CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 4 छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य Chapter 4.2 लोककथाएँ are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 4 छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य Chapter 4.2 लोककथाएँ
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अभ्यास-
पाठ से –
निर्देश: हिंदी में दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिंदी में तथा छत्तीसगढ़ी में दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी मातृभाषा में लिखिए।
Q.1. किसान के बेटे को साथ ले चलने के लिए केकड़े ने क्या तर्क दिया?
उत्तर :- किसान के बेटे के साथ ले चलने के लिए केकड़े ने तर्क दिया कि :- भैया साथ में हमराही होने से रास्ता आसानी से कट जाता है | यदि आप मुझे अपने साथ ले चलते हैं तो आप निश्चिंत होकर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे |
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Q.2. केकड़ा और ठेंगा ने किसान के बेटे की रक्षा किस तरह की?
उत्तर :- केकड़ा, कौआ एवं साँप की बातचीत को तुमा के खोल में बैठा सुन रहा था | समय देखकर वह तुमड़ी के अंदर से बाहर आकर साँप के गले को अपने आरी जैसे पंजे में पकड़कर कहता है कि तु मेरे दोस्त को जिंदा कर नहीं तो तेरा प्राण नहीं बच पाएगा | उचित अवसर देखकर डंडा (ठेंगा) उठता है कौआ और साँप को मारता है, साँप किसान के बेटे का जहर खींच लेता है जिससे वह जिंदा हो जाता है | परंतु साँप और कौआ के आतंक को खत्म करने के लिए अंत में उनका वध करना ही पड़ता है, उन्हें मारने के बाद वे उनके सिर काट कर अपने साथ ले जाते हैं |
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Q.3. साँप और कौए के आतंक से पूरा राज्य किस तरह प्रभावित था?
उत्तर :- साँप और कौआ जंगल में बसेरा बनाकर रहते थे | जो कोई भी जंगल में जाता उसे मार दिया जाता था। वहाँ से कोई भी वापस नहीं आ पाता था। इस प्रकार पूरा राज्य उनके आतंक से प्रभावित था।
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Q.4. किसान के बेटे ने परिश्रम के महत्त्व को किस तरह परिभाषित किया?
उत्तर :- किसान के बेटे ने राज्य मिल जाने व राजा का दामाद बन जाने के बावजूद प्रातः काल होते ही खेत में जाकर मजदूरों जैसा मेहनत करता था। उसने अपने कार्य से लोगों में छोटे बड़े का भेदभाव मिटाकर सभी को समानता के भावों से अवगत कराकर अपने परिश्रम को परिभाषित किया |
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Q.5. हिरण और कोलिहा ने कुएँ से पानी पीने के लिए कौन सी तरकीब सोची?
उत्तर :- हिरण और कोलिहा ने कुएँ से पानी पीने के लिए एक दूसरे की पूँछ को पकड़कर लटककर कुएँ से पानी पीने की तरकीब सोची ।
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Q.6. हिरण को कुएँ में धकेलने के पीछे कोलिहा का क्या उद्देश्य रहा होगा?
उत्तर :- हिरण को कुएँ में धकेलने के पीछे कोलिहा का स्वार्थ रहा होगा कि उसे कुएँ में धकेलने से वह मर जाएगा और कुएँ से पानी पीने वाले लोग उसे बाहर निकालेंगे फिर उसके माँस को मै खा जाऊँगा। अर्थात् कोलिहा हिरण के माँस खाना चाहता था । यह तभी संभव हो सकता था जब हिरण मर जाता। इसलिए उसने कुआँ में हिरण को धकेल दिया।
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Q.7. कोलिहा के द्वारा माँस माँगने पर किसानों ने क्या कहा?
उत्तर :- कोलिहा के द्वारा माँस माँगने पर किसानों ने कहा कि हिरण को कुएँ से हम लोगों ने बाहर निकाला है। अतः हिरण पर हमारा अधिकार है न कि तुम्हारा। जो मेहनत करता है फल उसे ही प्राप्त होता है। इसलिए यह हम खायेंगे। इस पर सिर्फ हमारा ही हक है।
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Q.8. धोरइ अपन बात ल काबर नइ रखिस?
