थे | समोसे भी जरूरत से ज्यादा तथा कच्चे बन रहे थे | गुलाब जामुन की कमी थी जो कि सभी मेहमानों को देने के लिए कम पड़ जाते थे | इन सब को देखते हुए बुआ ने मुंडन के कार्यक्रम की कमान अपने हाथों में संभाल ली| जिससे कार्यक्रम सही तरीके से संपन्न हो सके |
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Q.4. बुआ की सोच और नए फैशनवाली सोच में आप किस तरह का अंतर पाते हैं?
उत्तर:- आधुनिक सोच और पुरातन सोच में जमीन आसमान का अंतर देखने को मिलता है| आधुनिकता के आवरण ने हमारी परंपराओं को धूमिल कर दिया है | पुराने समय में घरों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए कुछ दिनों पूर्व में ही एक दूसरे को आमंत्रित कर दिया जाता था ताकि लोग अपने आने जाने की तैयारी ढंग से कर सकें | परंतु आधुनिक समाज में अब फोन और मोबाइल के चलन के कारण कार्यक्रम या उत्सव के दिन ही लोग संदेश सामूहिक रूप से भेज देते हैं जिससे रिश्तो की प्रगाढ़ता भंग होती हुई प्रतीत होती है | कभी-कभी अचानक आमंत्रण मिलने के कारण लोग समय पर पहुंच भी नहीं पाते हैं और यदि पहुंच जाते हैं तो पैसे को लिफाफे में रखकर या घर में पड़ा कोई भी नया सामान उपहार के रूप में लेकर जाते हैं | जिसके कारण ऐसे उपहार या पैसों को लोग कुछ दिनों बाद भूल भी जाते हैं | क्योंकि उसमें अपनत्व का अभाव प्रतीत होता है | पुरानी ख्याल की होने के कारण बुआ बिना आमंत्रण के ही पहले से विवाह उत्सव में सम्मिलित होने के लिए तैयार होकर आमंत्रण आने की प्रतीक्षा कर रही थी |
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Q.5. ’’मानो वे दूसरे के घर में नहीं अपने ही घर में काम कर रही हों’’ इस पंक्ति के माध्यम से सोमा बुआ के व्यक्तित्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सामने आती हैं?
उत्तर:- सोमा बुआ का स्वभाव बड़ा ही स्वच्छंद और मिलनसार व जुझारू था | वह कभी भी किसी के कार्य को अपना ही कार्य मानकर पूरी लगन और स्वेच्छा से करने लगती थी| अर्थात वे दूसरे के घर के काम को अपने घर की तरह करती थी तथा मिल-जुलकर कार्य को सिद्ध करती थी | जिससे किसी के सम्मान को भी ठेस न पहुंचे | उनका स्वभाव ऐसा था कि वह किसी भी उम्र के लोगों के साथ शीघ्र ही घुल मिल जाती थी | बुआ पूरी लगन एवं निष्ठा पूर्वक दूसरों के घरों में भी अपने घर जैसी तन्मयता के साथ काम करती थी | क्योंकि उनका हृदय बड़ा था ,निश्चल था | उनके स्वभाव में अपना पराया जैसा कोई भाव नहीं होता था | ऐसा करने में उनको आत्मिक सुख प्राप्त होता था | यही उनके महानता और ममत्व को दर्शाता है | एक महान व्यक्तित्व की परिचायक है |
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Q.6. कहानी में आए पात्र सोमा बुआ के पति, राधा भाभी और विधवा ननद के व्यक्तित्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:- सोम बुआ के सन्यासी पति :-
सोमा बुआ के पति का स्वभाव बुआ के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत था | पुत्र मृत्यु के उपरांत उन्होंने सन्यास ग्रहण कर लिया था | वह एक महीने में एक बार ही आते थे , वह घर द्वार से दूर रहते थे तथा उनको उनका स्वभाव भी बुआ के प्रति बड़ा संवेदनहीन था | उनके कड़वे बोल बुआ की आत्मा को भी छलनी-छलनी कर देते थे | वे किसी से कोई भी संबंध नहीं रखते थे, इसलिए दिवगंत भाई की पुत्री के विवाह उत्सव में बिना आमंत्रण जाने से रोक दिया | वे हमेशा गुम शुम ही रहते थे |
राधा भाभी :- राधा भाभी सोम बुआ की सुख-दु:ख की साथी थी | वह बुआ को हमेशा सही सलाह देती थी | उनके सुख-दु:ख की बातें सुनकर वह उन्हें (ढांढ़स) सांत्वना प्रदान करती थी | हमेशा न्यायोचित निर्णय दिया करती थी | बुआ के घर की ऊपरी मंजिल में वह किराए पर ही रहती थी | वह एक शिक्षित और सुलझी हुई महिला थी
विधवा ननद :- सोमा बुआ की एक विधवा ननद थी | उसे यह बताती थी कि समधिन के घर शादी की लिस्ट में बुआ का नाम है | यही बात बुआ को बताती है | वह उन्हें हमेशा प्रसन्न देखना चाहती थी |
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Q.7. आपके अनुसार कहानी का शीर्षक ‘अकेली’ क्यों है?
