CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन आश्रित समुदाय – CGBSE Solutions PDF in Hindi

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CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति एवं वन आश्रित समुदाय


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प्रश्न 01 : क्या हमें लगता है की वन महत्वपूर्ण है ? अगर खेती , सड़क , खनन , उद्दोग या घर बनाने के लिए इन सारे वन काट देंगे तो क्या होगा? क्या इन वनों के बिना नहीं रह सकते? कक्षा में चर्चा करें | 

उत्तर : हाँ वन बहुत ही महत्वपूर्ण है ( अगर खेती , सड़क , खनन , उद्दोग या घर बनाने के लिए हम सारे वन काट देंगे तो दैनिक आवश्यकताओं  की पूर्ति जो की हमें वनो से प्राप्त होती है वो नहीं हो पायेगी क्योकि मनुष्य जीव – जंतु सभी कही न कही प्रतिदिन जंगल या वन में निर्भर है | वनो के बिना जीवन संभव नहीं है| भारत के जंगलो में जनजातीय समुदाय रहते है |  

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प्रश्न 02 : क्या यह कहना सही है की वन प्राकृतिक रूप से दुर्गम पहाड़ और पथरीले प्रदेशो में ही होते है? 

उत्तर : 

अभ्यास : 

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प्रश्न 01 : प्रशासकीय  आधार पर वनों को कितने भागो में बाँटा गया है | 

उत्तर : प्रशासनिक वर्गीकरण- वन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधार पर वनों को 3 वर्गों में विभाजित किया जाता है-:- 

1.आरक्षित वन ,

2.  रक्षित वन , 

3. अवर्गीकृत वन

1 आरक्षित वन – शासकीय वन वह है जहां न कोई पेड़ काट सकता है न जानवर चरा सकता है, न घरेलू उपयोग के लिए वनोपज ले जा सकता है। हमारे देश के 54.4% वन इसके अंतर्गत आते है।

2 रक्षित वन – इस प्रकार के वनों में पशुओं को चराने, घास को काटने, ईधन के लिए लकड़ी बिनने, लघु वनोपज इकट्ठा करने की सुविधा दी है। हमारे देश के 29.2% वन इसके अंतर्गत आते हैं।

3 अवर्गीकृत वन – इसमें पशुओं को चराने तथा लकड़ी काटने की छूट दी जाती है। भारत में 16.4% वन इस प्रकार के है।

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प्रश्न 02 : भारत में  वनों को मुख्य रूप से कितने भागो में बाँटा गया है?

उत्तर : भारत में वनों का वर्गीकरण यहां की जलवायु और उगने वाले पेड़ो के आधार पर भी किया जाता है। इस आधार पर भारत में वनों को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता है –

1 ) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन 

2 ) मानसूनी पतझड़ वन :- इसे दो भागों में बांटा गया है 

       i) आर्द्र मानसूनी वन |

       ii) शुष्क मानसूनी वन |

3 ) कांटेदार झाड़ी वाले वन

4 ) समुद्र तटीय वन 

5 ) पर्वतीय वन |  

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प्रश्न 03 : सदाबहार वन की विशेषताएं बताये | 

उत्तर : इस प्रकार के वन ऐसी जगह पर होते हैं जहां साल भर गर्मी पड़ती है और अधिकांश महीनों में बारिश होती रहती है| लगभग ऐसे क्षेत्रों में 200mm से ज्यादा बारिश होती है, इस कारण यहां के पेड़ पौधों को वर्ष भर पोषण और नमी मिलती रहती है, और यही कारण है कि इन क्षेत्रों के वन बहुत घने और साल भर हरे भरे रहते हैं | इनके पत्ते झड़ते हैं, तुरंत नए पत्ते आ जाते हैं | इन वनों में पशु पक्षियों की बहुत अधिकता होती है |

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प्रश्न 04 : पतझड़ वाले वन कँहा  पाए जाते है और उनकी विशेष पहचान क्या है? 

उत्तर : पतझड़ वाले वन भारत के लगभग 70% क्षेत्रों में पाए जाते हैं यह वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां साल के तीन चार महीनों में ही वर्षा होती है और यह बारिश 76 MM से 200 MM के बीच में होती है यह पेड़ गर्मी के दिनों में वाष्पीकरण की प्रक्रिया से बचने के लिए अपने पत्ते को गिरा देते हैं जिससे वह गर्मी के दिनों में यह पेड़ अपने आप को बचा सके और कम पानी में भी जिंदा रह सके और बाद में मौसम बदलते ही पत्तियां पुनः उग जाती हैं इन पेड़ों की पत्तियां चौड़ी होती हैं वर्षा के आधार पर इन्हें दो भागों में बांट सकते हैं :-

