CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 16 कोयला, पेट्रोलियम एवं पेट्रोरसायन – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 16 कोयला, पेट्रोलियम एवं पेट्रोरसायन are given below for hindi medium students.

CG Board Class 9 Science Solutions Chapter 16 कोयला, पेट्रोलियम एवं पेट्रोरसायन


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Q.1.जीवाश्म ईधन किसे कहते हैं ?

उत्तर :- ये ईंधन करोड़ो वर्षो तक पृथ्वी की सतह के नीचे गहराई में दबे हुए जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के अवशेषों का रूपातंरण है तथा ये जीवश्म ईंधन (कोयला और पेट्रोलियम ) कहलाते है।

Q.2.कोयला कैसे बनता है ?

उत्तर :- भू-गर्भ ये दबी वनस्पतियों के विघटन से कोयले का निर्माण हुआ है। ये विघटित वनस्पतियां सर्वप्रथम पीट में परिवर्तित होती है तथा लगातार उच्च ताप एवं दाब के कारण क्रमशः लिग्नाइट बिटुमिनस व ऐन्थ्रासाइट कोयले में बदल जाती है।

Q.3. किस प्रकार के कोयले में सल्फर की मात्रा सर्वाधिक पाई जाती है ?

उत्तर :- बिटुमिनस |

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Q.4. प्रभाजी आसवन किसे कहते हैं ?

उत्तर :- दो या दो से अधिक मिश्रणीय द्रवों को जिनके क्वथनांक के मध्य बहुत कम अंतर होता है, पृथक करने की विधि प्रभाजी आसवन कहलाती है।

Q.5. पेट्रोलियम का प्रभाजी आसवन क्यों आवश्यक है। प्रभाजक स्तंभ में उपर की ओर कौन-सी गैस प्राप्त होती है ?

उत्तर :- पेट्रोलियम कई हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है, जिनके क्वथनांक में बहुत कम अंतर होता है।ऐसे मिश्रण के घटकों का साधारण आसवन विधि के द्वारा पृथक करना कठिन होता है अतः इसके लिए विशेष उपकरण का प्रयोग किया जाता है जिसे प्रभावी आसवन विधि कहते हैं।

प्रभाजक स्तंभ में ऊपर की ओर पेट्रोलियम गैस (ब्यूटेन, प्रोपेन) प्राप्त होती है।

Q.6.पेट्रोलियम का रासायनिक सूत्र क्यों नहीं होता है ?

उत्तर :- पेट्रोलियम का एक निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता हैं क्योंकि यह कई हाइड्रोकार्बन का  मिश्रण होता है।

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Q.7. प्लास्टिक का पुनः चक्रण किसे कहते हैं ?

उत्तर :- अनुपयोगी प्लास्टिक की वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को प्लास्टिक का पुनः चक्रण कहते हैं।

Q.8.दहन किसे कहते हैं समझाइए ?

उत्तर :- किसी वस्तु के जलने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन की उपस्थिति में वस्तु का जलन दहन कहलाता है। दहन की प्रक्रिया में ऊष्मा निकलती है, अतः यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

कोयले के दहन की प्रक्रिया में मुख्यतः CO2 तथा ऊष्मा उत्पन्न होती है।

       C+O2 Co2+ऊष्मा

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अभ्यास :-  

Q.1. सही विकल्प चुनिए –

i) कोयले का निर्माण निम्नलिखित के अवशेषों से होता है –

अ)  वनस्पतियों                               ब)  जंतुओं

स)  वनस्पति एवं जंतुओं दोनों            द) इनमें से कोई नहीं

ii) जीवाश्म ईधन बनने के लिए आवश्यक स्थितियां हैं –

    अ ) उच्च ताप                               ब) उच्च दाब  

    स) ऑक्सीजन की अनुपस्थिति          द)  उपर्युक्त सभी 

iii) किस प्रकार के कोयले में कार्बन की मात्रा सर्वाधिक होती है

     अ)  पीट                               ब)  लिग्नाइट 

      स) बिटुमिनस                        द) ऐन्थ्रासाइट

iv) पी. वी. सी .से निर्मित वस्तुओं का पहचान कोड क्या है –

     अ) 1                             ब) 2

     स) 3                             द) 4

उत्तर :- i) स)  वनस्पति एवं जंतुओं दोनों,  ii) द)  उपर्युक्त सभी, iii) द) ऐन्थ्रासाइट , 

iv) स) 3   |

Q.2. रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए –

i) कोयला एवं पेट्रोलियम …………………… ईधन है।

ii) कोयले के निर्माण में सर्वप्रथम……………..  प्रकार का तथा अंत में…………. प्रकार का कोयला बनता है।

iii) कार्बन की सबसे कम मात्रा………………… प्रकार के कोयले में पाई जाती है।

iv) प्रभाजी आसवन तब किया जाता है जब द्रव्यों के……….. में अंतर बहुत कम होता है।

v) पेट्रोलियम दो शब्दों………… और……………. से मिलकर बना है।

उत्तर :- i) जीवाश्म   ii)   पीट , ऐन्थ्रासाइट  iii) पीट   iv) क्वथनांक  v) पेट्रा (चट्टान), ओलियम (तेल)

