CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 3 समसामयिक मुद्दे Chapter 3.4 रीढ़ की हड्डी are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 3 समसामयिक मुद्दे Chapter 3.4 रीढ़ की हड्डी
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. लड़केवालों के स्वागत में रामस्वरूप के घर में हो रही तैयारियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :- लड़के वालों के स्वागत के लिए रामस्वरूप ने अपने घर का कायाकल्प कर दिया था | घर में तख्त बिछाना, दरी, चादर, तकिया आदि से उसे सजाना | वाद्य यंत्रों को भी मनमोहक ढंग से सजाना, ग्रामोफोन को साफ करके रखना, गुलदस्ता, कुर्सियां आदि की सफाई, चाय, नाश्ता, मिठाई, नमकीन, टोस्ट, समोसे आदि खाद्य पदार्थों की तैयारी करना भी उनकी तैयारियों में शामिल था,ताकि सब कुछ मेहमानों के आने के पूर्व सुव्यवस्थित रहे|
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Q.2. पुराने ज़माने की लड़कियों और उमा के बीच क्या अंतर है?
उत्तर :- पुराने जमाने की लड़कियों और उमा के बीच अनेक भिन्नताएं हैं :-
1) आधुनिक युग की लड़की उमा एक शिक्षित लड़की है, जबकि पुराने जमाने की लड़कियां अधिक शिक्षित नहीं रहती थी या तो फिर अधिकतर अशिक्षित रहती थी |
2) पुराने जमाने की लड़कियों का विवाह माता-पिता की इच्छा पर निर्भर रहता था | परंतु उमा आधुनिक युग की लड़की है, जो बिना अपनी मर्जी के विवाह नहीं करना चाहती है |
3) उमा एक साहसी लड़की है तथा वह विवाह संबंध के लिए लड़के के पिता गोपाल प्रसाद द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विरोध करती है | जबकि पुराने समय में लड़कियों द्वारा किसी भी प्रकार का विरोध नहीं प्रकट होता था |अर्थात उनका कोई भी अपना स्वतंत्र विचार ही नहीं था |
4) उमा एक शिक्षक तथा आधुनिक युग की लड़की है | अतः उसने शंकर जैसे चरित्रहीन व विकलांग युवक से विवाह को अस्वीकार कर दिया | जबकि प्राचीन काल में लड़कियां विवाह आदि मामलों में शांत रहती थी, उस समय उनकी इच्छा या अनिच्छा का कोई महत्व नहीं था, न तो वह किसी भी प्रकार का विरोध प्रकट कर सकती थी |
5) पुराने जमाने में लड़कियां माता-पिता की इच्छा को भेड़ बकरियों की तरह स्वीकार कर लेती थी | किंतु उमा आधुनिक युग की एक शिक्षित लड़की थी, जो अपने साथ हो रहे अच्छे बुरे को भली भांति पहचानती थी |
6) पुराने जमाने में दहेज के बिना लड़कियों का विवाह संभव नहीं था | परंतु उमा आज के युग की एक शिक्षित लड़की है अतः उसने दहेज प्रथा का विरोध किया |
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Q.3. उमा गोपाल प्रसाद से यह क्यों कहती है, ’’घर जाकर यह पता लगाइएगा कि आपके लाड़ले बेटे की रीढ़ की हड्डी है भी या नहीं?’’
