CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 14 ध्वनि – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 14 ध्वनि are given below for hindi medium students.

CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 14 ध्वनि


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Q.1. पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाने पर ध्वनि पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

उत्तर :- जैसे ही हम पृथ्वी की सतह से उपर जाते है घनत्व कम होता है, जिसके कारण ध्वनि कम एवं देरी से सुनाई देगी।

Q.2. क्या अंतरिक्ष में भी ध्वनि सुनाई देगी ? कारण दें।

उत्तर :- ध्वनि के गमन के लिए माध्यम की जरूरत होती है। अतः अंतरिक्ष में माध्यम के अभाव के चलते ध्वनि नहीं सुनाई देगी।

Q.3. बारिश के मौसम में बिजली कड़कड़ाने पर हमें रोशनी पहले दिखाई देती है और कड़कड़ाने की आवाज कुछ क्षण  बाद सुनाई देती है | क्यों ?

उत्तर :- चूंकि प्रकाश का वेग ध्वनि से अधिक होता है इसलिए हमें रोशनी पहले दिखाई देती है।

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Q.4. चन्द्रमा पर वायुमण्डल न होने पर क्या वहाँ अंतरिक्ष यात्री बात कर पायेंगे ?कारण दीजिए |

उत्तर :- ध्वनि के संचरण के लिए वक्ता एवं स्त्रोता के बीच पदार्थ के माध्यम की आवश्यकता होती है। जिससे ध्वनि उर्जा को संपीडन एवं विरलन के रूप में कंपन के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक गमन करती है । वायुमण्डल पृथ्वी में पदार्थ माध्यम के रूप में ध्वनि उर्जा को स्थानांतरित कराती है। चन्द्रमा में माध्यम, वायुमण्डल की अनुपस्थिती में ध्वनि को स्थानांतरण असंभव है।

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अभ्यास-

1) सही विकल्प चुनकर लिखिए :- 

i) जब ध्वनि तरंगे माध्यम में संचारित होती है तब एक स्थान से दूसरे स्थान पर –

  अ) माध्यम के कणों का स्थानांतरण होता है |

  ब) उर्जा का एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरण होता है |

  स) उर्जा का परिवर्तन होता है |

  द) इनमें से कोई नहीं।                                     

ii) 20 Hz से कम आवृत्ति वाली ध्वनि कहलाती है-

   अ) श्रव्य                          ब) अवश्रव्य 

   स) पराश्रव्य                      द) इनमें से कोई नहीं

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iii) दो क्रमागत संपीड़नों या विरलनों के बीच की दूरी कहलाती है

   अ) आयाम                         ब) आवृत्ति 

   स) तरंग की चाल                द) तरंग दैर्ध्य

iv) संचरित तरंग के वेग (v), आवृत्ति (n), तथा तरंगदैर्ध्य () में संबंध होता है-

    अ) v=n                                  ब) v=n

    स)  v=n                              द) इनमें से कोई नहीं

v) ध्वनि तरंगें संचरित नहीं होती है-

    अ) ठोस में                             ब) द्रव में 

    स) वायु में                              द) निर्वात् में

vi) कंपन करती हुई वस्तु का आवर्तकाल 0.05 sec. हो तो उत्पन्न तरंगों की आवृत्ति होगी-

     अ) 5 Hz                                       ब) 20 Hz

     स) 200 Hz                                   द) 2 Hz 

उत्तर :- i) ब) उर्जा का एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरण होता है,  ii) ब) अवश्रव्य ,        iii) द) तरंग दैर्ध्य , iv) ब) v=n , v) द) निर्वात् में , vi)  ब) 20 Hz |

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Q.2) रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

   i) मानव में ध्वनि की श्रव्यता परास………….  से………….  होती है।

   ii) तरंगदैर्ध्य का SI मात्रक………………….. है।

   iii) क्रमागत संपीड़न तथा विरलन के मध्य की दूरी………………होती है।

   iv) ध्वनि की चाल……………………. पर निर्भर करती है।

उत्तर :- i) 20 Hz से 20 KHz तक,  ii) मीटर , iii) तरंग दैर्ध्य , iv) माध्यम |

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Q.3) यदि ध्वनि तरंग की आवृत्ति को दुगुना कर दिया जाए तो माध्यम में उसकी चाल कितनी होगी ?

