CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 9 औद्योगिक क्रांति और सामाजिक बदलाव सन 1750 – 1900 – CGBSE Solutions PDF in Hindi

CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 9 औद्योगिक क्रांति और सामाजिक बदलाव सन 1750 – 1900 are given below for Hindi Medium Students.

CG Board Class 9 SST Solutions Chapter 9 औद्योगिक क्रांति और सामाजिक बदलाव सन 1750 – 1900


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प्रश्न 01  : कारखाने स्थापित करने के लिए उत्तम किस्म के लोहे की क्यों जरूरत थी? 

उत्तर :- कारखाने स्थापित करने के लिए लिए उत्तम लोहे की जरूरत थी क्योंकि कारखानों में भारी -भारी मशीने स्थापित की जाती है, जो कि अच्छा लोहा न होने की वजह से जल्दी खराब हो जाती। तथा रेलवे और पुलों को बनाने के लिए अच्छी लोहे की जरूरत पड़ती है।  बड़ी बड़ी बिल्डिंग खड़ा करने के लिए लोहे की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए, ताकि वह काफी समय तक टिकाऊ हो तथा रख रखाओ का खर्च कम हो सके। 

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प्रश्न 02  : पत्थर कोयले और लकड़ी कोयले में क्या – क्या अंतर होते है? 

उत्तर :- सभी भारी उद्योग को चलाने के लिए पत्थर कोयले और लकड़ी का उपयोग किया जाता है, तथा शुरुवाती दौर में रेलवे को चलाने और बिजली में भी इसका इस्तेमाल होता रहा है | पत्थर, कोयला देर तक ऊष्मा प्रदान करता है, जो लकड़ी, कोयला द्वारा सम्भव नहीं है। लकड़ी कोयले का उत्पादन भी एक गंभीर व जसील प्रकिया है, जिसमे बहुत समय व कम खर्च होता है परन्तु पत्थर कोयला बहुतायत पाया जाता है व कम खर्च में इस्तेमाल हो जाता है, इसलिए पत्थर, कोयला उत्तम होता है। 

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प्रश्न 03 : नई मशीनों के उपयोग के कारण कारखाने स्थापित करना क्यों जरुरी हो गया था? 

उत्तर :- नई मशीनों के कारण लोहा का उत्तम तथा पत्थर, कोयला की उपलब्धता  के कारण भारी औद्योगीकरण हुआ, जिससे अन्य अयस्कों की खोज हुयी, जो कि आसानी से उत्पादित की जाती थी, जिसमे लोहा, सीसा -रांगा आदि उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी सहायक घटक उपलब्ध थे तथा बढ़ती आबादी की जरुरत पूरी  करने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए कारखाना स्थापित करना जरुरी था।  

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प्रश्न 04 : कारखाने स्थापित करने के लिए ‘आरंभिक औद्योगीकरण ‘ किस प्रकार सहायक रहा होगा? 

उत्तर :-आरंभिक औद्योगीकरण मूलतः लोहे की खोज तथा कोयला ही रहा है। जो कि शुरुवाती दौर में भारी मशीनो के बनाने व उनको चलाने में सहायक सिद्ध हुआ।उत्तम  श्रेणी का होने के कारण टिकाऊपन तथा कोयले की काफी समय तक उष्मित होना तथा कम खर्च, कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायक होना था।

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प्रश्न 05 : आजकल कारखाने किस ऊर्जा के स्रोत से चलते है? वह ऊर्जा किसकी मदद से बनाई जाती है? 

उत्तर :- पुराने समय में ऊर्जा का मुख्य स्रोत लकड़ी का कोयला तथा मानव श्रम ही रहा। परन्तु औद्योगिक क्रांति में यह स्त्रोत बदल गया, उसकी जगह पत्थर के कोयला तथा विद्युत  ऊर्जा ने लिया तथा कालांतर में डीजल तथा पेट्रोल की खोज हुयी. आज कल के कारखाने ज्यादातर विद्युत ऊर्जा द्वारा चलाये जाते है तथा डीजल व पत्थर कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। ऊर्जा का उत्पादन ही हम उसी कोयले के द्वारा करते है। जिसमे विद्युत  ऊर्जा प्रमुख है। 

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प्रश्न 06 : जानवर की ताकत या बहती नदी से औद्योगीकरण क्यों संभव नहीं था? 