उत्तर :- धोरइ चरवाहा अपनी बात इसलिए नहीं बता पाया क्योंकि वह झूठ बोल रहा था। अर्थात् धोरई कहिथे साँप अउ कउँवा ल मै तो मारे हँवाग धोरई हर सच नइ कहत है। धोरई के मुँह ले तो एको भाखा नई फूटिस, इहाँ तो दूध के दूध अउ पानी के पानी होगे रहिसा। धोरई हर अपराधी कस मूड़ी गड़ियायें खड़े रहिस।
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Q.9. कोलिहा हर बटुरा के खेत म आगी काबर लगा दिस?
उत्तर :- कोलिहा मथुरा के खेत में आग इसलिए लगा दिया क्योंकि किसान उसे हिरण के माँस में हिस्सा नहीं दे रहा था, उसने सोचा कि आग लगाऊँगा तो सभी किसान अपनी फसल को बचाने खेत की ओर जाएंगे फिर मैं अकेले उसके माँस को खाऊँगा | अर्थात कोलिहा हर हिरण के माँस ल खाय बर बटुरा के खेत में आगी लगा दिस । किसान ह खेत के आग बुझाय बर जब गइस तभै कोलिहा ह हिरण के माँस पेट भर खाइस ।
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पाठ से आगे –
Q.1. जनजाति समूह के व्यक्तियों में कौन-कौन सी विशेषताएँ होती है? बड़े-बुजुर्गों से चर्चा करके लिखिए।
उत्तर :- जनजातियाँ वह मानव समुदाय है जो एक अलग तथा निश्चित भू-भाग में निवास करती है और जिनकी एक अलग संस्कृति, अलग रीति रिवाज, अलग भाषा होती है | तथा यह केवल अपने ही समुदाय में विवाह करते हैं | सरल अर्थों में कहें तो जनजातियों का अपना एक वंशज पूर्व तथा सामान्य से देवी देवता होते हैं | यह अमूमन प्रकृति पूजक होते हैं| यह लोग मेहनती होते हैं | दिन में मजदूरी करके जीवन यापन सुख पूर्वक करते हैं | वे कोई भी त्यौहार बहुत ही धूमधाम से नाच गाकर मनाते हैं |
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2. छत्तीसगढ़ में लोककथा कहने के साथ-साथ लोकगीत भी गाए जाते हैं। किन्हीं पाँच लोकगीतों के नाम लिखकर एक-एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर :- छत्तीसगढ़ में लोक गायन की अविच्छिन्न परंपरा विद्यमान है | लोक गायक परंपरागत गाथाओं में और संस्कारिक गीतों तथा नृत्य गीतों एवं पूर्व से जुड़े गीतों का गायन करते हैं | अंचल के अनुसार छत्तीसगढ़ के लोकगीत भी अलग-अलग हैं |
1. धर्म और पूजा गीत :- भोजली, जंवारा, माता सेवा, नागमत, गौरा-गौरी, पंथी ।
भोजली के उदाहरण :- देबी गंगा देबी गंगा |
2. ऋतु आधारित लोकगीत:- सवनाही, फाग ।
फाग के उदाहरण :- मुख मुरली बजाय छोटे से श्याम कन्हैया |
3. राउत नाचा:- यह हर वर्ष मड़ई मेला दीपावली के बाद प्रारंभ होता है |
उदाहरण :- ए पार नदी ओपार नदी …………
बिचम टेड़गी रूख रे ……………..
सोन चिरैया अंडा पारे हे रेक……….
बेटा दुःख हे।
4. सुआ गीत :- सुआ गीत ए नृत्य के साथ गाए जाने वाला गीत होता है |
उदाहरण :- तही हरी नाना मोर
नाना सुवानारे सुआहो |
5. संस्कार गीत :- बिहाव (विवाह), सोहर |
उदाहरण :- तोला माटी कोड़े ला………..
