CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 8 लोकतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी क्रांतियां सन 1600 – 1900 – CGBSE Solutions PDF in Hindi

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CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 8 लोकतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी क्रांतियां सन 1600 – 1900


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प्रश्न 01 : भारतीय राजा व बादशाह अपने चहेतों व मंत्रियों से राय – मशविरा करके निर्णय लेते थे | भारतीय और इंग्लैंड की व्यवस्था में क्या कोई अंतर है?

उत्तर : इंग्लैंड में राजा की प्रजा से संवाद की एक व्यवस्था थी जिसे पार्लियामेंट कहते हैं। जब कभी भी राजा को कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता था तो वे पार्लियामेंट को बुलाकर उसकी राय लेता था और यह वहां भी परंपरा बन गई थी कि बिना पार्लियामेंट की सहमति के कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता था। परन्तु वहीं भारत में संसद या पार्लियामेंट जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। बादशाह और राजा अपनी मर्जी से शासन चला सकते थे। वे अपने चहेतों और सलाहकारों से राय जरूर लेते थे लेकिन उनकी सलाह पर चलना उनके लिए अनिवार्य नहीं था। कर बढ़ाने या घटाने के निर्णय राजा अपनी समझ और सूझबूझ से करते थे। इसके प्रजा की कोई कानूनी भूमिका नहीं थी।

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प्रश्न 02 : सन् 1600 से सन् 1688  के बीच इंग्लैंड में संसद और राजा के बीच किन मुद्दों पर मतभेद हुए थे? 

उत्तर : सन् 1600 से सन् 1688  के बीच संसद और राजा की बीच निम्न मुद्दों को लेकर मतभेद थे-

1.संसद राजकीय मामलों में अधिक भूमिका चाहती थी जबकि दूसरी ओर राजा संसद के प्रति जबाब देही नहीं चाहता था।

2. सन् 1603 में जेम्स प्रथम राजा बने। उनका मानना था कि राजा को उसकी शक्ति ईश्वर से मिलती है और वह केवल ईश्वर के प्रति उत्तरदायी हो सकता है। जबकि संसद इस बात का विरोध करने लगी।

3. सन् 1625 में चार्ल्स प्रथम गद्दी पर आसीन हुआ। उसके और संसद के बीच मतभेद बढ़ने लगे। दोनो के बीच कर वसूलने के अधिकार को लेकर झगड़े शुरू हो गए। तब राजा ने संसद की अनुमति के बिना नया कर लगा दिया ओर जबरदस्ती व्यापारियों व भूस्वामियों से धन उधार लेना प्रारंभ कर दिया।

4. 1628 में संसद ने राजा को चेतावनी दी और राजा के सामने अधिकारों का एक विज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें लिखा था कि संसद की सहमति के बिना कोई कर न लिया जाए।

सन् 1640 में एक पड़ोसी देश के विरूद्ध युद्ध होने से राजा का खजाना खाली हो गया था। युद्ध के लिए नए कर लगाने थे जिसके लिए उसे संसद को बुलाना पड़ा और यह युद्ध पांच वर्षो तक चला। सन् 1649 में चार्ल पराजित हुआ और उसे मृत्युदण्ड दिया गया।

5. सन् 1688 में रक्तहीन क्रान्ति हुई तथा विलियम और मैरी को राजा तथा रानी बनाया गया और संसद का स्थान स्थापित हुआ।

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प्रश्न 03 : संसद सदस्यों के चुनाव में राजा हस्तक्षेप न करे – यह व्यवस्था क्यों बनाई गई होगी? 

उत्तर :  यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई होगी जिससे संसद का कार्य निष्पक्षता से हो पाये तथा संसद के सदस्य निष्पक्ष रूप से चुनकर आ सके। अगर राजा द्वारा इन चुनावों में हस्तक्षेप होता तो संसद जनता का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाती और सभी प्रतिनिधि राजा के समर्थक ही चुन लिए जाते। अतः यह व्यवस्था इसलिए रखी गई कि संसद के प्रतिनिधि जनता की इच्छा से ही चुने जाएं न की राजा की मर्जी से। 

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प्रश्न 04 : संसद में कुछ भी कहने का अधिकार (राजा के विरोध में भी) अगर न होता तो क्या होता? 

उत्तर : यदि राजा के विरोध में संसद में कुछ भी कहने का अधिकार नहीं होता है तो राजा निरंकुश और तानाशाह हो जाता और संसद की महत्वा व सर्वोच्चता भी समाप्त हो जाती।

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प्रश्न 05 : रूसो ने अपने समाज की बुराइयों व समस्याओं पर विचार करके उनसे निकलने के कुछ तरीके सुझाए |क्या आप भी कभी इन बातों पर सोचते है? अपने विचारों पर कक्षा में सबके साथ चर्चा करें| 

उत्तर : रूसो ने अपने समाज की बुराइयों व समस्याओं पर बड़ा ही अनोखा व मनोवैज्ञानिक तरीका सुझाया | उनके अनुसार इस समस्या का हल यही हो सकता है कि सारे लोग मिलकर एक नया सामाजिक अनुबंध करें, जिसके तहत वे अपने प्राकृतिक अधिकारों या इच्छाओं को प्राथमिकता न देकर सामुदायिक निश्चय को प्राथमिकता दें | यह निश्चित सब लोगों के विचार विमर्श और न्याय के सिद्धांतों के आधार पर बनेगा | सामुदायिक निश्चय को प्राथमिकता देने पर कोई इंसान किसी ताकतवर या धनी व्यक्ति की इच्छाओं से संचालित नहीं होगा| रूसो के यह सिद्धांत आने वाले युग में लोकतांत्रिक आंदोलनों के आधार बने | हां हम सभी समस्याओं पर सघन विचार करते हैं और लोगों की विचारधारा से पूर्ण रूप से सहमत हैं | यदि समाज बुराइयों से युक्त होगा तो समानता का सेतु कभी बन पाएगा | समाज के लिए आवश्यक है कि समानता व स्वतंत्रता जैसी बुनियादी अधिकार सभी वर्गों को समान रूप से प्राप्त हो सके  |

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प्रश्न 06 : क्या आज के संदर्भ में किसी देश , गाँव या शहर में सामुदायिक निश्चय बन सकता है? अगर बनाना हो तो उसके लिए किस तरह की तैयारी की जरूरत होगी? 