उत्तर :- सत्रहवीं सदी तक किसी काम को करने  के लिए जानवरों की ताकत या मानव श्रम ही था या फिर नदी बहाव से भी कुछ मदद ली जाती थी, परन्तु यह कार्य अल्प समय के लिए ही सम्भव था, जिसके कारण भारी मात्रा में किसी चीज का उत्पादन संभव नहीं था। तथा बहुत समय व श्रम  खर्च होता था, जो कि औद्योगीकरण  में संभव नहीं था।    

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प्रश्न 07: रेलमार्ग स्थापित करना और कारखाना स्थापित करना इन दोनों में क्या महत्वपूर्ण अंतर है? 

उत्तर :- रेलवे तथा कारखाने दोनों एक दूसरे के पूरक है, जिनके बीच औद्योगीकरण संभव नहीं था. कारखानों के उत्पादित माल को दूर -दूर तक पहुंचना एक चुनौती थी, जिसको रेलवे द्वारा पूरा किया जा सकता था  तथा कारखानों में कच्चे माल तथा लोहा व कोयला की आपूर्ति भी रेलवे द्वारा ही संभव हो सकी  तथा इसमें सबसे महत्वपूर्ण कड़ी श्रमिकों को गांव से औद्योगिक क्षेत्रों तक  पहुंचना था ,जो रेवलेमार्ग द्वारा ही सम्भव था। 

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प्रश्न 11 : भारत में भी सन 1947 के बाद विदेशी सामान के आयात पर अधिक सीमा शुल्क लगाया जाता था | 

उत्तर :- औद्योगीकरण से किसी भी चीज का अत्यधिक उत्पादन किया जाता जिसे बेचने के लिए बड़े बाजार की जरुरत होती है। 

सोलहवीं शताब्दी में राजनैतिक एकता और प्रशासनिक केन्द्रीकरण के कारण सम्पूर्ण ब्रिटेन में एक आर्थिक निति लागु हुयी बाजार व्यवस्था में स्थानीय सामंतों या अधिकारियों का पहले जैसा कोई हस्तक्षेप नहीं तह यानि वे अपने इलाके से होकर गुजरने वाले माल पर कोई क्र नहीं लगा सकते थे। पुरे देश में आंतरिक व्यापार तेजी से बढ़ पाया। 

सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक आते आते ब्रिटेन के लेन -देन में मुद्रा का व्यापक उपयोग होने लगा था इससे पहले अनाज ही लेन -देन का माध्यम था और वस्तु विनिमय व्यापक था। लेकिन व्यपार के बढ़ने से सत्रहवीं सदी से वस्तु विनिमय कम होता गया और मजदुर जमीन का लगान कर आदि नगद के रूप में ही अदा किये जाने लगे इसका एक और महत्वपूर्ण कारण था कृषि का व्यापारीकरण।अब खेती घरेलू उपयोग के लिए नहीं बल्कि बिक्री के लिए होने लगी। अतः गाँवो में भी मुद्रा का चलन बढ़ गया। इससे लोगों को अपनी आमदनी से खर्च करने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त हो गए और वस्तुओं की बिक्री के लिए बाजार का विस्तार हो गया। 

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प्रश्न 12 : लेकिन सन 1990 के बाद से सीमा शुल्क न्यूनतम हो गया | इस बदलती नीति के बारे में शिक्षक की मदद से पता कीजिए और कक्षा में चर्चा कीजिए | 

उत्तर : औद्योगीकरण से किसी भी चीज का अत्यधिक उत्पादन किया जाता जिसे बेचने के लिए बड़े बाजार की जरुरत होती है। 

सोलहवीं शताब्दी में राजनैतिक एकता और प्रशासनिक केन्द्रीकरण के कारण सम्पूर्ण ब्रिटेन में एक आर्थिक निति लागु हुयी बाजार व्यवस्था में स्थानीय सामंतों या अधिकारियों का पहले जैसा कोई हस्तक्षेप नहीं तह यानि वे अपने इलाके से होकर गुजरने वाले माल पर कोई क्र नहीं लगा सकते थे। पुरे देश में आंतरिक व्यापार तेजी से बढ़ पाया। 

सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक आते आते ब्रिटेन के लेन -देन में मुद्रा का व्यापक उपयोग होने लगा था इससे पहले अनाज ही लेन -देन का माध्यम था और वस्तु विनिमय व्यापक था। लेकिन व्यपार के बढ़ने से सत्रहवीं सदी से वस्तु विनिमय कम होता गया और मजदुर जमीन का लगान कर आदि नगद के रूप में ही अदा किये जाने लगे इसका एक और महत्वपूर्ण कारण था कृषि का व्यापारीकरण।अब खेती घरेलू उपयोग के लिए नहीं बल्कि बिक्री के लिए होने लगी। अतः गाँवो में भी मुद्रा का चलन बढ़ गया। इससे लोगों को अपनी आमदनी से खर्च करने के लिए अधिक विकल्प प्राप्त हो गए और वस्तुओं की बिक्री के लिए बाजार का विस्तार हो गया। 

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प्रश्न 08 : अगर देश में हर प्रांत में अलग – अलग मापन हो तो व्यापार में क्या कठिनाई आती? 