उत्तर :-  ज्ञात है ध्वनि तरंग का वेग 

             v= आवृत्ति (n) तरंगदैर्ध्य ()

            माना ध्वनि तरंग का वेग 

              v=n

            जब आवृत्ति n को 2n किया जाए

            तब नया वेग v1 =2n

                  v1=2v 

            वेग दोगुना होगा।

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Q.4) स्त्रोत A से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति स्त्रोत B से उत्पन्न ध्वनि की आवृत्ति की दुगुनी है। दोनों स्त्रोतों के तरंगदैर्ध्य की तुलना करें।

उत्तर :- हमें ज्ञात है कि 

           ध्वनि का वेग   V=n

           जहां   n=आवृत्ति 

                    =तरंग दैर्ध्य

                    U =n

                   U1 =n1    

                   U2 =n2

  माना श्रोत A व B से उत्पन्न

 ध्वनि की आवृत्ति क्रमशः   n1व n2 तथा तरंग दैर्ध्य 1 व 2 है।

  तब, श्रोत A के लिए वेग  V= n11………………..(i)

            चूंकि एक ही माध्यम में ध्वनि का वेग समान होता है।

        श्रोत B के लिए वेग   V= n2 2……………(ii)

         समी. (i) व (ii) से

                                    n11= n2 2………..(iii)

अब 

      प्रश्नानुसार   n1=2n2

     समी. (iii)  से 

                    2n21= n2 2

          12 =  n22n2  =   12

           1 =  12 2        ……….उत्तर |

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Q.5) ध्वनि के कौन से अभिलक्षण से आप किसी कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज को पहचान लेते हैं ?

उत्तर :- ध्वनि का तारत्व वह गुण है जिसकी सहायता से किसी व्यक्ति विशेष की आवाज पहचानी जा सकती है | ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति के अनुरूप होती है |

 परंतु दोलन करने वाली प्रत्येक वस्तु की आवृत्ति भिन्न-भिन्न होती है, जिससे उत्पन्न ध्वनि का तारत्व भी भिन्न-भिन्न होता है |

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Q.6) दो धातुओं की टक्कर से क्रमशः वायु एवं जल में ध्वनि उत्पन्न की जाती है। बताएं समान दूरी पर किसमें ध्वनि तीव्र होगी ?

उत्तर :- ध्वनि का वेग माध्यम के घनत्व एवं प्रत्यास्थता पर निर्भर करती है | अर्थात माध्यम की प्रत्यास्थता अधिक होने पर उसका वेग भी अधिक होता है | ज्ञात है कि जल का घनत्व वायु से अधिक होता है, इसलिए जल में ध्वनि का वेग वायु की तुलना में अधिक होगी | साथ ही साथ आयाम या तीव्रता वेग एवं दूरी पर निर्भर करती है | वेग बढ़ने पर तीव्रता भी बढ़ती है तथा दूरी बढ़ने पर तीव्रता कम होती है | अतः स्पष्ट है कि वायु की तुलना में जल में ध्वनि तेज होगी |

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Q.7) ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है |

उत्तर :- ध्वनि एक प्रकार की ऐसी ऊर्जा हो है जो किसी स्रोत से उत्पन्न होकर अनुदैर्ध्य तरंग के रूप में किसी माध्यम द्वारा श्रोता तक पहुंचती है | ध्वनि किसी वस्तु में कंपन से उत्पन्न होती है |