उत्तर : हां आज के संदर्भ में भी सामुदायिक निश्चय बन सकता है यदि हमारी और समाज की इच्छा शक्ति प्रबल है तो हम रेगिस्तान में भी फूल खिलाने का दम रखते हैं अगर हमें गांव में सामुदायिक निश्चय बनाना है तो इसके लिए निम्न तैयारी करनी होगी :- 

1.गांवो में जो भूमि पति था, धनी वर्ग है, अथवा जिनके पास आवश्यकता से अधिक भूमि है, उन लोगों को अपनी संपत्ति से मोह भंग करना होगा, तथा गांव की सारी संपत्ति भूमि, कृषि, भवन आदि सार्वजनिक करने होंगे |

2. निजी संपत्ति व अवैध धनसंपदा से भी सभी को अपना स्वामित्व छोड़ना होगा |

3. सभी उत्पादन कार्य सार्वजनिक होने चाहिए तथा सभी लोग अपनी क्षमता अनुसार कार्य करें व सभी को आय का वितरण आवश्यकतानुसार व समान रूप से किया जाना चाहिए |

4. एक ऐसा संविधान बनाना होगा जिससे सभी वर्ग के लोगों में एक समानता का भाव स्थापित हो तथा सभी को सर्वोत्तम स्थान प्राप्त हो और स्वार्थी लोगों को अपने स्वार्थ का भी त्याग करना होगा |

5. हमें अपना अहम छोड़कर लोक कल्याण के लिए तन मन से एकाग्रचित  होकर जन सेवा भाव के लिए प्रयत्नशील रहना होगा |

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प्रश्न 7 : अमेरिका के लोग स्वयं को इंग्लैंड राष्ट्र का हिस्सा क्यों नहीं महसूस कर पा रहे थे जबकि उनके पूर्वज इंग्लैंड से आये थे , उनकी भाषा भी अंग्रेजी ही थी और धैर्य में भी समानता थी?  

उत्तर : अमेरिका में बसे हुए बहुत से ऐसे लोगों के पूर्वज इंग्लैंड से ही आए हैं जो यहां कृषक व्यापारी और कारीगर के रूप में कार्यरत हैं | अमेरिकी उपनिवेशों  के लिए इंग्लैंड की संसद कानून बनाती थी, परंतु वहां के लोगों को इस संसद के लिए प्रतिनिधि  चुनने का अधिकार नहीं था | संसद ने जो कर व शुल्क लगाये और कानून बनाए वे अमेरिकी उपनिवेश के निवासियों के हित में नहीं बल्कि इंग्लैंड के व्यापारियों व व्यवसायियों के हित में थे। ये कर तो देते थे परन्तु इंग्लैण्ड की संसद के प्रति बिल्कुल भी जिम्मेदार नहीं थी। इन्हीं कारणों से अमेरिका के लोग इंग्लैंड राष्ट्र का हिस्सा स्वयं को नहीं समझते थे। 

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प्रश्न 8 : अमेरिका स्वतंत्रता के घोषणा – पत्र ने ऐसे कौन से विचार थे जो लॉक व रूसो के विचारों से मिलते थे ? 

उत्तर : अमेरिकी स्वतंत्रता के घोषणा पत्र में लोक और रूपों के विचार एक विशेष स्थान रखते हैं | उनका मानना था कि राजा, मंत्री या सरकार को सत्ता आम लोगों से ही मिलती है. समाज में सभी मनुष्य एक समान है, तथा सभी को शासन में भाग लेने का एक समान अधिकार प्राप्त है | शासन की संपूर्ण शक्ति तीनों अंगों अर्थात राजा, मंत्री या सरकार में बराबर बंटी होनी चाहिए | ईश्वर ने सभी मनुष्यों को एक समान बनाया है, सभी को जीने का अधिकार और स्वतंत्र रहने का अधिकार समान रूप से मिलना चाहिए | सरकार को अपने कर्तव्य का पालन बिना किसी भेदभाव के करना चाहिए | यदि वह ऐसा नहीं करता है तो सरकार के अधिकार को बदल देना चाहिए |

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प्रश्न 9 : क्या आप इस बात से सहमत है की ईश्वर ने हरेक मनुष्य को जीवन स्वतंत्रता और सुख प्राप्त करने का अधिकार दिया है?

उत्तर : हां मैं इस बात से पूर्ण रूप से सहमत हूं कि ईश्वर ने सभी जीवो को एक समान अधिकार दिया है, परंतु हम मनुष्य पृथ्वी पर सबसे बुद्धिजीवी हैं, हमने अपने अधिकार क्षेत्रों को अपनी जरूरत व ताकत के बल पर निश्चित कर दिया है | ईश्वर ने तो सभी को एक समान रूप से जीवन जीने का अधिकार दिया है| इसी कारण सभी लोकतांत्रिक देशों ने समानता का अधिकार भी बनाया है | किसी के जीवन पर प्रतिबंध एक कानूनी प्रक्रिया मानी जाती है, सभी को स्वतंत्रता का एक समान अधिकार ही प्राप्त है | जब तक कि वह एक दूसरे व्यक्तियों की स्वतंत्रता में बाधा न उपस्थित करें | अपनी आजादी व खुशी को प्राप्त करने का अधिकार सभी को एक समान रूप से ही मिला है | इन सभी अधिकारों को प्राप्त करने के लिए अर्थात सत्ता के संचालन के लिए सरकार बनाई जाती है | यदि कोई व्यक्ति सत्ता का हनन करता है तो आप लोगों को यह अधिकार भी है कि वे ऐसी सरकार को खत्म कर दे या बदल दे और पुनः नई सरकार का गठन करें |