नई एवं मिल धीरे धीरे |
6. जसगीत :- उदाहरण :- माताफूल गजरा गूंथव हो मालिन के देहरी हो फूल गजरा,
कोहन फूल के गजरा, कोहन फूल के हार,
काहेन फूल के तोर माथ, मटुकिया सोलहों सिंगार |
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Q.3. ‘‘जो कोई साँप और कौए को मारेगा, उससे मैं राजकुमारी का विवाह कराऊँगा।’’ क्या राजा की यह घोषणा उचित थी? अपने विचार दीजिए।
उत्तर :- ‘‘जो कोई साँप और कौए को मारेगा, उससे मैं राजकुमारी का विवाह कराऊँगा।’’ यह घोषणा राजा की कदापि उचित नहीं थी | क्योंकि कन्या विवाह किसी अच्छे घर वर को देख कर किया जाता है ताकि वह खुशहाल जीवन जी सके | साँप और कौआ तो कोई भी मार सकता है। यदि किसी ऐसे व्यक्ति ने उन्हें मारा होता जो कि राजकुमारी के योग्य न होता तो फिर उसका जीवन बलिवेदी पर चढ़ जाता | यदि समय पर किसान का बेटा न पहुँचता तो राजकुमारी का विवाह घोरई के साथ करना पड़ता, जो कि राजकुमारी के साथ अन्याय होता। अतः हमें कोई भी काम बिना विचारे नहीं करना चाहिए नहीं तो उसका दुष्परिणाम हमारे पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है।
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Q.4. पानी पीये बर हिरन हर कोलिहा के सँग दिस, फेर कोलिहा के पारी आए ले वोहर हिरन ल कुँआ म ढकेल दिस। कोलिहा के अइसन आचरन के बारे म अपन बिचार लिखौ।
उत्तर :- कोलिहा वोखर माँस खाए बर वो हर हिरन ल कुँआ में ढकेल दिस | अर्थात् कोलिहा हिरण का माँस खाने के लिए उसे कुएँ में ढकेल देता है |
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Q.5. खेत की खड़ी फसल में आग लग जाने पर उसे बुझाने के कौन-कौन से तरीके हो सकते हैं? विस्तारपूर्वक लिखिए।
उत्तर :- खेत की खड़ी फसल में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए निम्न तरीके हो सकते हैं :-
1. कुआं से पानी बाल्टी आदि के माध्यम से निकालकर |
2. नलकूप आदि के माध्यम से |
3. कुएँ में रहट ढेकली के माध्यम से |
4. मोटर पम्प के माध्यम से |
5. दमकल की गाड़ियों के माध्यम से |
6. बालू या मिट्टी फेंक कर |
7. नदीं तालाब आदि से पानी लाकर |
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भाषा के बारे में –
Q.1. निम्नलिखित छत्तीसगढ़ी शब्दों को हिंदी में लिखिए?
ओसरी-पारी, घटाटोप, नेकी-बदी, अधमरहा, घेंच, अचरज, ठट्ठा-दिल्लगी, डहर, हुरहा, मुड़ी, नजिक आदि।
उत्तर :-
| शब्द | अर्थ |
| ओसरी पारी घटा टोप नेकी बंदी अधमरा घेंच अचरज ठ दिल्लगी डहर हुरदा मुड़ी नजिक | क्रमशः अँधकार अँधेरा कलंक खराबी घायल किसी एक बात को पकड़ कर अणना आश्चर्य हँसी मजाक रास्ता पथ तेजी से सिर नजदीक समीप |
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Q.2. अपने क्षेत्र में प्रचलित किन्हीं पाँच लोकोक्तियों का संग्रह करके उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर :- 1. लात के देवता बात मा नइ मानय :-
अर्थ :- धूर्त व्यक्ति जब तक दंडा नहीं मिलता तब तक नहीं सुधरता है |
वाक्य प्रयोग :- लाला के टूरा बड़ उदबास लइका ताए नंगत के समझाथे ओखर ददातभों ले नइ सुधरत हो, लात के देवताबात का नइ मानय ठठाए मा सुधरही |