उत्तर :- शरीर में रीढ़ की हड्डी की मुख्य भूमिका होती है | अर्थात रीढ़ की हड्डी के सहारे व्यक्ति सीधा होकर बैठ सकता है | यदि इस हड्डी में कोई भी खराबी आ जाए तो व्यक्ति सुखी जीवन नहीं बिता सकता है | इसी प्रकार समाज हमारा शरीर है और चरित्र उसकी रीढ़ की हड्डी | चरित्र के अभाव में स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है | गोपाल प्रसाद के पुत्र शंकर की भी रीढ़ की हड्डी स्वस्थ नहीं है | वह सिद्धांतहीन युवकहै| सामाजिक रीति रिवाज दोष युक्त है | वर पक्ष, कन्या पक्ष की छानबीन इस प्रकार करता है मानो कोई भेड़-बकरी या मेज-कुर्सी बिक रही हो | इसके विपरीत वर की कोई छानबीन भी नहीं करता, भले ही वह चरित्रहीन ही क्यों ना हो |
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Q.4. पाठ के आधार पर उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :- उमा का चरित्र-चित्रण :-
- सुशिक्षित युवती :- उमा बी.ए. पास एक सुशिक्षित युवती है | उसे अपने शिक्षित होने पर स्वाभिमान है | इसलिए वह गोपाल प्रसाद को कड़ा प्रत्युत्तर देती हुई कहती है कि जी हां मैं कॉलेज में पड़ी हूं मैंने बी.ए. पास किया है, कोई पाप या चोरी नहीं की है|
- रूढ़ियों के प्रति विद्रोह :- उमा के मन में रूढ़िवादिता के प्रति विद्रोह के भाव हैं, एक भारतीय कन्या वर पक्ष को चुप कर दें, यह उसकी रूढ़ियों के प्रति विद्रोह के भाव दर्शाता है |
- साहसी :- उमा शंकर की चारित्रिक दुर्बलता की बात सबके सामने बता देती है| यहां उसके साहसी स्वभाव का परिचायक है |
- सरल स्वभाव और सादगी प्रिय :- उमा का स्वभाव सरल है | वह सादगी प्रिय है| इसलिए वह इंटरव्यू के समय कोई साज श्रृंगार नहीं करती है |
- स्वाभिमानी :- उमा को नारी होने पर स्वाभिमान है | वह विवाह के नाम पर होने वाली लड़कियों के नाप-तोल और मोल भाव से घृणा करती है | उमा साहसी व निर्भीक है | सत्य के लिए अपनी आवाज बुलंद करती है और माता-पिता की विवशता से आहत होकर मुखर हो उठती है | उमा सर्वगुण संपन्न है तथा विभिन्न कलाओं में पारंगत है |
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Q.5. लड़केवालों के लौटने के बाद उमा की हँसी सिसकियों में क्यों तब्दील हो गई?
उत्तर :- विवाह योग्य लड़की होने पर माता-पिता अपनी लड़की का विवाह शीघ्र करना चाहते हैं | उनकी प्रबल इच्छा रहती है कि हमारी लाड़ली पुत्री के लिए कोई सुयोग्य वर व घर तथा अच्छा संस्कारी परिवार मिले | इसलिए वह यथा संभव प्रयत्न करते हैं | लड़के वालों के लौटने के बाद उमा को उस लड़के पर हँसी आई कि वह एक चरित्रहीन युवक है और लड़कियों को भेड़ बकरी समझने वालों को मैंने अच्छा सबक सिखाया | किंतु उसकी हँसी सिसकियों में बदल गई कि उसका विवाह नहीं हो रहा था | बड़ी मुश्किल से एक रिश्ता आया था, वह भी लौट गया | अर्थात उनके वापस होने पर पिता के टूटे हुए दिल को देख उमा की हँसी सिसकियों में परिवर्तित हो जाती है | क्योंकि बहुत मुश्किल से रिश्ते पक्के होते हैं, वह पिता के दर्द को समझती थी |
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Q.6. उमा के पिता द्वारा अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के समय उसे छिपाना। यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को दिखाता है?
उत्तर :- उमा के पिता के द्वारा अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना व विवाह के समय उसे इसलिए छुपाता है कि कहीं लड़के वाले यह न समझें कि ज्यादा पढ़ी लिखी लड़की होने से घर में अनेक समस्याएं उत्पन्न होंगी | अतः इसलिए उमा के पिता उमा की योग्यता को छुपाना चाहते हैं |