उत्तर :– पुराने समय में वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी जो वस्तु के बदले वस्तु से भी परन्तु उसमे व्यपारियो को काफी कठीनाई होती जिसका कारण था कि व्यापारी लोग अपनी वस्तु के बदले मनचाही वस्तु नहीं मिल पाती उनके वस्तु का उचित मूल्य प्राप्त नहीं होगा जो कि हर प्रान्त में अलग मापन निर्धारित होगी  तथा मापन भिन्न के कारण हर प्रान्त के लिए अलग अलग दरें बनानी पड़ेगी तथा काफी लम्बी हिसाब किताब प्रक्रिया होगी हर प्रान्त के कर -बिक्री तथा लेन -देन में काफी मुश्किल होगी।  

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प्रश्न 9:- यदि देश में हर प्रांत में अलग – अलग मुद्रा का चलन होता तो व्यापारियों को क्या कठिनाई होती? 

उत्तर :- काफी अनुभव व समय के बाद यह महसूस किया गया कि किसी भी विनिमय के लिए एक मुद्रा का चलन किया जाए जो कि सभी जगहों तथा पुरे देश में सार्वभौमिक हो जिस कारण व्यापार तथा आम आदमी आसानी से लेन देन कर सके। अलग अलग मुद्रा देने से बिक्री दर में दिक्क्त होगी तथा करो में अंतर होगा मूल्य में भरी अंतर होगा हिसाब में दिक्क्त होगी समय व्यर्थ होगा एक व्यक्ति को हर प्रान्त की मुद्रा ले जाने होगी वहाँ की इकाई याद करनी होगी तथा एक कार्य के लिए हर प्रान्त में अपने  प्रतिनिधि नयुक्त करने पड़ेगे। वस्तु विनिमय अब कही नहीं होता है। 


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प्रश्न 15 : क्या आपने वस्तु विनिमय का उदाहरण अपने गाँव या शहर में देखा है? इसके बारे में सबको बताएं | 

उत्तर :- हाँ , हमने शहर में वस्तु विनिमय का उदाहरण देखा है | साइकिल में घूम – घूमकर व्यवसाय करने वाला जो टूटे फूटे स्टील के बर्तन किलोग्राम के हिसाब से लेकर बदले में उतने ही किलोग्राम का शक्कर प्रदान करता है | जैसे उदाहरण के लिए आधा किलोग्राम टूटे – फूटे स्टील के बदले आधा किलोग्राम शक्कर प्रदान करते है | 

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प्रश्न 10: मुद्रा के चलन से व्यापार की संभावनाएँ क्यों बढ़ जाती होगीं? 

उत्तर :- मुद्रा मानव समाज की एक उपज है जो कि मानव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है,  व्यापार की कल्पना मुद्रा के बगैर संभव नहीं है. मुद्रा नहीं होगी तो व्यापार  में दिक्क़ते होगी, जैसे – श्रमिकों को वेतन देना, हिसाब में अंतर, बिक्री में गड़बड़ी ,वस्तुओ के बदले उचित वस्तु का मिलना, इन सभी समस्याओं का एक हल मुद्रा है. जो एक व्यापार के लिए अत्यंत आवश्यक है। 

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प्रश्न 16 : आपके क्षेत्र के किसान अपने उत्पादन का कितना हिस्सा बाजार में बेचते है और कितना हिस्सा घर के उपयोग के लिए रखते है? 

उत्तर :- किसान अपने उत्पादन का 70% भाग बाजार में बेचते है और 30% भाग घर के उपयोग के लिए रख लेता है | 

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प्रश्न 11:- ब्रिटेन की कृषि – क्रांति से जो उत्पादन बढ़ा , उसका फायदा किसे हुआ | 

उत्तर :- ब्रिटेन की कृषि का सबसे ज्यादा लाभ वहां  के जमींदारों ने उठाया, जिन्होंने वहां पर बड़े पैमाने पर  कृषि कार्य स्वयं शुरू कर  दिया, तथा छोटे किसानों कि भूमि खरीद ली, तथा वे भूमि हीन हो गए तथा वह औद्योगिक क्षेत्र की तरफ पलायन कर गए, जिसका लाभ कारखानों में मालिकों को मिला, उन्हें सस्ते श्रमिक उपलब्ध हुए। 

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प्रश्न 12  : कारखाना लगाने के लिए बैंक पूंजी उपलब्ध कैसे करते है? उन्हें यह धन कैसे मिलता होगा? 

