CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 6 विज्ञान एवं तकनीकी Chapter 6.1 सी. वी. रमन are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 Hindi Solutions Unit 6 विज्ञान एवं तकनीकी Chapter 6.1 सी. वी. रमन
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अभ्यास-
पाठ से :-
Q.1. प्रयोगशाला का सबसे महँगा और कीमती उपकरण मनुष्य के दिमाग को क्यों कहा गया है?
उत्तर :- आज वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में अंधाधुंध पूंजी निवेश और परिष्कृत उपकरणों का बोलबाला है| परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रयोगशाला में सबसे महँगा और कीमती उपकरण आज भी मनुष्य का दिमाग है | इसका कारण यह है कि जो भी शोधकार्य होते हैं उसमें मनुष्य का दिमाग ही लगता है | वह अपने दिमाग के सफल उपयोग से कुछ ना कुछ खोज कर लेता है | इसलिए दुनिया में सभी अविष्कारों के पीछे दिमाग का ही सर्वश्रेष्ठ स्थान है | सभी मनुष्यों में विलक्षण दिमाग नहीं पाया जाता है | इस बात की सच्चाई का प्रमाण हमें सी.वी. रमन जी के जीवन से मिलता है | वह अकेले ही ऐसे वैज्ञानिक है, जिन्हें भारत में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए शोध कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया | जिन अल्पविकसित उपकरणों का उन्होंने शोध में उपयोग किया उनकी कीमत ₹200 से भी कम थी, परंतु उनके दिमाग का कोई मूल्य नही लगा सकता है| अर्थात वह बहुमूल्य है |
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Q.2. वह कौन सी घटना थी जिसके कारण रमन ने सारी जिंदगी भारत में रहकर ही शोधकार्य किया?
उत्तर :- भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि ग्रहण करने के बाद उनकी विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए उन्हें विदेश जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने की सलाह दी गई | किंतु मद्रास में सिविल सर्जन ने जब उनकी जांच की तो उन्होंने पाया कि रमन का शरीर इंग्लैंड के मौसम के अनुरूप नहीं है | इंग्लैंड का कड़क मौसम बर्दाश्त वे नहीं कर पाते | इसलिए रमन ने सारी जिंदगी भारत में रहकर ही शोध कार्य किया |
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Q.3. ‘रमन प्रभाव’ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- जब किसी एक रंग का प्रकाश किसी द्रव से गुजरता है तो प्रकाश के कण और द्रव के परमाणु एक दूसरे पर क्रिया करते हैं और प्रकाश को बिखेर देते हैं | बाहर निकलने वाली प्रकाश किरण का रंग आने वाली किरण से भिन्न होता है | बाहर निकलने वाली किरण आने वाली किरण की तुलना में ऊंचे एवं नीचे दोनों स्तरों की ऊर्जा की ओर मुड़ती है | इसे रमन प्रभाव कहते हैं | जिस पर आगे चलकर रमन जी को नोबेल पुरस्कार मिला |
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Q.4. एक वैज्ञानिक होते हुए भी रमन को वित्त विभाग की नौकरी क्यों करनी पड़ी? इस नौकरी में रहते हुए भी उनका मन कहाँ लगा रहा?
उत्तर :- रमन ने भौतिक विज्ञान में m.a. किया | इन दिनों विज्ञान पढ़ने वालों के लिए बहुत कम नौकरियां थी | अन्य विकल्प खुले न होने के कारण रमन को वित्त विभाग की सरकारी नौकरी करनी पड़ी | वित्त विभाग की नौकरी करते हुए रमन का मन भौतिकी में ही लगा रहा | उनकी भौतिकी विज्ञान में विशेष रूचि थी इसलिए उन्होंने वित्त विभाग की नौकरी करते हुए भी अपने घर में एक छोटी सी प्रयोगशाला बनाई थी ताकि सतत वे भौतिक विज्ञान के संपर्क में रहें |
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Q.5. रमन की व्याख्यात्मक शैली की विशेषता क्या थी?
उत्तर :- रमन के व्याख्यान में आसमान नीला क्यों होता है आज भी वैज्ञानिक भावना को संकेतिक करने और उनकी पद्धति की अनूठी मिसाल है रूखे तथ्यों या सूत्रों को रटकर सीखने के विषय के रूप में प्रस्तुत न करके वे विज्ञान को चरणबद्ध प्रश्नों की एक श्रृंखला के रूप में पेश करते थे | इस तरह से वे सुव्यवस्थित तार्किकता के माध्यम से प्रकृति की कार्यप्रणाली को समझते थे | यह उनकी व्याख्यात्मक शैली की विशेषता थी |
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Q.6. अपने पिता का रमन के स्वभाव व रुचि पर कैसा प्रभाव पड़ा?