अर्थात समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुप्रथा के कारण उमा के पिता अपने शिक्षित व सुशील बेटी का विवाह तय नहीं कर पा रहे हैं | समाज की इस कुप्रथा के अनेक सम स्वरूप हैं | इस विरोधाभास को वे जीने पर विवश हो जाते हैं जो कि अनुचित है |
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पाठ से आगे –
Q.1. पढ़ी-लिखी लड़की के घर में आ जाने से स्थितियाँ किस प्रकार बदलती हैं? अपना उत्तर तर्क सहित लिखिए।
उत्तर :- एक पढ़ी-लिखी लड़की जब विवाह के उपरांत अपने ससुराल जाती है तो घर की परिस्थितियों के अनुसार ढलने का प्रयास करती है, परंतु समाज की रूढ़िवादिता को अस्वीकार कर देती है | जिसका परिणाम उसे अपने ससुराल तथा कुछ ऐसे असभ्य लोगों के कटु वचनों को सुनकर ही जीना पड़ता है | परंतु कुछ घरों में आज भी शिक्षित लड़कियों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है | आज का युग आधुनिक युग है | अतः शिक्षा का महत्व कुछ तो अवश्य ही बड़ा है | गांधी जी कहते थे कि यदि एक बालक को शिक्षित किया जाए तो वह बालक स्वयं ही शिक्षित कहलाता है, परंतु यदि किसी बालिका को शिक्षित किया जाए तो पूरा परिवार शिक्षित होगा | क्योंकि शिक्षा के माध्यम से ही महिलाओं का विकास हो सकता है और यदि महिलाएं विकसित होंगी तो पूरा समाज विकसित होगा | शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो पुरुष स्त्री दोनों को स्वयं के प्रति अधिक उत्तरदाई बना सके और एक दूसरे के प्रति अधिक सम्मान की भावना पैदा कर सके |
अर्थात पढ़ी-लिखी लड़की घर में आ जाने से अशिक्षित परिवार जो पुरानी रूढ़िवादिता से युक्त होता है | वहां समस्याएं उत्पन्न हो सकती है चूँकि विचारधाराएं एक दूसरे से भिन्न अवश्य ही होंगी | उसको घर में रहने का तरीका, बातचीत करने का ढंग, पुरानी परंपराओं के पालन में भी कठिनाई आ सकती है, उसे बहुत से विरोध का भी सामना करना पड़ता है | परंतु पढ़ी-लिखी लड़की पूर्ण जिम्मेदारी से घर का कार्य करते हुए, परिवार के प्रत्येक सदस्य के हितों का ख्याल रखती है | इससे परिवार खुशहाल रह सकता है |
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Q.2. क्या लड़के और लड़कियों की शिक्षा व्यवस्था अलग-अलग तरह की होनी चाहिए?
कारण बताते हुए अपना उत्तर लिखिए।
उत्तर :- विकास काल में जहां सरकार व समाज द्वारा नारी को समान अधिकार दिया जाता है | वही इस स्थिति को देखते हुए लड़के-लड़कियों को समान शिक्षा देनी चाहिए | लड़कियों को माता-पिता के घर के अतिरिक्त विवाह उपरांत ससुराल को भी संभालना पड़ता है, इसलिए उनको गृहस्थी के कार्य भोजन पकाने तथा सभी सदस्यों से यथोचित कार्य व्यवहार की शिक्षा देनी चाहिए | यदि यह गुण लड़की में नहीं पाए गए तो ससुराल में लड़की को परेशानी होती है, व डांट फटकार खानी पड़ती है | इसके परिणाम स्वरूप कभी-कभी वह आत्महत्या करने के लिए भी मजबूर हो जाते हैं | इसलिए आधुनिक युग में लड़के और लड़कियों को व्यवहारिक शिक्षा व व्यापारिक शिक्षा अवश्य देनी चाहिए, ताकि उनका जीवन यापन हो सके | आज के परिदृश्य में यह जरूरी है कि समाज में स्त्री व पुरुष को शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हैं | क्योंकि शिक्षा के माध्यम से ही लड़का-लड़की के भेदभाव से समाज मुक्त किया जा सकता है | समाज में समुचित विकास के लिए स्त्रियों के सहयोग की भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी पुरुषों के योगदान की |
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Q.3. ’’अब मुझे कह लेने दो बाबूजी! ये जो महाशय खरीददार बनकर आए हैं। उनसे ज़रा पूछिए कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होते? क्या उनको चोट नहीं लगती है? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर . . .?’’
(क) इस वक्तव्य में उमा ने किन प्रवृत्तियों पर चोट की है?