2. आदर के भात खाय बिन आदर के लात खाए:-
अर्थ :-आमंत्रित व्यक्ति को सम्माप मिलता है और बिना आमंत्रित मेहमान को अपमान सहना पड़ता है |
वाक्य प्रयोग :- दूसर मनके लड़ई झगरा मा कूदबे तेन आदर के भात खाय बिन आदर के लातखाय बरोबर तो आय |
3. आवन लगे बारात तब ओटन लगे कपास:-
अर्थ :- कार्य के शुरू होने तक व्यवस्था का न हो पाना |
वाक्य प्रयोग :- चना ओन्हारी के दिन आगे हे अउ बीत भात निमारे छिन के तइयारी नइ होय हे इहां तो आवन लगे बरात तब ओटन लगे कपास कस हाल होगे हे अइसने मा ओन्हारी कब होही |
4. उजड़े मड़वा मा ड़ीड़वा नाच:-
अर्थ :- काम खत्म होने पर चुस्ती और तंदरूस्ती महसूस होना
वाक्य प्रयोग :- धान लुबई मिजई के उजड़े मड़वा मा ड़ीड़वा नाचे बरोबर लगाथे |
5. मोरे बिलई मोरे से मियाउँ:-
अर्थ :- जिसकी खाते है उसी से बहस करना |
वाक्य प्रयोग :- कोदु घर राहय ओखरे घर खाय कमाएं अउ कांदी कहितिस ताहन कोदुच बर खिसिया जाए तहाँ रामू कटिघे, मोरे बिलई मोरे से मियाउं |
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Q.3. अव्यय शब्द- संस्कृत भाषा में कुछ अव्यय शब्द होते हैं, जिन्हें प्रयोग में लाते समय उनके मूल स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता। ठीक उसी तरह छत्तीसगढ़ी भाषा में भी अव्यय शब्द होते हैं, जिनके रूप नहीं बदलते, जैसे- डहर, तब्भे, सेती, बर, कनि आदि। इसी तरह छत्तीसगढ़ी के अन्य अव्यय युक्त शब्दों को ढूँढकर उनके अर्थ भी लिखिए।
उत्तर :-
| शब्द | अर्थ |
| डहर सेती बर कनि अड़बड़ हर | रास्ता के कारण के लिए मेरे पास अत्यधिक से |
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Q.4. पाठ में आए क्रिया शब्दों को लिखकर उनका हिंदी में अनुवाद कीजिए।
जैसे: कहिस जैसे: – कहा; शब्दखइस – खाया; होइस – हुआ।
उत्तर :-
| क्रिया | अर्थ हिंदी में |
| जावत रहिन लागिस दिस बताइस | गये रहेलगा दियाबताया |
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योग्यता विस्तार –
Q.1. आप अपने क्षेत्र में प्रचलित दो लोककथाओं को अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर :-1) अजगर हिंदी लोक कथा :- बहुत वर्ष पहले एक राजा की दो रानी थी बड़ी रानी शोभा बहुत अच्छे स्वभाव की दयावान स्त्री थी छोटी रानी रूपा बड़ी कठोर और दुष्ट थी बड़ी रानी शोभा के एक पुत्री थी नाम था देवी रानी रूपा के भी एक बेटी थी नाम था तारा |
रानी रूपा बड़ी चालाक और महत्वाकांक्षी स्त्री थी वह चाहती थी कि राज्य की सत्ता उसके हाथ में रहे राजा भी उस से दबा हुआ था रानी रूपा बड़ी रानी और उसकी बेटी से नफरत करती थी एक दिन उसने राजा से कह दिया कि रानी शोभा और देवी को राजमहल से बाहर निकाल दिया जाए राजा रानी रूपा की नाराजगी से डरता था उसे लगा कि उसे वही करना पड़ेगा जो रूपा चाहती है उसने बड़ी रानी और उसकी बेटी को राजमहल से बाहर एक छोटे से घर में रहने के लिए भेज दिया लेकिन रानी रूपा की घृणा इससे भी नहीं हटी |