उत्तर:- प्रस्तुत कहानी “अकेली” में संपूर्ण कथानक कहानी की एकमात्र जीवंत पात्र सोमा बुआ के बारे में लिखा गया है | कथानक के अनुसार सोमा बुआ का एकमात्र पुत्र भी उन्हें छोड़कर इस संसार से जा चुका था अर्थात उसकी मृत्यु हो चुकी थी | पुत्र की मृत्यु के पश्चात बुआ के पति ने सन्यास ग्रहण कर लिया था और वह साल के 11 महीने हरिद्वार में रहते थे| जिसके कारण बुआ को अकेले ही अपना जीवन यापन करना पड़ता था | यद्यपि वर्ष में 1 माह के लिए उनके पति घर में ठहरते थे | उनके पति का व्यवहार बड़ा ही नीरस था | वह किसी से मिलना-जुलना या आना-जाना पसंद ही नहीं करते थे | सोमा बुआ से भी उनके मधुर संबंध नहीं थे | कभी भी वह बुआ से प्रेम की बातें नहीं करते थे | अपितु हमेशा उन्हें कड़वे वचन ही बोलकर रुलाते रहते थे | सुहागिन होते हुए भी बुआ एक विधवा की तरह जीवन यापन कर रही थी | उन्हें पति का कोई भी सहयोग नहीं था | अतः यही एकाकीपन कहानी को उचित शीर्षक देने में सफल होता है | इसलिए हम कह सकते हैं कि शीर्षक “अकेली” ही इस कथानक का उचित शीर्षक हो सकता है अन्यथा और कुछ भी नहीं |
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पाठ से आगे –
Q.1. समधी के यहाँ से बुआ को बुलावा क्यों नहीं आया होगा? आपके अनुसार इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:- समधि के यहाँ से बुआ को बुलाना न आने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :-
1. समधि के यहाँ से बुआ को बुलावा इसलिए नहीं आया होगा क्योंकि उनके देवर जी को मरे 25 बरस हो गए हैं | इसलिए वह लोग बुलाना भूल गए होंगे |
2.बुआ जी का अपने देवर की मृत्यु के बाद उन लोगों से कोई संबंध तथा आना जाना ही नहीं था | अतः यह भी कारण हो सकता है उन्हें बुलावा न देने का |
3.आजकल के फैशन के हिसाब से पुराने संबंधों को बुलाना उचित नहीं समझा जाता होगा |
4.आजकल रिश्तेदार इतने अधिक हो गए हैं कि वह बुलावा देना ही भूल गए होंगे |
5.बुआ जी अपने देवर के परिवार में होने वाले लड़की के पिता अर्थात समधी की अपेक्षा अत्यधिक निर्धन थी | अर्थात वे दोनों परिवारों के वैभव कि नहीं थी | यह भी कारण हो सकते हैं उन्हें ना बुलाने का |
6. बुआ पुराने ख्यालों वाली एवं आधुनिकता से दूर रहने वाली थी | बुआ के वहाँ पहुंचने से परिवार की कमी उजागर हो सकती थी, जिससे उत्सव फीका पड़ सकता था | अतः यह भी एक कारण हो सकता है |
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Q.2. यदि समधी के यहाँ से बुलावा आ जाता तो कहानी क्या होती?