Q.3. जीवश्म ईंधन किस प्रकार बनते हैं ? समझाइए |

उत्तर :- उच्च ताप एवं दाब पर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के अवशेषों के रूपांतरण से जीवाश्म ईंधन बनते हैं। कोयला एवं पेट्रोलियम जीवश्म ईंधन है।

कोयले का निर्माण कार्बोनिफेरस काल में वनस्पतियों पेड़-पौधों एवं जंतुओं के मृत शरीर पृथ्वी  के भीतर दब गए। धीरे-धीरे उन पर मिट्टी की परतें जमती गई भू-गर्भ में उच्चताप एवं दाब पर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ये मृत शरीर कोयले में बदल गए।

  पेट्रोलियम की उत्पत्ति समुद्र में रहने वाले जीवों (लवक) से हुई है। जब ये जीव मृत हुए तब इनके शरीर समुद्र के पेंदे में जाकर जम गए और फिर रेत तथा मिट्टी की तहों द्वारा ढक गए। लाखों वर्षों तक ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उच्च ताप व दाब पर मृत जीव पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस में परिवर्तित हो गए।

Q.4. कोयले के विभिन्न प्रकारों को विस्तारपूर्वक लिखिए ?

उत्तर :- कोयले में मुख्यतः कार्बन एवं उसके यौगिक होते हैं, कार्बन की प्रतिशत मात्रा के आधार पर कोयले को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा गया है-

1. पीट- यह वनस्पति के कोयले में रूपांतरण की पहली अवस्था है। इसमें लगभग 25-35% कार्बन होता है। इसका उपयोग अधिकतर ईंधन के रूप में किया जाता है।

2.  लिग्नाइट– यह  कोयला, भूरा कोयला के नाम से भी जाना जाता है। इसमें लगभग 35-45 % तक कार्बन होता है। इसका उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है।

3. बिटुमिनस–  यह प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तथा सर्वाधिक उपयोग में आने वालाकोयला है। इसमें कार्बन लगभग 45-85% तक होता है। इसका उपयोग मुख्यतः तापीय और सीमेंट संयंत्रों में, पेपर कारखानों में, ऑटोमोबाइल एवं वस्त्र उद्योगों में किया जाता है। इसका उपयोग इस्पात संयंत्रों में कोक के रूप में भी किया जाता है। इस कोयले में सल्फर की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है।

4 . ऐन्थ्रासाइट- इसे कठोर कोयला भी कहते हैं, यह एक उत्तम श्रेणी का कोयला है। इसमें कार्बन 85 % से अधिक होता है। अधिक कार्बन प्रतिशत के कारण यह अधिक समय तक जलता है, इससे धुआँ और राख कम उत्पन्न होने के कारण इसका उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जाता|

Q.5. जीवाश्म ईधन के अधिक उपयोग से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को बताइए?

उत्तर :- i) ईंधन को जलाने से जो कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न होती है उसका कुछ भाग तो हरे पेड़-पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण में उपयोग कर लिया जाता है | परंतु ज्यादातर भाग पौधाघर प्रभाव (greenhouse effect) उत्पन्न करता है। इसके कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है।

ii) ईंधन के दहन से उत्पन्न कार्बन मोनो ऑक्साइड एक विषैली गैस है जो रक्त में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन में, ऑक्सीजन की अपेक्षा तीव्रता से घुलती है। यदि कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा रक्त में अधिक हो जाए तो मृत्यु तक हो सकती है।

iii)  तापीय संयंत्रों में कोयले के दहन से उत्पन्न होने वाली राख आस-पास के क्षेत्रों में उड़ती है, उसे उड़नराख (fly ash)  कहते हैं। यह फेफड़ों को संक्रमित करके सिलिकोसिस बीमारी उत्पन्न करती है जिससे फेफड़ों को क्षति पहुँचती है।

iv) ईंधन में पाए जाने वाले नाइट्रोजन तथा सल्फर दहन के पश्चात् उनके ऑक्साइड में बदल जाते हैं जिनके वर्षा के जल में घुलने के कारण अम्ल वर्षा होती है।

Q.6. जीवाश्म ईंधन का संरक्षण आवश्यक है, समझाइए ?

उत्तर :- जीवश्म ईंधन ऊर्जा का ऐसा स्त्रोत है जिसे बनने में करोड़ो वर्ष लगते हैं। दूसरी ओर इसके ज्ञात भंडार सिर्फ कुछ सौ वर्ष और चलने वाले हैं। हमें इसके दुरूपयोग को रोकने का प्रयास करना चाहिए। हमारे द्वारा इसके संतुलित उपयोग करने पर ही यह भावी पीढ़ी के लिए उपलब्ध हो सकेगा। इसलिए जीवश्म ईंधन का संरक्षण आवश्यक है।

Q.7. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त उत्पाद कौन-कौन से हैं इनके क्या उपयोग है?

उत्तर  :-

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