उत्तर :- रमन के पिता भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता थे | रमन को बचपन से ही विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ने को मिली | उन्हें अपने पिता से संगीत का प्रेम भी मिला साथ ही उन पर पिता की विज्ञान विशेष की रूचि का प्रभाव पड़ा |
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Q.7. रमन की समुद्र यात्रा भौतिक विज्ञान के लिए लाभदायक सिद्ध हुई। ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर :- सन 1921 में एक सम्मेलन में भाग लेने समुद्री रास्ते से रमन विदेश जा रहे थे | वह समुद्र के गहरे नीले पानी को निहारते रहे | सागर का पानी नीला क्यों दिखता है ? क्या पानी आसमान के प्रतिबिंब के कारण ही नीला दिखता है ? या कोई और ही कारण है | रमन को एहसास हुआ कि सागर का नीला पन पानी और सूर्य के प्रकाश से अंतर्सबन्ध के कारण है| इसका वे जेबी वर्णक्रम मापी से अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश के प्रकीर्णन पर प्रयोग किया और शोध पत्र लिखा | इसलिए रमन की समुद्र यात्रा भौतिक विज्ञान के लिए लाभदायक सिद्ध हुई |
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Q.8. अपने पिता से मिले संगीत प्रेम के आधार पर रमन ने क्या शोध किया और कौन-सा सिद्धांत विकसित किया?
उत्तर :- अपने पिता से मिले संगीत प्रेम के आधार पर रमन ने वाद्य यंत्रों के ध्वनि विज्ञान पर भी काम किया | अध्यारोपण गतियों के आधार पर धनुष डोर से बजने वाले वाद्य यंत्रों के तिर्यक कंपन का सिद्धांत भी उन्होंने विकसित किया | भारतीय ताल वाद्य तबला और मृदंग की ध्वनि के सम स्वरीय पर शोध करने वाले वे प्रथम व्यक्ति थे | 1943 में उन्होंने एक कंपनी शुरू की जिसका नाम त्रावणकोर के मिकल एण्ड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड था|
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पाठ से आगे :-
Q.1. निम्नलिखित दोनों घटनाएँ रमन के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को प्रकट करती हैं?
घटना एक- ‘‘जब जहाज पर अन्य मुसाफिर ताश और बिंगो के खेलों में मस्त थे, तब
रमन प्रयोगों में मगन थे।’’
घटना दो- ‘‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस का साइन बोर्ड देखकर रमन चलती ट्राम से कूदकर वहाँ पहुँच गए।’’
उत्तर :- घटना एक :- विदेश जाने के लिए समुद्री यात्रा के दौरान समुद्र के नीले पानी को देखकर रमन को यह जिज्ञासा हुई कि समुद्र का पानी नीला क्यों है | अपनी उत्सुकता को मिटाने के लिए उन्होंने यात्रा के दौरान ही प्रयोग करना प्रारंभ कर दिया |
घटना दो :- भौतिकी में विशेष रूचि होने के कारण काम से लौटते समय ‘‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस का साइन बोर्ड देखकर रमन चलती ट्रेन से कूदकर वहाँ पहुँच गए | यदि उनकी भौतिकी में विशेष रूचि न होती तो वे वहां न जाते |
इस प्रकार दोनों घटनाओं में उनकी विशेष रूचि एवं जिज्ञासु होने के साथ कार्य में तन्मयता दिखाई देती है |
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Q.2. सी. वी. रमन छोटे कद के थे, और इससे उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन यह उनकी सफलता में बाधक नहीं बना। क्या आप मानते हैं कि किसी प्रकार की शारीरिक चुनौती आगे बढ़ने में बाधक नहीं होती है। तर्क सहित अपनी बात रखिए।
उत्तर :- सी. वी. रमन छोटे कद के थे | इससे उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, किंतु अपने पथ से विचलित नहीं हुए और अपना कार्य करते रहे | इसलिए किसी व्यक्ति की प्रगति पर उसकी शारीरिक चुनौती बाधक नहीं होती | अगर किसी ने यह ठान लिया कि मुझे किसी कार्य को पूरा करना है चाहे उस पर किसी भी प्रकार की कठिनाई या परिस्थिति हो उनसे लड़कर हमें अपने कार्य को करते रहना चाहिए |