(ख) वक्तव्य के अंत में अधूरे छोड़े गए वाक्य को पूरा कीजिए।
उत्तर :- (क) प्रस्तुत वक्तव्य के माध्यम से उमा ने समाज की रूढ़िवादिता पर कड़ा प्रहार किया है | वह समाज के प्रतिष्ठित व उच्च पद पर अशिक्षित लोगों को आईना दिखाने का प्रयास करती है | उमा ने शंकर के पिता गोपाल प्रसाद द्वारा पूछे गए व्यापारी की भांति प्रश्न जैसे खाने-पीने, उठने-बैठने, सिलाई-कढ़ाई, संगीत आदि बेतुके प्रश्न को सुनकर उमा के हृदय को जो आघात पहुंचता है, उसके धैर्य का अंत होने पर वह गोपाल प्रसाद के पुत्र शंकर के चरित्र हीनता को उजागर करती है | उस समय उसके पिता रामस्वरूप जी रिश्ता टूटने के भय से अपनी पुत्री उमा को रोकने की कोशिश करते हैं | यहाँ शंकर के दुर्गुणों पर पर्दा डालते हुए दूसरों की कमी खोजना विवाह जैसे पवित्र संस्कार को एक जानवर के व्यवसाई जैसे बातचीत करना आदि कुरीति पर प्रहार किया गया है | अर्थात लड़के वालों को आईना दिखाते हुए उनकी ओंछी सोच को उजागर किया है |
(ख) अब मुझे कह लेने दो बाबूजी, यह जो महाशय खरीदार बनकर आए हैं उनसे जरा पूछे कि क्या लड़कियों के दिल नहीं होते ? क्या उनको चोट नहीं लगती है ? क्या वह बेबस भेड़ बकरियां हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देखभाल कर खरीदता है |
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Q.4. रामस्वरूप अपनी बेटी की पढ़ाई-लिखाई छुपाते हैं और गोपाल प्रसाद अपने बेटे की कमजोरियों पर पर्दा डालते हैं। क्या आपको उन दोनों का यह व्यवहार उचित लगता है? अपने पक्ष के समर्थन में तर्क दीजिए।
उत्तर :- आधुनिक समाज में सभ्य नागरिक होने के बावजूद रामस्वरूप को अपनी बेटी के भविष्य के खातिर रूढ़ीवादी लोगों के दबाव में झुकना पड़ रहा है | यह बात उन की विवशता को उजागर करती है | अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं वह सरासर गलत है | प्रत्येक माता-पिता अपनी पुत्री का विवाह श्रेष्ठ घर तथा संपन्न परिवार में करके उसका जीवन सुख में देखना चाहता है| यहां रामस्वरूप जी अपनी बेटी की पढ़ाई-लिखाई इसलिए छुपाते हैं कि गोपाल प्रसाद जो शंकर के पिता है उनको केवल मैट्रिक तक पढ़ी लिखी लड़की चाहिए थी जबकि उमा बी.ए तक पढ़ी थी | उसके पिता इस शिक्षित परिवार में अपनी पुत्री का विवाह करना चाहते थे जो कि मेरी और समाज की दृष्टिकोण से शतप्रतिशत् गलत था | क्योंकि रिश्तो की बुनियाद कभी भी झूठ के नींव पर नहीं बन सकती | दूसरी तरफ गोपाल प्रसाद अपने पुत्र के दुर्गुणों पर पर्दा डालते हुए अर्थात उसकी विकलांगता तथा चरित्र हीनता को छुपाते हुए उसका विवाह एक ऐसी लड़की से करना चाहते हैं जो गंभीर और संस्कारी हो | जबकि दोनों पक्षों को अपने बच्चों की सही जानकारी देते हुए ही रिश्ता जोड़ना उचित होता | परंतु दोनों ही अपनी-अपनी विचारधारा से ग्रसित है |
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भाषा के बारे में –
Q.1. पाठ में आए इन मुहावरों और लोकोक्ति के अर्थ लिखकर उनका प्रयोग अपने वाक्यों में कीजिए-
(क) बाप शेर है तो बेटा सवा शेर
(ख) खींसे निपोरना
(ग) काँटों में घसीटना
(घ) चूँ न करना
(ङ) कानों में भनक पड़ना
(च) आँखें गड़ाकर देखना
उत्तर :- (क) बाप शेर है तो बेटा सवा शेर :- एक से बढ़कर एक होना या अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से श्रेष्ठ होना |
वाक्य प्रयोग :- शेर को सवा शेर मिल गया अब गोपाल को मजा आएगा |
(ख) खींसे निपोरना :- अनावश्यक हँसना |
वाक्य प्रयोग :- कुछ असभ्य और अशिक्षित लोग हर बात में खींसे निपोरते रहते हैं |
(ग) काँटों में घसीटना :- अत्यधिक कष्ट देना
वाक्य प्रयोग :- शिक्षित कन्या का अशिक्षित परिवार से विवाह करना काँटों में घसीटने के समान है|
(घ) चूँ न करना :- शांत रहना |
वाक्य प्रयोग :- भारत ने जब पाकिस्तान पर सर्जिकल अटैक किया तो पाकिस्तान ने चूँ तक नहीं किया |
(ङ) कानों में भनक न पड़ना :- किसी को पता न चलना |
वाक्य प्रयोग :- रमा और रीता के षड्यंत्र की भनक किसी के कानों में नहीं पड़ी।
(च) आँखें गड़ाकर देखना :- आश्चर्य से देखना |
वाक्य प्रयोग :- विवाह के उपरांत नववधू को सभी लोग आंखें गड़ा कर देख रहे थे |
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Q.2. इन वाक्यों के रेखांकित शब्दों को उनके हिंदी पर्यायवाची शब्दों से इस तरह बदलिए कि वाक्य का अर्थ न बदले-
(क) तुम्हारी बेवकूफी से सारी मेहनत बेकार न हो जाए।
(ख) लड़कियों के दिल नहीं होते।
(ग) उनके दकियानूसी खयालों पर मुझे गुस्सा आता है।
(घ) उसकी हँसी सिसकियों में तब्दील हो जाती है।
(ङ) चीनी नाम के लिए डाली जाए तो ज़ायका क्या रहेगा?