जब कोई वस्तु कंपन करती है तो वह अपने संपर्क के माध्यम के कणों पर बल आरोपित करती है | जिससे माध्यम के कण अपनी संतुलित या विराम अवस्था से विस्थापित हो जाते हैं, और अपने समीप के अन्य कणों पर समान बल आरोपित करते हैं |

यह विस्थापित कण पुनः अपने समीप के कणों पर बल आरोपित कर उन्हें विस्थापित कर देते हैं | समीप के कणों को विस्थापित करने के पश्चात प्रारंभिक कण अपनी मूल अवस्था में लौट आते हैं | इस प्रकार ऊर्जा का एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरण होता है, और ध्वनि आगे बढ़ती है | माध्यम में यह प्रक्रिया तब तक चलते रहती है जब तक ध्वनि आपके कानों तक पहुंच नहीं जाती |

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Q.8) संपीड़न एवं विरलन को सचित्र समझाएं |

उत्तर :- ध्वनि संचरण के दौरान वायु के अणु जिन स्थानों पर इकट्ठा हो जाते हैं, उन्हें संपीड़न कहते हैं |

 या जब कोई कंपन करता हुआ वस्तु अपने आगे की ओर कंपन करती है तो, अपने सामने की वायु को धक्का देकर संपीड़न करती है, जिससे एक उच्च दाब वाला क्षेत्र उत्पन्न होता है, इस क्षेत्र को संपीड़न कहा जाता है |

 इसी प्रकार कंपन करती हुई वस्तु जब पीछे की ओर कंपन करें, जिससे निम्न दाब वाला क्षेत्र उत्पन्न हो जाए तो उसे विरलन कहते हैं |

 जब वस्तु लगातार कंपन करती है तो वायु में संपीड़न और विरलन की एक श्रेणी बन जाती है | यही संपीड़न और विरलन एक तरंग बनाते हैं, जो माध्यम से होकर संचारित होती है| ध्वनि का संचरण घनत्व परिवर्तन के संचरण के रूप में भी देखा जा सकता है |              

            (  यहां C संपीड़न तथा R विरलन को दर्शाता है। )

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Q.9) ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। प्रयोग द्वारा समझाएं |

उत्तर :- ध्वनि निर्वात् में रहकर एक स्थान से दूसरे तक संचरित नहीं हो सकती। अतः ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। जैसे – वायु, जल इत्यादि। इसे हम बेलजार का वायुसूचक के प्रयोग के माध्यम से समझ सकते है। 

बेलजार – यह निर्वात् उत्पन्न करने के लिए एक प्रयोगशाला उपकरण होता है। इसका आकार घंटी नुमा होने के कारण इसे बेलजार कहा जाता है। बेलजार को एक ऐसे तल पर स्थापित किया जाता है।जहां से बाहर की तरफ आसानी से एक नली निकाली जा सके ताकि उसे एक निर्वात् पंप से जोड़ा जा सके। जार के अंदर का वायुदाब परिवर्तित करने के लिए बेलजार के अंदर की वायु धीरे-धीरे बाहर निकाली जाती है।

प्रयोग:- इस प्रयोग में एक विद्युत घंटी को बेलजार के अंदर स्थापित किया जाता है। जब बेलजार की वायु धीरे-धीरे बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू होती है वो साथ ही साथ घंटी की ध्वनि धीमी हो जाती है।

एक विशेष निर्वात् की स्थिति बन जाने के पश्चात् घंटी से कोई ध्वनि सुनाई नहीं देती। हम देखते है कि हथौड़ा को घंटी पर मारते रहने से ध्वनि का उत्पादन लगातार जारी है। परन्तु एक निर्वात् की स्थिति के कारण ध्वनि का हमारे कानों तक आने में असमर्थ हैं या आश्रव्य है। अतः स्पष्ट हो जाता है कि ध्वनि तरंगे निर्वात् में संचरण नहीं कर सकती।

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Q.10) समझाएं कि ध्वनि तरंग अनुदैर्ध्य तरंग है ?