उसने देवी को आज्ञा दी कि वह प्रतिदिन राजा की गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाया करें | रानी शोभा यह अच्छी तरह जानती थी कि यदि देवी गायों को चराने के लिए गई तो रानी रूपा उन्हें किसी और परेशानी में डाल देगी | इसलिए उसने अपनी लड़की से कहा कि वह रोज सुबह गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाया करें, और शाम के समय उन्हें वापस ले आया करें |
देवी को अपनी मां का कहना तो मानना ही था, इसलिए वह रोज सुबह गायों को जंगल में ले जाती | एक शाम जब जंगल से घर लौट रही थी तो उसे अपने पीछे एक एक धीमी सी आवाज सुनाई दी “देवी, देवी, क्या तुम मुझसे विवाह करोगी ?” देवी डर गई | जितनी जल्दी हो सके उसने गायों को घर की और हांका | दूसरे दिन भी जब वह घर लौट रही थी तो उसने वही आवाज पुनः सुनी, वही प्रश्न उससे फिर पूछा गया | रात को देवी ने अपनी मां को उस आवाज के बारे में कहा | मां सारी रात इस बात पर विचार करती रही | सुबह तक उसने निश्चय कर लिया कि क्या किया जाना चाहिए | “सुनो बेटी” वह अपनी लड़की से बोली- “मैं बता रही हूं कि यदि आज शाम के समय भी तुम्हें वही आवाज सुनाई दे तो तुम्हें क्या करना होगा |”
“बताइए मां”, देवी ने उत्तर दिया | “तुम उस आवाज को उत्तर देना” रानी शोभा ने कहा, “कल सुबह तुम मेरे घर आ जाओ, फिर मैं तुम से विवाह कर लूंगी|” “लेकिन मां” देवी बोली- हम उसे जानते तक नहीं | “मेरी प्यारी देवी” मां ने दु:खी होकर कहा कि जिस स्थिति में हम जीवित हैं उससे ज्यादा बुरा और क्या हो सकता है | हमें इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेना चाहिए | ईश्वर हमारी सहायता करेगा | उस संध्या को जब देवी गायों को लेकर लौट रही थी, उसे वही आवाज सुनाई दी, आवाज कोमल और दु:ख भरी थी | “देवी, देवी क्या तुम मुझसे विवाह करोगी? आवाज बोली | उसने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन उसे कोई नहीं दिखाई दिया | वहां से भाग जाना चाहती थी, लेकिन लेकिन फिर उसे मां के शब्द याद आ गए वह जल्दी से बोली हां यदि तुम कल सुबह मेरे घर आ जाओ तो मैं तुम से विवाह कर लूंगी | तब वह बड़ी तेजी से गायों को हांकती हुई घर चली गई | अगले दिन रानी शोभा सुबह जरा जल्दी उठ गई उसने जाकर बाहर का दरवाजा खुला देखने के लिए कि कोई प्रतीक्षा तो नहीं कर रहा | वह कोई भी न था | अचानक उसे एक धक्का सा लगा और वह स्तब्ध रह गई | एक बड़ा अजगर कुंडली मारे सीढ़ियों पर बैठा था | रानी शोभा सहायता के लिए चिल्लाई | देवी और नौकर भागे भागे आए कि क्या बात है | तभी एक आश्चर्यजनक बात हुई, अजगर बोला – नमस्कार उसका स्वर बहुत विनम्र था | मुझे निमंत्रित किया गया था इसलिए मैं आया हूं | आपकी लड़की ने वायदा किया था कि यदि मैं सुबह घर आ सकूं तो वह मुझसे विवाह कर लेगी | मैं इसलिए आया हूं | रानी शोभा कि समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें | उसे तो यही आशा थी कि किसी दिन कोई सुंदर नौजवान उसकी लड़की से विवाह करने आएगा | उसमें यह कभी नहीं सोचा था कि वह अजगर होगा | एक नौकर भागकर रानी रूपा के पास गया, और उसे उसने सारी घटना बतला दी |