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प्रश्न 10 : अमेरिका में उस समय महिलाओं को मताधिकार नहीं दिया गया था | उन दिनों अमेरिका के खेतो में काम करने के लिए अफ्रीका के लोगों को दास बनाकर लाया गया था | उन्हें भी मताधिकार नहीं दिया गया | महिलाओं और दासो को मताधिकार न देने के क्या कारण रहे होंगे? क्या आपको यह तर्क संगत लगता है? अपने विचार बताएं |

उत्तर : अमेरिका में उस समय महिलाओं और दासों को अपना मत देने का अधिकार नहीं दिया गया था। क्योंकि यह माना गया था कि महिलाओं का कार्य क्षेत्र घर के अंदर सीमित है उन्हें सार्वजनिक जीवन में नहीं आना चाहिए यही कारण हो सकता है कि उन्हें मताधिकार से वंचित रखा जाता होगा। इसी प्रकार अमेरिका में यह भी परंपरा थी कि वहां खेतों में दासों के बिना कृषि कार्य संभव ही नहीं था। अतः उन्हें भी मताधिकार से दूर रखा जाता रहा होगा। ये बात बिल्कुल भी तर्क संगत नहीं थी । इसी कारण आगे चलकर अमेरिका में अब्राहम लिंकन के राष्ट्रपति काल में दास प्रथा को ही समाप्त कर दिया गया। किसी भी व्यक्ति का यह सोचना कि महिलाओं का कार्यक्षेत्र घर के भीतर ही सीमित है अतः उन्हें सार्वजनिक क्षेत्रों में अधिकार न दिया जाना न्याय संगत अथवा अनुचित था। दासों का शोषण माना तथा उन्हें एक निश्चित धुरी में बांध कर रखना भी अनुचित है।

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प्रश्न 11(i) : इसमें पुरुषों के लिए किस – किस तरह की स्वतंत्रता की बात की गई है?

उत्तर : पुरुष स्वतंत्र पैदा होते है, स्वतंत्र है और उनके अधिकार समान होते है | हर व्यवस्था का लक्ष्य पुरुष के नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा करना है।

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ii) : किसी को लोगों पर शासन करने का अधिकार कौन दे सकता है? 

उत्तर : राज करने का अधिकार का स्रोत राष्ट्र की जनता है। कोई भी समूह या व्यक्ति जनता की स्वीकृति के बिना राज्य करने का अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता।

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iii) : कानून किन बातो पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता है? 

उत्तर : कानून उस बातों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जो समाज के लिए हानिकारक नहीं है। अर्थात कानून जनता के अधिकारों और राज्यों की संप्रभुता के बीच हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

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iv) : कानून बनाने की प्रक्रिया क्या होगी? 

उत्तर : कानून सामुदायिक निश्चय की अभिव्यक्ति है। अर्थात सामाजिक नियमों को बचाना ही कानून का उद्देश्य होगा। सभी नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से कानून के निर्माण में भाग लेने का अधिकार है। अर्थात सामाजिक प्रतिनिधियों के माध्यम से कानून बनाने की प्रक्रिया पूर्ण होगी। इसलिए व्यक्तिगत रूप से या व्यक्ति के द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से ही कानून बनाने की प्रक्रिया सर्वाधिक उपयुक्त होगी।

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v) : किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता उससे किन परिस्थितियों में और किन तरीको से छीनी जा सकती है? 

उत्तर : किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से यदि समाज को हानि पहुंचती है या स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने पर कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उस पर कार्यवाही की जा सकती है। स्वतंत्रता पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

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vi) : फ्रांस में पहले कर के सम्बन्ध में नियम थे और इस घोषणा –  पत्र में क्या नया प्रावधान किया गया? 

उत्तर : फ्रांस में पहले कर के संबंध में नियम था कि तृतीय एस्टेट्स जिसमें सामान्यवर्ग आते थे उन्हें ही राजा को कर देना पड़ता था परन्तु घोषणा पत्र के बाद सेना व प्रशासन के खर्चे चलाने के लिए एक सामान्य कर लगाना अपरिहार्य है। सभी नागरिकों पर अपनी आय के अनुसार समान रूप से कर लगाया जाना चाहिए।

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प्रश्न 12 : फ्रांस की क्रांति में महिलाओ और पुरुषो दोनों ने ही भाग लिया फिर क्यों महिलाओ को पुरुषो के बराबर अधिकार नहीं दिए गए? 

उत्तर : फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं और पुरुषों दोनो ने भाग लिया था लेकिन पुरूषों के बराबर महिलाओं को अधिकार नहीं मिले इसके निम्न कारण हो सकते हैं – 

उस समय के चिंतन यह मानते थे कि महिलाओं को कार्यक्षेत्र घर के अन्दर ही सीमित है अतः उन्हें सार्वजनिक जीवन में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

चूंकि सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकार को केवल पुरूषों के लिए रखा गया । इसी धारणा के चलते फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं को मताधिकार नहीं दिया गया और उन्हें नागरिक अधिकारों के दायरे से बाहर रखा गया। 

यही कारण हो सकते है कि महिलाओं को पुरूषों के बराबर अधिकार नहीं दिये गए।

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प्रश्न 13 : अगर अभिजात वर्ग और गरीब जनता दोनों को 1791 का संविधान स्वीकार नहीं था तो वह किसे स्वीकार्य रहा होगा? 

उत्तर : सन् 1791 के संविधान में बहुसंख्यक फ्रांसीसी खुश नहीं थे क्योंकि उसमें केवल संपत्तिवालों को सक्रिय नागरिक माना गया था। उस समय लोग राजनीतिक क्लबों में एकत्र होकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते थे। ये क्लब आज की राजनैतिक पार्टियों में प्रारंभिक रूप थे। इनके जैसे को बिन क्लब सबसे लोकप्रिय था। इस क्लब के सदस्य समाज के कम समृद्ध तबकों से आते थे। इनमें छोटे दुकानदार, कारीगर, नौकर और दिहाड़ी मजदूर शामिल थे। इनका नेता मैक्समिलियन रोबेस्पेयर था।

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प्रश्न 14 : राजा लुई सोलहवाँ और उसकी पत्नी मेरी को मौत के घाट क्यों उतारा गया? 

