CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 4 भारत की नदियाँ एवं अपवाह प्रणाली are given below for Hindi Medium Students.
CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 4 भारत की नदियाँ एवं अपवाह प्रणाली
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महानदी बेसिन, छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक मानचित्र में देखकर बताइये –
प्रश्न 01 : महानदी के उद्गम स्थल का नाम लिखिए |
उत्तर : महानदी का उद्गम स्थल सिहावा पर्वत है। जो कि धमतरी जिले में स्थित है।
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प्रश्न 02 : महानदी की उत्तरी व दक्षिणी सहायक नदियों के नाम लिखिए |
उत्तर : महानदी की उत्तरी सहायक नदियां – शिवनाथ, पैरी, सोंढ़र, हसदेव और अरपा, तथा महानदी की दक्षिणी सहायक नदियां जोंक खारून है।
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प्रश्न 03 : महानदी के तट पर बसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख्य स्थानों के नाम लिखिए |
उत्तर : महानदी के तट पर बसे हुए छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्थान निम्न है- राजिम शिवरीनारायण चन्द्रपुर सिरपुर और तुरतुरिया।
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अभ्यास :
प्रश्न 01 : संलग्न चित्र किस तरह के अपवाह प्रतिरूप को इंगित करता है ?
क ) वृक्षाकार
ख ) आयताकार
ग ) जालीनुमा
घ ) केंद्रोन्मुखी
प्रश्न 02 : ब्रह्मपुत्र बेसिन का विस्तार है – अ) भारत और चीन में ब ) भारत और पाकिस्तान में स ) बांग्लादेश में
क ) केवल अ सही है |
ख ) अ और स सही है |
ग ) अ और ब सही है |
घ ) केवल ब सही है |
प्रश्न 03 : सुंदरवन डेल्टा किस नदी के मुहाने पर बना है |
क ) गोदावरी
ख ) गंगा
ग ) कावेरी
घ ) सिंधु
प्रश्न 04 : भारत का सबसे लम्बा बांध हीराकुण्ड है| यह किस नदी पर बना है?
क ) गंगा
ख ) गोदावरी
ग ) नर्मदा
घ ) महानदी
उत्तर : 1) ख ) आयताकार, 2) ग ) अ और ब सही है , 3) ख ) गंगा , 4) घ ) महानदी
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प्रश्न 05 : अपवाह एवं अपवाह तंत्र को समझाइए?
उत्तर : पानी की वह मात्रा जो धरती की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में ढाल का अनुसरण करते हैं। जल की धाराओं, नदियों नालों के रूप में प्रवाहित होता है। उसे अपवाह कहते हैं। अर्थात अपवाह से आशय नदी में आने वाले पानी के जल प्रवाह से है जो भूमि के ढाल एवं धरातलीय अवस्था पर निर्भर करता है।
परन्तु किसी नदी में जहां-जहां से पानी आकर मिलता है वह संपूर्ण क्षेत्र उस नदी का बेसिन कहलाता है। मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियां मिलकर एक तंत्र का निर्माण करती है। जिसे अपवाह तंत्र कहते हैं।
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प्रश्न 06 : नदी की युवावस्था की विशेषताओं का वर्णन करें?
उत्तर : जब नदी उद्गम क्षेत्र से निकलकर पर्वतीय क्षेत्र में बहती है , तो उसका वेग त्रीव होता है यंहा इसके द्वारा कटाव अधिक है | इस अवस्था में तल का कटाव अधिक व् तट का कटाव कम होने से “v “ आकर की घाटी का निर्माण होता है | इससे घाटी गहरी और संकरी होती जाती है | नदियां अपने साथ कंकड़ पत्थर और चट्टानी टुकड़ो को लेकर आगे बढ़ती है|
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प्रश्न 07 : गंगा बेसिन और गोदावरी बेसिन में क्या अंतर है?
उत्तर : गंगा बेसिन व गोदावरी बेसिन में निम्न अंतर है :-
| गंगा बेसिन | गोदावरी बेसिन |
| 1 गंगा अपनी सहायक नदियों के साथ भारत के उत्तरी भाग में विशाल मैदान की रचना करती है।2 ये नदियां बाढ़ में प्रत्येक वर्ष नवीन जलोढ़ मिट्टी का जमाव करती है। जिससे ह्रयूमस की मात्रा अधिक होती है।3 गंगा बेसिन वन आबादी वाला क्षेत्र है, समतल मैदानी भाग होने के कारण परिवहन साधन व उद्योगों का विकास अधिक हुआ है । | 1 इस बेसिन का निर्माण गोदावरी व उसकी सहायक नदियां पेनगंगा, मंजरी और पेनगंगा आदि द्वारा हुआ है।2 यह बेसिन कहीं संकरी तो कहीं चौड़ी है। पूर्वी घाट की ओर आंध्रप्रदेश के पोलावरम के पास यह कन्दरा में होकर बहती हैं।3 काली मिट्टी के इस क्षेत्र में कपास व अन्य व्यापारिक फसलें अधिक उत्पादित की जाती है। इस नदी में नौका परिवहन का कार्य भी होता है। |
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प्रश्न 08 : यदि आप सुंदरवन में रहते तो आपको किन – किन समस्याओ का सामना करना पड़ता? इन समस्याओं के समाधान के लिए आप क्या करते?