रानी रूपा अपने नौकरों के साथ रानी शोभा के घर गई “ यदि राजकुमारी देवी ने किसी के साथ विवाह का वायदा किया है तो उसे अपना वादा निभाना चाहिए | रानी होने के कारण यह देखना मेरा कर्तव्य है कि वह अपना वायदा पूरा करें |उसी दिन विवाह हो गया | रानी शोभा और देवी के लिए कोई प्रसन्नता का समय नहीं था लेकिन दुर्भाग्य से किसी भी प्रकार की विपत्ति का सामना करने को तैयार थी | विवाह के पश्चात अजगर अपनी पत्नी के साथ उसके कमरे में गया | सारी रात रानी शोभा ने प्रार्थना करते हुए बताया कि उसकी बच्ची ठीक ठाक रहें | दूसरे दिन बड़े सवेरे उसने देवी के कमरे का दरवाजा खटखटाया- एक सुन्दर नवयुवक ने दरवाजा खोला | देवी उसके पीछे खड़ी थी | मैं आप को कह नहीं सकता कि मेरी जान बचाने के लिए मैं आपको और आपकी देवी का कितना आभारी हूं | वह नवयुवक बोला मैं एक शाप के कारण अजगर बन गया था | एक वनदेवता मुझसे क्रुद्ध थे और उन्होंने मुझे अजगर बना दिया | बाद में उन्हें अपनी करनी पर दु:ख हुआ, तब उन्होंने कहा कि यदि कोई राजकुमारी मुझसे विवाह कर लेगी तो मैं फिर से मनुष्य बन जाऊंगा और अब देवी ने मुझसे विवाह कर लिया है मेरा शाप उतर गया है | अब मैं फिर कभी अजगर नहीं बनूंगा |
रानी शोभा बहुत प्रसन्न हुई वह अपनी लड़की और दामाद को राजा से मिलाने के लिए ले गई | यह बड़ी विचित्र घटना थी | चारों ओर से लोग इस विचित्र नवयुवक को देखने राज महल में आने लगे | सभी उत्सुक थे, शिवाय रानी रूपा के | रानी रूपा बहुत गुस्से में थी उसने झल्लाते और खीझते हुए अपने आप को कमरे में बंद कर लिया | देवी का भाग्य उससे देखा नहीं जा रहा था | वह चाहती थी कि उसकी बेटी तारा भी ऐसी भाग्यशाली बने, आखिरकार उसे एक युक्ति सूझी | उसने अपनी लड़की को बुलाया | देवी का विवाह तो अब हो गया है| इसलिए गायों को जंगल में चराने के लिए तुम ले जाया करो | “नहीं” तारा चीख कर बोली- इतने नौकर है तो फिर मैं क्यों गायें चराने जाऊं | “यह मेरी आज्ञा है” रानी क्रुद्ध होकर बोली- एक बात और यदि जंगल में तुमसे कोई विवाह का प्रस्ताव करें तत्काल कह देना तुम विवाह के लिए राजी हो यदि वह अगले दिन सुबह हमारे घर आ जाए | तारा मां की इस योजना से भयभीत हो गई | वह गायों को जंगल में नहीं ले जाना चाहती थी | वह खूब रोई | लेकिन रानी फिर भी नहीं पिघली तारों को उसकी आज्ञा माननी पड़ी | तारा रोज सुबह गायों को जंगल में चराने के लिए ले जाती और फिर शाम के समय वापस ले आती | लेकिन उसने एक बार भी जंगल में किसी तरह की आवाज नहीं सुनी जो यह कह रही हो क्या तुम मुझसे विवाह करोगी | फिर भी रानी निराश नहीं हुई | जंगल में कोई अजगर तो था नहीं जो तारा से विवाह का प्रस्ताव करता, इसलिए उसने खुद अजगर ढूंढने का निश्चय किया| उसने अपने नौकरों को एक अजगर लाने की आज्ञा दी | बहुत खोज करने पर काफी दिनों पश्चात उन्हें एक बहुत बड़ा अजगर मिला, उसे पकड़कर वे राजमहल ले आए | आखिरकार रानी का अब अभिप्राय पूरा हो गया, और उसने तारा का विवाह इस अजगर से कर दिया | अब रानी को संतोष हुआ | विवाह की रात तारा तथा अजगर को एक कमरे में बंद कर दिया गया |