उत्तर:- यदि समधी के यहां से बुआ जी को बुलावा आ जाता है तो वह उनके लिए बड़े ही सम्मान की बात होती है | बिरादरी में उनकी उपस्थिति से बुआ का जीवन सुखमय हो जाता, तथा उनके जीवन का एकाकीपन दूर हो जाता | उन्हें बुलावा आने मात्र से ही आत्म संतुष्टि हो जाती है, क्योंकि मान सम्मान सभी चाहते हैं | उनके पति की नजर में भी उनका सम्मान अधिक रहता | देवर की मृत्यु हुए 25 वर्ष हो चुके थे, तभी से उनका पारिवारिक संबंध टूट चुका था, वह पुनः विस्थापित हो जाता |
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Q.3. ‘‘नई लाल-हरी चूड़ियाँ पहनने के बाद बुआ सारे दिन हाथ को साड़ी के आँचल से ढँके-ढँके फिरीं।’’ बुआ ने ऐसा क्यों किया होगा?
उत्तर:- नई लाल हरी चूड़ियाँ पहनने के बाद बुआ सारे दिन हाथों को साड़ी के आँचल से ढँके-ढँके फिरीं क्योंकि वह इतने दिन से मट मैली चूड़ी को पहनने हुई थी | लेकिन आज समधी के घर बिना बुलाए शादी में जाने के लिए इतनी तैयारी कर रही थी | अतः पति द्वारा देखे जाने पर उनके क्रोध का भी भय उन्हें सता रहा था तथा लोक लाज के कारण भी उन्होंने चूड़ियों को ढक रखा था | बिना बुलाए हुए वहां जा नहीं सकती थी इसलिए आमंत्रण की प्रतीक्षा में बुआ ने पति व दूसरे लोग भी ना देख पाए इसलिए उन्होंने चूड़ियों को आंचल से ढक रखा था |
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Q.4. शादी-विवाह जैसे सामाजिक समारोहों में अक्सर व्यक्ति अपनी हैसियत से अधिक खर्च करता है और आर्थिक बोझ में दब जाता है। आपके अनुसार यह कहाँ तक उचित है?
उत्तर:- शादी विवाह जैसी सामाजिक समारोह में व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति से अधिक खर्च करता है | आज आधुनिक युग में दिखावा व महंगाई के कारण व्यक्ति को बाजार से सामान खरीदना आवश्यक हो जाता है और विवाह जैसे आवश्यक कार्य किसी भी तरह संपन्न हो होते देखना चाहता है, परिणाम स्वरूप ऐसे समारोहों में अक्सर व्यक्ति अपनी हैसियत से अधिक खर्च करता है और आर्थिक बोझ तले दब जाता है | यह सर्वथा अनुचित है जिसके कारण पूरा परिवार दु:ख भोगता है | घर के दूसरे लोगों की ठीक से परवरिश नहीं हो पाती उनका भविष्य बर्बाद हो जाता है | अनेक बार मानसिक तनाव में लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं और कुछ लोग तो असामाजिक कार्य करने लग जाते हैं| इससे पूरे समाज और राष्ट्र को नुकसान होता है | अतः हमें सतत प्रयासरत रहना चाहिए कि हम अपनी क्षमता से अधिक फिजूलखर्ची ना करें और जरूरी खर्च करके समारोह को संपन्न कराएं जिससे इसकी मधुर स्मृतियां हमें हमेशा याद रहे ना कि हम जीवन के अनमोल क्षणों को कर्ज के बोझ तले दबा दें |
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भाषा के बारे में-
Q.1. इस पाठ में अनुनासिक ध्वनियों को व्यक्त करने के लिए दो तरह के संकेतों चन्द्र बिंदु ( ँ) और बिंदु ( ं ) का उपयोग हुआ है और अनुस्वार को व्यक्त करने के लिए बिंदु ( ं ) का उपयोग कई जगह हुआ है। कक्षा में समूह बनाकर नीचे दी गई सारणी में ऐसे शब्दों को खोज कर लिखिए।