उत्तर : सुंदरवन क्षेत्र प्राकृतिक विविधता और जटिलताओं से भरा हुआ क्षेत्र है | क्योंकि गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में गिरने से पूर्व इस क्षेत्र में कई धाराओं में बहती है, और इसका प्रवाह भी धीमे हो जाता है, जिसके कारण यहां बहुत अवसाद एकत्र होते हैं, यह क्षेत्र बहुत उपजाऊ होने के कारण सघन वन क्षेत्रों से भरा हुआ है, यहां सुंदरी के पेड़, बांस के पेड़ और हाथी घास बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है | यहां का मानवीय जीवन बहुत कठिन है क्योंकि यहां के लोगों का मुख्य पेशा खेती करना, मछली पकड़ना, और जंगल में शिकार करना है | चूँकि यहां पर आबादी लगातार बढ़ रही है, और संसाधन सीमित है | इसलिए मानव और प्रकृति में अधिकतर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है | जैसे कि हाथी घास कम होने से और जंगलों के अत्यधिक काटे जाने और शिकार करने से यहां पर रहने वाले बाघ कभी-कभी मानव बस्तियों में शिकार के लिए आ जाते हैं |
इन समस्याओं का समाधान हमें प्रकृति संरक्षण के माध्यम से ही निकालना होगा, जिससे सुंदरवन की वनस्पतियां और जंगली जीवों और मनुष्यों तथा जलीय जीवों का संरक्षण किया जा सके | हमें जंगली क्षेत्रों में मनुष्यों के अतिक्रमण को रोकना होगा, जिससे जंगल की संपदा और उसमें रहने वाले जीवो की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित किया जा सके | हमें मनुष्यों की प्रकृति पर निर्भरता को कम करना होगा और साथ ही साथ जनसंख्या नियंत्रण पर भी ध्यान देना होगा , जिससे हम क्षेत्र में हो रहे प्राकृतिक असंतुलन को कम कर सकें, इस क्षेत्र की समस्याओं का यही समाधान उचित हो सकता है |
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प्रश्न 09 : भूमिगत जल का आशय स्पष्ट कीजिए | क्या भूमिगत जल स्तर नीचे जा रहा है? यदि हाँ तो क्यों?
उत्तर : जब बारिश का पानी जमीन पर गिरता है तो , इसका कुछ भाग सतह पर बहकर नालों नदियों एवं झीलों में चला जाता है , कुछ पौधों द्वारा प्रयोग किया जाता है कुछ वाष्पित होकर वातावरण में चला जाता है और कुछ जमीन में रिस जाता है जल भूतल की ऊपरी परत से रिस – रिस कर जमीन के नीचे चली जाती है और यही जल भूमिगत जल कहलाता है | हाँ , भूमिगत जल स्तर के नीचे जा रहा है क्योकि भूमिगत जल का दोहन निजी सम्पति मानकर किया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह है की भूमिगत जल किसी खेत के नीचे जमा नहीं बल्कि वह जमीन के अंदर बहता रहता है | इसलिए एक व्यक्ति द्वारा जल के अधिक दोहन से दूसरे व्यक्ति को प्रयाप्त जल नहीं मिल पाता | दुसरो के नलकूप से गहरा नलकूप लगाकर कोई भी दुसरो को मिल रहे जल को कम कर सकता है | ज्यादा से ज्यादा जल पाने की होड़ में नलकूप सुख रहे है और भूमिगत जल स्तर नीचे जाता जा रहा है |
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प्रश्न 10 : हिवरे बाजार गांव के लोगों ने किस प्रकार जलाभाव की समस्या का समाधान किया?
उत्तर : हिवरे बाजार गांव महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है | यह एक सूखाग्रस्त गांव है | यहां औसत वर्षा 400 m.m. होती है | इस गांव में मिट्टी और जल संरक्षण के लिए सार्वजनिक भूमि और चारागाहों का उपयोग किया गया | यहां वर्षा के जल संरक्षण के लिए पहाड़ी ढलानों पर गड्ढे खोदे गए, जिससे मिट्टी का और जल का संरक्षण हुआ, और कृषि जल की वृद्धि हुई, और घास की भी वृद्धि हुई, जल संचयन हेतु चेक बांध, रिसने वाले तालाब और ढीले पत्थरों की संरचना बनाई गई | पूरे गांव और गांव के मार्गों में पौधों का रोपण किया गया | गांव में वृक्षों की कटाई और अनियंत्रित पशुओं की चराई पर रोक लगाई गई | पशुओं की चराई के लिए एक निश्चित स्थान नियत किया गया | इन सभी प्रयत्नों से सिंचाई का रकबा 7 हेक्टेयर से बढ़कर 72 हेक्टेयर हो गया | गांव में पानी का जलस्तर बढ़ गया, जिसके कारण सभी जलस्रोत, पानी की उपलब्धता सुलभ हो सकी, और गन्ना और केला फसलों को प्रतिबंधित किया गया, और लोगों ने सिंचाई की व्यवस्था होने से आलू, अंगूर, प्याज, अनार, गेहूं, आदि उगाना शुरू किया | यहां की सबसे बड़ी उपलब्धि जल स्तर में वृद्धि है | जिसके कारण किसान अपनी जमीन पर अधिक से अधिक पैदावार कर सके, जिसके कारण रोजगार की स्थिति सुधार हुआ, और यहां के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो सका |