उत्तर :-क) तुम्हारी मूर्खतः से सारा परिश्रम व्यर्थ न हो जाए।
ख) लड़कियों के हृदय नहीं होते ।
ग) उनके रूढ़िवादी विचारों पर मुझे क्रोध आता है।
घ) उसकी हँसी सिसकियों में बदल जाती है।
ङ) शक्कर नाम के लिए डाली जाए, तो स्वाद क्या रहेगा |
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Q.3. हिंदी में कुछ शब्द पुल्लिंग रूप में प्रयोग किए जाते हैं किंतु उनके पर्यायवाची उर्दू शब्द स्त्रीलिंग रूप में है।
(क) उदाहरणों को समझते हुए तालिका पूरी कीजिए-
उत्तर :-
| हिंदी पुल्लिंग | उर्दू स्त्रीलिंग |
| मार्ग विलंब रोग स्वर व्यायाम चित्र | राह देर बीमारी ध्वनि कसरत तस्वीर |
(ख) परिवर्तित उर्दू स्त्रीलिंग शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :- 1) राह :- शिक्षा की राह मुश्किल नहीं |
2) देर :- मां को आने में देर हो जाएगी |
3) बीमारी :- कैंसर की बीमारी का इलाज संभव नहीं है |
4) ध्वनि :- ध्वनि प्रदुषण से जानवर सबसे अधिक परेशान होते हैं।
5) कसरत :- स्वस्थ रहने के लिए कसरत करना अति आवश्यक है |
6) तस्वीर :- वह तस्वीर बड़ी ही खूबसूरत है |
Q.4. पाठ में आए इन शब्दों को देखिए-
’टोस्ट-वोस्ट’, पेंटिंग-वेंटिंग, पढ़ाई-वढ़ाई
शब्दों के इस तरह के युग्म में पहला शब्द सार्थक होता है और दूसरा निरर्थक। इन शब्दों में निरर्थक शब्द के स्थान पर ’आदि’ या ’वगैरह’ लिखने से भी शब्दों के अर्थ में कोई बदलाव नहीं होता है। जैसे- ’टोस्ट-वगैरह’ को ’टोस्ट-आदि’ भी लिखा जा सकता है।
अपनी बातचीत में आमतौर पर प्रयोग में आने वाले 20 ऐसे ही शब्दों को लिखिए।
उत्तर :- 1) देर-वेर – देर-बगैरह – देर -आदि |
2) फल-वल – फल-बगैरह – फल-आदि |
3) थाली-वाली – थाली-बगैरह – थाली-आदि |
4) नाम-वाम – नाम-बगैरह – नाम- आदि |
5) काम-वाम – काम-बगैरह – काम-आदि |
6) बल-वल – बल -बगैरह – बल-आदि |
7) खाना-वाना – खाना -बगैरह – खाना-आदि |
8) आना-वाना – आना -बगैरह – आना-आदि |
9) माल-वाल – माल -बगैरह – माल-आदि |
10) बिस्किट-विस्किट – बिस्किट -बगैरह – बिस्किट-आदि |
11) सोना-वोना – सोना -बगैरह – सोना-आदि |
12) मजाक-वजाक – मजाक -बगैरह – मजाक-आदि |
13) नाच-वाच – नाच -बगैरह – नाच-आदि |
14) सेना-वेना – सेना -बगैरह – सेना-आदि |
15) रात-वात – रात -बगैरह – रात-आदि |
16) मिठाई-सिठाई – मिठाई -बगैरह – मिठाई-आदि |
17) जात-पात – जात -बगैरह – जात-आदि |
18) लड़की-वड़की – लड़की -बगैरह – लड़की-आदि |
19) कंबल-वंबल – कंबल -बगैरह – कंबल-आदि |
20) हंसी-वंसी – हंसी -बगैरह – हंसी -आदि |
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Q.5. नीचे एक बाल नाटिका के कुछ संवाद दिए गए हैं। खिलाड़ियों के दो दलों के बीच संवाद हो रहा है। दल एक के कथन पूरे-पूरे दिए गए हैं, किंतु दल दो के कथन नहीं दिए गए हैं। आप अपनी समझ के अनुसार दल दो के कथनों को लिखिए।
दल एक – अरे, तुम लोग कहाँ जा रहे हो?