1.आर्द्र मानसूनी वन :-   ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा 100 से.मी. से 200 से.मी के बीच होती है | इनमें कुछ पेड़ बढ़े और सदाबहार भी होते हैं | उनके नीचे लगाए और झाड़ियों की अधिकता होती है | ऐसे वन छत्तीसगढ़, बिहार ,पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल और ओडिशा के क्षेत्रों में पाए जाते हैं | इसमें प्रमुख रूप से बैर, कोसम और अर्जुन आदि के वृक्ष होते हैं | यह वन क्षेत्र सदाबहार वनों की तुलना में कम घने होते हैं, और पेड़ों की ऊंचाइयां भी अपेक्षाकृत कम होती है |

2. शुष्क मानसूनी वन :- ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां बारिश 70 से.मी. से 100 सें.मी. के बीच होती है | इनमें भी गर्मी के दिनों में पत्तियां झड़ जाती है | यह वन कम घने होते हैं और इनमें पेड़ के नीचे झाड़ियों की अपेक्षा घास ज्यादा घनी रहती है यह वन पंजाब राजस्थान हरियाणा गुजरात और पश्चिम मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में पाए जाते हैं यहां प्रमुख रूप से साबुन तेंदूपत्ता पलाश खैर महुआ और शीशम के पेड़ पाए जाते हैं |

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प्रश्न 05 : छत्तीसगढ़ के वनो में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्षों के नाम लिखिए?

उत्तर : छत्तीसगढ़ के वनों में प्रमुख रूप से सागौन, बांस, अर्जुन, महुआ, तेंदूपत्ता आदि के पेड़ प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं | परंतु सरकार और पर्यावरण बिद् के सहयोग से आवळा ,कगंर, चार, हर्रा, मेहरा, आदि के पौधे भी जंगलों में लगाए जा रहे हैं, जिससे जंगलों को विस्तारित और उपयोगी बनाया जा सके |

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प्रश्न 06 : मानसूनी वन किसे कहते है ? सविस्तार समझाइये | 

उत्तर : मानसूनी वन भारत के विशिष्ट वन है | हमारे देश के लगभग 70 प्रतिशत वन इस प्रकार के है |  उन क्षेत्रों में पाए जाते है जंहा गर्मी भी पड़ती है और साल के कुछ महीनो ही वर्षा होती है | वर्षा की मात्रा 75 से मि से 200 से मी तक होती है यानि न बहुत कम न अधिक | इन पेड़ो पत्तिया चौड़ी होती है ये पेड़ गर्मी के सूखे दिनों में नमी बचाने के लिए अपनी पत्तिया गिरा देते है ताकि पतियों से होने वाले वाष्पीकरण को रोका जा सके | बाद में इनमे फिर से पत्तिया निकल आती है | सूखे महीनो में पत्तिया झड़ने के कारण इनको पतझड़ वाले वन भी कहते है हमारे राज्य में अधिकांश वन इसी श्रेणी में आते है | मानसूनी वनो के आधार पर दो भागो में बाटा जा सकता है अधिक वर्षा वाले मानसूनी वन और कम वर्षा वाले शुष्क मानसूनी वन | 

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प्रश्न 07 : वन नीति को समझाइए | वन संरक्षण के उपाय बताइए | 

उत्तर :  आदिवासी संघर्षों के फल स्वरुप सन् 1988 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय वन नीति की घोषणा की | इस नीति में माना गया कि वनों के संरक्षण और विकास में आदिवासियों और ग्राम समुदायों की अहम भूमिका रही होगी | नीति ने यह भी स्वीकारा कि आदिवासियों और अन्य वन आश्रित समुदायों को अपनी जरूरतों के लिए वनों का उपयोग करने का अधिकार है, इस नीति के तहत संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम चलाए गए,  जिनके अंतर्गत आदिवासियों को जंगल से चारा, जलाने योग्य लकड़ी, और छोटे वनोपज इकट्ठा करने का अधिकार मिला, और वन विभाग के तहत रोजगार भी मिला, लेकिन साथ-साथ उन पर दबाव बनने लगा कि वह खेतिहर जमीन पर अपना अधिकार छोड़ दें, ताकि वहां पेड़ उगाए जाए | इस कानून के द्वारा आदिवासियों व जंगल के अन्य पारंपरिक उपभोक्ताओं को वनों पर उनके पारंपरिक अधिकार और जिस भूमि पर खेती कर रहे थे उन पर उनका स्वामित्व दिया गया|

वन संरक्षण के उपाय :-  वनों को संरक्षित करने के लिए निम्न उपाय किए जाने चाहिए :-

 1. वनों की कटाई पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए |

2. वनों के विनाश को अति शीघ्र रोकने के लिए आस-पास के लोगों को कड़ी पहल करनी चाहिए|