| अनुनासिक ( ँ ) | अनुनासिक ( ं ) | अनुस्वार ( ं ) |
| पाँचअँगूठीआँखेंआँचल पहुँच गाँठ ढँकेंजाऊँगी | पापड़ोंमैं समाधियोंबोलींजिदगींचूड़ियोंअवयवोंहाथों जावेंगे | पंकजस्वच्छंदसंकटोंतंगरंगसंन्यासीअंकुशसंग्रहसंयत |
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Q.2. पाठ में आए अनुनासिक और अनुस्वार के उपयोग वाले शब्दों के अलावा ऐसे शब्दों का चयन कर एक सूची बनाइए, जिसमें अनुनासिक और अनुस्वार का प्रयोग हुआ हो।
| अनुनासिक ( ँ ) | अनुस्वार ( ं ) |
| काँछनाआँचलपूँछनाढूँढ़नागठरियाँ | श्रृंगारदानसंन्यासीकुंठितबंदमुंडन |
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Q.3. घर-बार, मिलना-जुलना, आस-पास, अभी-अभी आदि इस तरह के शब्द अक्सर प्रयोग में आते हैं, इस कहानी में भी आए हैं। कक्षा में समूह बनाकर इसी प्रकार के शब्दों को ढूँढ़कर सूची बनाइए एवं उन्हेनिम्नांकित सारणी के अनुसार वर्गीकृत कीजिए |
| दोनों समान शब्द | परस्पर विरोधीशब्द | विपरीत लिंगींशब्द | पहला सार्थक दूसरा निरर्थक शब्द | दोनों निरर्थक शब्द |
| धीरे-धीरे | आना-जाना | पति-पत्नी | चाय-वाय | आँय-बाँय |
| अभी-अभी | कहा-सुनी | घूमना-फिरना | मिलना-जुलना | टाँय-टाँय |
| पास-पड़ोस | रोटी-पानी | बन्ना-बन्नी | तोड़-ताड़ | काँव-काँव |
| नई-नवेली | धर्म-कर्म | छाया-मूर्ति | जैसे-तैसे | |
| पड़ी-पड़ी | इधर-उधर | औरत-पुरुष | दाना-पानी | |
| कूट-कूट कर | जोर-शोर | खाना-पाना |
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Q.4. ‘‘समाधियों का मामला ठहरा, सो भी पैसेवाले’’।
(क) यहाँ ‘ठहरा‘ शब्द से क्या आशय है?
(ख) ‘‘ठहरा‘‘ शब्द के अलग-अलग अर्थ बताने वाले वाक्य लिखिए।
उत्तर:- (क) यहाँ “ठहरा” शब्द से आशय है “या होना” होगा |
(ख) (1) ठहरा हुआ जल | यहाँ “ठहरा” का अर्थ रुका हुआ है |
(2) ठहर-ठहर कर चलना हो गया | यहाँ “ठहरा” का अर्थ सावधानीपूर्वक या धीरे-धीरे हो सकता है |
(3) मोहन एक तो उदंड ठहरा ऊपर से उसकी संगत भी गलत है | यहाँ ठहरा शब्द का अर्थ “होना या है” है |
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योग्यता विस्तार –
Q.1. कहानी के अंत को दर्शाते हुए चित्र बनाइए और उस पर अपने विचार लिखिए।
Q.2. विवाह के अवसर पर गीत गाए जाते हैं। इसी तरह से विभिन्न अवसरों पर गाए जाने वाले गीतों का अपना एक संकलन तैयार कीजिए। घर के बड़ों से बातचीत करके अपने पसंद के किसी एक गीत को सीखकर समूह में गाइए।
Q.3. आपने ’अकेली’ कहानी पढ़ी। इस कहानी में निहित मूल भावों से मिलती-जुलती और भी कई कहानियाँ हैं, यथा- प्रेमचंद की ‘बूढ़ी काकी‘, भीष्म साहनी की ’चीफ़ की दावत’ आदि। शिक्षक की सहायता से इन कहानियों को पढ़कर निम्न आधारों पर चर्चा कीजिए-
(क) पात्र
(ख) सामाजिक स्थिति
(ग) शब्दों का चयन
(घ) भाषा आदि।
उत्तर:- योग्यता विस्तार विद्यार्थी गण स्वयं करें |