दल दो – हम लोग तिकोने मैदान जा रहे हैं |
दल एक – क्या? तिकोने मैदान में? किसलिए?
दल दो – हाँ तिकोने मैदान में खेलने जा रहे हैं |
दल एक – नहीं, तुम वहाँ नहीं खेल सकते। वह हमारा मैदान है, क्योंकि हमने उसे पहले ढूँढ़ा है।
दल दो – हम वही खेलेंगे |
दल एक – नहीं, तुम कोई और जगह ढूँढ़ो।
दल दो – नहीं हम दूसरी जगह नहीं ढूँढ़ेगें |
दल एक – हम नहीं मानते। वह हमारा मैदान है।
दल दो – हम वही खेलेंगे |
दल एक – तुम झगड़ा करना चाहते हो?
दल दो – हाँ हम झगड़ा करना चाहते हैं |
दल एक – आओ, वहाँ खड़े मत रहो।
दल दो – हाँ अभी आ रहे हैं |
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योग्यता विस्तार –
Q.1. महिलाएँ आजकल कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। क्षेत्र का नाम लिखकर उस क्षेत्र की सफल/प्रसिद्ध महिलाओं के नाम लिखिए-
| क्षेत्र | कार्य/विधा | उल्लेखनीय महिला |
| उदाहरण- संगीत शिक्षानेता | वायलिन वादनप्राचार्यामुख्य मंत्री | एन. राजमश्री मती किरण पाण्डेयवसुन्धराराजे सिन्धिया |
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Q.2. दहेज-प्रथा पर लगभग 300 शब्दों में एक निबंध लिखिए।
उत्तर :- प्रस्तावना :- भारत में शादियों को हमेशा से एक खर्चीली एवं कष्टकर सामाजिक रीति मानी जाती रही है | इसमें आकर्षक सजावट, शानदार भोज, प्रकाश व्यवस्था, बहुमूल्य उपहार आदि कीमती वस्तु शामिल रहते हैं | दूल्हे का परिवार बहुत खुश रहता है | वे दुल्हन और लाखों रुपए के उपहार के साथ घर जाते हैं | वह अपने पीछे दुल्हन के चिंतित परिवार को छोड़ जाते हैं | यही आधुनिक भारतीय शादी है | शादियों में दिए जाने वाले सभी उपहार दहेज की श्रेणी में आते हैं और इस प्रकार यह दहेज प्रथा कई पीढ़ियों से चली आ रही है |
दहेज प्रथा का इतिहास :- पहले के समय में माता-पिता अपनी पुत्रियों की शादी में जरूरी घरेलू चीजें दिया करते थे | कई परिवार कुछ सोना और चांदी भी दे देते थे | यह उसके भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य किया जाता था | यह सब उनके अपने स्तर के अनुसार किया जाता था | परंतु धीरे-धीरे यह एक रिवाज हो गया |अब दूल्हे का परिवार जो मांगता है उसे दुल्हन के परिवार को देना पड़ता है, चाहे उनको उसके लिए किसी से कर्जा लेना पड़ जाए या अपना घर गिरवी रखना पड़ जाए | उन्हें किसी भी हाल में उसकी व्यवस्था करनी पड़ती है | उन्हें इसके लिए उधार धन या कर्ज का सहारा लेने पर मजबूर कर देते हैं|
दहेज प्रथा कानून :- दहेज प्रणाली भारतीय समाज में सबसे क्रूर सामाजिक प्रणालियों में से एक है | इसने कई तरह के मुद्दों जैसे कन्या भ्रूण हत्या, लड़कियों को लावारिस छोड़ना, लड़की के परिवार में वित्तीय समस्याएं, पैसे कमाने के लिए अनुचित साधनों का उपयोग करना, बहू का भावनात्मक और शारीरिक शोषण आदि सामाजिक पाप को जन्म दिया है | इस समस्या को रोकने के लिए सरकार ने दहेज को दंडनीय अधिनियम बनाते हुए कानून बनाए हैं |