उत्तर :- जब तरंग का संचरण होता है, तो माध्यम के कण का स्थानांतरण नहीं होता है। अपितु वह अपनी मूल स्थिति के सापेक्ष कंपन या दोलन करते हैं। तरंग संचरण की दिशा के सापेक्ष माध्यम के कणों के दोलन की दिशा के आधार पर तरंग दो प्रकार के होतें है।

1) अनुदैर्ध्य तरंग

2) अनुप्रस्थ तरंग

इन तरंगों को समझने के लिए स्लिंकी के प्रयोग को समझना होगा

एक स्लिंकी स्प्रिंगनुमा प्लास्टिक लेना होगा। अद्य चित्रानुसार स्लिंकी के दोनों सिरे को पकड़कर आगे – पीछे बारी-बारी से खीचें और धक्का दें।

अब स्लिंकी पर निशान लगा दें और उक्त क्रिया को पुनः दोहराएं और इसे ध्यानापूर्वक देखें उस क्रियाकलाप में हम देखते हैं कि आगे-पीछे धक्का देने एवं खिचनें पर स्लिंकी में लगा। चिन्ह भी विस्थापन के संचरण की दिशा के समानांतर दिशा में गति करता है।

इस प्रकार की तरंगे अनुदैर्ध्य तरंगे कहलाती है। अर्थात् वे तरंगे जिसमें माध्यम के कणों का कंपन दोलन तरंग संचरण की दिशा के समानान्तर होता है, उन्हें अनुदैर्ध्य तरंग कहते हैं। ध्वनि तरंगों का संचरण भी इसी प्रकार होता है। अतः ध्वनि तरंगे भी अनुदैर्ध्य तरंगे है।

              स्लिंकी में अनुदैर्ध्य तरंगों का बनना  |

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Q.11) टिप्पणी लिखिए- 1) ईकोकार्डियोग्राफी  2) अल्ट्रासोनोग्राफी   3)सोनार |

उत्तर :- 1) ईकोकार्डियोग्राफी :- पराध्वनि तरंगों को हृदय के विभिन्न भागों से परावर्तित करा कर हृदय का प्रतिबिंब बनाया जाता है | इस तकनीक को ई.सी.जी. या इकोकार्डियोग्राफी भी कहा जाता है |

2) अल्ट्रासोनोग्राफी :- पराध्वनि संसूचक या अल्ट्रासोनोग्राफी एक ऐसा यंत्र है जो पराध्वनि तरंगों का उपयोग करके मानव शरीर के आंतरिक अंगों का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए उपयोग में लाया जाता है | इस संसूचक से रोगी के अंगों जैसे यकृत. पित्ताशय, गर्भाशय, गुर्दे आदि का प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सकता है, तथा पथरी व विभिन्न अंगों के ट्यूमर का पता लगाने में सहायता करते हैं |

  इस तकनीक में पराध्वनि तरंगे शरीर के ऊतकों में गमन करती है तथा उस स्थान से परावर्तित हो जाती है, जहां उत्तक के घनत्व में परिवर्तन होता है | इसके पश्चात इन तरंगों को विद्युत संकेतों में परिवर्तित कर उस अंग का प्रतिबिंब बना लिया जाता है | इन प्रतिबिंब को मॉनिटर पर प्रदर्शित किया जाता है या फिल्म पर अंकित कर लिया जाता है |

   इसका उपयोग गर्भकाल में भ्रूण की जांच, उसके जन्मजात दोषों तथा उसकी वृद्धि की अनियमितताओं का पता लगाने में किया जाता है | पराध्वनि का उपयोग गुर्दे की छोटी पथरी को बारीक कणों में तोड़ने के लिए भी किया जाता है। 