उत्तर : सन् 1792 मे पड़ोसी देशों ने राजा लूई सोलहवें के समर्थनप में फ्रांस पर हमला बोल दिया। इससे कुछ होकर तथा महंगाई एंव अभाव से नाराज पेरिस वासियों ने एक विशाल हिंसक विद्रोह शुरू कर दिया। 10 अगस्त सन् 1792 की सुबह उन्होने राजा जी महल पर धावा बोल दिया। राजा के रक्षक मारे गए और राजा को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया गया। नए चुनाव कराये गये। इस चुनाव में 21 वर्ष से अधिक उम्र वाले सभी पुरूष चाहे उनके पास संपत्ति हो या नहीं को मताधिकार दिया गया लेकिन महिलाओं को अभी भी वंचित रखा गया। विनिर्मित असेंवली को कन्वेंशन का नाम दिया गया। जिसने 21 सितम्बर सन् 1792 को राजतंत्र का अंत करने की घोषणा कर दी। फ्रांस को गणतंत्र घोषित किया गया। लूई सोलहवों और बाद में उसकी पत्नी मेंरी को देशद्रोह के अपराध में मौत की सजा सुनाई गई।

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प्रश्न 15 : जापान को आधुनिक राष्ट्र राज्य बनाने के लिए सामंतो की स्वायतता ख़त्म करना क्यों जरुरी था?  

उत्तर : जापान को आधुनिक राष्ट्र बनाने हेतु सामंतों की स्वायत्तता को खत्म किये बिना, दरों एकीकृत केन्द्रीय शासन स्थगित नहीं किया जा सकता था। जबकि जापान के विकास हेतु यह आवश्यक था कि सामन्तों की स्वायत्तता समाप्त की जाएं और पूरे देश में एक समान कानून लागू किए जाएं। इसके अलावा सामन्त अपने क्षेत्रों में किसानों से बहुत अधिक लगान वसूल करते हैं। और उन्हे बेगारी भी करनी पड़ती थी। हां निश्चय ही इससे सामन्तों द्वारा मनमाना लगान वसूल करने की नीति में अंकुश लगा होगा। इसका एक और कारण प्रजा के लिए कानूनी समानता का ऐलान करना भी प्रमुख था।

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प्रश्न 16 : भारत जैसे विशाल और विविधता भरे देश में लोग एक राष्ट्रीय भावना के तहत एकजुट हुए ,इसके पीछे क्या कारक दिखाई देते है –  चर्चा कीजिये | 

उत्तर : भारत विशाल और भौगोलिक सांस्कृतिक विविधताओं को देश है। जहां संस्कृति जड़वत नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में भिन्नता का त्यागकर ही स्वतंत्रता की लड़ाई को सफल किया जा सकता था। भारत में ब्रिटिश साम्राज्य स्थापित होने के बाद अंग्रेजों ने पूरे देश में एक समान प्रशासन लागू किया गया जिससे भारतीयों में राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास हुआ। ब्रिटिश शासन काल में आवागमन ऐसे संचार साधनों के विकास के कारण अब देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे से मिल सकते थे। इससे लोगों को एकता की भावना का विकास हुआ। जातीय एवं क्षेत्रीय विविधताएं होने के बावजूद पूरे भारत के लोग एक समान आर्थिक शोषण की नीतियों का विरोध किया। अंग्रेजों ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा लागू की जिससे अब अंग्रेजी ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा लागू की जिससे अब अंग्रेजी पढ़े-लिखे लोग भारत की भाषाई विविधता के होते हुए भी अंग्रेजी को एक संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग कर रहे थे, इस संपर्क भाषा ने उन्हें एकजुटकर दिया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद भारतीय लोगों को एक भारतीय मंच प्राप्त हो गया। इस मंच पर अब भारतीय क्षेत्रवाद भाषा धर्म से ऊपर उठकर एक मंच पर एकत्रित हुए और उनके बीच राष्ट्रीय एकता की स्थापना हुई। भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के नेता विभिन्न वर्गों जातियों क्षेत्रों से आये थे लेकिन इन्होंने भारत की जनता को एक लक्ष्य के लिए एकत्रित किया जिससे प्रेरित होकर भारतीयों में राष्ट्रवाद की भावना मजबूत हुई।

अभ्यास :

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प्रश्न 01 : इंग्लैण्ड की संसद ने ऐसे कौन से कदम उठाए जिससे निरंकुश वाद समाप्त किया जा सका?  

उत्तर : इंग्लैण्ड की संसद को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़े जिससे निरंकुशवाद को सम्पूर्ण रूप से समाप्त किया जा सके। जिसके अन्तर्गत जेम्स द्वितीय की निरंकुशता को रोकने के लिए 1688 में जेम्स की बेटी मैरी और उसके पति विलियम को इंग्लैण्ड की गद्दी संभालने के लिए आमंत्रण भेजा गया। संसद ने मेरी और उसके पति के सामने निम्नलिखित शर्तें रखाी-

1 सभी कानून संसद की सहमति से ही बनेगा।

2 कानून को रद्द करने की सहमति भी संसद ही देगा।

3 बिना संसद की सहमति के कोई नया कर न लगाया जाए।

4 संसद के चुनाव में राजा की सहभागिता या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

5 अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए किसी भी संसद सदस्य को बंदी नहीं बनाया जा सकेगा।

6 सेना का विस्तार भी बिना संसद की सम्मति के न किया जाये।

7 संसद की बैठक नियमित रूप से संचालित की जानी चाहिए।

इस सभी शर्तों को मानने के बाद मैरी को रानी और विलियम केा राजा का पद्भार सौंपा गया। इस तरह रक्तहीन क्रांति से निरंकुशवाद समाप्त हुआ और बदले में संवैधानिक राजतंत्र बना था। लोकतंत्र की ओर बढ़ता हुआ पहला कदम माना गया। समस्त प्रजा को अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता कानून के समक्ष समानता आदि अधिकार दिये गये।