उत्तर :– कारखाने लगाने के लिए पर्याप्त पूंजी की जरुरत होती है, यह पूंजी बड़ी होने के कारण एक व्यक्ति या व्यक्तियों  के द्वारा संभव नहीं हो पाता, जिसके लिए बैंक अपने यहाँ कुछ गिरवी रखवा कर पूंजी उपलब्ध करवाते है। गिरवी या बंधक में जमीन के कागज या कोई सम्पत्ति होती है, जो लगभग ऋण के समानुपातिक मूल्य की हो. बैंको को  धन सरकार द्वारा  उपलब्ध कराया जाता है ,तथा जनता द्वारा भी जमा किया गया होता है, जिसके बदले बैंक ब्याज जनता को देता है और ऋणी से ब्याज लेता है।    

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प्रश्न 13:- ब्रिटेन में ऐसे कौन से उद्योग लगे जिनके लिए कच्चा माल उपनिवेशों से मिलता था? 

उत्तर :-ब्रिटेन के दुनिया में बहुत से उपनिवेशक थे, जिनमे कपड़ा प्रमुख उघोग था, जिसमे अमेरिका व भारत द्वारा कपास की खेती करा कर, कच्चा माल ब्रिटेन के कारखानों को उपलब्ध कराया गया।   

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प्रश्न 14:- धनी जमींदार और धनी व्यापारी इन दोनों में से कौन उद्योग में पूंजी लगाने के लिए तैयार होगा? 

उत्तर :- धनी जमींदार की अपेक्षा  धनी व्यापारी उद्योग के लिए अपने पूंजी लगाने के लिए तैयार हो जाएगा, क्योंकि व्यापारी को व्यापार का अनुभव होता है, तथा व्यापार उनके पुश्तैनी धंधो में आता है, परन्तु जमींदार के लिए व्यापार उघोग एक नया क्षेत्र होगा, इसलिए वह वहां पर पूंजी लगाने के लिए डर महसूस करेगा।  

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प्रश्न 15:- गाँव का किसान और शहर का दिहाड़ी मजदूर , इन दोनों में कौन बाजार से अपनी जरुरत की साड़ी चीजें खरीदेगा? 

उत्तर :- गांव का किसान  हो या शहर का दिहाड़ी मजदूर हो, दोनों अपनी जरुरत के सामान बाजार में ही खरींदेगे, गांव के किसान के पास सिर्फ आनाज उपलब्ध होता है, बाकि का सामान बाजार में ही लेना पड़ता है। 

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प्रश्न 16: आपने अभी तक जो पढ़ा उसके अनुसार ब्रिटेन के ओधोगीकरण के लिए कौन – कौन से कच्चे माल की जरुरत थी | इनकी आपूर्ति किस तरह होती है? 

उत्तर :- ब्रिटेन के औद्योगीकरण के कच्चे माल ब्रिटेन अपने उपनिवेशों द्वारा करता था. कपास, लोहा तथा जूट, मसाला इत्यादि प्रमुख थे, जिनका निर्यात वह भारत ,अमेरिका तथा अफ्रीका द्वारा करता था।   

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प्रश्न 17 :- आजकल कारखानों में महिलाओं को किस तरह के काम मिलते है? क्या कानून 14 साल से कम आयु के बच्चे काम  कर सकते है? 

उत्तर :- औद्योगीकरण के पहले महिलाएं घर के ही काम करती या खेती का काम करती थी, परन्तु औद्योगीकरण के बाद महिलाएं कारखानों में काम करने लगी, आजकल महिलाएं उद्योगो में हल्के काम करती है, जैसे :- सामान पैकिंग या कटाई-छटाई, सफाई आदि का हिसाब किताब का भी काम देखती हैं,शुरुवाती दौर में उद्योगो द्वारा बच्चों  से काफी काम कराये जाते थे, जो भारी काम होते थे जिससे उनके शारीरिक, मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था और उनकी शिक्षा भी नहीं हो पाती थी. इसको ध्यान में रख कर सरकार ने 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया। 

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प्रश्न 18:- औद्योगीकरण के दौर में महिलाएं कारखानों में 12 से 16 घंटे काम करती थी और स्वतंत्र रूप में कमाने लगीं | इसका परिवारों के अन्दर महिलाओं की स्थिति पर क्या असर पड़ा होगा? 