दहेज प्रथा का समाधान :- सरकार द्वारा बनाए गए सख्त कानूनों के बावजूद दहेज प्रणाली कि अभी भी समाज में एक मजबूत पकड़ है और आए दिन कई महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं | इस समस्या को समाप्त करने के लिए देश के हर व्यक्ति को अपनी सोच बदलनी होगी | हर व्यक्ति को इसके खिलाफ लड़ने के लिए महिला को जागरुक करना होगा |
दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए तथा इसके खिलाफ लोगों के अंदर जागरूकता लाने के लिए यहां कुछ समाधान दिए गए हैं :-
उचित शिक्षा :- दहेज प्रथा, जाति, भेदभाव और बाल श्रम जैसे सामाजिक प्रथाओं के लिए शिक्षा का अभाव मुख्य योगदान कर्ताओं में से एक है | देश में शिक्षा की कमी होने के कारण आज देश में दहेज प्रथा जैसे क्रूरता सामाजिक प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है | लोगों को ऐसे विश्वास प्रणालियों से छुटकारा पाने के लिए तार्किक और उचित सोच को बढ़ावा देने के लिए शिक्षित किया जाना चाहिए जिससे ऐसी प्रथा समाप्त हो सके |
महिला सशक्तिकरण :-अपनी बेटियों के लिए एक अच्छी तरह से स्थापित दूल्हे की तलाश में और बेटी की शादी में अपनी सारी बचत का निवेश करने के बजाय लोगों को अपनी बेटी की शिक्षा पर पैसा खर्च करना चाहिए और उसे स्वयं खुद पर निर्भर करना चाहिए | अगर कोई महिला शादी से पहले काम करती है और उसे आगे भी काम करने की इच्छा है तो उसे अपने विवाह के बाद भी काम करना जारी रखना चाहिए और ससुराल वालों के व्यंग्यात्मक टिप्पणियों के प्रति झुकने की बजाए अपने कार्य पर अपनी उर्जा केंद्रित करना चाहिए | महिलाओं को अपने अधिकारों और वे किस तरह खुद को दुरुपयोग से बचाने के लिए इनका उपयोग कर सकती हैं,इस ओर अपना ध्यान आकर्षित करना चाहिए।
लैंगिक समानता :- हमारे समाज में मूल रूप से मौजूद लिंग असमानता दहेज प्रणाली के मुख्य कारणों में से एक है | बच्चों को बाल उम्र से ही लैंगिक समानता के बारे में सिखाना चाहिए, कि दोनों पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकार हैं और कोई भी एक दूसरे से बेहतर या कम नहीं है| युवाओं को दहेज प्रथा को समाप्त करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, उन्हें अपने माता-पिता से यह कहना चाहिए कि वह दहेज स्वीकार नहीं करें |
उपसंहार :- अभिभावकों को समझना चाहिए कि दहेज के लिए धन बचाने के बजाय उन्हें अपनी लड़कियों को शिक्षित करने के लिए खर्च करना चाहिए | माता पिता को उन्हें वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाना चाहिए | दहेज मांगना या दहेज देना दोनों ही भारत में गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है | इसलिए ऐसे किसी मामले के विरुद्ध शिकायत की जानी चाहिए| युवाओं को दहेज प्रथा को समाप्त करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए | क्योंकि शादी आपसी संबंध होती है | दोनों परिवारों को मिलकर साझा खर्च करना चाहिए | तभी सुखद विवाह और स्वस्थ्य समाज हो पाएंगे तथा देश से दहेज प्रथा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे |
Q.3. समाचार पत्र-पत्रिकाओं से दहेज प्रताड़ना से संबद्ध खबरों की कतरन एकत्र कर
विद्यालय की भित्ति-पत्रिका में लगाइए।
उत्तर :- विद्यार्थी गण स्वयं करें।