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प्रश्न 02 : अमेरिका के संविधान के मुख्य  लेखक कौन थे? इस संविधान की विशेषताओं का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए |

उत्तर : अमेरिका संविधान के मुख्य लेखक “थॉमस जैफरसन” जी थे। इस संविधान की प्रमुख विशेषताएं निम्न थी –

1 लिखित संविधान – यह संसार का पहला लिखित संविधान था जिसके द्वारा अमेरिका के लोकतंत्र की स्थापना हुयी।

2 नागरिक अधिकार – संविधान के अंदर नागरिकों के अधिकारों का भी उल्लेख किया गया। जिसके माध्यम से नागरिकों को अपने विचारों की अभिव्यक्ति और समानता का अधिकार भी प्राप्त था। यह स्वतंत्रता का अधिकार उन्हें सम्मान जनक व्यक्तित्व तथा समानता को जीवंत रखने की प्रेरणा देता था। 

3 संघीय शासन प्रणाली – संघीय शासन प्रणाली के अन्तर्गत अमेरिका में संवैधानिक संघीय शासन को अपनाया गया। वहां पर दो प्रकार की सरकारों का गठन किया गया। पहली केन्द्र सरकार और दूसरी राज्य सरकार।

4 शक्तियों के विभाजन की व्यवस्था – शक्तियों का विभाजन निम्न इकाइयों के माध्यम से संभव हो पाया जैसे कि कार्यपालिका विधायिका व न्यायपालिका अर्थात अमेरिका में शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत को अपनाया गया। ये इकाइयाँ एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी।

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प्रश्न 03 : आपने इंग्लैंड , अमेरिका , फ्रांस के बारे में पढ़ा है | इन देशो के ‘ सन्दर्भ ‘ में निम्नाकित को पहचाने | 

अ ) जहां राजा के कुछ अधिकार क्रांति के बाद भी बने रहे | 

उत्तर : इंग्लैंड |

आ ) वह देश जिसने नारा दिया – ‘no taxation without representation’ | 

उत्तर : अमेरिका |

इ ) पुरुष एवं नागरिक अधिकार घोषणा – पत्र 

उत्तर : फ्रांस |

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प्रश्न 04 : तोकुगावा शोगुन और जापानी राजा के संबंधों के बारे में मुख्य बातें बताएं | 

उत्तर : 1603 – 1867 के समय तोकुगावा परिवार के लोग शासन पद पर आये। उस समय जापान में शोगुन  पद पर आये। उस समय जापान में शोगुन  के अधीन 250 सामन्त शासन कर रहे थे। जापानी राजा नाममात्र का शासक था जिन्हें गुजारे के लिए चावल की प्राप्ति और कुछ विशेषाधिकार थे। जापान में सम्राट सत्ता में सर्वोच्च स्थान पर होता था और शो गुन  उसके सेनापति होते थे। लेकिन बारहवीं सदी के बाद वास्तविक सत्ता शोगुन  के हाथों में आ गई। यूरोपीय साम्राज्यवाद से जापान को बचाने के लिए शो गुन  ने 1824 में यह फैसला लिया कि वे पश्चिमी देशों से व्यापार नहीं करेंगे। और कोशिश करेंगे कि वे उनके संपर्क में न आए। लेकिन 1853 में अमेरिका जापान में हुए समझौते के कारण 1868 आते – आते समुदाय वर्ग ने शो गुन  को सत्ता विहीन करने के लिए सामन्तों व धनिकों की सहायता से सशस्त्र आन्दोलन चलाया जिसका परिणाम हुआ कि मेईजी को जापान की सत्ता सौंप दी गई। इस प्रकार जापान में लगभग 700 वर्षों के बाद सत्ता शौगुनों के हाथों से निकलकर पुनः सम्राट (मेइजी) के हाथों में आ गई।

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प्रश्न 05 : सत्याग्रह से आप क्या समझते है – उसको अपने शब्दों में लिखिए | 

उत्तर : सत्याग्रह से आशय है कि एक ऐसा तरीका जिसमें अन्याय के खिलाफ सत्याग्रही सबसे पहले उस अन्यायपूर्ण व्यवस्था या कानून को मानने से मना कर देते हैं। और प्रयास करते हैं कि अत्याचारी का हृदय परिवर्तित हो जाये। अर्थात सत्य के प्रति डटे रहना ही सत्याग्रह कहलाता है। सत्य का आग्रह अहिंसा द्वारा किया जाता है। यह एक ऐसी पद्धति है जिसमें अन्याय के खिलाफ सत्याग्रही सबसे पहले अन्यायपूर्ण व्यवस्था या कानून को मानने से मना कर देता है।

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प्रश्न 06 : कर लगाने पर इंग्लैंड की संसद का नियंत्रण किस प्रकार राजशाही पर अंकुश लगा सकता था? 

उत्तर : ब्रिटेन में 1603 से 1688 तक राजा और संसद के बीच मूलरूप से इसी कारण संपर्क चलता रहा कि राजा को कर लगाने का अधिकार नहीं है और कर संसद की अनुमति के बिना नहीं लगाए जाने चाहिए। यदि कर लगाने पर संसद का नियंत्रण हो जाता तो इससे राजा की तो सारी निरंकुश शक्तियों पर अंकुश लगा सकता था, क्योंकि इन्हीं करों से प्राप्त धनराशि में राजा सेनाओं का निर्माण करता था और उसी सैन्य शक्ति से अपनी निरंकुश सत्ता को लागू करता था। अतः निश्चित रूप से कर लगाने पर यदि संसद का नियंत्रण हो जाता तो राजशाही पर अंकुश लगाया जा सकता था। 

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प्रश्न 07 : रूसो मानता था की संपत्ति के कारण मानव समाज विकृत हुआ और इससे मनुष्य की स्वतंत्रता ख़त्म हुई | आपको इसके पीछे क्या तर्क दिखाई देते है?