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Q.3. वित्त विभाग में नौकरी करते हुए भी सी. वी. रमन विज्ञान के शोध पर कार्य करते रहे, जबकि आजकल ज्यादातर लोग अपनी रुचि के कार्यक्षेत्र में न जाकर केवल अच्छी नौकरी की ओर भागते हैं। इस संबंध में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर :- आधुनिक युग में भविष्य को ध्यान में रखते हुए तथा बढ़ती महंगाई के कारण व्यक्ति अच्छी नौकरी को अपनाते हैं | ताकि उन्हें अधिक पैसे भी मिले एवं आराम भी मिले | हो सकता है कि जिस कार्य में उनकी विशेष रूचि है | उसमें इनका भविष्य उज्जवल ना हो या उनका जीवन सुखमय रहकर भी निर्वाह न हो सके | नौकरी में उनका भविष्य सुखमय प्रतीत होता है | इसलिए लोग अपनी रुचि को भूलकर अच्छी नौकरी की तरफ भागते हैं |
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Q.4. कुछ ऐसे भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में बताइए जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है।
उत्तर :- कुछ भारतीय वैज्ञानिकों के नाम व उनके विज्ञान के क्षेत्र में योगदान :-
1) डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम :- 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्में डॉ अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम को भारत का मिसाइल मैन एवं जनता के राष्टपति के नाम से जाना जाता है।
कार्यक्षेत्र :- 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरन द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक संगठनात्मक तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई। इन्हें 1977 में भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया था।
2) सी. एम. आर. राव :- 30 जून 1934 को वर्तमान कर्नाटक के बैंगलोर में जन्में चिंतामणि नागेश रामचन्द्र राव ने संरचनात्मक, रसायनशास्त्र पर मुख्य रूप से काम किया है।
कार्यक्षेत्र :- घन अवस्था व रसायन शास्त्र पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में शोध/ इन्हें लीजन ऑफ ऑनर पद्म पुरस्कार एवं भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।
3) जी. माधवन नायर :- 31 अक्टूबर 1943 को केरल के तिरूवंतपुरम में जन्में नायर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान(ISRO) के प्रमुख रहें है।
कार्यक्षेत्र :- इनके 6 वर्ष के कार्यकाल में भारत ने 25 सफल मिशन पूरे किए हैं जिसमें चन्द्रयान – 1 भी शामिल है।
4) होमी जहांगीर भाभा (1909-1966) :- भाभा जी भारत के एक प्रमुख वैज्ञानिक और दूरदृष्टा थे।
कार्यक्षेत्र :– इन्होने भारत के परमाणु उर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। 1944 में नाभिकीय उर्जा पर अनुसंधान की शुरूआत की। अंतरिक्ष किरणों की बौछार की।
5) जगदीश चन्द्रबसु (1858-1937) :- डॉ. जगदीश चन्द्रबसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। इन्हें भौतिकी जीव विज्ञान वनस्पति विज्ञान और पुरातत्व का गहरा ज्ञान था।
कार्यक्षेत्र :- वे ऐसे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर काम किया।
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Q.5. रमन की विज्ञान के प्रचार-प्रसार में गहरी रुचि थी। आपकी किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा रुचि है, और उसके विकास में आप क्या योगदान दे सकते हैं?
उत्तर :- मेरी एक सफल शिक्षक बनने के क्षेत्र में सबसे ज्यादा रुचि है | आज एक शिक्षक के लिए जरूरी है कि वह बच्चों को जाने, समझे, कक्षा में उनके व्यवहार को समझें, उनके सीखने के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करें, उनके लिए उपयुक्त सामग्री व गतिविधियों का चुनाव करें, बच्चों की जिज्ञासा को भी बनाए रखें, उन्हें अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करें व उनके अनुभवों का सम्मान करें |
योगदान :- हम इस ईकाई में क्या सीख सकते हैं :-
1) कक्षा की पढ़ाई के अपने परिवेश को विकसित करना कैसे और क्यों महत्वपूर्ण है ?