3)सोनार :- यह एक ऐसी युक्ति है जिसमें जल में स्थित पिंडों की दूरी दिशा तथा चाल मापने के लिए पराध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है | इस यंत्र में एक प्रेषित एक संसूचक होता है, इसे किसी नाव या जहाज में चित्रानुसार लगाया जाता है | प्रेषित पराध्वनि तरंगे उत्पन्न तथा प्रेषित करता है | यह तरंगे जल में गमन करती है तथा समुद्र तल में पिंड से टकराने के पश्चात परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है, एवं विद्युत संकेतों में परिवर्तन कर लिया जाता है | समय अंतराल ज्ञात कर पिंड की दूरी गणना की जा सकती है | माना पर ध्वनि संकेत के  प्रेषण तथा अभिग्रण में लगा समय अंतराल है तथा समुद्री जल में ध्वनि की चाल V है | अतः संकेत द्वारा तय की गई ( d दूरी जाना एवं d दूरी आना)  दूरी 2d होगी |

  चूंकि वेग = दूरी / समय अंतराल 

   दूरी       = वेग समय अंतराल

  2d =   v t अतः गहराई ( d = v t2)

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Q.12) तरंग के वेग, आवृत्ति तथा तरंगदैर्ध्य को सचित्र परिभाषित कर इनमें संबंध व्युत्पन्न करें।

उत्तर :- आवृत्ति :- जब ध्वनि किसी माध्यम में संचरित होती है तो माध्यम का घनत्व किसी अधिकतम तथा न्युनतम मान के बीच बदलता है।घनत्व का अधिकतम मान से न्युनतम मान तक आकर पुनः अधिकतम मान तक पहूंचने पर एक दोलन पूरा होता है।

एकांक समय में इन दोलनों की कुल संख्या ध्वनि तरंग की आवृत्ति कहलाती है।यदि हम प्रति एकांक समय में तरंग के एक बिन्दु से गुजरने वाली संपीड़नों या विरलनों की संख्या की गणना करें तो हम ध्वनि तरंग की आवृत्ति ज्ञात कर सकते हैं। इसे (म्यू) से प्रदर्शित किया जाता है।इसका S.I. मात्रक (हर्ट्ज) है।

तरंगदैर्ध्य :-  दो क्रमागत संपीडनों श्रृंगों अथवा विरलनों गर्तो के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते है। इसे  (लेमड़ा) से प्रदर्शित करते हैं इसका S.I. मात्रक मीटर है।

आयाम :- जब ध्वनि तरंगे वायु में गमन करती है जब वायु के कण दोलायमान होता है जिससे संपीड़न और विरलन क्षेत्र बनता है, परिणामस्वरूप किसी क्षेत्र का वायुु घनत्व सामान्य से अधिक होकर उच्चतम स्तर एवं न्यूनतम स्तर तक घटता-बढ़ता है। ध्वनि तरंग के कारण माध्यम के घनत्व में मूल स्थिति में उतार-चढ़ाव का मान तरंग का आयाम कहलाता है। जितनी उंची या तीव्र ध्वनि हो उतना अधिक माध्यम के घनत्व में उतार-चढ़ाव होता है। अर्थात् उतना अधिक तरंग का आयाम होता है। इसे अक्षर (A) से प्रदर्शित करते हैं।

आवर्तकाल :- दो क्रमागत संपीड़नों या दो क्रमागत विरलनों द्वारा किसी निश्चित बिन्दू से गुजरने में लगे समय को तरंग को आवर्तकाल कहते है। या किसी माध्यम में घनत्व के एक संपूर्ण दोलन में लिया गया, समय ध्वनि तरंग का आवर्तकाल कहा जाता है। इसे ‘T’ से प्रदर्शित करते हैं। इसका S.I. मात्रक सेकंड है |

आवृत्ति एवं आवर्तकाल में संबंध :- एक दोलन में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है। तथा एक सेकण्ड में दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।

संबंध     T=1  अथवा =1T 

ध्वनि तरंगों का वेग हम जानते हैं कि वेग =  दूरी / समय

अतः एक दोलन पूर्ण करने में तरंग द्वारा चली गई दूरी का मान तरंगदैर्ध्य के बराबर एवं समय आवर्तकाल के बराबर होता है।

अतः वेग   =       / T

  आवृत्ति   =       1 / T

अतः वेग   =      

अर्थात्   (वेग =  आवृत्ति तरंगदैर्ध्य )

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Q.13) एक ध्वनि तरंग 339 m/s की चाल से चलती है। यदि इसका तरंगदैर्ध्य 1.5 से.मी. हो तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी ? क्या ये श्रव्य होगी ?          