उत्तर : रूसो एक प्रसिद्ध दार्शनिक लेखक तथा संगीतकार थे। रूसों का यह मानना कि संपत्ति के कारण ही मानव समाज विकृत हुआ है यह तर्क शत्प्रतिशत सत्य प्रतीत होता है। क्योंकि समय के साथ निजी संपत्ति कार्य का विभाजन, असमानता और सभ्यता के विकास के साथ मनुष्य विकृत होता चला गया। धनी और ताकतवर लोग अपनी इच्छा बाकी लोगों पर थोपने लगे। मनुष्य के बीच असमानता को बनाए रखने के लिए लोगों के अधिकारों व स्वतंत्रता को न करना जरूरी हो गया। संपत्ति के कारण ही समाज में वर्ग विभाजन एवं संघर्ष की स्थिति पैदा हुई है। आज समाज में जितने झगड़े और विवाद होते हैं उनमें अधिकांश के पीछे संपत्ति विवाद ही होते हैं। इन्हीं मानसिकताओं के कारण ही मनुष्य की स्वतंत्रता खत्म हुई है।

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प्रश्न 08 : अमेरिका के स्वतंत्रता संघर्ष के पीछे क्या कारण थे?अपने शब्दों में बताइए | 

उत्तर : विश्व के इतिहास में अमेरिका के स्वतंत्रता का विशेष स्थान है | 17वीं और 18वीं सदी में इंग्लैंड ने उत्तरी अमेरिका में अपने उपनिवेश स्थापित किए | इस स्वतंत्रता युद्ध में पहली बार किसी यूरोपियन उपनिवेशवाद तथा वाणिज्यवाद को चुनौती दी गई |इस स्वतंत्रता के संघर्ष के पीछे निम्न कारण थे :- 

1.अमेरिका में उपनिवेशों पर राजनीतिक प्रतिबंध :-  अमेरिका में इंग्लैंड से जो 13 उपनिवेश थे, उनके इंग्लैंड अपने गवर्नर नियुक्त करता था, यह गवर्नर उपनिवेशों के प्रति उत्तरदायी न होकर ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदाई होते थे | इसके अलावा बड़े-बड़े पदों पर केवल अंग्रेज ही नियुक्त होते थे | उपनिवेश वासियों को सरकारी पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता था | फलस्वरूप उपनिवेश वासियों में ब्रिटेन के प्रति आक्रोश था | 

2. ब्रिटिश सरकार की व्यापारिक नीति :-  ब्रिटिश व्यापारिक नीतियों में उपनिवेशों  के हितों की उपेक्षा की जाती थी | अमेरिका के लोगों को व्यापार करने की अनुमति नहीं थी | इंग्लैंड उपनिवेशों  से कच्चा माल सस्ते दामों में खरीद कर, तैयार माल उन्हीं के बाजारों में अधिक दामों पर बेचते थे | परिणामस्वरूप  उपनिवेशों का आर्थिक शोषण हो रहा था |

3. मध्यम वर्ग का उदय :-  इस संघर्ष में सबसे अहम भूमिका थी मध्यम वर्ग की | इस समय कई लोग इंग्लैंड की धार्मिक यातनाओं से परेशान होकर अमेरिका भाग आए तथा यहां बस गए थे | वह ऐसा राज्य चाहते थे, जो उनके व्यापारिक हितों की रक्षा करें और कम कर लगाए | इसी दौर में अनेक राजनीतिक विचार हुए, जिन्होंने निरंकुश राजाशाही का विरोध किया और लोकतंत्र को समर्थन किया | ये सभी अंग्रेजी सिपाहियो से अच्छी तरह लड़ सकते थे | अतः उन्होंने आगे की रणनीति बनाना शुरू कर दिया |

4. ब्रिटिश सरकार की व्यापारिक नीति :- ब्रिटिश की व्यापारिक नीतियों में उपनिवेशों के हितों की उपेक्षा की जाती थी। अमेरिका में लोगों को सामान बनाने पर प्रतिबंध लगा हुआ था | अर्थात अमेरिका के लोगों को व्यापार करने की अनुमति प्रदान नहीं थी | इंग्लैंड उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ते दामों में खरीद कर, तैयार माल उन्हीं के बाजारों में अधिक दामों पर बेचते थे | फलस्वरुप देशों का आर्थिक शोषण हो रहा था, इसके अलावा कारीगर, किसान, मजदूर आदि थे जो सामंती व्यवस्था से त्रस्त थे | वे न केवल राजा व संतों की मनमानी खत्म करना चाहते थे बल्कि समाज में बुनियादी परिवर्तन लाना चाहते थे, ताकि ऊंच-नीच का अंतर मिट जाए | इन सभी समस्याओं के कारण उपनिवेश वासियों का असंतोष होना स्वाभाविक था |

5. प्रतिनिधि का अभाव :-  अमेरिका उपनिवेशों के लिए इंग्लैण्ड की संसद कानून बनाती थी,परन्तु यहां के लोगों को इस संसद के लिए प्रतिनिधि चुनने का अधिकार नहीं था। जिसके कारण से लोगों में भारी असंतोष था। 

6. त्रुटिपूर्ण नीतियों का बनना :-  ब्रिटिश की संसद ने अमेरिका के लोगों पर जो शुल्क व कर लगाए तथा उनके लिए कानून बनाए, वह इंग्लैंड के व्यापारियों व व्यवसायियों के हित में थे, न कि अमेरिकी उपनिवेश वासियों के हित में थे | इसके चलते अमेरिका ने नारा दिया कि “बिना प्रतिनिधित्व के कोई कर नहीं” अतः राजा ने इसे बगावत माना और सन 1775 में अमेरिका पर युद्ध की घोषणा कर दी  |

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प्रश्न 10 : फ्रांस की घोषणा पत्र  की बाते अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा से किस तरह समान है? 