रानी अधीरता से सुबह की प्रतीक्षा कर रही थी | रानी रूपा ने सवेरे सवेरे ही लड़की के कमरे का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई उत्तर न मिला | उसने जरा और जोर से दरवाजा खटखटाया लेकिन दरवाजा तब भी न खुला | रानी से और प्रतीक्षा न की गई और उसने धक्का देकर दरवाजा खोल दिया | मोटा अजगर जमीन पर पड़ा हुआ था लेकिन तारा का कहीं पता नहीं था | रानी चीख पड़ी, महल में सभी ने उसका चीखना सुना | राजा और नौकर भागे आए की क्या बात है राजकुमारी कहां है ?” सब चिल्लाये |
“वह तो अजगर के पेट में होगी “, रसोईया बोला – देखो वह कितना मोटा हो गया है ? रानी अब बड़ी जोर जोर से रोने लगी राजा भी रोने लगा |
रसोईया अपना सबसे बड़ा चाकू ले आया | वह बोला- यदि अब वह अब तक जीवित हुई तो मैं राजकुमारी को बचाने की कोशिश करूंगा | उसने अजगर का पेट चीर डाला | तारा अच्छी भली जीवित थी | रसोइए ने उसे बाहर खींचा | वह चीख मारकर अपनी मां की तरफ भागी |
अजगर की मृत्यु हो गई ,और साथ में रानी रूपा की इस इच्छा की भी कि तारा का विवाह देवी की तरह ही किसी योग्य और संपन्न नवयुवक से हो |
2) लोहा खा गया घुन :– एक बार की बात है दो व्यक्ति थे जिनका नाम था मामा और फूफा मामा और फूफा दोनों व्यापार करते थे और दोनों व्यापार में सहभागी थे | मामा ने फूफा से कहा, फूफा क्यों ना हम कोई ऐसी वस्तु खरीद लें जो जल्दी खराब ना हो और उसकी कीमत ; बढ़ती रहे फिर हम उसे कुछ वर्षों बाद भेजें जिससे उसके मूलधन से ज्यादा दाम मिले |
फूफा ने कहा ठीक है मामा तुम्हारी बात तो सही है पर हम खरीदें क्या ?
उन्होंने आपस में राय मशवरा किया और लोहा खरीदने का निर्णय लिया | दोनों ने बराबर रुपए मिलाकर लोहा खरीदा फूफा ने मामा से कहा कि लोहा वह कहीं सुरक्षित स्थान पर रख दें | मामा ने लोहा अपने पास एक पुरानी कोठरी में रख लिया |
कुछ दिन तो लोहा जस का तस रखा रहा पर धीरे-धीरे मामा के मन में लालच आ गया और मामा फूफा को बिना बताए लोहा बेचने लगा |
काफी दिनों बाद फूफा मामा के पास गया और बोला मामा आज लोहे का भाव काफी बढ़ गया है जल्दी से वह लोहा निकालो हम इसे बेचकर आते हैं | इस पर मामा बोला फूफा लोहा तो अब कबाड़ घर में नहीं है क्योंकि लोहे को तो घुन खा गए हैं |”
फूफा समझ गया कि मामा ने उसके साथ धोखा किया है और उसे बिना बताए सारा का सारा लोहा बेच दिया है फूफा को क्रोध तो बहुत आया पर वह बिना कुछ कहे सुने वहां से चला गया |
इस घटना के कुछ दिनों बाद फूफा मामा के पास आया और बोला मामा मैं एक बारात में जा रहा हूं बड़ा अच्छा इंतजाम है अकेला हूं चाहो तो अपने लड़के को साथ भेज दो उसकी भी मौत हो जाएगी और कल सुबह तक हम वापस भी आ जाएंगे |
मामा बोला यह भी भला कोई कहने की बात है, मामा तुम निश्चिंत रहो इस तरह 2 दिन बीत गए मामा का लड़का अभी तक घर वापस नहीं आया | मामा को बहुत चिंता हो गई कि अभी तक उसका लड़का घर वापस क्यों नहीं आया है ?
वह अपने लड़के के बारे में जानने के लिए फूफा के पास गया और बोला फूफा मेरा लड़का कहां है ? वह अभी तक घर वापस क्यों नहीं आया है ?