उत्तर :- ध्वनि की चाल   V=339m/s 

           ध्वनि तरंग का तरंगदैर्ध्य

                       =1.5cm

           या  1.5100m 

प्रश्नानुसार 

                  तरंग की आवृत्ति = ?

हमें ज्ञात है कि 

                   ध्वनि तरंग का वेग

                                 V=…………..(i)

                   यहां वेग  V=339m/s

समी. (i) से  

              339 = 1.5100m

           U=3391001.5 = 22600 हर्ट्ज (SI) मात्रा

             =22.6KHz

हम जानते हैं कि 

श्रव्य ध्वनि से =20Hz से 20KHz  होता है

अतः यह ( 22.6KHz ) पराश्रव्य ध्वनि होगा।

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Q.14) किसी ताप पर वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s एवं तरंगदैर्ध्य 0.017 m है। उसी ध्वनि स्त्रोत को जल में डाल दिया जाए तो तरंगदैर्ध्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यदि जल में ध्वनि की चाल 1480 m/s  है, गणना कर बताएं।                  

उत्तर :- ज्ञात है कि :- 

        वायु में ध्वनि का वेग,

                    V=…………..(i)

                    V=340m/s

                    = 0.017

   समीं. (i)  से, 

       340    =   0.017

       U = 3400.017 = 20,000Hz 

पुनः 

    जल में ध्वनि का वेग, 

    समी. (i) से, 

          1480 = 20,000

          = 148020,000 = 0.074

 अतः   =0.074m     उत्तर |

नोट – माध्यम बदलने पर आयाम, तरंगदैर्ध्य, वेग बदल जाता है | जबकि आवृत्ति में परिवर्तन नहीं होती ।

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Q.15) सितार की ध्वनि की तीक्ष्णता को कम करने के लिए आप कौन-कौन से उपाय करेंगे ?

उत्तर :- ध्वनि की कर्ण प्रियता के लिए उचित पिच की आवश्यकता होती है। अर्थात् आवृत्ति पर ही ध्वनि की तीक्षणता निर्भर करती है। सितार की ध्वनि की मधुरता के लिए उसमें प्रयोग होने वाले तारों को उचित तरीकों से ट्युनिंग किया जाता है। चूंकि प्रत्येक तार का पिच अलग-अलग होता है, इसलिए तारों को एक विशेष आवृत्ति तक लाने के लिए तारों को कसा या ढीला किया जाता है।सितार के आंतरिक हिस्से में खालीपन होता है, इसलिए प्रतिध्वनि उत्पन्न होती है, जिससे ध्वनि की मधुरता बढ़ती है।

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Q.16) एक अनुदैर्ध्य तरंग जिसकी तरंगदैर्ध्य 1 cm है, वायु में 330 m/s चाल से संचारित होती है। तरंग की आवृत्ति की गणना कीजिए। क्या यह तरंग सामान्य मनुष्य द्वारा सुनी जा सकती है ?

उत्तर :-   हमें ज्ञात है कि 

                      तरंग का वेग V=…………..(i)

दिया है       = 10 cm या 1100 m

वायु में वेग   = 330m/s 

     समी.(i)  से 

तब प्रश्नानुसार

         आवृत्ति  = 330100

                   = 33000HZ 

                   = 33 KHZ          उत्तर |    

यह मानव पराश्रव्य तरंग ध्वनि है।

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