उत्तर : फ्रांस के घोषणा पत्र की बाते तथा अमेरिका के स्वतंत्रता की घोषणा में जो समानता थी वह यह थी कि दोनों ही देश के आम लोगों को मानवाधिकार विशेषकर जीवन, स्वतंत्रता और समानता प्रदान कर के पक्ष में थे।

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प्रश्न 11 : पुरुष एवं नागरिक अधिकार घोषणा – पत्र यह पढ़कर आप क्या समझ पाए की वे लोग महिलाओं के बारे में क्या सोचते थे |  

उत्तर : पुरूष एवं नागरिक अधिकार घोषणा पत्र यह दोनों ही पढ़ने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि वे लोग महिलाओं को लेकर दोहरी मानसिकता अपनाते हैं। उनकी विकृत सोच के अनुसार महिलाओं का कार्यक्षेत्र घर के अन्दर है। और उन्हें सार्वजनिक जीवन में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं को दखल नहीं होना चाहिए। इस कारण सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकार को केवल पुरूषों के लिए रखा गया। इसी सोच के चलते फ्रांसीसी क्रांति में भी महिलाओं को मताधिकार नहीं दिया गया और पुरूष को नागरिक अधिकारों के दायरे में रखा गया था।

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प्रश्न 12 : आज हम भारत में जिन मौलिक अधिकारों की बात करते है उनकी शुरुआत फ्रांसीसी क्रांति से किस प्रकार हुई लगती है? 

उत्तर : फ्रांसीसी क्रांति में नागरिक अधिकार पत्र की घोषणा की गई थी उनमें स्वतंत्रता संपत्ति की सुरक्षा, शोषण के प्रतिरोध के अधिकार की बात कही गई थी। ये सभी भारतीय मौलिक अधिकारों में शामिल है। फ्रांस की क्रांति के बाद लोकतंत्र की स्थापना से मौलिक अधिकारों की शुरुआत हुई। इसके तहत हमें जो भी मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्राप्त है, उनकी बात पहली बार सार्वजनिक रूप से हम फ्रांस की क्रांति के दौरान में घोषणा पत्र में की गई थी, अतः इसकी शुरुआत फ्रांस की क्रांति से हुई लगती है।

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प्रश्न 13 : अलग – अलग देशों में हुई लोकतांत्रिक क्रांतियों में गरीब तबको विशेषकर किसानों की क्या भूमिका थी? 

उत्तर :विभिन्न देशों में हुई लोकतांत्रिक क्रांतियों में मुख्य कारण गरीब तबका विशेषकर किसान बना क्योंकि 95 प्रतिशत आबादी में किसानों की संख्या अधिक थी जिस पर ही सर्वाधिक कर का बोझ लाद कर शोषित किया गया। वह वर्ग यह था जिसे पूरी तरह अधिकारों से वंचित किया गया इसलिए विद्रोहों की कड़ी में किसान एक प्रमुख कारण बना जैसे कि –

इंग्लैंड – इंग्लैंड में किसान मजदूर और कारीगर सामंती व्यवस्था से त्रस्त थे। ये सभी लोकतंत्र तथा गणतंत्र  के पक्ष में थे और यह चाहते थे कि जमीन जैसे उत्पादन साधन पर सबका समान अधिकार हो और सब लोगों मेहनत से अपनी आजीविका कमाएं। चार्ल्स प्रथम को हटाने में इस वर्ग की प्रमुख भूमिका थी फिर भी रक्तहीन क्रान्ति में गरीब तबकों के सत्ता से बाहर रखा गया।

अमेरिका – अमेरिकी मूल निवासी की 13 उपनिवेश के रूप ब्रिटिश शोषण का शिकार था जिसमें भी अधिकांशतः किसान कारीगर व अन्य समुदाय थे। अमेरिकी क्रांति का श्री गणेश इन्हीं वर्गों की देन थी। हम संघर्ष का ही परिणाम था कि वहां ब्रिटिश नियंत्रण खत्म हुआ।

फ्रांस – फ्रांस का गरीब तबका जो देश के लिए अन्य व श्रम उत्पादक था उन्हें स्टेट्स जनरल में किसी प्रकार के अधिकार नहीं थे। इन्होनें अपने लिए एकजुटता दिखाते हुए राजा के विरुद्ध विद्रोह किया जिसके कारण ही 1789 में सामंती शासन खत्म हुआ राष्ट्र निर्माण का अधिकार स्वतंत्रता बंधुत्व व समानता पर आधारित हुआ।

भारत – भारत में ब्रिटिश शोषण से मुक्ति की प्रथम क्रांति में भी किसान, शिल्पकार दस्तकार और आम लोगों की सहभागिता का ही परिणाम था लम्बा संघर्ष और 1947 में आजादी की प्राप्ति हुई। गांधीजी के आगमन के बाद ग्रामीण किसान तथा गरीब लोग बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ गये, तीसरे दशक में अखिल भारतीय किसान सबका गठन किया गया। तथा किसान ने संगठित होकर लोकतांत्रिक संघर्ष में योगदान किया।

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प्रश्न 14 : जापान और भारत के राष्ट्रवाद में क्या फर्क था? 