3. वनों की भूमि पर भू माफियाओं द्वारा हो रहे कब्जे को खत्म करना चाहिए |

4. वनों के पूर्ण निर्माण में युवा पीढ़ी को भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए |

5. वनों के संरक्षण हेतु छात्रों को जागरूक करना चाहिए तथा वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों में विद्यालयों को स्वयं आगे बढ़कर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए |

6. वनों के आसपास के लोगों को ईंधन का उचित साधन प्रदान कराया जाना चाहिए, जिससे वह वनों की लकड़ियों का प्रयोग ईंधन के रूप में ना करें |

7. जंगलों को पर्यटन स्थल नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि लोग वहां जाकर हमारी वन संपदा को तथा वहां रह रहे जीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं |

8. बंजर तथा जो भूमि कृषि योग्य नहीं है, वहां जंगल का विस्तार करना चाहिए |

9. वनों में कम पानी तथा स्वयं व तेजी से पनपने वाले वृक्षों को लगाना चाहिए |

10. वनों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए  |

11. जंगल को नुकसान पहुंचाने वालों को कड़े से कड़ा दंड देने का प्रावधान होना चाहिए |

12. सरकार की पहल से जंगली जीवों की विलुप्त होती नस्लों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए|

13. वनों में अचानक लगने वाली आग के प्रति कुछ जरूरी व उपयोगी कदम उठाने चाहिए| 

आदि कई ऐसे तरीके हैं जिसके माध्यम से हम अपने ‘वन राज’ को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं | परंतु इस कार्य के लिए मन मस्तिष्क में शुद्ध भावना होना अति आवश्यक है |

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प्रश्न 08 : भारतीय वनों के नष्ट होने का प्रमुख कारण लिखिए | 

उत्तर : :- भारतीय वनों के नष्ट होने के प्रमुख कारण निम्न है :- 

1. जनसंख्या में वृद्धि  :- अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि इस समस्या का मुख्य कारण है | यदि इसी रफ्तार से जनसंख्या वृद्धि होती रही तो हमारे पृथ्वी से वनों की संकल्पना ही समाप्त हो जाएगी, क्योंकि अति जनसंख्या वृद्धि के कारण ही हमारे वन संकुचित होते जा रहे हैं |

2. पुनः वृक्षारोपण में कमी :- यदि प्राकृतिक आपदाओं या आग के कारण हमारे वृक्षों को नुकसान पहुंचता है तो भी हमारे वनों में वृक्षों की संख्या कम होती जाती है, जिससे वन सिकुड़ते जा रहे हैं, परंतु आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी कौन ले अर्थात कोई भी नहीं लेना चाहता |

3. जागरूकता में कमी :- जंगल के आसपास रह रहे लोगों को लगता है कि यह जंगल उनकी अपनी पूंजी है | अतः वे जंगलों का दोहन करते चले जा रहे हैं |

4. रेल मार्गों का विस्तार :- रेल मार्ग के विस्तार के लिए भी जंगल काटे जा रहे हैं, जिससे हमारा पर्यावरण ही नहीं अपितु जंगली जीव भी परेशान होकर शहरों की ओर आ रहे हैं |

5. कृषि के लिए भूमि का विस्तार :- जंगल के आसपास रह रहे लोग जंगल को काट कर उस पर कृषि करने लगते हैं, जिससे जंगल का विस्तार अवरुद्ध हो जाता है |

6. पालतू पशुओं के चारा के लिए :- जंगल में प्रवेशन  क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण भी अपने पशुओं को चराने के लिए पशुओं को जंगलों में छोड़ देते हैं, जिसके कारण उनके पालतू पशु जंगल को चारागाह समझ कर चर जाते हैं | अतः इसके कारण जंगली जीव शहरों की ओर आने लगते हैं |

7. प्राकृतिक आपदाएं :- समय-समय पर हमारा पर्यावरण अपने आपको स्वयं स्वच्छ बनाने का प्रयत्न करने लगता है, जिसके परिणाम स्वरूप प्राकृतिक आपदाओं का आगमन होता है | वर्षा के दिनों में बाढ़ और तूफान के कारण भी जंगल नष्ट होते जा रहे हैं |

8. व्यवसाय में विस्तार :- जंगल भी आजकल व्यावसायिक क्षेत्र बनते जा रहे हैं | लोग अपने आप शहर की भीड़ से कुछ दिनों के लिए बचते-बचाते जंगल के रिशॉट में आराम फरमाते हैं | जिसके कारण बहुत से व्यवसायियों ने अपने-अपने रिशॉट जंगल में बना लिए हैं |

9. आपराधिक गतिविधियां :-  जंगलों में कई तस्कर भी पकड़े जाते हैं, जो कीमती लकड़ियों तथा पशुओं के खाल व हड्डी की तस्करी करते हैं | अतः यह जंगल उनके आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं |
  

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