फूफा ने कहा क्या बताऊं मामा, रास्ते में एक चील तुम्हारे लड़के को उठाकर ले गया | मामा बोला यह कैसे हो सकता है भला कोई चीज 12 साल के लड़के को उठाकर ले जा सकती है ? सीधी तरह मेरा लड़का मुझे वापस करो नहीं तो मैं राजा भीम के पास जाऊंगा, फूफा बोला ठीक है मामा चलो, राजा जी के पास चले अब वही न्याय करेंगे |
मामला वहां के राजा भीम के सामने पेश हुआ | राजा भीम ने सारी बात सुनी और आश्चर्यचकित होते हुए फूफा से कहा, देखो फूफा तुम झूठ बोल रहे हो भला कोई चील 12 वर्ष के लड़के को उठाकर अपने पंजों से आसमान में ले जा सकती है | इस पर फूफा ने उत्तर दिया – कथा कहूं कथावली, सुनो राजा भीम | लोहा को घुनन खाए, तो लड़का ले गया चील || इस पर राजा भीम सब समझ गए और उन्होंने मामा को आज्ञा दी कि वह फूफा का लोहा वापस कर दे और फूफा को कहा कि वह लड़के को मामा के पास वापस पहुंचा दे |
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Q.2. हिंदी भाषा में लिखी गई किन्हीं दो लोककथाओं का अनुवाद अपनी मातृभाषा में कीजिए।
उत्तर :- 1) कुकरी अउ चिंया :-
एक ठप कुकरी के चार ठन चिंया रहंय। कुकरी ह रोज अपन चिंया मन ल संगे संग फिराय अउ चारा चराय। एक दिप कुकरी ह चिंया मन ल कहिथे – चलो चले बर आज भांठा कोती जाबोन।
चिंया मन कहिथे- भांठा म का मिलही भांटा बारी म जाबोन, उहां कीरा-मकोरा गजब मिलही।
लइका मन के जिदियाही म कुकरी के एको नइ चलिस। चरे बर माई-पिला भांटा बारी गिन। गोड़ म खोभर-खोभर के सब झन चरत रहंय। एक ठन भांटा पेड़ म बड़े जबर गोलिंदा भांटा फरे रहय, कुकरी ह वोकरे खाल्हे म बिधुन हो के चरत रहय। भांटा पेड़ ह जोरंग गे अउ कुकरी ह गोलेंदा भांटा म चपका के मर गे।
चिंया मन गजब चींव-चींव करिन। किहिन-हमर पेलियाही म हमर दाई के परान चल दिस।
2)
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Q.3. लोककथा किसे कहते हैं? यह लोकगीतों से किस प्रकार भिन्न होती है? शिक्षक से चर्चा कीजिए।
उत्तर :- लोककथा :- ऐसी कहानी होती है जो लोगों की जबानी होती है | यद्यपि इनका साहित्यिक स्वरूप नहीं होता तथापि वे शिक्षाप्रद और मनोरंजन पूर्ण होते हैं | यह नाना-नानी, दादा-दादी के जबानी पर पीढ़ी पर चलती है | मनोरंजन का भरपूर साधन होती है |
लोकगीत :- लोकगीत ‘लोक’ की आंतरिकता का लय बद्ध और संगीत बद्ध अभिव्यक्ति है| लोकगीत ‘लोक’ की सांस्कृतिक यात्रा का ऐसा साक्षी है जो अपनी परंपरा में नवीनता का पक्षधर है | लोकगीतों में व्यवस्थाओं की स्मृतियाँ, अवशेषादि को लेकर लोकमानस पर जो प्रतिक्रियाएँ हुई उन्हीं से लोक साहित्य सुजीत हुआ जिसका बड़ा हिस्सा संगीतमय है| लोकगीतों में व्यक्ति विशेष के बदले पूरी जाति का व्यक्तिगत परिलक्षित होता है |
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Q.4. छत्तीसगढ़ क्षेत्र में अनेक लोकगाथाएँ गाई जाती हैं। कुछ लोकगाथाओं एवं उनके प्रसिद्ध गायकों के नाम लिखिए।
| क्र. सं. | लोकगाथा का नाम | लोकगाथा गायक/गायिका |
| 1 | देवरानी की गाथा | तीजन बाई |
| 2 | पंडवानी | तीजन बाई, झाड़ूराम |
| 3 | नागेसर कइना गाथा | देवदास बंजारे |
| 4 | बाली की गाथा | श्री मती सुरूज बाई खांडे |
| 5 | रजबल ठेठवार की गाथा | भानदास टंडन |
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Q.5. अपने पुस्तकालय से लोककथाओं की पुस्तकें लेकर उनमें दी गई लोककथाओं को पढ़िए।