उत्तर :- औद्योगीकरण के शुरुवाती दौर में महिलाओं को कारखानों में 16 से 18 घंटे काम करना पड़ता था, चूंकि पुरुषो का वेतन बहुत कम होता था,जिसमें परिवार का पोषण करना मुश्किल होता था। महिलाओ को कठिन परिस्थिति में अनुशासन तथा दंड का भय भी था तथा उसके बाद उन्हें घर का काम भी करना पड़ता था, महिलाएं स्वंतन्त्र रूप से  कमाने तो लगी थी, परन्तु अत्यधिक श्रम के कारण उनके स्वास्थ्य की स्थिति दयनीय होती गयी तथा मानसिक, शारीरिक क्षमता ख़त्म होने लगी तथा उनकी आयु कम हो गयी औद्योगीकरण का महिलाओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा।   

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प्रश्न 19 :- औद्योगीकरण मजदूरों के लिए एक अभिशाप था या ग्रामीण सामन्तों के चंगुल से बचने का एक रास्ता था? कक्षा  में इस विषय पर चर्चा कीजिए | 

उत्तर :- औद्योगीकरण मजदूरों की स्थित में कोई सुधार नहीं हुआ क्योंकि उनकी स्थिति और बदतर हो गयी, क्योकि वे सामंतो के चंगुल से निकलकर पूंजी पतियों के चंगुल में फस गए, मजदूरों को अपने गांव से विस्थापित होकर शहरो की गन्दगी तथा गटर वालो को अपने ठिकाना बताना पड़ा तथा वे भूमि हीन हो गए, शहरो में परिवार का भरण पोषण करने के लिए पूरे परिवार को मजदूरी का सहारा लेना पड़ा, जिसके कारण वे तनाव ग्रस्त हो गए और नशे का सेवन करने लगे जिससे उनकी आर्थिक व शारीरिक स्थिति और भी ख़राब हो गयी तथा उनका सामाजिक पतन हुआ। 

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प्रश्न 20:- ब्रिटेन एवं जर्मनी के औद्योगीकरण में राज्य की भूमिका में अंतर बताइए | 

उत्तर :- ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोप के देश भी इस प्रयास में लगे जिसमे जर्मनी प्रमुख रहा, जर्मनी के एकीकरण के बाद  राज्य के नेतृत्व में सभी व्यापारिक रुकावटों को दूर किया, मुद्रा व्यवस्था को सुधार किया, तथा भूमि सुधार तथा सामंत शाही का अंत भी शामिल था तथा किसानो को आबादी मिल तथा जमींदारों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया, राज्य के करो की उचित व्यवस्था की, रेलवे व पुलों को बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की, जिनके कारण बड़े कारखाना खुले व खदाने भी खुलने लगी. राज्य सभी को पर्याप्त पूंजी भी उपलब्ध कराई तथा शिक्षा का व्यापारिक दिशा प्रदान की, परन्तु ब्रिटेन की औद्योगीकरण एक सामायिक तथा कंपनियों द्वारा किया गया जिसमे सरकार का हस्तक्षेप कम रहा. ब्रिटेन के औद्योगीकरण में हर प्रकार के हथकंडे का इस्तेमाल किया, जिसमे उपनिवेशों का शोषण व मजदूरों व बच्चो महिलाओं का भी शोषण किया गया।   

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प्रश्न 21  : सामन्तों व सम्राटों ने औद्योगिकरण को क्यों बढ़ावा दिया गया? 

उत्तर :- औद्योगिक क्रांति के बाद बहुत तेजी से यूरोप की परिस्थितियां बदलने लगी और आधुनिक विचारों का प्रचार हुआ, ब्रिटेन द्धारा बहुत तेजी से तरक्की की जाने लगी, ज्यादा लाभ कमाने की इच्छा हुई, समंतो ने देखा कि छोटे किसान औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरी को अधिक पसंद कर रहे है, तथा सम्राट को भी सत्ता में बने रहने के लिए औद्योगीकरण करने पर विवश किया।  

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प्रश्न 21: जब बुनकरों का माल बिकना बंद हो गया तो उन्होंने अपनी आजीविका के लिए क्या किया होगा? 