उत्तर : जापान का राष्ट्रवाद सामन्तवाद पर आधारित था और भारत का राष्ट्रवाद जनतंत्र का समर्थक था। जापान में लम्बे समय से शोगुनों का शासन चल रहा था और वहाँ के राजा एकान्तवास में थे। इस प्रकार जापान की जनता ने किसी विदेशी शक्ति से नहीं बल्कि अपने ही देश के शासन से संघर्ष कर राजा की सत्ता स्थापित की। इसके विपरीत भारत के विदेशियों अर्थात अंग्रेजों का शासन था। इन विदेशी शासकों के अत्याचार और शोषण के विरुद्ध भारतीय जनता के सभी वर्गों के राष्ट्रवाद से प्रेरित होकर तथा एकजुट होकर संघर्ष किया और ब्रिटिश सत्ता से भारत को मुक्त कर भारत में लोकतंत्र की स्थापना की।

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प्रश्न 15 : मेईजी वंश की पुनर्स्थापना से जापान में क्या बदलाव आए? विस्तार से बताइए  | 

उत्तर : सन् 1868 में समुराई वर्ग ने शोगुन को हटाने के लिए कई सामन्तों तथा धनी व्यापारियों की मदद से एक सशस्त्र आन्दोलन चलाया जिसमें शक्ति रहे और उन्होंने सम्राट मोई जी को जापान की सत्ता सौंप दी। उनकी अपेक्षा थी कि सम्राट के नेतृत्व में जापान एक राष्ट्र के रूप में उभरेगा और पश्चिमी देशों की चुनौती का सामना करेगा। इस समय तक सामन्त अपने-अपने क्षेत्रों में स्वायत्त शासन कर रहे थे। यह व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई। अब कर्मचारियों के माध्यम से जापान में एक केन्द्रीय शासन प्रारंभ हुआ। इसमें पहले के सामन्तों व उनके साथ लोगों को जगह दी गई। सामन्तों के लगान वसूलने का अधिकार छीन लिया गया। अब राज्य सीधे किसानों से लगान वसूल करने लगा। लेकिन सामन्तों को इसकी भरपाई नगदी पेंशन के माध्यम से की गई।

जापान का सामंती वर्ग अपनी पुरानी सत्ता खो बैठा लेकिन वे लोग इस नए युग में एक आर्थिक ताकत के रूप में उभरे, क्योंकि उनको पेंशन के रूप में मोटी रकम मिलती थी। उनके पास राजकीय नौकरी थी और धन भी था, जिससे व्यापार और उद्योगों को निवेश कर सकते थें। जापानी राज्य ने अब तेजी से औद्योगीकरण का कार्यक्रम शुरू किया ताकि जापान एक औद्योगिकृत राष्ट्र के रूप में विकसित हो सके। एक और महत्वपूर्ण कदम था कानूनी समानता का ऐलान। इसके तहत समुराई वर्ग के विशिष्ट अधिकार समाप्त कर दिये गए। जापान में एक दल ने सन् 1882 में यूरोप और अमेरिका के संविधानों के अध्ययन के लिए वहाँ के देशों का भ्रमण किया और एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सन् 1881 में नए संविधान का ऐलान हुआ जिसे मेइजी संविधान कहा जाता है। मेईजी संविधान में जापान की प्रजा को भी कुछ अधिकार दिए गए जैसे – कानून के समक्ष सब की समानता, धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक उपचार विधि द्वारा ही दण्ड दिया जाना आदि। लेकिन स्वतंत्रता के ये अधिकार बहुत सीमित है। 

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प्रश्न 16 : गांधी जी के आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में गति आने के मुख्य कारण आपके अनुसार क्या रहे होंगे? चर्चा करें | 

उत्तर : सन् 1915 में गांधी जी दक्षिण आफ्रीका के शासन के विरूद्ध संघर्ष कर रहे थे, भारत लौटो उन्होने राष्ट्रवादी आन्दोलन और अन्य आन्दोलनों के बीच जुड़ाव बनाया और किसानों, आदिवासियों , मजदूरों महिलाओं व वंचित वर्ग की समस्याओं को राष्ट्रवादी आन्दोलन के तहत उठाया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत में कुछ ऐसी घटनाएं हुई जिनके कारण राष्ट्रीय आन्दोलन में गति आ गई। 1919 ई में ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट लागू किया। परन्तु पूरे देश में इस एक्ट का विरोध किया गया। दूसरी घटना थी 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलिया वाला बाग हत्याकाण्ड की घटना जहां निरपराध और निहत्थे लोगों या गोली चलाकर लगभग 1000 महिला, पुरूष व बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

गांधी जी के आंदोलनों ने भारत में राष्ट्रवाद को बहुत मजबूत बनाया जिसके कारण आम  लोग भी अपने आपको भारत देश का हिस्सा समझने लगे थे। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा की कुल्हाड़ी से गुलामी रूपी जंजीर को काट फेंका। उन्होने कई विसमताओं को दूर किया जैसे- छुआछूत पर रोक, महिलाओं का विकास, किसानों के कल्याण हेतु कृषि देश में साफ-सफाई का कार्य आदि। अंग्रेजो की कई कोशिशों के बावजूद न तो यह राष्ट्रवादी भावना दबाई जा सकी और न ही लोगों को किसी भी तरह का समझौता करके अंग्रेजों के अधीन रहने को तैयार किया जा सका। लोग पूर्ण स्वराज की मांग पर अड़ गया। सन् 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो के नाम से एक विशाल आंदोलन किया गया। 

इन्हीं सब के बीच भारत अगस्त 1947 में भारत और पाकिस्तान दो अलग राष्ट्रों में बंटकर आजाद हुआ। इस प्रकार गांधीजी के सतत प्रयास के कारण ही भारत एक आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र राज्य बना गया।

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प्रश्न 17 : नीचे दी गई सूची में अपने भारत और अन्य देशों में मताधिकार के बारे में क्या फर्क महसूस किया बताइए? सभी वयस्कों को मताधिकार कहां – कब मिला निम्नलिखित तालिका में देखें | 

          देश पुरुष महिला 
इंग्लैण्ड 19181928
अमेरिका 18621920
फ्रांस 18751944
जर्मनी 18711919
इटली 19121945
जापान 19251946
भारत 19501950

उत्तर : ऊपर दी गई तालिका के अनुसार भारत को छोड़कर सभी देशों के पुरूषों को मताधिकार पहले प्राप्त हुआ और महिलाओं को यह अधिकार बाद में मिला लेकिन भारत के मताधिकार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी महिला एवं पुरूषों को एक साथ प्राप्त हुआ। अर्थात् अन्य देशों की तुलना में भारत ही ऐसा देश है जिसने पुरूष-स्त्री दोनों को समानता के आधार पर एक साथ मताधिकार दिया था।

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