2) आप और आपके विद्यार्थियों के बीच अंतरक्रियाएं किस प्रकार से पढ़ायें कि परिवेश और विद्यार्थी की उपलब्धि को प्रभावित कर सकती है
3) कार्य कुशल होकर पढ़ाई के अपने माहौल को किस प्रकार से बेहतर बनाएं ?
यह दृष्टिकोण क्यों महत्वपूर्ण हैं :-
कक्षा के भौतिक परिवेश तथा सामाजिक एवं भावनात्मक माहौल का आपने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है। स्वयं के लिए और अपने विद्यार्थियों के लिए सम्मान प्रेषित पढ़ाई का सकारात्मक माहौल तैयार करने का काम कई प्रकार से किया जा सकता है जिसे बहुत कम या शून्य खर्च पर। शिक्षण की गतिविधियां उस समय सर्वाधिक प्रेरणादायक होती हैं, जब वे विद्यार्थियों को या तो समस्या का व्यावहारिक रूप से अन्वेषण करने के लिए जोड़ते है।
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भाषा के बारे में :-
Q.1. जब हम किसी के बीते हुए कल के बारे में वर्णन करते हैं, तो सामान्यतः वाक्यों में
भूतकालिक क्रियाओं, सहायक क्रियाओं का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए- ‘रमन का कद छोटा था।’ ‘रमन की विज्ञान के प्रचार-प्रसार में गहरी रुचि थी।’ आदि।
अब आप अपने बचपन के किसी साथी या अध्यापक के बारे में लिखिए, जो अब आपके साथ नहीं हैं। देखिए कि उनके बारे में लिखते समय आप किस प्रकार की क्रियाओं, सहायक क्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं।
उत्तर :- मेरे एक गणित के अध्यापक थे | जिनका कद तो बड़ा ही छोटा था परंतु उनके ज्ञान के कद का कोई आंकलन नहीं लगा सकता था | उनकी समाज सेवा में विशेष रूचि थी | वह प्रतिदिन आवारा पशुओं के लिए स्वयं ही स्वादिष्ट भोजन बनाते और उन्हें खिलाते थे | वह बहुत ही मधुर बांसुरी बजाते और गाते भी थे | उन्हें बच्चों को पढ़ाने और देश दुनिया की जानकारी देना बहुत ही अच्छा लगता था | आज वे नहीं है परंतु उनकी स्मृतियां हमारे मन पटल पर आज भी जीवित है |
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Q.2. (क) ’महा’ शब्द का प्रयोग एक उपसर्ग के रूप में किया जाता हैं, जैसे महाराज, महाविद्यालय, महासागर आदि। ऐसे अन्य शब्दों की सूची बनाइए।
(ख) इस तरह से सोचिए-
’राज’ शब्द का अर्थ है- शासन। पर जब इसमें ’महा’ उपसर्ग जुड़ता है तो प्राप्त शब्द ’महाराज’ का अर्थ एक ऐसा व्यक्ति जो उस पूरे शासन को चलाता है अर्थात् राजा। इसी तरह अपने बनाए गए शब्दों को देखिए और चर्चा कीजिए कि ’महा’ के जुड़ने से क्या-क्या बदलाव होते हैं।
उत्तर :- (क) महारानी ,महामना , महासंग्राम , महाभारत , महावीर , महामहिम , महादेव, महापुरुष , महामानव , महादानव , महालया |
(ख) महारानी :- महाराजा की पत्नी |
महामना :- उदार मन वाला |
महासंग्राम :- बड़ा युद्ध |
महाभारत :- महान भारत का महाकाव्य |
महावीर :- बहुत बड़ा वीर |
महामहिम :- अधिक महिमा वाला (राष्ट्रपति) |
महादेव :- महान है जो देव शिव जी |
महापुरुष :- महान पुरुष |
महामानव :- ईश्वरीय अवतार अर्थात अत्यंत महान पुरुष |
महादानव :- दानव में श्रेष्ठ |
महालया :- फूल के देवी देवता व पितरों का आवाहन |
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योग्यता विस्तार :-
Q.1. ‘नोबेल पुरस्कार’ क्या है? इसकी विस्तृत जानकारी पुस्तकालय से खोजकर लाइये और कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर :-
2. अब तक किन-किन भारतीयों को ‘नोबेल पुरस्कार’ मिल चुका है। इन्हें कब व किस क्षेत्र
में योगदान के लिए यह पुरस्कार मिला है? पुस्तकालय से जानकारी जुटाइए।