उत्तर :- ईस्ट इण्डिया कंपनी के आने के पूर्व भारतीय कपड़ो की मांग सारे विश्व में थी, सबसे अच्छे आराम दायक कपड़ो का उत्पादन भारत में होता था, परन्तु अंग्रेजो ने अपने यहाँ की मिलो को चलाने के लिए यहाँ के स्थानीय बुनकरों पर तरह के कर लगा दिए, तथा अच्छे किस्म का कपास इंगलैंड भेजना शुरू कर दिया, जिससे कपड़ो का मूल्य घट गया तथा स्तर गिर गया, जिसके कारण पारम्परिक रोजगार छोड़ खेती कर खेती या अन्य छोटे व्यवसाय की तरफ पलायन कर गए या मजदूरी करने लगे। 

अभ्यास : 

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प्रश्न 01 : वैकल्पिक प्रश्न –

क ) सर्वप्रथम औद्योगिक क्रांति कहाँ हुई? 

अ ) फ्रांस 

ब ) जर्मनी 

स ) स्पेन 

द ) इंग्लैंड  

ख ) जर्मनी की औद्योगिक क्रांति किन उद्योगों पर आधारित थी | 

अ ) सूती कपड़ा 

ब ) कंप्यूटर 

स ) खनिज 

द ) रसायन एवं बिजली 

उत्तर :  1) द ) इंग्लैंड,   2) द ) रसायन एवं बिजली  |

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प्रश्न 02 : प्रारंभिक औद्योगीकरण और कारखाना उत्पादन में क्या समानताएं व अंतर है? 

उत्तर :- प्रारंभिक औद्योगीकरण में स्थानीय बुनकरों व कारीगरों द्वारा गांव में माल का उत्पादन किया जाता था | इसका उत्पादन कारखानों में नहीं घरों व गांवों में किया जाता था. स्थानीय व्यापारी बुनकरों व कारीगरों को हाथ द्वारा काम के लिए पैसा देते थे | उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराते थे, परंतु कारखानों में भारी मशीनों द्वारा उत्पादन किया जाता है, जो ज्यादातर शहरों में होते हैं | उसमें बिजली व रसायन का प्रयोग किया जाता है, तथा दोनों में कच्चा माल की जरूरत पड़ती है, दोनों में कारीगर की जरूरत है, दोनों में पूंजी की जरूरत है, दोनों का उद्देश्य माल का उत्पादन करना है |

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प्रश्न 03 : ब्रिटेन में औद्योगीकरण के लिए किन लोगों ने पूंजी निवेश किया था? 

उत्तर :- ब्रिटेन में औद्योगीकरण के लिए वहां की धनी व्यापारियों ने पूंजी लगाई | जिसे प्रारंभिक सौदागर व्यापारी थे जो गांव के बुनकरों व कारीगरों द्वारा माल उत्पादन करा कर विदेशों में माल बेचते थे |

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प्रश्न 04 : जर्मनी के औद्योगीकरण के लिए पूंजी किसने लगाई? 

उत्तर :- इंग्लैंड के औद्योगीकरण के लाभ को देखकर जर्मनी द्वारा भी यह प्रक्रिया शुरू की गई | परंतु वहां की राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न थी, इसलिए औद्योगीकरण के लिए वहां सरकार द्वारा कदम उठाए गए | व्यापारियों को धन की व्यवस्था कराई गई तथा करो में रियायत दी गई |  जर्मन सरकार द्वारा आयात निर्यात शुल्क तथा सभी प्रकार की सहायता की गई, तथा स्वयं भी उद्योग स्थापित किए गए |

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प्रश्न 05 : इंग्लैंड , जर्मनी और भारत के शुरुआती औद्योगीकरण में राज्य की भूमिका में क्या अंतर दिखाई देता है ? 

उत्तर :- ब्रिटेन की औद्योगीकरण एक नियोजित नहीं था | वहां स्वतः धीरे-धीरे औद्योगिकरण शुरू हुआ | उसके लिए ब्रिटेन के व्यापारी ने स्वयं ही देश-विदेश तक व्यापार विस्तार किए तथा उपनिवेश के कारण उन्हें इसमें बहुत सहायता प्राप्त हुई | जबकि जर्मनी का औद्योगीकरण राज्य द्वारा नियोजित व प्रायोजित था , जिसके लिए सरकार द्वारा व्यापारियों को धन व पूंजी तथा विदेशी व्यापार के लिए सुविधाएं मुहैया कराई गई | परंतु भारत एक गुलाम देश होने के कारण यहां पर स्थिति बिल्कुल दयनीय रही | यहां पर राज्य द्वारा कोई सुविधा नहीं मिली, उल्टा अनेक कर तथा पाबंदियां लगाई गई | कुछ धनी व्यापारियों द्वारा कुछ उद्योग लगाए गए, जैसे – टाटा आदि  |

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प्रश्न 06 : औद्योगिक क्रांति में लोहा इस्पात उद्योग का क्या योगदान था? 

उत्तर :- औद्योगिक क्रांति लोहा इस्पात के बिना संभव ही नहीं थी | अच्छे किस्म के लोहा के उत्पादन से मजबूत व बड़ी-बड़ी मशीनों का निर्माण संभव हो सका | जो मशीनें लंबे समय तक काम कर सकती थी और लगातार रात दिन चलाया जा सकता था, जिससे लगातार भारी उत्पादन संभव हुआ, जिससे औद्योगिक क्रांति हुई |

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प्रश्न 07 : औद्योगिक विकास का समाज में पड़ने वाले प्रभावों को बतलाइए |

उत्तर :- औद्योगिक क्रांति के बाद समाज में व्यापक परिवर्तन देखा गया | लोग कृषि संबंधी कार्यों से हटने लगे, और कारखाने तथा मिलों में काम करना शुरू कर दिया | खेतीहर श्रमिकों का प्रभाव हो गया तथा शहरों में नया श्रमिक वर्ग जो गांव से रोजगार के लिए आया उनकी श्रमिक बस्तियां बस गई, जिसमें मूलभूत आवश्यकताओं का अभाव होता था तथा पूंजीवादी व्यवस्था का जन्म हुआ, जो सामंतों की जगह पूंजीवादी व्यवस्था ने ले लिया | जिन्होंने पूंजी तो लगाई पर श्रमिकों का शोषण करना शुरू किया ,उससे नई विचारधारा का जन्म हुआ, जिसे हम कम्युनिस्ट के नाम से जानते हैं | जिसमें हड़ताल व छंटनी का दौर चला और कारखाने बंद हुए और लोग बेरोजगार हुए |

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प्रश्न 08 : अठारहवीं सदी में जर्मनी की औद्योगिक क्रांति के रास्ते में क्या – क्या बाधाएं थी? इन्हें किस प्रकार दूर किया गया? 

उत्तर :– अठारहवीं शताब्दी में नेपोलियन की पराजय के बाद जर्मनी ने सर्वप्रथम अपना एकीकरण किया, तथा मुद्रा व्यवस्था कर सुधार किया | जर्मनी ने अपने कृषि को सामंतवाद से मुक्त किया तथा राजकीय व्यवस्था में सामंतवाद का प्रभाव समाप्त किया, तथा भूमि सुधार तथा करो में सुधार किया, जिसके कारण सामंतों ने खेती को आधुनिक तरीके से करना शुरू किया | जर्मनी राज्य ने अपने व्यवसायियों को उद्योग के लिए पूंजी की व्यवस्था की तथा बड़े बड़े बैंकों की स्थापना की, जिससे उनको धन मिल सके तथा निर्यात पर कर मुक्त किया तथा आयात पर भारी कर लगाया, जिससे उद्योगपतियों को लाभ मिल सके | जर्मनी ने अफ्रीकी में अपने शिखरों को स्थापित किया, जिससे उसको बहुत लाभ मिला |

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प्रश्न 09 : उपनिवेशों  औद्योगीकरण में क्या योगदान दिया? उपनिवेशों में होने वाले औद्योगीकरण के लिए क्या बाधाएं थी ? 

उत्तर :– औद्योगीकरण में उपनिवेश की बड़ी भूमिका रही | यूरोपीय देशों द्वारा उपनिवेशों से हर प्रकार की जरूरत की चीजें, कच्चा माल तथा गुलाम व मजदूर का शोषण किया गया. उपनिवेशों से वह कच्चा माल ले जाते और फिर उपनिवेश के बाजारों में उसे बेचते थे, उपनिवेशों को उन्होंने बाजार के तौर पर इस्तेमाल किया और वहां की संपत्ति लूट कर अपने देश में बड़े-बड़े कारखाने स्थापित किए. इसी कारण उपनिवेशों में उन्होंने किसी प्रकार औद्योगिक गतिविधियां नहीं शुरू कराई | वह समझते थे कि एक न एक दिन उन्हें उपनिवेशों को छोड़ना पड़ेगा |

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प्रश्न 10 : अगर कारखाने का उत्पादन बिक नहीं पाए तो उसका पूँजीपति और मजदूरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 

उत्तर :- अगर कारखाने में तैयार माल बिक नहीं पाएगा तो पुनः दूसरा माल तैयार करने के लिए पूंजीपति को नयी पूंजी लगानी पड़ेगी और बार-बार कोई भी नयी पूंजी  कारखाने में नहीं डाल सकता है. माल न बिकने से उसका लाभ नहीं प्राप्त होगा, जिससे वह मजदूरों तथा अन्य देनदारियों को भुगतान नहीं कर पायेगा, और मजदूर काम करना बंद कर देंगे और बाजार में व्यापारी की साख खराब होगी  |

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प्रश्न 11 : तकनीकी बदलाव का मजदूरों और उस उत्पादन के ग्राहकों पर क्या प्रभाव पड़ता होगा?

उत्तर :- तकनीकी बदलाव से परंपरागत मजदूर बेकार हो जाते हैं, उनके लिए नई तकनीकी के कुशल श्रमिक की आवश्यकता पड़ती है, जिसके लिए नए लोगों को ट्रेनिंग आदि  करानी पड़ती है, तथा ग्राहकों को उनकी पसंद बदलने के लिए हर प्रकार से प्रचार तथा नए उत्पाद के फायदे तथा किफायती होने का प्रमाण देना पड़ता है, जैसे –  किसी वस्तु को बेकरी द्वारा बनाया जाता था, बाद में तकनीकी की सहायता से उसका उत्पादन किया जाने लगा, उसके लिए कंपनी ने कुशल श्रमिक लगाए जो उन मशीनों को चला सके और ग्राहकों को परंपरागत सामानों की अपेक्षा अपने उत्पाद को स्वास्थकारी व किफायती बताया |

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प्रश्न 12 : ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति का भारत के बुनकरों पर क्या प्रभाव पड़ा? 

उत्तर :- ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति का प्रभाव भारत के बुनकरों पर बहुत बुरा पड़ा, अंग्रेजों द्वारा अच्छे किस्म की कपास इंग्लैंड भेज दी जाती थी, तथा वहां से लाए गए कपड़ों पर कोई चुंगी या टैक्स नहीं लगाया जाता था | भारत में स्थानीय बुनकरों द्वारा उत्पादित कपड़ों पर भारी कर लगा दिए गए, जिससे उनको माल महंगा पड़ने लगा, तथा उनका माल बिकना बंद हो गया, धीरे-धीरे बुनकर बेरोजगार हो गए |

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प्रश्न 13 : प्रारंभिक भारतीय उद्योगपति कौन थे और उन्हें कारखाने लगाने के लिए पूंजी कैसे मिली होगी? 

उत्तर :- प्रारंभिक उद्योगपति जमशेदजी टाटा व हुकुमचंद जी, जी.डी. बिड़ला आदि थे, उन्होंने शुरू शुरू में चीन से अफीम का व्यापार कर पैसा कमाया और बाद में फैक्ट्री तथा कारखाने लगाए |

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प्रश्न 14 : प्राम्भिक भारतीय उद्योग पतियों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा? 

उत्तर :- अंग्रेजी सरकार वहां के उद्योगों को प्राथमिकता देने के लिए देशी उत्पादों भारी कर लगा रखी थी तथा उनके उत्पाद प्राथमिकता के तौर पर बेचे जाते थे, अच्छी गुणवत्ता का कच्चा माल भी भारतीय उद्योगों को नहीं मिल पाता था, सरकारी प्रयोग की वस्तुएं भी सीधे इंग्लैंड से आती थी, इस कारण प्रारंभ में भारतीय उद्योगों को हर प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा |

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प्रश्न 15 : मजदूरों के हित में ब्रिटेन , जर्मनी , और भारत में जो कानून बने उनमें क्या समानताएं थी और क्या अंतर थे | 

उत्तर :-  मजदूरों के लिए भारत व जर्मनी ने ब्रिटेन में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई, तथा काम कराने के घंटे निश्चित किए तथा श्रमिकों के लिए एक न्यूनतम वेतन तथा उनके परिवार के लिए कुछ रिजर्व फंड की व्यवस्था की है | परंतु भारत में श्रमिकों को जर्मनी व ब्रिटेन के समान बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा, दुर्घटना बीमा, तथा शारीरिक अपंगता होने पर एक निश्चित पेंशन की व्यवस्था नहीं है, तथा उनकी छंटनी या बाहर निकालने पर मालिकों को मुआवजा नहीं दिया जाता है |

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